सदनों में लोकतांत्रिक पद्धतियां और मूल्य हमारी सभ्यतागत चेतना में विद्यमान: ओम बिरला

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– 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन काे लोकसभा अध्यक्ष ने किया संबाेधित

— सम्मेलन में संसदीय परंपराओं, सुशासन और विधायी नवाचारों पर चर्चा

लखनऊ, 19 जनवरी (हि.स.)। यूपी विधानसभा में आज से शुरु हुए 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सदनों में लोकतांत्रिक पद्धतियां और मूल्य हमारी सभ्यतागत चेतना में विद्यमान हैं, लेकिन कई बार सदन की कार्यवाही को नारेबाजी, तख्तियां दिखाने और कागज फाड़ने और फेंकने तथा नियम विरुद्ध आचरण से बाधित किया जाता है, जो निराशाजनक है और इससे बचना चाहिए।

सम्मेलन का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ करने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत के विधायी निकायों के सभी अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के साथ, पीठासीन अधिकारियों के इस सम्मेलन की स्वेच्छा से मेजबानी का दायित्व उठाने के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति को बधाई।

लाेकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि आज आर्थिक मोर्चे पर उत्तर प्रदेश राज्य की स्थिति में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में, राज्य पिछड़े राज्यों की श्रेणी से अब भारत के सबसे तेजी से विकसित होते राज्यों में से एक बन गया है और हमारी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को गति प्रदान कर रहा है। 24 करोड़ से अधिक की आबादी के साथ, जो हमारी कुल आबादी का लगभग 17 प्रतिशत है, राज्य ने पिछले दशक में अभूतपूर्व प्रगति की है। राज्य में प्रति व्यक्ति आय एक दशक से भी कम समय में दोगुनी हो गई है। यह 2016-17 के 54,564 रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1,08,572 रुपये हो गई है। लोकसभा अध्यक्ष ने महाकुंभ के सफल आयोजन की चर्चा करते हुए इसके लिए राज्य सरकार की सराहना की और कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होने से इस राज्य का गौरव बढ़ गया है ।

वर्ष 1921 में हुई थी पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन की शुरुआत

लोकसभा अध्यक्ष ने सम्मेलन के इतिहास की चर्चा करते हुए कहा कि वर्ष 1921 में पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन की शुरुआत की गई थी । समय के साथ-साथ, यह सम्मेलन संसदीय कार्यप्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के अलावा सदन में अनुशासन और मर्यादा सुनिश्चित करने; विधायिका और न्यायपालिका के बीच सौहार्दपूर्ण सम्बन्धों की स्थापना करने, संसदीय निगरानी को मजबूत बनाने, विभागों से संबद्ध स्थायी समितियों के कार्यकरण आदि जैसे मुद्दों पर विचार विमर्श करने का एक सक्रिय मंच बन गया है।

सदन में नारेबाजी, तख्तियां दिखाना और कागज फाड़ना निराशाजनक

ओम बिरला ने कहा कि लोकतांत्रिक पद्धतियां और मूल्य हमारी सभ्यतागत चेतना में विद्यमान हैं, लेकिन कई बार सदन की कार्यवाही को नारेबाजी, तख्तियां दिखाने और कागज फाड़ने और फेंकने तथा नियम विरुद्ध आचरण से बाधित किया जाता है जो कि निराशाजनक है। कई राज्य विधानमंडलों और हमारी संसद में कुछ सदस्यों का किया गया इस तरह का व्यवहार, नेताओं और निर्वाचित प्रतिनिधियों की छवि को नकारात्मक बना देता है और इससे हमारी विधायी संस्थाओं का अपमान होता है। उन्हाेंने कहा कि नेताओं का आचरण ईमानदारीपूर्ण होना चाहिए।

जन महत्व के मुद्दों को उठाने के लिए करें प्रोत्साहित

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारियों के रूप में हमारा एक महत्वपूर्ण दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि सदन की कार्यवाही में सार्थक भागीदारी के लिए सभी सदस्यों, विशेषकर नए और युवा सदस्यों को पर्याप्त अवसर दिया जाए। हमें उन्हें स्थापित नियमों और परंपराओं के अनुसार सदन में जन महत्व के मुद्दों को उठाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। विधानमंडल जनता की समस्याओं को उठाने के लिए सबसे स्वाभाविक और प्रभावी मंच के रूप में कार्य करते हैं।

