लखनऊ एक्सप्रेस वे पर अजमेर से नेपाल जा रही चलती यात्री बस में लगी आग

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फिरोजाबाद, 23 दिसम्बर (हि.स.)।आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मंगलवार को अजमेर से नेपाल जा रही एक चलती यात्री बस में आग लग गई। बस में सवार सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन बस जलकर खाक हो गई। इस दौरान दहशत का माहौल रहा।

आगरा_लखनऊ एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 76.300 पर मंगलवार को उस समय अफरा तफरी मच गई। जब अचानक एक चलती बस के टायर में अचानक आग लग गई। जिसने देखते ही देखते पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगते ही यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन बस चालक और परिचालक की सूझबूझ से सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। किसी भी यात्री को कोई चोट नहीं आई। बस में कुल 42 यात्री थे, जिनमें 12 बच्चे भी शामिल थे।

घटना की सूचना मिलते ही एक्सप्रेसवे की रेस्क्यू टीम और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद बस में लगी आग पर काबू पाया गया। बस अजमेर से नेपाल जा रही थी। बस के चालक की पहचान वीरगंज (नेपाल) निवासी चुन्नू मिश्रा पुत्र गंगा मिश्रा के रूप में हुई है। सहायक चालक मुन्ना श्रीवास्तव और बस ठेकेदार भोला अंसारी हैं। प्रशासन की ओर से घटना की जांच की जा रही है कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी या टायर फटने के कारण।

फायर अधिकारी सतेंद्र पांडेय ने बताया कि एक्सप्रेस वे पर बस में आग की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया गया। बस जल गई है। सभी 42 यात्री सुरक्षित है, कोई जनहानि नहीं है।

नीरज चोपड़ा प्रधानमंत्री से मिले

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से आज नीरज चोपड़ा और उनकी पत्नी हिमानी मोर ने नई दिल्ली के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर मुलाकात की। श्री मोदी ने कहा कि हमने खेल समेत विभिन्न मुद्दों पर बहुत अच्छी बातचीत की।

प्रधानमंत्री ने इस अवसर की तस्वीरें साझा कीं, जहां उन्होंने भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा और उनकी पत्नी हिमानी मोर की मेजबानी की। तस्वीरों में प्रधानमंत्री खिलाड़ी के साथ सौहार्दपूर्ण बातचीत करते नजर आए और उन्होंने अपनी पोस्ट में कई विषयों, विशेष रूप से खेल से संबंधित विषयों पर चर्चा का उल्लेख किया।

नीरज भारत के सबसे प्रतिष्ठित एथलीटों में से एक हैं, लेकिन प्रतिस्पर्धा के लिहाज से 2025 का साल उनके लिए मिला-जुला रहा। उनके सीज़न की एक बड़ी उपलब्धि दोहा डायमंड लीग में देखने को मिली। उन्होंने 90 मीटर का बहुप्रतीक्षित आंकड़ा पार किया। 90.23 मीटर का उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो एक व्यक्तिगत उपलब्धि थी। हालांकि यह स्वर्ण पदक हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं था। जर्मनी के जूलियन वेबर ने 91.06 मीटर के बेहतर थ्रो के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया, जिससे नीरज को दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।

इस हार के बावजूद, नीरज ने अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने पेरिस डायमंड लीग और ओस्ट्रावा गोल्डन स्पाइक दोनों में जीत हासिल की। ​​डायमंड लीग सीज़न के दौरान, वह दौड़ रैंकिंग में कुल मिलाकर दूसरे स्थान पर रहे। हालांकि, विश्व चैंपियनशिप 27 वर्षीय नीरज चोपड़ा के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर साबित हुई। चोट और अनियमित प्रदर्शन से जूझते हुए नीरज पोडियम पर जगह बनाने में नाकाम रहे और कुल मिलाकर आठवें स्थान पर रहे। 2018 के बाद किसी बड़ी प्रतियोगिता में यह उनका पहला गैर-पोडियम प्रदर्शन था, जो उनके शानदार करियर में इस तरह के दुर्लभ परिणाम को रेखांकित करता है। चैंपियनशिप के दौरान उनकी शारीरिक परेशानी स्पष्ट थी और माना जाता है कि इसका उनके प्रदर्शन पर काफी असर पड़ा।

