वायुसेना अकादमी (एएफए) में संयुक्त दीक्षांत समारोह परेड

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संयुक्त दीक्षांत परेड (सीजीपी) 13 दिसंबर को हैदराबाद के डुंडीगल स्थित वायु सेना अकादमी (एएफए) में आयोजित की गई। यह भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की फ्लाइंग और ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं के फ्लाइट कैडेटों के पूर्व-कमीशनिंग प्रशिक्षण के सफल समापन का प्रतीक थी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान परेड के समीक्षा अधिकारी (आरओ) थे और उन्होंने 216वें कोर्स के स्नातक फ्लाइट कैडेटों को राष्ट्रपति कमीशन प्रदान किया। इस दिन कुल 244 फ्लाइट कैडेटों ने दीक्षांत समारोह में भाग लिया जिनमें 215 पुरुष और 29 महिला कैडेट शामिल थे।

सीडीएस का स्वागत एयर मार्शल तेजिंदर सिंह, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ट्रेनिंग कमांड और एयर मार्शल पी.के. वोहरा, कमांडेंट, एएफए ने किया। परेड द्वारा आरओ को जनरल सैल्यूट दिया गया जिसके बाद एक शानदार मार्च पास्ट हुआ।

इस अवसर पर भारतीय नौसेना के छह अधिकारियों, भारतीय तटरक्षक बल के आठ अधिकारियों और वियतनाम समाजवादी गणराज्य के दो प्रशिक्षुओं को उड़ान प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर ‘विंग्स’ से सम्मानित किया गया। पांच अधिकारियों को नेविगेशन प्रशिक्षण पूरा करने पर ‘ब्रेवेट’ प्रदान किए गए। स्नातक होने वाले अधिकारियों के परिवार के सदस्य समारोह में उपस्थित थे!

परेड का मुख्य आकर्षण ‘कमीशनिंग समारोह’ था जिसमें स्नातक कैडेटों को आरओ द्वारा फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में कमीशन दिया गया। स्नातक अधिकारियों को शपथ दिलाई गई जिसमें उन्होंने देश की संप्रभुता और सम्मान की रक्षा करने का संकल्प लिया। स्नातक परेड के दौरान पिलाटस पीसी-7, हॉक, किरण और चेतक विमानों द्वारा सुव्यवस्थित और समन्वित फ्लाई पास्ट किया गया। आकाश गंगा टीम और एयर वॉरियर ड्रिल टीम (एडब्ल्यूडीटी) के रोमांचक प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विभिन्न प्रशिक्षण विषयों में उनके असाधारण प्रदर्शन को सम्‍मान देते हुए, आरओ ने फ्लाइंग शाखा के फ्लाइंग ऑफिसर तनिष्क अग्रवाल को पायलट कोर्स में समग्र योग्यता क्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रपति पट्टिका’ और ‘नवानगर सोर्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया। फ्लाइंग ऑफिसर सक्षम डोबरियाल को नेविगेशन स्ट्रीम में समग्र योग्यता क्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए ‘राष्ट्रपति पट्टिका’ से सम्मानित किया गया। फ्लाइंग ऑफिसर नितेश कुमार को ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं में समग्र योग्यता क्रम में प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए ‘राष्ट्रपति पट्टिका’ से सम्मानित किया गया।

परेड को संबोधित करते हुए, आरओ ने नवनियुक्त अधिकारियों की बेदाग वर्दी, सटीक ड्रिल और परेड के उच्चतम मानकों के पालन की सराहना की। आरओ ने स्नातक होने वाले अधिकारियों को सेना में शामिल होने और मातृभूमि की सेवा करने के लिए बधाई दी। उन्होंने अधिकारियों से अहंकार और अज्ञानता से दूर रहने और सिद्धांतों के मामले में दृढ़ रहने का आग्रह किया।

