उपराष्ट्रपति ने महामना मालवीय की जयंती पर उनकी रचना संग्रह’ की अंतिम श्रृंखला ‘महामना वांग्मय’ का विमोचन किया

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उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज भारत रत्न पंडित मदन मोहन मालवीय जी की जयंती पर “मदन मोहन मालवीय की रचनाओं के संग्रह” (खंड 12 से 23) की अंतिम श्रृंखला का विमोचन किया।

नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम के सभागार-एक में आयोजित समारोह में महामना मालवीय मिशन और केन्‍द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आरंभ की गई महत्वपूर्ण द्विभाषी प्रकाशन परियोजना संपन्‍न हो गई। 12 खंडों की यह अंतिम श्रृंखला 11 खंडों की पहली श्रृंखला के बाद प्रकाशित हुई है, जिसका विमोचन प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 25 दिसंबर 2023 को किया था।

इस परियोजना में आधुनिक भारत के निर्माताओं में शामिल रहे श्री मालवीय जी की विरासत को संरक्षित करने के लिए देश भर से मूल दस्तावेजों का शोध और संकलन शामिल किया गया। लगभग 3,500 पृष्ठों के संकलित दस्तावेजों से युक्‍त दूसरी श्रृंखला महामना के बहुआयामी जीवन का व्यापक स्वरूप प्रस्तुत करती है।

इस संग्रह की प्रमुख विशेषताओं में केंद्रीय विधानसभा में उनके द्वारा दिए गए सभी 200 भाषणों का समावेश है, जो सांसद के रूप में उनकी प्रतिभा को प्रदर्शित करता है। इन खंडों में भारतीय औद्योगिक आयोग के सदस्य के रूप में महामना द्वारा देश भर के 135 उद्योगपतियों के साथ साक्षात्कारों का एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी शामिल है।

इस संग्रह में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में उनके सभी सम्‍बोधन शामिल हैं। इसमें पूना पैक्‍ट से संबंधित दुर्लभ सामग्री भी शामिल की गई है, जिससे नए नज़रिए से इस ऐतिहासिक घटना को देखने और अनुसंधान से संभावित बदलाव की संभावना है।

महामना मालवीय के विशिष्ट कानूनी कार्य जीवन को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में उनके द्वारा लड़े गए 170 मुकदमों के माध्यम से दर्शाया गया है, जिसमें चौरी-चौरा कांड के आरोपियों को न्याय दिलाने के लिए न्यायालय में उल्लेखनीय तौर पर अधिवक्‍ता के रूप में उनकी वापसी भी शामिल है। यह संग्रह धर्म ध्वजवाहक के रूप में उनकी भूमिका को भी उजागर करता है, जिसमें सनातन धर्म महासभा में उनकी भागीदारी और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में गीता प्रवचन द्वारा उनके आध्यात्मिक चिंतन का दस्तावेजीकरण किया गया है।

महामना वांग्मय विमोचन समारोह में विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल तथा सांसद और कोयला, खान एवं इस्पात संबंधी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह ठाकुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

आयोजन में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष पद्म भूषण राम बहादुर राय उपस्थित थे ।इनके नेतृत्‍व में शोध और संकलन टीम ने मूल दस्तावेजों का संग्रह किया। प्रकाशन विभाग के प्रधान महानिदेशक भूपेंद्र कैंथोला भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