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से दूर, नीरज को 2025 में भी जश्न मनाने के कारण मिले। उन्होंने बेंगलुरु में पहले नीरज चोपड़ा क्लासिक की मेजबानी की, जिसमें दुनिया भर के एथलीटों ने भाग लिया। घरेलू मैदान पर प्रतिस्पर्धा करते हुए, उन्होंने 86.18 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ टूर्नामेंट जीता, जबकि जूलियस येगो और रमेश पथिरागे क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।

भारत माता के प्रति आस्था और संकल्प का उद्घोष है वंदे मातरम् : केशव प्रसाद मौर्य

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लखनऊ, 23 दिसम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री व नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को विधान परिषद में भारत के राष्ट्र गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के सम्बंध में नियम 59 (9) के अन्तर्गत प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि वंदे मातरम आजादी का महामंत्र था। विधान परिषद में वंदे मातरम राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूर्ण होने पर चर्चा में उन्हाेंने कहा कि 1875 में अक्षय नवमी के दिन बंकिम चंद्र चटर्जी ने वंदे मातरम गीत की रचना की थी। 2025 में भारत के ऐतिहासिक एवं गौरवशाली राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे हुए हैं। वन्देमातरम् भारत की शास्वत चेतना है। वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, भारत माता के प्रति आस्था और संकल्प का उद्घोष हैवंदे मातरम स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक आध्यात्मिक शक्ति, मातृभूमि के प्रति समर्पण व विदेशी शक्तियों के खिलाफ प्रेरणा का एक चित्रण बन गया था और गहरी देशभक्ति को जन्म दिया था। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने 565 रियासतों को भारतीय गणराज्य का हिस्सा बनाया था। सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर पूरे देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया गया। हर घर तिरंगा फहराकर दिखा दिया गया कि एक भारत है -श्रेष्ठ भारत है । यह वंदे मातरम के साथ चलने वाला भारत है। भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जन्म जयंती है। उन्हाेंने कहा कि भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई का भी जन्म शताब्दी वर्ष है, इन सभी महापुरूषो मैं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

उन्होंने कहा वन्देमातरम के 150 वर्षगांठ के अवसर पर हमारे सामने विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश का बनाने का लक्ष्य और इस दिशा में हम तेजी से काम करेंगे, यही वंदे मातरम है। नेता सदन ने कहा कि वंदे मातरम आनंदमठ की आत्मा है।आजादी के आंदोलन का महामंत्र है। वन्देमातरम भारत की शास्वत चेतना है। अयोध्या में रामलला का मंदिर बन गया,यह राम मंदिर ही नहीं राष्ट्र मंदिर है और राष्ट्र मंदिर का निर्माण होना भी वंदे मातरम है। प्रयागराज कुंभ में 65 करोड लोगों ने डुबकी लगाई, यही वंदे मातरम है। देश मे 10 करोड़ परिवारों को उज्ज्वला योजना के तहत गैस के कनेक्शन दिए गए, हर गांव में शौचालय दिए गए,आयुष्मान कार्ड दिए गए, दिवाली व होली में गरीबों को सरकारी खजाने से गैस दी गई,यही वंदे मातरम है।स्वच्छ भारत अभियान भी वंदे मातरम है। वन्देमातरम वर्तमान का भी महामंत्र है, भविष्य का भी यही महामंत्र है, आने वाली पीढियां का भी महामंत्र है।