उन्होंने युद्ध जीतने के लिए विषमता पैदा करने और उसे बनाए रखने पर भी जोर दिया। ऐसा उभरते क्षेत्रों में करना कहीं अधिक आसान है। उन्होंने प्रौद्योगिकी को एक निर्णायक कारक बताया और कहा कि इसलिए हमें एआई संचालित डेटा फ्यूजन, मानव-मानवरहित टीमिंग, स्वायत्त और मानवरहित प्रणालियों और संज्ञानात्मक डोमेन संचालन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय वायु सेना की अद्वितीय पेशेवराना अंदाज का प्रमाण है, एक निरंतर प्रक्रिया है जिसे जेएआई द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए। संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार जेएआई के मूल सिद्धांत हैं और ये भारत की युद्ध शक्ति के भविष्य को आकार देंगे। उन्होंने अधिकारियों को साहसपूर्वक सेवा करने और निडरता से नेतृत्व करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए अपना संबोधन समाप्त किया।

परेड का समापन नवनियुक्त अधिकारियों के दो कॉलम की धीमी गति से मार्च करने के साथ हुआ जो सैन्य मार्च की धुनों पर आधारित था, और एक विशेष भावनात्मक क्षण आया जब वायुसेना प्रमुख (सीएएस) एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने उनके ऊपर तीन विमानों के किरण फॉर्मेशन का नेतृत्व किया और उनके साथ उड़ान भरी जबकि उनके तत्काल कनिष्ठ अधिकारियों द्वारा उन्हें पहली सलामी दी गई।

सारंग हेलीकॉप्टर की प्रदर्शन टीम और सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (एसकेएटी) द्वारा प्रस्तुत एक मनमोहक सिंक्रोनस फ्लाइंग डिस्प्ले, सीजीपी के भव्य समापन का हिस्सा था।

 केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा बॉम्बे जिमखाना की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट का अनावरण

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डाक विभाग ने बॉम्बे जिमखाना की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया है , जो खेल उत्कृष्टता की इसकी गौरवशाली विरासत और राष्ट्र के लिए इसके स्थायी सांस्कृतिक योगदान का जश्न मना रहा है।

इस स्मारक डाक टिकट को मुंबई के बॉम्बे जिमखाना में केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा औपचारिक रूप से जारी किया गया । इस अवसर पर राज्यसभा सांसद  मिलिंद देवरा , बॉम्बे जिमखाना के अध्यक्ष  संजीव सरन मेहरा , नवी मुंबई क्षेत्र की पोस्टमास्टर जनरल सुश्री सुचिता जोशी और अन्य विशिष्ट अतिथियों एवं बॉम्बे जिमखाना के सदस्यों की उपस्थिति रही।

इस अवसर पर श ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आशा व्यक्त की कि यह स्मारक डाक टिकट हर व्यक्ति की हथेली में एक संदेशवाहक की तरह काम करेगा, जो एक लिफाफे से दूसरे लिफाफे और एक हाथ से दूसरे हाथ तक यात्रा करेगा। उन्होंने कहा कि खेल की ही तरह, यह डाक टिकट भी कहानियों और मूल्यों को समेटे हुए है, जो युवा लड़के-लड़कियों को खेल अपनाने, सक्रिय रहने और जीवन को सकारात्मक रूप से आकार देने में संस्थानों की शक्ति पर विश्वास करने के लिए प्रेरित करता है।

श्री सिंधिया ने इंडिया पोस्ट और बॉम्बे जिमखाना क्लब के बीच तुलना करते हुए कहा कि दोनों ही संस्थाएं भावनाओं को व्यक्त करने, लोगों को जोड़ने और पीढ़ियों के बीच सेतु बनाने पर आधारित हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदृष्टि और अटूट समर्थन से डाक विभाग में एक क्रांतिकारी बदलाव हो रहा है—अपनी पुरानी प्रणालियों को नया रूप दे रहा है, अपनी सेवाओं का विस्तार कर रहा है और अगले पांच वर्षों में विश्व का सबसे बड़ा और सबसे समावेशी लॉजिस्टिक्स संगठन बनने की दिशा में अग्रसर है।

सन् 1875 में स्थापित बॉम्बे जिमखाना भारत की खेल और सामाजिक विरासत का एक विशिष्ट स्तंभ रहा है, जिसने पीढ़ियों से खिलाड़ियों का पोषण किया है और साथ ही सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों के लिए एक जीवंत केंद्र के रूप में कार्य किया है। 150 वर्ष के दौरान, इस संस्था ने खेल भावना, सौहार्द और सामुदायिक जुड़ाव की प्रबल भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यह स्मारक डाक टिकट बॉम्बे जिमखाना के प्रतिष्ठित परिसर और मैदानों को खूबसूरती से दर्शाता है , जो इसकी चिरस्थायी विरासत और भारत के खेल परिदृश्य में इसके योगदान का प्रतीक है।

