अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक संस्था थे: उपराष्ट्रपति

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उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति निवास में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी द्वारा लिखित पुस्तक ‘सनातन संस्कृति की अटल दृष्टि’ का विमोचन किया। उपराष्ट्रपति ने श्री देवनानी को पुस्तक लिखने के लिए बधाई दी और इसे एक समयोचित एवं महत्वपूर्ण योगदान कहा, विशेषकर तब जब देश पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी मना रहा है।उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि स्वयं में एक संस्था थे, जिनका जीवन और नेतृत्व सिद्धांतों एवं मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक था।

उपराष्ट्रपति ने श्री वाजपेयी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए कहा कि उन्हें 12वीं और 13वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में श्री वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए उनसे सीखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने जनसंघ के दिनों की सुखद यादें साझा कीं, जिनमें आपातकाल से पहले कोयंबटूर में श्री वाजपेयी के लिए एक बड़े सार्वजनिक सम्मेलन का आयोजन करना शामिल था, यह अनुभव उनके जीवन में गहरा एवं अमिट छाप छोड़ा।

राष्ट्रनिर्माण में श्री वाजपेयी के योगदान पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री वाजपेयी की दूरदर्शी नेतृत्व ने भारत को कई क्षेत्रों में रूपांतरित किया। मई 1998 में ऑपरेशन शक्ति के अंतर्गत पोखरण में सफल परमाणु परीक्षणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्री वाजपेयी का निर्णायक नेतृत्व वैश्विक मंच पर भारत के आत्मविश्वास एवं संकल्प को प्रदर्शित करता है। उन्होंने अटलजी के प्रेरणादायक नारे “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान” को भी याद किया, जो राष्ट्रीय शक्ति के लिए उनकी समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है।

उपराष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड राज्यों के गठन में श्री वाजपेयी की दूरदर्शिता को भी रेखांकित किया, जो क्षेत्रीय आकांक्षाओं तथा विकेंद्रीकृत एवं उत्तरदायी शासन की आवश्यकता की उनकी गहरी समझ को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय कार्य मंत्रालय की स्थापना भी श्री वाजपेयी की समावेशी विकास एवं सबसे दूरदराज़ लोगों के लिए न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें इन दूरदर्शी निर्णयों के दूरगामी प्रभाव को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर प्राप्त हुआ।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री वाजपेयी हमेशा सुशासन पर बल देते थे, यही कारण है कि उनका जन्मदिवस ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और विद्युत क्षेत्र में सुधार जैसी महत्वपूर्ण पहलों का उल्लेख किया, जिन्होंने भारत के विकास के लिए मजबूत नींव रखी।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष और पुस्तक के लेखक वासुदेव देवनानी सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित हुए।

विद्यालय-महाविद्यालयों में अभियान चलाकर शौचालय विशेषकर महिला शौचालय ठीक कराये जाएं

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भाजपा एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने आज नियम – 110 के अन्तर्गत प्रदेश के विद्यालयों में साफ-सफाई विशेषकर महिला शौचालयों में सफाई की व्यवस्था के विषय को ध्यान दिलाते हुए राज्य में विद्यालय-महाविद्यालयों में अभियान चलाकर शौचालय विशेषकर महिला शौचालय ठीक कराये जायें और विद्यालयों में यथा सम्भव शैनेट्री नैपकीन की व्यवस्था सुनिश्चित कराये जाने हेतु सदन में चर्चा / वक्तव्य कराये जाने की मांग की ।
प्रधानमंत्री के स्वच्छता मिशन को तेजी से आगे बढ़ाने में प्रदेश के यशश्वी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य स्वच्छता अभियान गतिमान है। प्रदेश के स्कूल कालेज में फैली गंदगी एक गम्भीर समस्या है। जिसके कारण शिक्षारत् छात्रों के स्वास्थ्य और पढ़ाई पर भी बुरा असर पड़ता है। स्कूल कालेजों के शौचालयों में समुचित सफाई न होने के कारण स्थिति गम्भीर है। प्रदेश के कई स्थानों पर शौचालयों में पानी साबुन तक के सामान्य चीजों का अभाव रहता है। राजधानी लखनऊ में तो कई कालेज के छात्र-छात्राएं बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे है। कहीं शौचालयों में दरवाजें नहीं है तो कही खिड़कियों में शीशे नहीं है। ऐसी स्थिति में छात्रायें शौचालय का इस्तेमाल करने से कतराती हैं। राजधानी के आईटी गुरूनानक गर्ल्स पीजी कालेज समेत एक दर्जन कालेजों के शौचालयों की स्थिति बद से बदतर हो गयी है। यह स्थित राज्य के कई विद्यालय जानकारी में है, गाजियाबाद, आजमगढ़, बरेली, जौनपुर और पीलीभीत जैसे जनपद उदाहरण हैं। हालात यह है कि शैनेट्री नैपकीन शहर के अधिकांश महिला विद्यालयों में नहीं है। कुछ स्थान जहां मशीनें लगी थी वो भी हटा दी गयी है।