उन्होंने यह गीत पढ़ा –

राष्ट्र की जन चेतना का गान वंदे मातरम् राष्ट्रभक्ति प्रेरणा का गान वंदे मातरम्

बंशी के बहते स्वरों का प्राण वंदे मातरम्

शंख के संघोष का संदेश वंदे मातरम्

दिव्य गीता ज्ञान का संगीत वंदे मातरम्

वीर पुत्रों की अमर ललकार वंदे मातरम्

वंदे मातरम राष्ट्रगीत है, उसे गाना गर्व की बात है। सुभाष चंद्र बोस ने मंत्र दिया था – तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा, यह प्रेरणा वंदे मातरम से मिली। देश प्रगति कर रहा है। देश दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत विश्व का सबसे सफल लोकतंत्र है। हमें विकसित भारत व विकसित उत्तर प्रदेश बनाना है, तो वंदे मातरम् गाना है। वंदे मातरम् के टुकड़े नहीं होते, तो देश के टुकड़े नहीं होते। जम्मू कश्मीर से मोदी जी के नेतृत्व में धारा 370 व 35 – ए हटाई गई, यही वंदे मातरम है। रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा गया यह वंदे मातरम् राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कर देता है

पुलिस ने श्रीनगर में कुख्यात ड्रग तस्कर की एक करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की

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श्रीनगर, 23 दिसंबर (हि.स.)। श्रीनगर में मादक पदार्थों की तस्करी और उससे अर्जित संपत्तियों पर चल रही अपनी कार्रवाई के तहत रैनावारी पुलिस स्टेशन ने आज मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ अधिनियम के प्रावधानों के तहत लगभग 1 करोड़ रुपये मूल्य के दो मंजिला आवासीय मकान को जब्त कर लिया। जब्त की गई संपत्ति में सैदाकदल के सुल्तान मोहल्ला स्थित 12 मरला जमीन पर बना दो मंजिला आवासीय मकान शामिल है।

आरोपी निसार अहमद बोता पुत्र मोहम्मद शफी बोता निवासी सुल्तान मोहल्ला सैदाकदल का है। आरोपी रैनावारी पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8 20-29 के तहत दर्ज एफआईआर संख्या 39 2022 में शामिल है। जांच के दौरान यह स्थापित हुआ कि उक्त संपत्ति मादक पदार्थों की तस्करी से प्राप्त अवैध आय से अर्जित की गई थी। परिणामस्वरूप एनडीपीएस अधिनियम की धारा 68-एफ के तहत संपत्ति को जब्त कर लिया गया। अटैचमेंट की कार्यवाही निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार और दो स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में की गई।

अटैचमेंट आदेश के अनुसार मालिक को संपत्ति बेचने पट्टे पर देने हस्तांतरित करने उसमें बदलाव करने या किसी तीसरे पक्ष के हित का सृजन करने से प्रतिबंधित किया गया है।

राष्ट्र प्रेरणा स्थल म्यूजियम का काम पूरा, प्रधानमंत्री मोदी 25 दिसंबर को करेंगे उद्घाटन

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म्यूजियम में राष्ट्र नायकों को समर्पित 5 गैलरियों और 5 कोर्टयार्ड का किया गया है निर्माण

लखनऊ, 23 दिसंबर (हि.स.)। राष्ट्रवाद की त्रिवेणी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी बाजपेयी को समर्पित हैं, राष्ट्र प्रेरणा स्थल। राष्ट्र प्रेरणा का उद्घाटन 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। राष्ट्र प्रेरणा स्थल के भव्य उद्घाटन समारोह की लगभग सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इसी क्रम में प्रेरणा स्थल में राष्ट्र नायकों के जीवन वृत्त को दर्शाने वाले म्यूजियम के क्यूरेशन का कार्य भी पूरा हो चुका है। 5 गैलरियों और 5 कोर्टयार्ड से युक्त म्यूजियम के क्यूरेशन का कार्य पैन इंटेल कॉम कंपनी ने किया है। भावी पीढ़ियों में राष्ट्रवाद की भावना के संचार के लिए बने म्यूजियम को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। केन्द्रीय वित्त राज्यमंंत्री और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल का निरीक्षण किया।