इस विशेष अंक के माध्यम से, डाक विभाग संस्था की 150 साल की यात्रा का सम्मान करता है और डाक टिकट संग्रह के माध्यम से भारत की समृद्ध खेल उपलब्धियों को संरक्षित करने और प्रदर्शित करने की अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

यह स्मारक डाक टिकट डाक टिकट कार्यालयों के माध्यम से और ऑनलाइन www.epostoffice.gov.in पर उपलब्ध होगा

अजमेर में दरगाह ख्वाजा साहब के 814वें उर्स की तैयारियों की समीक्षा

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अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने आज अजमेर में 17 दिसंबर, से शुरू होने वाले दरगाह ख्वाजा साहब के 814वें उर्स की तैयारियों का जायजा लिया। एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की। समीक्षा उर्स के दौरान दरगाह आने वाले यात्रियों (जियारिनों) की सुरक्षा, संरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्था सुनिश्चित करने पर केंद्रित थी। मंत्रालय के अधिकारियों ने आयोजन के सुचारू और शांतिपूर्ण संचालन को सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के बीच घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

एक परंपरा के रूप में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना को दर्शाते हुए, दरगाह ख्वाजा साहब में प्रतिवर्ष एक चादर भेजते हैं।

बैठक के दौरान, प्रमुख व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई जिनमें महत्‍वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना, पर्याप्त पेयजल और शौचालयों की व्‍यवस्‍था करना, पार्किंग सुविधाएँ, स्वच्छता और सफाई बनाए रखना, भीड़ का प्रभावी प्रबंधन और डीकेएस क्षेत्र से आवारा पशुओं को हटाना शामिल था। जिला प्रशासन ने बताया कि सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं और संबंधित विभागों को पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

फील्ड समीक्षा के रूप में, मंत्रालय के अधिकारियों ने अजमेर के बाहरी क्षेत्र में लगभग 150 बीघा भूमि पर बनाए जा रहे विश्राम शिविर आश्रय स्थल (मुसाफिरखाना) का भी दौरा किया, ताकि उर्स के दौरान जियारिनों के आवास और सुविधा के लिए बनाई जा रही सुविधाओं का आकलन किया जा सके।

मंत्रालय ने जिला प्रशासन द्वारा साझा की गई तैयारियों पर संतोष व्यक्त किया और उर्स के दौरान किसी भी समस्‍या के त्वरित समाधान के लिए निरंतर निगरानी के महत्व पर जोर दिया। बैठक की अध्यक्षता अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के निदेशक श्री एसपी सिंह तेवतिया ने की और इसमें जिला प्रशासन के अधिकारियों और दरगाह ख्वाजा साहब (डीकेएस) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने राज्य और जिला अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ज़ियारिन 814वें उर्स के दौरान सुरक्षित, संरक्षित और आरामदायक वातावरण में अपनी यात्रा कर सकें।

केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी होंगे उत्तर प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष?

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केंद्रीय केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष हाेंगे। यूपी भाजपा अध्यक्ष पद के लिए उन्हाेंने शनिवार काे अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उनके खिलाफ किसी ने नामांकन नहीं किया ताे पंकज भाजपा उत्तर प्रदेश के नए चौधरी हाे गए। उनके भाजपा उत्तर प्रदेश के नियुक्त हाेने की घाेषणा रविवार काे की जाएगी। 

इससे पहले यूपी बीजेपी अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे चल रहे पंकज चौधरी ने शनिवार को पार्टी कार्यालय पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल किया। दोपहर एक बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पार्टी दफ्तर पहुंचे, जहां कार्यकर्ताओं ने ‘प्रभु राम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे लगाकर उनका जोरदार स्वागत किया। सीएम ने भी हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया।