कानपुर बना स्टार्टअप का नया हब, 1879 युवा बने जॉब क्रिएटर : अंजनीश प्रताप सिंह

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कानपुर, 23 दिसम्बर (हि. स.)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का ‘जॉब क्रिएटर’ बनाने का मिशन अब कानपुर में हकीकत बनकर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना ने जिले के युवाओं की सोच को एक नई उड़ान दी है। जिससे कानपुर नगर अब उद्यम का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। जिले में अब तक 1879 युवाओं को उनके नए स्टार्टअप और बिजनेस को विस्तार देने के लिए ऋण वितरित किया जा चुका है। यह जानकारी मंगलवार को उपायुक्त उद्योग अंजनीश प्रताप सिंह ने दी।

उपायुक्त उद्योग ने बताया कि जनपद कानपुर के लिए शासन की तरफ से तीन हज़ार लाभार्थियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को पाने के लिए विभाग और बैंक मिलकर काम कर रहे हैं। वर्तमान में 1879 लाभार्थियों को सीधे आर्थिक स्वावलम्बन से जोड़ा गया है, जिससे न केवल जिले की बेरोजगारी कम हो रही है बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

उपायुक्त उद्योग ने बताया कि योजना का लाभ लेकर शहर के युवा अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं। इन्ही में से एक हैं अनुभव शुक्ला, जिन्होंने मशरूम उत्पादन जैसे आधुनिक कृषि क्षेत्र को अपना करियर चुना। विभाग ने उनकी मार्जिन मनी भी जारी कर दी है। वहीं, नारी शक्ति का उदाहरण पेश करते हुए प्रभनूर कौर ने बेकरी मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में कदम रखा है।

उन्होंने बताया कि आयुषी चतुर्वेदी ने भी ब्यूटी पार्लर खोलकर स्वरोजगार की राह चुनी है। शहर के खान-पान के शौक को व्यापार बनाने में अनुपम शुक्ला और मोहम्मद अशफाक भी पीछे नहीं हैं। अनुपम ने फास्ट फूड सेवा की शुरुआत की है, तो वहीं मोहम्मद अशफाक ने अपना खुद का फूड रेस्टोरेंट शुरू कर दिया है। उपायुक्त उद्योग ने विश्वास जताया कि यह योजना जल्द ही कानपुर के एमएसएमई क्षेत्र को एक नई और मजबूत पहचान दिलाएगी।

हालैंड से वाराणसी पहुंचे प्रवासी परिवार को अपने पूर्वजों के गांव की तलाश

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– 1909 के अभिलेखों के सहारे चौबेपुर क्षेत्र में खोज, थाने में दिया प्रार्थना पत्र

वाराणसी, 23 दिसंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद के चौबेपुर क्षेत्र में हालैंड से आया एक प्रवासी परिवार अपने पूर्वजों के गांव और रिश्तेदारों की तलाश में भटक रहा है। वर्ष 1909 के पुराने अभिलेखों के आधार पर भारत पहुंचे इस परिवार को अब तक अपने पुरखों के गांव का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। खोज में सफलता न मिलने पर परिवार ने सहयोग की उम्मीद में चौबेपुर थाने में प्रार्थना पत्र भी सौंपा है।

परिवार के मुखिया वेद प्रकाश विजय ने ग्रामीण अंचल के पत्रकारों को बताया कि उनके दादा दुक्खी को वर्ष 1909 में अंग्रेजों द्वारा कलकत्ता (कोलकाता) से सूरीनाम ले जाया गया था। उनके दादा की शादी मंगनी मनराज से हुई थी, जबकि दादी जहाज पर कार्य करती थीं। परिवार को हाल में मिले पुराने अभिलेखों में उनके दादा का पता “बनारस, थाना चौबेपुर, ग्राम बाबड़पुर” दर्ज है। इसी दस्तावेज के आधार पर वे अपनी पत्नी चंद्रावती और बेटियों शिवानी व पूजा के साथ चौबेपुर पहुंचे हैं।