राष्ट्र नायकों को समर्पित है प्रेरणा स्थल का म्यूजियम ब्लॉक

राष्ट्र प्रेरणा स्थल में राष्ट्रवाद की त्रिवेणी कहे जाने वाले राष्ट्र नायकों को समर्पित म्यूजियम का भी निर्माण किया गया है। प्रेरणा स्थल के 98000 वर्ग फुट के क्षेत्र में एलडीए ने म्यूजियम ब्लॉक का निर्माण कराया है। इसके क्यूरेशन का कार्य पैन इंटेल कॉम कंपनी ने किया है। म्यूजियम में 2 फ्लोर में 5 गैलरियां और 5 कोर्टयार्ड, वीवीआईपी ग्रीन रूम और 12 इंटरप्रिटेशन वॉल का निर्माण किया गया है। म्यूजियम की पहली गैलरी ओरियेंटेशन रूम के रूप में बनाई गई है, जिसमें वीडियो और एवी के माध्यम से राष्ट्र नायकों के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों को दिखाया जाएगा। दूसरी गैलरी में भारतीय जन संघ के निर्माण और उसकी विकास यात्रा को दर्शाया गया है। म्यूजियम की क्रमशः तीसरी, चौथी और पाँचवीं गैलरी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेयी को समर्पित हैं। इन गैलरियों में उनकी फोटो, अखबार की कटिंग, सिलिकॉन की मूर्तियों के जरिए उनके जीवन के प्रेरक प्रसंगों को दिखाया गया है।

म्यूजियम में लगी हैं भारत माता, दीपक और सुदर्शन चक्र की प्रतिकृतियां म्यूजियम में 5 गैलरियों के साथ 5 कोर्टयार्ड का भी निर्माण किया गया है। फर्स्ट फ्लोर पर बने तीन कोर्टयार्ड क्रमशः भारत माता, जन संघ के प्रतीक चिन्ह दीपक और सुदर्शन चक्र की प्रतिकृतियां बनाई गई हैं। एक कोर्टयार्ड में भारत माता की 10 फिट ऊँची मूर्ति लगी है, साथ ही दीवार पर वन्दे मातरम उत्कीर्ण किया गया है। सेकंड फ्लोर पर बने कोर्टयार्ड में राष्ट्र नायकों के प्रयोग किए गए समान जैसे- तख्त, मेज-कुर्सी, छड़ी को लोगों के दर्शन के लिए रखा गया है। इसके अलावा म्यूजियम में 12 इंटरप्रिटेशन वॉल बनाई गई हैं, जिन पर म्यूरल और रिलीफ आर्ट के माध्यम से भारत के स्वतंत्रता संग्राम की घटनाओं और महान विभूतियों को दर्शाया गया है। एक वॉल पर, राष्ट्रवाद से प्रेरित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की कविता की पंक्तियाँ लिखी गई हैं। इसके साथ ही म्यूजियम ब्लॉक में वीवीआईपी ग्रीन रूम का भी निर्माण किया गया है। राष्ट्र नायकों को समर्पित म्यूजियम आने वाले समय में भी भावी पीढ़ियों में राष्ट्रवाद की भावना का संचार करेगा।

नदियों और जलाशयों के संरक्षण में जनभागीदारी आवश्यक : सुजीत कुमार

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नई दिल्ली, 23 दिसंबर (हि.स.)। देश में नदियों और जलाशयों के पुनर्जीवन तथा संरक्षण में आम लोगों की भूमिका को अहम बताते हुए राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने कहा है कि जल स्रोतों का कायाकल्प केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि इसके लिए समुदाय की भागीदारी और स्वामित्व भावना आवश्यक है।