पंकज_चौधरी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के कुर्मी समुदाय से आते हैं। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सात बार लोकसभा चुनाव जीते हैं।
चौधरी बहुत ही जमीन से जुड़े हुए नेता रहे हैं। अपना राजनीतिक सफर 1989 में गोरखपुर नगर निगम से स्वतंत्र पार्षद के रूप में शुरू किया और बाद में डिप्टी मेयर भी बने।
1991 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पहली बार महाराजगंज से लोकसभा चुनाव जीता था।
1996 और 1998 में भी उन्होंने लगातार जीत हासिल की लेकिन 1999 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2004 में फिर से जीत दर्ज की, लेकिन 2009 में कांग्रेस के उम्मीदवार से हार गए। 2014 के बाद से लगातार 2014, 2019 और 2024 में महाराजगंज सीट पर जीत हासिल करते हुए वे कुल सात-बार सांसद बने।
जातीय गणित के हिसाब से भाजपा की वर्तमान राजनीति में वह अध्यक्ष के लिए बहुत फिट बैठ रहे हैं। कुर्मी बिरादरी उत्तर प्रदेश और बिहार में यादव के बाद ओबीसी में दूसरे नंबर पर प्रभावशाली मानी जाती है। खासतौर से उत्तर प्रदेश जैसे सबसे बड़े सूब में इस बिरादरी की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका रही है भाजपा को प्रभावशाली बनाने में। पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग की चुनौती पर यह बिरादरी बहुत फिट बैठती है।
मजे की बात यह है कि यह पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश में कुर्मी बिरादरी से संबंध रखते हैं, जबकि बिहार के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री सम्राट चौधरी कोइरी बिरादरी से आते हैं। सम्राट चौधरी में बिहार से भाजपा का पहला मुख्यमंत्री बनने की पूर्ण संभावना बनती है। ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश में कुर्मी बिरादरी से किसी नेता को बहुत महत्वपूर्ण पद दिए जाने से ओबीसी पर भाजपा की पकड़ और ज्यादा लंबे समय तक मजबूत बने रहने की प्रबल संभावना बन जाएगी। कुछ लोगों का कहना है कि पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाएगा ,, परंतु मेरे सूत्र कुछ और कह रहे हैं। उन्हें इससे बड़ी जिम्मेदारी मिलने जा रही है …
Pramod Shukla

उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने संसद भवन परिसर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी

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आज भारत ने 2001 में संसद पर हुए आतंकवादी हमले की बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले बहादुर सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापतिश्री सी पी राधाकृष्णनप्रधानमंत्रीश्री नरेन्द्र मोदीकेंद्रीय मंत्रीगणविपक्ष के नेताश्री राहुल गांधीराज्यसभा के उपसभापतिश्री हरिवंशसंसद सदस्योंपूर्व संसद सदस्यों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। लोक सभा के महासचिवश्री उत्पल कुमार सिंहराज्यसभा के महासचिवश्री पी. सी. मोदी और शहीदों के परिजनों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इससे पहले दिन मेंलोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने एक्स‘ पर एक संदेश साझा कियाजिसमें उन्होंने कहा  कि:

वर्ष 2001 में भारत की संसद पर हुए कायराना आतंकी हमले में वीरगति को प्राप्त होने वाले हमारे साहसी सुरक्षाकर्मियों और कर्मठ कर्मचारियों के सर्वोच्च बलिदान को कोटि-कोटि नमन।

लोकतंत्र की इस सर्वोच्च संस्था की रक्षा करते हुए जिन्होंने अपने प्राण न्योछावर कर दिएउनके प्रति हम कृतज्ञ हैं। देश के प्रति उनकी अद्वितीय निष्ठा हमें निरंतर प्रेरणा देती है।

उन अमर वीरों ने जिस वीरता से आतंकवादियों का सामना कियावह कर्तव्यपालन के साथ ही लोकतांत्रिक मूल्यों व राष्ट्र रक्षा के प्रति भारत की अदम्य इच्छाशक्ति का प्रतीक है। भारत आतंकवाद के विरोध में हमेशा दृढ़ता से खड़ा रहा है। राष्ट्र की एकताअखंडतासुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता केवल औपचारिक घोषणा नहींबल्कि एक सशक्त संदेश है कि भारत किसी भी प्रकार की आतंकवादी मंशा के सामने कभी झुकेगा नहीं।