परिवार ने चौबेपुर क्षेत्र में बाबड़पुर गांव की व्यापक खोज की। इसके अलावा चोलापुर, एयरपोर्ट क्षेत्र तथा आसपास के कई गांवों में भी जानकारी जुटाई, लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी। मंगलवार को परिवार ने बहरामपुर, छितमपुर, बाबतपुर नियार समेत कई गांवों में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और बुजुर्गों से मुलाकात कर जानकारी ली। बावजूद इसके, बाबड़पुर नामक गांव का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिल सका।

वेद प्रकाश विजय का मानना है कि समय के साथ गांव का नाम बदल गया होगा या वह किसी अन्य गांव में विलीन हो गया हो। परिवार ने बताया कि बुधवार को वे जिलाधिकारी और मंडलायुक्त से मिलकर प्रशासनिक सहयोग की मांग करेंगे और जब तक पूर्वजों की जड़ों का पता नहीं चल जाता, तब तक तलाश जारी रखेंगे।

इस दौरान परिवार ने प्रवासी भारतीयों के संघर्ष और पीड़ा पर आधारित एक भावनात्मक गीत भी प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर वहां मौजूद लोग भावविभोर हो उठे। अपने पूर्वजों से जुड़ने की यह कोशिश स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

कोडीन कफ सिरप के अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा: केशव प्रसाद मौर्य

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लखनऊ, 23 दिसम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व विधान परिषद मे नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने अपने वक्तव्य में कहा कि कोडीन कफ सिरप मामले में भी किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले में सभी अभियुक्तों की गिरफ्तारी करने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक 84 अभियोग पंजीकृत हुए हैं, 236 लोग नामजद किए गए हैं, इसमें 90 गिरफ्तार हो चुके हैं। 12,77,095 बोतलें बरामद हुई है।

उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों को किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा। डबल इंजन सरकार ने नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों की कमर तोड़ कर रख दिया है। नशे का कारोबार करने वाले माफिया बच नहीं सकते हैं।

हेल्पलाइन की मदद से रू 630 करोड़ की धनराशि फ्रीज करने का कार्य किया गया है। सरकार अपराधियों के मामले में कोई समझौता नहीं करती है। सरकार की नजर में अपराधी सिर्फ अपराधी है। हम भ्रष्टाचार मुक्त भारत और भ्रष्टाचार मुक्त उत्तर प्रदेश बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। ध्यान भटकाने से जांच करने वालों का ध्यान भटकने वाला नहीं है।

नेता सदन ने कहा कि चाहे ड्रग माफिया हो, नकल माफिया हो, शराब माफिया हो, खनन माफिया हो, भर्ती माफिया हो, किसी भी तरह के माफिया को हम बख्शने वाले नहीं है। कानून व्यवस्था चुस्त -दुरुस्त रखना हमारी बड़ी उपलब्धि है। माफियाओं के खिलाफ कानून के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। किसी ने मनी लान्ड्रिग जैसा कोई कार्य किया होगा, तो वह भी नहीं बचेगा, आगे करने की कोशिश करेगा, तो भी नहीं बचेगा।

अस्पतालों के पंजीकरण में स्थलीय निरीक्षण अनिवार्य हो: विजय बहादुर पाठक

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लखनऊ, 23 दिसम्बर (हि.स.)। शीतकालीन सत्र के दौरान मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक ने सदन में बिना मानक पूरा किये अस्पताल संचालन का मुद्दा उठाया। नियम 110 के अंतर्गत विजय बहादुर पाठक ने कहा ​कि प्रदेश में जगह जगह शिकायतों पर निजी अस्पतालों पर सरकार ने कार्यवाही कर उन अस्पतालों को बंद कराया, और लाइसेंस भी निरस्त कर दिया।