अमित शाह शुक्रवार को नई दिल्ली में ‘आतंकवाद निरोधी सम्मेलन’ का उद्घाटन करेंगे

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केद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह शुक्रवार, 26 दिसंबर  को नई दिल्ली में ‘आतंकवाद निरोधी सम्मेलन’ का उद्घाटन करेंगे। दो दिवसीय सम्मेलन भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आतंकवाद के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस विजन के तहत आयोजित यह वार्षिक सम्मेलन उभरते खतरों से निपटने के लिए भारत की अगली पीढ़ी की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने का एक मंच बन गया है। यह सम्मेलन ऑपरेशनल फोर्सो, तकनीकी, कानूनी और फोरेंसिक विशेषज्ञों और आतंकवाद विरोधी गतिविधियों में लगी एजेंसियों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले मुद्दों और आतंकवाद से उत्पन्न होने वाले खतरों पर विचार-विमर्श करने के एक मंच के रूप में उभरा है।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ‘Whole of the Government approach’ की भावना से आतंकवाद के खतरे के खिलाफ समन्वित कार्रवाई के लिए औपचारिक और अनौपचारिक चैनल स्थापित करके विभिन्न हितधारकों के बीच तालमेल विकसित करना और भविष्य की नीति निर्माण के लिए ठोस सुझाव प्रस्तुत करना है।

दो दिवसीय सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं और विचार-विमर्श का उद्देश्य आतंकवाद विरोधी (CT) मुद्दों से निपटने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अनुभवों और अच्छी प्रथाओं (good practices) और आतंकी जांच से मिली सीख को साझा करना है।

इस सम्मेलन में विदेशी न्यायक्षेत्रों से साक्ष्य एकत्र करने, आतंकवाद विरोधी जांच में डिजिटल फोरेंसिक और डेटा विश्लेषण, मुकदमे का प्रभावी प्रबंधन, कट्टरता से निपटना, जासूसी और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उभरते hybrid खतरों सहित आतंकवाद से संबंधित अन्य विषयों पर सत्र शामिल हैं। इसके अलावा दो दिन के सम्मेलन में, आतंकवाद वित्तपोषण नेटवर्क को बाधित करने के टूल्स, तकनीक और केस स्टडी, भविष्य के लिए आतंकवाद विरोधी रणनीतियों का निर्माण और उभरते राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों से निपटने के लिए संस्थागत क्षमताओं के निर्माण पर सत्रों को भी शामिल किया गया है।

सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, आतंकवाद विरोधी मुद्दों से निपटने वाली केंद्रीय एजेंसियों/विभागों के अधिकारी और कानून, फोरेंसिक, प्रौद्योगिकी आदि जैसे संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

अगर मान जाते तो उत्तर प्रदेश के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री बनते अटल बिहारी वाजपेयी

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नई दिल्ली, 25 दिसंबर (हि.स.)। कम लोगों को पता है कि 1991 में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पहली बार पूर्ण बहुमत प्राप्त होने पर पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं का प्रस्ताव था कि अटल बिहारी वाजपेयी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें लेकिन वाजपेयी ने इसके लिए मना कर दिया और कल्याण सिंह को यह पद देने की वकालत की थी।

एक टेलीविजन चैनल के लिए निर्माणाधीन एक वृत्तचित्र में शामिल एक साक्षात्कार में उत्तर प्रदेश के कद्दावर भाजपा नेता रहे राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने इस घटना का उल्लेख किया है।

कलराज मिश्र ने वाजपेयी के व्यक्तित्व में अपने सहयोगियों को प्रोत्साहित करने की प्रव‍ृत्ति की चर्चा करते हुए कहा, “ऐसा कौन होगा जो उत्तर प्रदेश जैसे इतने बड़े राज्य का मुख्यमंत्री ना बनना चाहे।” उन्होंने कहा कि बात 1991 की है जब भाजपा को पहली बार उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ था। डॉ मुरली मनोहर जोशी राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। एक बैठक में डॉ जोशी सहित तमाम वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री के पद को लेकर चर्चा की और तय हुआ कि अटल जी को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “सभी नेता अटल जी को मुख्यमंत्री बनाये जाने के पक्ष में थे लेकिन मेरी राय दूसरी थी। हमने कहा कि नहीं, कल्याण सिंह विधानमंडल दल के नेता हैं, उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए लेकिन कल्याण सिंह सहित सभी नेताओं ने अटल जी को मुख्यमंत्री बनाने की बात कही।”