यह अतुलनीय बलिदान हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए साहसत्याग और कर्तव्यनिष्ठा का प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए आतंकवादी हमले में आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए वीरगति को प्राप्त होने वाले सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धांजलि दी।

X पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, “आज का दिन आतंकवाद के खिलाफ हमारे सुरक्षा बलों के उस अदम्य शौर्य व साहस को फिर से स्मरण करने का दिन है, जब वर्ष 2001 में विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर, हमारे संसद भवन पर हुए कायराना आतंकी हमले को उन्होंने अपने जज्बे से नाकाम किया। आतंकियों को मुँहतोड़ जवाब देते हुए वीरगति को प्राप्त होने वाले सुरक्षा बलों के जवानों को नमन करता हूँ। यह राष्ट्र वीर सेनानियों के त्याग व बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा।”

मुंह में छाले का इलाज

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मुंह में छाले आमाशय में पित्त (एसिड)से जो व्यक्ति परेशान हैं बार बार मुंह में छाले हो जाते हैं वह सौंफ, मुलैठी धनिया,अम्बा हल्दी ,जीरा का चूर्ण एक एक चम्मच सुबह शाम पानी के साथ सेवन करें। लाभ होगा।

वैद्य यशपाल यिंह

ऊर्जा संरक्षण का महत्व

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 बाल मुकुन्द ओझा

आज देशभर में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाया जा रहा है।  भारत में हर साल 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाया जाता है। ऊर्जा संरक्षण दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों के बीच ऊर्जा संसाधनों के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करना है। साथ ही ऊर्जा की खपत को कम करना और लोगों को इसे कुशलता से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है। तेजी से बढ़ती हुई जनसँख्या और ऊर्जा की खपत को देखते हुए ऊर्जा संरक्षण एक प्रमुख मुद्दा बन जाता है। किसी भी देश के विकास में विद्युत की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऊर्जा आज हमारी जिंदगी का अहम् हिस्सा और जरूरत बन गई है। बिजली के बिना कोई भी देश तरक्की और प्रगति के पथ पर आगे नहीं बढ़ सकता। थोड़े से समय के लिए बिजली चली जाने पर हमारे ज्यादातर जरूरी काम रुक जाते हैं। ऊर्जा के अधिकांश स्रोत यथा, पेट्रोलियम, कोयला और गैस सीमित हैं। अगर इनका अत्यधिक उपयोग किया जाता है, तो ये जल्दी समाप्त हो सकते हैं। इसे दृष्टिगत रखते हुए हम ऊर्जा संरक्षण से इन संसाधनों को अधिक समय तक इस्तेमाल में ला सकते हैं।

देश के आर्थिक विकास के साथ बुनियादी ज़रूरतों की पूर्ति करने में ऊर्जा एक इंजन का कार्य करती है। जनसँख्या विस्फोट के फलस्वरूप ऊर्जा की मांग भी बढ़ती जा रही है। एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2040 तक देश में बिजली की खपत 1280 टेरावाट प्रति घंटा हो जाएगी। ऐसे में सीमित जीवाश्म-ईंधन आधारित ऊर्जा स्रोत हमारी भविष्य की इस मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। देश की बढ़ती ज़रूरतों की पूर्ति हेतु ऊर्जा के नवीकरणीय संसाधनों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत से तात्पर्य ऐसे स्रोतों से है जो उपयोग के साथ समाप्त नहीं होते हैं, ये प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होते हैं और जिनकी खपत की तुलना में पुनःभरण की उच्च दर होती है। आम नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में सौर, पवन, भूतापीय, पनबिजली, महासागर और जैव ऊर्जा शामिल हैं।