किन्तु कुछ लोगों ने बाद में नाम बदलकर नये सिरे से अस्पताल का संचालन शुरू कर दिया। व्यवस्था यह है कि नये अस्पतालों के पंजीकरण में स्थलीय निरीक्षण अनिवार्य है। सभी मानक पूरा होने पर लाईसेंस जारी होता है। किन्तु फिर भी जिन अस्पातालों को सरकार ने बंद करने के निर्देश दिये हैं फिर उसी स्थान पर नये अस्पताल कैसे शुरू हो रहे हैं। राजधानी लखनऊ समेत राज्य के अलग-अलग जनपदों में इस तरह की जानकरियां मिली हैं कि जो अस्पताल बंद किये गये थे उन्हीं स्थानों पर नये नामों से अस्पताल संचालित हो रहे हैं।

स्वास्थ्य एक संवेदनशील विषय है। स्वास्थ्य सेवायें के प्रति मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री पूरी तौर पर संजीदा है। फिर भी इस तरह के उदाहरण लापरवाही विभागीय खमोशी निगरानी शून्यता के कारण उत्पन्न है। इसी तरह की विशेष परिस्थिति होने पर राज्य सरकार को कटघरे में खड़े होने की स्थिति उत्पन्न करते हैं। बंद अस्पतालों को पुनः अवैधानिक तरीके से चलाये जाने पर जन आक्रोशित है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा की मांग की।

दुष्कर्म प्रकरण में आईपीएल क्रिकेटर को अग्रिम जमानत नहीं

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जयपुर, 23 दिसंबर (हि.स.)। पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत क्रम-3 महानगर प्रथम ने नाबालिग से दुष्कर्म करने से जुडे मामले में आईपीएल क्रिकेटर यश दयाल की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। पीठासीन अधिकारी अलका बंसल ने कहा कि आरोपी पर नाबालिग से दुष्कर्म का गंभीर आरोप है। ऐसे में उसे अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

अग्रिम जमानत अर्जी में कहा गया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ एक गैंग काम कर रही है। उसके खिलाफ पहले गाजियाबाद में मामला दर्ज कराया गया, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस पर कार्रवाई करने पर रोक लगा दी। इसके सात दिन बाद ही सांगानेर सदर थाने में उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया गया और इसे गंभीर रूप देने के लिए लडकी ने घटना दो साल पहले जब वह नाबालिग थी, तब की बता दी। अग्रिम जमानत अर्जी में कहा गया कि वह पेशेवर क्रिकेटर है और समाज में उसकी प्रतिष्ठा है। इसके अलावा वह प्रकरण की जांच में सहयोग करने को तैयार है। ऐसे में उसे अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाए। जिसका विरोध करते हुए सरकारी वकील रचना मान ने कहा कि आरोपी ने पीडिता को क्रिकेट में करियर बनाने का झांसा देकर कई बार संबंध बनाए हैं। वहीं नाबालिग की सहमति भी कानून में कोई महत्व नहीं रखती है। इसलिए आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जाए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने आरोपी क्रिकेटर की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है।

इतिहास से प्रेरणा लेकर समाज को आगे बढ़ाना होगा : योगी आदित्यनाथ

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-मुख्यमंत्री ने कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज में आयोजित 134वीं वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के समापन पर छात्र-छात्राओं को दिया मूलमंत्र

लखनऊ, 23 दिसम्बर (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए इतिहास के गौरवशाली क्षणों से प्रेरणा लेना आवश्यक है। इतिहास की गलतियों का समय पर परिमार्जन होना चाहिए, तभी समाज प्रगति करता है। यदि कहीं त्रुटि हुई है तो उसे सुधार करना होगा और अच्छे कार्यों को जीवन की प्रेरणा बनाकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी परंपराओं को पर्व-त्योहारों के माध्यम से संजोकर रखा है।

देश में राजनीति अपना काम करती रही, राजे रजवाड़ों और समाज के नेतृत्वकर्ताओं ने कभी हस्तक्षेप नहीं किया, बल्कि संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में योगदान दिया। मुख्यमंत्री योगी ने मंगलवार को कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज में आयोजित 134वीं वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के समापन अवसर पर विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को सम्बोधित किया।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मार्च पास्ट के दौरान विद्यार्थियों का अनुशासन, कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने का जज्बा और समर्पण देखकर ऐसा प्रतीत हुआ मानो नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आह्वान पर आजाद हिंद फौज के नौजवान देश की आजादी के लिए स्वयं को समर्पित कर रहे हों। उन्होंने कहा कि यह प्रयास सराहनीय है और इससे विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और आत्मविश्वास का विकास होता है। उन्होंने कहा कि मैं इस अवसर पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करूंगा इस संस्था के पूर्व अध्यक्ष कुंवर आनंद सिंह को, जिनके साथ मैंने कई बार इस संस्था के उन्नयन के बारे में चर्चा की। आज वे भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं है, मैं उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