जन अपेक्षाएं अधिक, सदन का समय व्यर्थ न जाने दें

उन्हाेंने प्रतिनिधियों का ध्यान विधायी कामकाज की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि विधानमंडलों की वास्तविक बैठकों की संख्या काफी कम होती हैं। उदाहरण के लिए, अपने पूरे पांच वर्षीय कार्यकाल के दौरान लोकसभा का सत्र लगभग 330 से 355 दिनों तक ही चलता है। इसका मतलब है कि यह एक वर्ष में 100 दिनों से भी कम है। और राज्य विधानमंडलों का सत्र तो इससे भी कम दिनों तक चलता है। इस नाजुक मोड़ पर, जब हमारे पास समय कम है और जनता की अपेक्षाएं तेजी से बढ़ रही हैं, हम एक भी क्षण व्यर्थ नहीं जाने दे सकते।

पीठासीन अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण

पीठासीन अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख पर लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा कि विधायिकाओं के संरक्षक के रूप में हमें लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को मजबूत करना होगा। विधानमंडल के सदस्यों के आचरण के माध्यम से, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी विधायी गतिविधियों के केंद्र में जनहित और जनता का कल्याण रहें। ठीक इसी संदर्भ में पीठासीन अधिकारियों का यह अखिल भारतीय सम्मेलन अधिक महत्व रखता है। यह हमें हमारी विधायी संस्थाओं के सामने उभरते मुद्दों और चुनौतियों पर सामूहिक रूप से विचार-विमर्श करने का मंच प्रदान करता है।

आज यूपी की ग्रोथ इंजन के रूप में पहचान: हरिवंश

सम्मेलन में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि यूपी देश का हृदय प्रदेश है। काशी, अयोध्या, प्रयाग जैसे स्थल हैं। यूपी नहीं देखा तो भारत नहीं देखा, स्लोगन सटीक बैठता है। उन्होंने यूपी विधानसभा की कार्यप्रणाली और अध्यक्ष सतीश महाना के विभिन्न पहल एवं प्रयोग का उल्लेख करते हुए सराहना की। यूपी विधानसभा की इन पहलों से हम सब भी सीख कर अपनी विधानसभाओं में लागू कर सकते हैं। सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि आज यह प्रदेश ग्रोथ इंजन के रूप में पहचान बनाई है। पहले यह प्रदेश समस्या प्रदेश के रूप में जाना जाता था। इसी प्रदेश ने सबसे पहली महिला मुख्यमंत्री कृपलानी के रूप में दिया है। भारत दुनिया की अर्थव्यवस्था में अग्रणी हो, इसमें केंद्र सरकार के साथ राज्यों की सरकारों को अहम योगदान निभाना होगा।

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने किया स्वागत

यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने मेरे आग्रह को स्वीकार किया और 2015 के बाद यूपी विधानसभा काे यह सम्मेलन की मेजबानी मिली। महाना ने कहा कि पहले यह कहा जाता था कि जब कुछ न आये तो नेता बन जाएं। अब बदल गया है, अब वही नेता बन सकता है जिसे सबकुछ आये। हमारी विधानसभा में डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, प्रोफेसर, किसान, बिजनेसमैन भी चुनकर आये हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने दाैरान इस कार्यक्रम के लिए आया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संदेश पढ़कर सुनाया। उन्हाेंने सभी अतिथियों का शाल ओढाकर और प्रतीक चिह्रन भेंट कर स्वागत किया।

सम्मेलन में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सम्मेलन में विधायी कार्याें काे लेकर उपयाेगी मंथन हाेगा। सम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने अपने विचार रखे। देशभर से आए पीठासीन अधिकारियाें के इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रदर्शनी का उद्घाटन, समूह चित्र और विभिन्न समितियों की बैठकें हाेंगी। 20 जनवरी को सत्र के दौरान एजेंडा बिंदुओं पर गहन चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर आधारित कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। 21 जनवरी को समापन सत्र होगा। 22 जनवरी को प्रतिनिधि अयोध्या धाम में श्री राम लला के दर्शन करने के साथ ही राम नगरी का भ्रमण करेंगे। 23 जनवरी को प्रतिनिधियों का प्रस्थान होगा। यह सम्मेलन लखनऊ में चौथी बार हो रहा है।

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