आजादी के बाद देश में जनसंख्या विस्फोट और आधुनिक सेवाओं, विद्युतीकरण की दर तेज होने और शहरीकरण से ऊर्जा की मांग के साथ ऊर्जा की आवश्यकताएँ भी लगातार बढ़ी है। देश की बढ़ती आबादी के उपयोग के लिए और विकास को गति देने के लिए ऊर्जा की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। लेकिन ऊर्जा के उत्पादन में खपत की तुलना में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि समय रहते हम ऊर्जा के श्रोत विकसित नहीं कर पाए तो एक बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है। यह भी कहा जा रहा है  जिस गति से ऊर्जा की आवश्यकता बढ़ रही है उसे देखते हुए ऊर्जा के संसाधनों के नष्ट होने की आशंका बढ़ने लगी है। देश में पेट्रोलियम, गैस, कोयला जैसे प्राकृतिक संसाधन बहुत सीमित मात्रा में ही उपलब्ध हैं।

ऊर्जा संरक्षण का सही अर्थ ऊर्जा के अपव्यय से बचते हुए कम-से-कम ऊर्जा का उपयोग करना है ताकि भविष्य में उपयोग हेतु ऊर्जा के स्रोतों को बचाया जा सके। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को ऊर्जा संरक्षण के प्रयास किये जाने चाहिए। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति, लाईट, पंखे, एसी या किसी अन्य बिजली के उपकरण के अनावश्यक उपयोग को समाप्त करके घर या कार्यालय में छोटे-छोटे कदम उठाकर ऊर्जा की बचत कर सकता है। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को एसी या हीटर का उपयोग कम करना चाहिए क्योंकि दोनों उपकरण हर दिन बड़ी मात्रा में ऊर्जा की खपत करते हैं। सीएफएल बल्ब या स्मार्ट प्रकाश विकल्प ऊर्जा की खपत को कम कर सकते हैं। पानी गरम करने में भी बहुत अधिक ऊर्जा की खपत होती है। इसलिए कम गर्म पानी का उपयोग करने से बहुत अधिक ऊर्जा बचाई जा सकती है। ऊर्जा के अधिकतम उपयोग से वायू प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ता है। ऊर्जा संरक्षण से हम पर्यावरण को संरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।
आम आदमी को इस बात के लिए जागरूक करना चाहिए कि कार्यस्थल पर अधिक रोशनी वाले बल्ब से तनाव, सिर दर्द, रक्तचाप, थकान जैसी विभिन्न समस्याएं उत्पन्न होती है और श्रमिकों की कार्य कुशलता में भी कमी आती है। जबकि दिन के प्राकृतिक प्रकाश में श्रमिकों की कार्य कुशलता के स्तर में भी वृद्धि होती है और ऊर्जा की खपत में भी कमी आती है। घरो में पानी की टंकियो में पानी पहुँचाने के लिए टाइमर का उपयोग करके पानी के व्यर्थ व्यय को रोककर विद्युत उर्जा की बचत की जा सकती है। बिजली की बचत किए बिना  विकसित राष्ट्र का सपना साकार नहीं हो सकता।

                                                        बाल मुकुन्द ओझा

वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

डी-32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर

सांसद सुधा मूर्ति ने हैंडलूम हाट, नई दिल्ली में भारत की हस्तकला धरोहर को दिखाने वाली प्रदर्शनी, क्राफ्ट-कथा का उद्घाटन किया

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संसद सदस्य (राज्य सभा) श्रीमती सुधा मुर्‍ती ने आज हैंडलूम हाट, जनपथ, नई दिल्ली में भारत भर के कारीगरों को दिखाने वाली प्रदर्शनी, “क्राफ्ट-कथा – 2025” का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी राष्ट्रीय हस्तशिल्प और धरोहर सप्ताह 2025 समारोह के अंतर्गत आयोजित की गयी है। उनके साथ विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) सुश्री अमृत राज, विकास आयुक्त (हैंडलूम) डॉ. एम. बीना और वस्त्र मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

क्राफ्ट-कथा – 2025 का उद्देश्य सतत आजीविका को बढ़ावा देकर, युवा शिल्पकारों को प्रोत्साहित करके और स्थानीय स्तर पर शिल्प इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाकर भारत की कलात्मक विरासत का जश्न मनाना है। आगंतुकों को लाइव प्रदर्शन, शिल्प कथावाचन सत्र, विशिष्ट हस्तशिल्प संग्रह और शिल्पकारों के साथ आपसी संवाद आदि का अनुभव करने का अवसर मिलेगा।