योगी ने कहा कि समाज को तोड़ने वाले तत्व हमेशा मौजूद रहते हैं, लेकिन समाज को जोड़ने की जिम्मेदारी शिक्षण संस्थानों की होती है। वर्ष 1889 में जब इस संस्थान की स्थापना हुई होगी, तब देश की परिस्थितियां कठिन रही होंगी। उसी कालखंड में वंदे मातरम् जैसे विचारों ने लोगों के मन में स्वतंत्रता की चेतना जगाई। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद भी गुलामी को स्थायी मान लिया गया था, लेकिन बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने उपन्यास आनंदमठ के माध्यम से वंदे मातरम् जैसी कालजयी रचना देश को दी। वर्ष 1896 में कांग्रेस के मंच से गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा इसे स्वर दिए जाने के बाद यह आजादी के आंदोलन का मंत्र बन गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉल्विन तालुकेदार्स कॉलेज द्वारा विद्यार्थियों के लिए अजंता, नालंदा, तक्षशिला, सांची और उज्जैन जैसे ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों के नाम पर हाउस बनाना भारत की गौरवशाली परम्परा को जीवित रखने का उत्कृष्ट प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह वर्ष देश के लिए अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियों से जुड़ा हुआ है। गुरु तेगबहादुर जी की 350वीं शहादत, लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 350वीं जयंती, वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष, सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और भारतीय संविधान के 75 वर्ष पूरे होना देश के गौरवपूर्ण इतिहास की स्मृति कराते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने का उत्सव केवल अयोध्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश ने दीपावली के माध्यम से इसे अपनाया। होली सामाजिक समता का पर्व बनी। रामनवमी, जन्माष्टमी, शिवरात्रि और रक्षाबंधन जैसे पर्वों ने समाज को जोड़ने का कार्य किया। हमारे पूर्वजों ने इन पर्वों को परम्परा के रूप में संरक्षित कर पीढ़ियों तक आगे बढ़ाया।

मुख्यमंत्री योगी ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए अनुशासन और परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। नियमित पढ़ाई के साथ किसी न किसी रचनात्मक गतिविधि से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश में खेलकूद को नई ऊंचाइयां मिली हैं। खेलो इंडिया, फिट इंडिया और सांसद खेलकूद प्रतियोगिताओं के माध्यम से खेल संस्कृति को बढ़ावा मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में कुछ लोग भ्रम फैलाने का कार्य करते हैं। ऐसे लोगों से दूरी बनाकर अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहना चाहिए। हार से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उससे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता का मार्ग है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को कप और शील्ड देकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वाले प्रमुख छात्र-छात्राओं में दिनेश प्रताप सिंह, प्रांजल त्रिपाठी, देवराज सिंह पटेल, आयुषी सिंह और सार्थक त्रिपाठी शामिल रहे। कार्यक्रम में 11 गोरखा राइफल्स के बैंड ने परेड में मुख्यमंत्री को सलामी दी। इस दौरान केन्द्रीय मंत्री तथा ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन के अध्यक्ष कीर्तिवर्धन सिंह, पूर्व विधान परिषद सदस्य राकेश प्रताप सिंह, कॉलेज के प्रबंधक मनीष वर्धन सिंह, प्रबंध समिति के सदस्य विनय कुमार सिंह, राजा वीरेंद्र सिंह परमार, कॉलेज के शिक्षक, छात्र-छात्राएं व उनके अभिभावक उपस्थित रहे।

व्यक्तियों के नाम पर बनाए गए राजस्व गांवों को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द

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जयपुर, 23 दिसंबर (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने बाड़मेर जिले के दो राजस्व गांवों के नाम भूमि दान करने वालों के नाम पर रखने वाली अधिसूचना को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह अधिसूचना राज्य सरकार के 20 अगस्त, 2009 के परिपत्र के खिलाफ है। यह परिपत्र किसी व्यक्ति, जाति, धर्म या समुदाय के नाम पर राजस्व गांव के नामकरण पर रोक लगाती है। जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने यह आदेश भीखा राम की याचिका पर दिए।