सुजीत कुमार यहां नेचर केयर इनिशिएटिव (एनसीआई) द्वारा आयोजित ‘नदियों और जलाशयों के स्वास्थ्य की बहाली’ विषय पर राष्ट्रीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सार्थक परिवर्तन की शुरुआत घर-घर से होनी चाहिए और इसके लिए पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली अपनाना जरूरी है। उन्होंने कहा, “नागरिकों का हर छोटा प्रयास मिलकर बड़े बदलाव का रूप लेता है।”

इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. दीनबंधु साहू ने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए जनसहभागिता अनिवार्य है। उन्होंने गंगा-यमुना एक्शन प्लान पर हुए भारी निवेश का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके बावजूद नदियों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। उन्होंने नागरिकों से इस समस्या को अपनी मानकर समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण संकट से निपटने के लिए प्रकृति आधारित समाधानों पर जोर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सौम्यजीत पाणी ने छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक शहरी क्षेत्रों में सामुदायिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया। वहीं, साउथ एशिया क्लाइमेट चेंज जर्नलिस्ट्स फोरम के अध्यक्ष आशीष गुप्ता ने कहा कि नदियों के पुनर्जीवन के लिए तकनीक, नीतिगत समन्वय और निरंतर जनभागीदारी का समन्वित दृष्टिकोण आवश्यक है।

तकनीकी सत्र ‘नदियों और जलाशयों की सफाई में सामुदायिक भागीदारी’ में वाईएसएस फाउंडेशन के निदेशक सचिन गुप्ता, कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (कीट), भुवनेश्वर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की अध्यक्ष डॉ. संजुक्ता साहू और दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस के सहायक प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार ने नागरिक नेतृत्व वाले पर्यावरणीय प्रयासों के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के दौरान प्रो. दीनबंधु साहू को ‘नेचर केयर अवॉर्ड फॉर नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस, 2025’ से सम्मानित किया गया। वहीं, ‘नेचर केयर सस्टेनेबिलिटी अवॉर्ड, 2025’ सचिन गुप्ता, डॉ. धर्मेंद्र कुमार और डॉ. संजुक्ता साहू को प्रदान किया गया।

बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 29 जनवरी से, प्रकाश राज होंगे एंबेसडर

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बेंगलुरु, 23 दिसंबर (हि.स.)। 17वां बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 29 जनवरी से 6 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। इस वर्ष महोत्सव की मुख्य थीम महिला सशक्तिकरण होगी। वरिष्ठ अभिनेता, निर्देशक एवं निर्माता प्रकाश राज को इस बार के फिल्म महोत्सव का एंबेसडर नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महोत्सव का उद्घाटन समारोह विधान सौधा के सामने भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पूर्व तैयारी बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस वर्ष के फिल्म महोत्सव में कन्नड़ और भारतीय फिल्मों के साथ-साथ 60 से अधिक देशों की 200 से ज्यादा फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। कुल मिलाकर 400 से अधिक शो आयोजित होंगे। प्रमुख प्रदर्शनों का आयोजन राजाजीनगर स्थित लुलु मॉल के सिनेपोलिस के 11 स्क्रीन पर होगा। इसके अलावा डॉ. राजकुमार भवन, चामराजपेट का कलाकार संघ और बनशंकरी स्थित सुचित्रा फिल्म सोसायटी थिएटर में भी फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि एशियन, भारतीय और कन्नड़ फिल्म प्रतियोगिता वर्गों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब तक 110 से अधिक फिल्मों की प्रविष्टियां प्राप्त हुई हैं। इन तीनों श्रेणियों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसंबर निर्धारित की गई है। बेंगलुरु फिल्म महोत्सव में कान्स, बर्लिन, वेनिस, कार्लोवी वेरी, लोकार्नो, रॉटरडैम, बुसान और टोरंटो जैसे विश्व के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में पुरस्कार और सराहना प्राप्त कर चुकी फिल्में इस बार एक ही मंच पर दर्शकों के लिए उपलब्ध होंगी। साथ ही इस वर्ष के ऑस्कर पुरस्कार के लिए शॉर्टलिस्ट हुई विभिन्न देशों की श्रेष्ठ फिल्मों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।