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम (एनएचडीसी) और अखिल भारतीय कारीगर और शिल्प श्रमिक कल्याण संघ (एआईएसीए) के सहयोग से आयोजित किया गया है, यह पहल भारत की विविध शिल्प परंपराओं, प्रमुख कारीगरों और अनोखे हस्तशिल्प उत्पादों को एक मंच पर लाती है।

यह पहल हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय (हस्तशिल्प) द्वारा कारीगरों को सशक्त बनाने, शिल्प समूहों का समर्थन करने और भारत के जीवंत हस्तशिल्प क्षेत्र के लिए बाजार पहुंच बढ़ाने से जुड़े निरंतर प्रयासों को रेखांकित करती है। यह कार्यक्रम शिल्प प्रेमियों, खरीदारों, डिजाइनरों, छात्रों और आम जनता के लिए दिल्ली के जनपथ स्थित हैंडलूम हाट में 11 दिसंबर 2025 तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 8 बजे तक खुला है, ताकि वे भारत की रचनात्मकता और शिल्प कौशल का अनुभव कर सकें।

RSS के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत द्वारा वीर सावरकर की प्रतिमा का अनावरण , अमित शाह ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज श्री विजयपुरम में स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी द्वारा रचित कविता ‘सागरा प्राण तळमळला’ के 115 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्यवंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल (सेवानिवृत्त) श्री डी के जोशी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह आज सभी भारतवासियों के लिए एक तीर्थस्थान बन गया है क्योंकि यहां वीर सावरकर जी ने अपने जीवन के सबसे कठिन समय को बिताया है। उन्होंने कहा कि यह स्थान हमारे स्वतंत्रता संग्राम के एक और महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाष बाबू की स्मृति से भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि जब आज़ाद हिंद फौज ने भारत को आज़ाद कराने का प्रयास किया, तब सबसे पहले भारत में अंडमान निकोबार द्वीप समूह को आज़ाद कराया जहां सुभाष बाबू दो दिन तक रहे भी थे। श्री शाह ने कहा कि सुभाष बाबू ने ही इस द्वीप समूह को शहीद और स्वराज नाम देने का सुझाव दिय़ा था जिसे श्री नरेन्द्र मोदी जी ने प्रधानमंत्री बन कर ज़मीन पर उतारने का काम किया। उन्होंने कहा कि अंडमान और निकोबार एक द्वीप समूह नहीं है बल्कि असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तप, समर्पण और अक्षुण्ण राष्ट्रभक्ति के योग से बनी हुई तपोभूमि है। उन्होंने कहा कि आज बहुत बड़ा अवसर है कि इसी तपोभूमि पर वीर सावरकर जी की आदमकद प्रतिमा का लोकार्पण हुआ है और यह लोकार्पण सावरकर जी की विचारधारा को सही मायने में आगे बढ़ाने का काम करने वाले संगठन के सरसंघचालक मोहन भागवत जी के हाथों से हुआ है। उन्होंने कहा कि यह भूमि और वीर सावरकर जी की स्मृति भी पवित्र है औऱ मोहन भागवत जी के हाथों से इस प्रतिमा का अनावरण सोने पर सुहागा की तरह इसे चिरस्मरणीय बनाता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि आज लोकार्पित यह प्रतिमा कई साल तक वीर सावरकर जी के बलिदान, संकल्प और भारत माता के प्रति अखंड समर्पण का प्रतीक बनकर रहेगी। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा कई दशकों तक आने वाली पीढ़ियों को सावरकर जी के जीवन से प्ररेणा लेने का संदेश देगी। उन्होंने कहा कि यह वीर सावरकर जी द्वारा किए गए आह्वान को हमारे युवाओं द्वारा आत्मसात करने के लिए एक बहुत बड़ा स्थान बनने वाला है। श्री शाह ने कहा कि यह, वीर सावरकर जी का साहस का संदेश, मातृभूमि के प्रति कर्तव्यपरायणता का संदेश, दृढ़ता के उनके गुण, राष्ट्रीय एकात्मता, सुरक्षा औऱ समृद्ध राष्ट्र की कल्पना को युवाओं को सौंपने का एक बहुत बड़ा स्थान बनेगा। उन्होंने कहा कि देशभक्ति की अभिव्यक्ति की पराकाष्ठा है वीर सावरकर जी की ‘सागरा प्राण तळमळला’। उन्होंने कहा कि सावरकर जी का एक वाक्य उनके अनुयायियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि वीरता भय का अभाव नहीं बल्कि भय पर प्राप्त की गई विजय है। जो भय को नहीं जानते वो हमेशा से वीर होते हैं, लेकिन सच्चे वीर वो होते हैं जो भय को जानते हैं और उसे परास्त करने का साहस रखते हैँ और वीर सावरकर जी ने इस वाक्य को जिया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज यहां एक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन हुआ है और सावरकर जी के सभी गुणों को इसमें समाहित करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि सावरकर जी के विचारों को आगे बढ़ाने वाले कई लोगों का आज यहां सम्मान भी हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सागर को कोई बांध नहीं सकता, उसी प्रकार सावरकर जी के गुणों और जीवन की ऊंचाई और उनके बहुआय़ामी व्यक्तित्व को पुस्तक, फिल्म या कविता में संजोकर रखना बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि अलग अलग स्तर पर हुए कई प्रयासों ने आने वाली पीढ़ियों को सावरकर जी को समझने का बहुत बड़ा ज़रिया दिया है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का अस्तित्व सिर्फ शरीर से नहीं बनता है बल्कि जिस विचारधारा का वह अनुसरण करता है, आत्मा जिसे श्रेष्ठ मानती है उस संस्कृति और व्यक्ति के कर्म से भी बनता है और वीर सावरकर जी के इन तीनों गुणों को सिर्फ भारत ही पहचान सकता है।