कलराज मिश्र ने कहा कि बाद में उन्हें वाजपेयी के पास यह बात बताने को भेजा गया। इस पर वाजपेयी ने उनसे पूछा कि वह क्या सोचते हैं। उन्होंने वाजपेयी से कहा, “मेरा विचार भिन्न है। आप प्रधानमंत्री वाले विषय हैं। आपको मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहिए। आपको कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि बाद में वाजपेयी ने मुख्यमंत्री पद स्वीकार करने से इन्कार कर दिया और कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव किया।

कलराज मिश्र ने कहा कि यदि वाजपेयी मुख्यमंत्री बन जाते तो फिर कहा जाता कि उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री आगे जा कर प्रधानमंत्री बनता है। उन्होंने कहा कि अपने सहयोगियों को आगे बढ़ाना और प्रोत्साहित करना अटल जी की प्रवृत्ति थी और उनकी विशाल हृदयता थी।

मूर्धन्य कवि, साहित्यकार, पत्रकार एवं राजनीति में अजातशत्रु रहे अटल बिहारी वाजपेयी बाद में देश के अत्यंत लोकप्रिय प्रधानमंत्री बने। उदारमना एवं संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी वाजपेयी ने भारत में गठबंधन की राजनीति एवं सरकार को सफलता प्रदान की और देश को कांग्रेस का ठोस विकल्प प्रदान किया। वाजपेयी की 101वीं जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी याद में देश में अनेक कार्यक्रम आयोजित किये गये। देश हर साल उनके जन्मदिन को सुशासन दिवस के रूप में मनाता है।

बसपा संयोजक आकाश के परिवार में आई कन्या

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बसपा सुप्रिमो कुमारी मायावती ने बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के राष्ट्रीय संयोजक श्री आकाश आनन्द को पुत्री के रूप में परिवार में नई सदस्य की प्राप्ति पर प्रसन्नता व्कीयक्त की है। अपने टविटर में उन्होेंने कहा है कि सभी लोगों में खुशी की लहर है ।उन्होंने कहा कि उनके लिये इससे भी ज़्यादा हर्ष व गौरव की बात यह है कि श्री आकाश ने अपनी बेटी को माननीय बहनजी की तरह ही बहुजन समाज के मिशन के प्रति समर्पित करने के लिये तैयार करने की इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने इसका भरपूर स्वागत किया है। कहा है कि माँ और बेटी दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

युग दृष्टा, प्रखर वक्ता व सुशासन के संवाहक थे अटल जी : केशव प्रसाद मौर्य

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लखनऊ,25 दिसम्बर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने गुरूवार को 7- कालिदास मार्ग स्थित अपने कैम्प कार्यालय पर नए भारत के स्वप्नदृष्टा, भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी और भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की जन्म जयन्ती पर उनके छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अटल जी का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रहित के लिए समर्पित रहा। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुये प्राण-प्रण से देश व समाज सेवा की। उनका व्यक्तित्व, उनके आदर्श एवं राष्ट्रधर्म हम सभी के लिए प्रेरणाप्रद है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी का जीवन और कार्यकाल हम सबके लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। अटल जी महान राष्ट्रवादी विचारक, युग दृष्टा, प्रखर वक्ता व सुशासन के संवाहक थे।

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अटल जी की कविताएं, उनकी जीवन गाथा, पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने जो आधारशिला रखी थी, देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उसी आधार शिला पर देश का नव निर्माण हो रहा है। उन्होंने अटल जी के जीवन संस्मरणों की याद ताजा करते हुए उनके सिद्धांतों को आत्मसात करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सुशासन के लक्ष्यों को कैसे प्राप्त किया जा सकता है, यह अटल जी ने करके दिखाया था।