पोलिश कल्चरल सेंटर, गोएथे इंस्टीट्यूट–मैक्स म्यूलर भवन, अलायंस फ्रांसै–फ्रेंच इंस्टीट्यूट और रॉयल थाईलैंड कांसुलेट के सहयोग से संबंधित देशों की प्रमुख फिल्मों का प्रदर्शन किया जायेगा। पोलैंड के प्रसिद्ध निर्देशक आंद्रेज वाजदा की जन्मशती के अवसर पर उनकी चयनित फिल्मों का विशेष रेट्रोस्पेक्टिव भी आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा अफ्रीकी सिनेमा के इतिहास को दर्शाने वाली विशेष फिल्म श्रृंखला भी महोत्सव का हिस्सा होगी।

फिल्म महोत्सव के मुख्य केंद्र में फिल्म अकादमिक गतिविधियों के लिए विशेष मंच उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही कन्नड़ फिल्म उद्योग के 91 वर्षों के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने वाली फोटोग्राफ प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025–26 में 17वें बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के आयोजन के लिए राज्य सरकार ने 7 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है। समापन समारोह में सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। साथ ही जीवन पर्यंत उपलब्धि पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।

मानव कल्याण के लिए एआई का सकारात्मक और नैतिक रूप से उपयोग किया जाना चाहिएः उपराष्ट्रपति

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उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय द्वारा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और आउटलुक पत्रिका के सहयोग से नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में आयोजित “एआई विकास – एआई का हाकुंभ” विषय पर आयोजित प्रमुख राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए रेखांकित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब भविष्य की अवधारणा नहीं बल्कि वर्तमान की वास्तविकता है, जो स्वास्थ्य देखभाल निदान, जलवायु मॉडलिंग, शासन, शिक्षा, वित्त और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित विभिन्न सेक्टरों को प्रभावित कर रही है। यह समाज के विकास और व्यक्तियों के जीवन और कार्य करने के तरीके को नया आकार दे रही है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी विकास को लेकर निराशावादी होने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कंप्यूटर के विकास का उदाहरण देते हुए कहा कि शुरुआत में तो इसका विरोध हुआ, लेकिन बाद में इसने दुनिया को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि हर प्रौद्योगिकीय प्रगति के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू होते हैं। उन्होंने बल देते हुए कहा कि यह हमारा उत्तरदायित्व है कि हम प्रौद्योगिकी का सकारात्मक और रचनात्मक तरीके से उपयोग करने के तरीके खोजें।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में अग्रणी देशों में से एक बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है। उन्होंने ठहराव के विरुद्ध चेतावनी दी और आग्रह किया कि भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में विकसित देशों के साथ कदम मिलाकर चलने की दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पाठ्यक्रम के शुभारंभ पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई से प्रारंभिक परिचय छात्रों को आलोचनात्मक सोच, समस्या-समाधान कौशल और प्रौद्योगिकी-चालित दुनिया के लिए आवश्यक भविष्य-तैयार योग्यताओं से सुसज्जित करेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों को तेजी से हो रहे प्रौद्योगिकीय परिवर्तनों के साथ तालमेल बनाए रखने और उत्कृष्टता एवं नवाचार के केंद्र के रूप में उभरने के लिए निरंतर विकसित होना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने भारत के जनसांख्यिकीय लाभ को रेखांकित करते हुए कहा कि लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। उन्होंने कहा कि यदि इस जनसांख्यिकीय लाभांश का सही ढंग से उपयोग किया जाए, तो भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनकर उभर सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत के आत्मनिर्भर, समावेशी और प्रौद्योगिकीय रूप से सशक्त आत्मनिर्भर और विकसित भारत (2047) बनने की दिशा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उपराष्ट्रपति ने उत्तरदायी और नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के महत्व पर बल देते हुए कहा कि किसी भी वैज्ञानिक प्रगति से मानवता को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए और प्रौद्योगिकी का अंतिम लक्ष्य लोगों को अधिक सुखी, समृद्ध और गरिमापूर्ण जीवन जीने में मदद करना होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानवीय बुद्धि बढ़ाने में सहायक होना चाहिए और सामाजिक कल्याण तथा जनहित को बढ़ावा देने के लिए नैतिक सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन का समापन करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि भारत अपनी प्रतिभा, दूरदृष्टि और मूल्यों के साथ न केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता को जिम्मेदारी से अपनाएगा बल्कि विश्व के भविष्य को आकार देने में भी मार्गदर्शन करेगा।

दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद; गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) महेश वर्मा; एआईसीटीई के प्रोफेसर टीजी सीतारामन; आउटलुक पत्रिका से श्री संदीप घोष, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और छात्रों के साथ इस सम्मेलन में शामिल हुए।

आर्थिक निवेश और विकास के प्रमुख संचालकों में सुरक्षा भी शामिल है: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (23 दिसंबर, 2025) नई दिल्ली में ‘जन-केंद्रित राष्ट्रीय सुरक्षा: विकसित भारत के निर्माण में सामुदायिक भागीदारी’ विषय पर आईबी शताब्दी वृत्ति व्याख्यान को संबोधित किया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह गर्व की बात है कि स्वतंत्रता के बाद से, आईबी देश के लोगों को सुरक्षा प्रदान करने और राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने में एक उत्कृष्ट भूमिका निभा रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस व्याख्यान का विषय ‘जन-केंद्रित राष्ट्रीय सुरक्षा: विकसित भारत के निर्माण में सामुदायिक भागीदारी’ हमारे देश के लिए तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण है। आईबी सहित सभी संबंधित संस्थानों को हमारे लोगों में जागरूकता फैलानी चाहिए कि राष्ट्रीय सुरक्षा प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। जागरूक नागरिक राष्ट्रीय सुरक्षा में लगे सरकारी एजेंसियों के प्रयासों में सशक्त तरीके से मदद कर सकते हैं। एक समुदाय के रूप में संगठित होकर हमारे नागरिक बड़ा समन्वय कर सकते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सरकार की पहलों में मदद कर सकते हैं। हमारा संविधान नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों को सूचीबद्ध करता है। इनमें से कई कर्तव्य राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक आयामों से संबंधित हैं। छात्र, शिक्षक, मीडिया, निवासी कल्याण संघ, नागरिक समाज संगठन और कई अन्य समुदाय इन कर्तव्यों का प्रचार-प्रसार कर सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सामुदायिक भागीदारी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती प्रदान करती है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिनमें जागरूक नागरिक सुरक्षा संकटों को टालने में पेशेवर बलों की सहायता करने में आगे रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा की व्यापक परिभाषा और रणनीति में जनता को केंद्र में रखा गया है। जनता को अपने आसपास घटित घटनाओं का मूक दर्शक नहीं बने रहना चाहिए। उन्हें अपने परिवेश और आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा में जागरूक और सक्रिय भागीदार बनना चाहिए। ‘जन भागीदारी’ जन-केंद्रित सुरक्षा की आधारशिला है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी नागरिक पुलिस और आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों को जनता की सेवा की भावना से काम करना होगा। सेवा की यह भावना जनता में विश्वास पैदा करेगी। यह विश्वास जन-केंद्रित राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति विकसित करने की पूर्व शर्त है, जिसमें सामुदायिक भागीदारी एक महत्वपूर्ण तत्व होगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों और खतरों का सामना कर रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव, आतंकवाद और उग्रवाद, विद्रोह और सांप्रदायिक कट्टरता पारंपरिक रूप से सुरक्षा संबंधी चिंता के विषय रहे हैं। हाल के वर्षों में, साइबर अपराध एक महत्वपूर्ण सुरक्षा खतरा बनकर उभरे हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि देश के किसी भी हिस्से में सुरक्षा के अभाव का आर्थिक प्रभाव इससे प्रभावित क्षेत्र से कहीं अधिक व्यापक होता है। सुरक्षा, आर्थिक निवेश और विकास के प्रमुख कारकों में से एक है। ‘समृद्ध भारत’ के