यूपीएससी का सभी दिव्यांग उम्मीदवारों पसंदीदा परीक्षा केंद्र आवंटित करने का निर्णय

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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने दिव्यांगजनों के लिए परीक्षा की सुगमता और पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से सभी दिव्यांग उम्मीदवारों को अपनी परीक्षाओं के लिए ‘पसंदीदा परीक्षा केंद्र’ आवंटित करने का निर्णय लिया है। इन उम्मीदवारों को अक्सर होने वाली व्यवस्था संबंधी चुनौतियों और विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने यह सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है कि प्रत्येक दिव्यांगजन आवेदक को वही परीक्षा केंद्र आवंटित किया जाए जिसे उन्होंने आवेदन पत्र में अपनी पसंदीदा पसंद के रूप में चुना है।

इस पहल की जानकारी देते हुए यूपीएससी के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने कहा कि पिछले पांच वर्षों के परीक्षा केंद्रों के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद, हमने पाया कि दिल्ली, कटक, पटना, लखनऊ और अन्य जैसे कुछ केंद्र आवेदकों की अधिक संख्या के कारण बहुत जल्दी अपनी क्षमता की अधिकतम सीमा तक पहुंच जाते हैं। इससे दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए चुनौतियां सामने आती हैं और उन्‍हें ऐसे केंद्रों का चयन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है जो उनके लिए सुविधाजनक नहीं होते। मुझे प्रसन्‍नता है कि इस निर्णय से अब प्रत्येक दिव्यांग उम्मीदवार को अपने पसंदीदा केंद्र का आश्वासन मिलेगा, जिससे यूपीएससी परीक्षा में शामिल होने के दौरान उन्हें अधिकतम सुविधा और सहजता सुनिश्चित होगी।

इस पहल को क्रियान्वित करने के लिए आयोग ने निम्नलिखित रणनीति अपनाई है:

  • प्रत्येक केंद्र की वर्तमान क्षमता का उपयोग सर्वप्रथम दिव्‍यांगजनों और गैर-दिव्‍यांगजनों दोनों तरह के उम्मीदवारों द्वारा किया जाएगा।
  • केंद्र के एक बार अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच जाने के बाद, यह गैर-दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए चयन हेतु उपलब्ध नहीं रहेगा; हालांकि, दिव्यांग उम्मीदवार उस केंद्र का चयन करने का विकल्प जारी रख सकेंगे।
  • इसके बाद यूपीएससी अतिरिक्त क्षमता की व्यवस्था करेगी ताकि किसी भी दिव्यांग उम्मीदवार को उसकी पसंद के केंद्र से वंचित न किया जाए।