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा आज अटल जी के रास्ते पर सरकार चल रही है। अटल जी ने स्वर्णिम चतुर्भुज योजना लाकर के देश में सड़कों का जाल बिछाया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत गांव में भी हाईवे जैसी सड़कें बनवाई। पूज्य अटल जी का जीवन अपने आप में हम सबके लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने राजनीति में कभी व्यक्तिगत वैमनस्यता नहीं पाली ।लोकतंत्र में जनता की सेवा कैसे की जाए ,यह अटल जी के जीवन से सीखा जा सकता है । उन्होंने कहा कि अटल जी के रास्ते पर चलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने देश में अनुसंधान को बढ़ावा दिया है।आज भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। वह दिन दूर नहीं जब अटल जी के रास्ते पर चलकर भारत विश्व गुरु बनेगा ।

उत्तर प्रदेश के संभल में सीजेएम कोर्ट ने इंस्पेक्टर समेत 12 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दिए एफआईआर के आदेश

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– पुलिस पर 2022 के फर्जी मुठभेड़ और झूठी विवेचना का आराेप

संभल , 25 दिसंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जनपद संभल की चंदौसी में स्थित सीजेएम कोर्ट ने 12 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआईआर के आदेश दिए हैं। जनपद संभल के चंदौसी में स्थित सीजेएम कोर्ट ने 2022 के फर्जी मुठभेड़ और झूठी विवेचना के मामले में कथित फर्जी मुठभेड़ दिखाने और झूठी विवेचना करने के आरोप में तत्कालीन इंस्पेक्टर, सीओ, एसएचओ समेत कुल 12 पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

24 अप्रैल 2022 को कथित लूट की घटना में एक व्यक्ति (ओमवीर) को आरोपी दिखाया गया, जबकि वह उस समय जिला कारागार (बदायूं) में निरुद्ध था। कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ा दिखाकर और 19 मोटरसाइकिलों की झूठी बरामदगी दिखाकर इस मामले को रचा गया, जिससे अवैध रूप से कार्रवाई की गई। अदालत ने कहा है कि प्रथम दृष्टया इस मामले में पुलिस कर्मियों द्वारा पद का दुरुपयोग, षड्यंत्र और अवैध विवेचना के संकेत मिलते हैं।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर ने पाया कि मामले की विवेचना में पद का दुरुपयोग, षड्यंत्र रचना और झूठे दस्तावेज़ पेश करना जैसे संकेत स्पष्ट हैं। कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज कराकर विधिसंगत जांच की जानी चाहिए।

न्यायालय ने फर्जी मुठभेड़ा और झूठी विवेचना के आरोपों के तहत पुलिस विभाग के 12 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए है।

इस मामले में जानकारी देते हुए पीड़ित ओमवीर ने बताया कि पुलिस ने जिस घटना में उसे दोषी बताया था जिस दिन वह घटना हुई थी उस दिन वह जेल में बंद था लेकिन पुलिस ने उसे मामले में उसे आरोपी बनाकर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करके उसे जमानत पर छूटने के बाद जेल भेज दिया। उसे जब बहजोई पुलिस के द्वारा जेल भेजे गए मुकदमे में जमानत मिली तो उसने अपने वकील के माध्यम से सीजेएम कोर्ट में दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए एक वाद दायर किया जिस पर न्यायालय ने तत्कालीन एसएचओ समेत 12 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध बहजोई थाने में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

वहीं इस मामले में जानकारी देते हुए पीड़ित ओमवीर के अधिवक्ता सुकांत कुमार ने बताया कि पीड़ित को जिस घटना के लिए आरोपी बनाकर जेल भेजा गया था उस घटना के दिन वह जेल में बंद था। जमानत पर छूटने के बाद ओमवीर ने दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध वाद दायर किया था जिसमें न्यायालय ने 12 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रकरण में

सीओ बहजोई गोपाल सिंह के खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराध न पाए जाने की बात न्यायालय ने कही।