मामले के अनुसार राज्य सरकार ने 31 दिसंबर, 2020 को एक अधिसूचना जारी कर कई राजस्व गांव बनाए थे। इसमें बाड़मेर जिले के सोहदा गांव की मेघवालों की ढाणी से अलग किए अमरगढ़ और सगतसर गांव भी शामिल थे। अधिसूचना से पहले तहसीलदार ने प्रमाणित किया था कि सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और प्रस्तावित गांव किसी व्यक्ति, धर्म या जाति आदि से जुडे नहीं है। वहीं बाद में सीमांकन के दौरान कुछ ग्रामीणों ने यह आपत्ति दर्ज कराई कि अमरगढ़ और सगतसर नाम भूमि दान करने वाले अमरराम और सगत सिंह के नाम पर लिए गए हैं। इसके बाद 2020 की अधिसूचना को हाईकोर्ट की एकलपीठ में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने माना की दोनों गांवों के नामांकरण में साल 2009 के परिपत्र की अवहेलना की गई है। इसके साथ ही एकलपीठ ने अधिसूचना को रद्द कर दिया। इसके खिलाफ पेश अपील पर खंडपीठ ने एकलपीठ का आदेश रद्द कर दिया। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील पेश की गई। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश को रद्द कर दिया।

डाक विभाग ने भगवान श्री राम की एक अमूल्य तंजावुर कृति को बेंगलुरु से अयोध्या पहुंचाया

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डाक विभाग ने अपनी लॉजिस्टिक्स डाक सेवा के जरिए भगवान श्री राम की एक अमूल्य तंजावुर कलाकृति को बेंगलुरु से अयोध्या तक सफलतापूर्वक पहुंचाया।पारंपरिक तंजावुर कला शैली में निर्मित यह चित्र एक अमूल्य सांस्कृतिक कलाकृति है। सोने की नींव पर बहुमूल्य और बेशकीमती पत्थरों की जड़ाई वाले इस चित्र का असाधारण कलात्मक और विरासत महत्व है। इस पवित्र कलाकृति को बेंगलुरु की श्रीमती जयश्री फनीश ने अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को दान किया था।

बारह फीट ऊंची और आठ फीट चौड़ाई वाली तथा लगभग आठ किलोग्राम वजनी इस विशाल पेंटिंग को अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए लकड़ी के बक्से में कई परतों वाली बबल रैपिंग के साथ पेशेवर तरीके से पैक किया गया था। खेप का परिवहन निरंतर निगरानी में किया गया, और विभागीय अधिकारी पूरी यात्रा के दौरान वाहन के साथ रहे।

इस कलाकृति को ले जाने वाला वाहन 17 दिसंबर 2025 को बेंगलुरु से रवाना हुआ और लगभग 1,900 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद 22 दिसंबर 2025 को सुरक्षित रूप से अयोध्या पहुंच गया। क्रेन और विशेष उपकरणों का उपयोग करते हुए इसे वाहन पर चढ़ाने और उतारने का कार्य अत्यंत सावधानी से किया गया।

यह मिशन अपनी तरह का पहला उच्च मूल्य वाला लॉजिस्टिक्स डाक खेप है, जिसे कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित कई डाक सर्किलों के बीच घनिष्ठ समन्वय के माध्यम से अंजाम दिया गया। संभागीय प्रमुखों और वरिष्ठ डाक अधिकारियों ने बेंगलुरु-हैदराबाद-नागपुर-जबलपुर-रीवा-प्रयागराज-अयोध्या मार्ग पर इस कलाकृति की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी। यात्रा के अंतिम चरण में घने कोहरे के बावजूद, इस खेप को अत्यंत सावधानी से संभाला गया और सुरक्षित एवं सुचारू रूप से पहुंचाया गया।

कलाकृति के अयोध्या पहुंचने पर, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ के महासचिव श्री चंपत राय की उपस्थिति में पेंटिंग को औपचारिक रूप से तीर्थ क्षेत्र में सौंप दिया गया और स्थापित किया गया।

यह सफल अभियान विशेष, उच्च-मूल्य वाली लॉजिस्टिक्स को संभालने में भारतीय डाक की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है, और राष्ट्रीय विरासत तथा सांस्कृतिक संरक्षण के समर्थन में विश्वसनीयता, सुरक्षा और सेवा उत्कृष्टता के प्रति इसकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।