निर्माण के लिए ‘सुरक्षित भारत’ का निर्माण आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद लगभग पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। उन्होंने बताया कि आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत बलों और एजेंसियों की गहन कार्रवाई वामपंथी उग्रवाद के लगभग उन्मूलन का प्रमुख कारण रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न पहलों के माध्यम से समुदायों का विश्वास जीतने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया गया। आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देना वामपंथी उग्रवादियों और विद्रोही समूहों द्वारा लोगों के शोषण के खिलाफ प्रभावी साबित हुआ है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सोशल मीडिया ने सूचना और संचार की दुनिया को बदल दिया है। इसमें सृजन और विनाश दोनों की क्षमता है। लोगों को गलत सूचनाओं से बचाना एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस कार्य को निरंतर और अत्यंत प्रभावी ढंग से करना होगा। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का ऐसा सक्रिय समुदाय बनाने की आवश्यकता है जो लगातार राष्ट्रीय हित में तथ्यों पर आधारित जानकारी प्रस्तुत करे।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे जटिल चुनौतियां गैर-पारंपरिक और डिजिटल प्रकृति की हैं। इनमें से अधिकांश समस्याएं अत्याधुनिक तकनीकों से उत्पन्न होती हैं। इस संदर्भ में, तकनीकी रूप से सक्षम समुदायों को विकसित करने की आवश्यकता है। डिजिटल धोखाधड़ी से बचने के लिए घरेलू, संस्थागत और सामुदायिक स्तर पर सतर्कता आवश्यक है। डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिकों को फ़िशिंग, डिजिटल धोखाधड़ी और ऑनलाइन दुर्व्यवहार की रिपोर्ट करने के लिए सशक्त बना सकते हैं। वे संबंधित एजेंसियों को वास्तविक समय का डेटा प्रदान कर सकते हैं। ऐसे वास्तविक समय के डेटा का विश्लेषण करके, भविष्यसूचक पुलिसिंग मॉडल विकसित किए जा सकते हैं। नागरिकों के सतर्क और सक्षम समुदाय न केवल साइबर अपराधों के प्रति कम संवेदनशील होंगे, बल्कि ऐसे अपराधों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच के रूप में भी कार्य करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि जन कल्याण और जनभागीदारी को अपनी रणनीति के केंद्र में रखकर हम अपने नागरिकों को खुफिया जानकारी और सुरक्षा के प्रभावी स्रोत बनने के लिए सशक्त बना सकते हैं। जनभागीदारी से प्रेरित यह परिवर्तन 21वीं सदी की जटिल और बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सहायक होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनभागीदारी के माध्यम से हम सभी एक सतर्क, शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध भारत के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार – 2025 प्रदान किए

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राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (23 दिसंबर, 2025) नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के गणतन्त्र मंडप में आयोजित एक पुरस्कार समारोह में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार- 2025 प्रदान किए।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार के दूसरे संस्करण में, विज्ञान रत्न, विज्ञान श्री, विज्ञान युवा और विज्ञान टीम – चार श्रेणियों में 24 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को पुरस्कार प्रदान किए गए।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार का उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार के विभिन्न क्षेत्रों में वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों और नवप्रवर्तकों द्वारा व्यक्तिगत रूप से या टीम के साथ किए गए उल्लेखनीय और प्रेरणादायक योगदान को मान्यता प्रदान करना है।