इनके खिलाफ हाेगी कार्यवाही

तत्कालीन एसएचओ पंकज लवानिया

तत्कालीन उपनिरीक्षक प्रबोध कुमार

तत्कालीन निरीक्षक राहुल चौहान

तत्कालीन वरिष्ठ उपनिरीक्षक नरेश कुमार

तत्कालीन उपनिरीक्षक नीरज कुमार मात्तोदकर

तत्कालीन उपनिरीक्षक जमील अहमद

आरक्षी वरुण

आरक्षी मालती चौहान

आरक्षी आयुष

आरक्षी राजपाल

आरक्षी दीपक कुमार

तत्कालीन मुख्य आरक्षी रूपचंद्र

सर्राफा बाजार में महंगा हुआ सोना, चांदी ने लगाई जोरदार छलांग

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नई दिल्ली, 25 दिसंबर (हि.स.)। घरेलू सर्राफा बाजार में आज क्रिसमस के दिन सोना और चांदी के भाव में तेजी का रुख बना हुआ है। सोना आज 350 रुपये प्रति 10 ग्राम से 380 रुपये प्रति 10 ग्राम तक उछल गया है। वहीं, चांदी ने आज लगभग 11 हजार रुपये प्रति किलोग्राम की छलांग लगाई है। सोने की कीमत में आई इस तेजी के कारण देश के ज्यादातर सर्राफा बाजारों में 24 कैरेट सोना आज 1,38,940 रुपये से लेकर 1,39,090 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह 22 कैरेट सोना आज 1,27,360 रुपये से लेकर 1,27,510 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच बिक रहा है। वहीं, चांदी की कीमत में जोरदार उछाल आने के कारण ये चमकीली धातु दिल्ली सर्राफा बाजार में आज 2,34,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बिक रही है।

दिल्ली में आज 24 कैरेट सोना 1,39,090 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 1,27,510 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। वहीं, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,38,940 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,27,360 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। इसी तरह अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की रिटेल कीमत 1,38,990 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,27,410 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है।

इन प्रमुख शहरों के अलावा चेन्नई में 24 कैरेट सोना आज 1,38,940 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर और 22 कैरेट सोना 1,27,360 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर बिक रहा है। इसी तरह कोलकाता में 24 कैरेट सोना 1,38,940 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,27,360 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। भोपाल में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,38,990 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,27,410 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

लखनऊ के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना आज 1,39,090 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर और 22 कैरेट सोना 1,27,510 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। पटना में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,38,990 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,27,410 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,39,090 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,27,510 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

देश के अन्य राज्यों की तरह कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा के सर्राफा बाजार में भी आज सोने के भाव में तेजी दर्ज की गई है। इन तीनों राज्यों की राजधानियों बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर में 24 कैरेट सोना 1,38,940 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह इन तीनों शहरों के सर्राफा बाजारों में 22 कैरेट सोना 1,27,360 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

भारत–नेपाल सीमा पर काली नदी का मोटरपुल जल्द होगा चालू

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नेपाल के भारत में राजदूत ने निर्माणाधीन पुल का लिया जायजा।उत्तराखंड काे नेपाल काे जाेड़ने वाला यह दूसर माेटरमार्ग हाेगादोनों देशों के बीच आवागमन, व्यापार और सहयोग हाेंगे और सुदृढ़ : शर्मा

पिथौरागढ़/धारचूला, 25 दिसंबर (हि.स.)। नेपाल के भारत में राजदूत डॉ. शंकर प्रसाद शर्मा ने कहा कि भारत–नेपाल सीमा पर स्थित काली नदी का मोटरपुल जल्द ही चालू हाे जाएगा। इससे दाेनाें देशाें के बीच वाणिज्यिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

नेपाल के राजदूत डॉ. शंकर प्रसाद शर्मा गुरुवार काे धारचूला उप-मंडल के छारछुम गांव पहुंचे और भारत–नेपाल सीमा पर स्थित काली नदी पर निर्माणाधीन मोटरपुल का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आशा व्यक्त की कि शीघ्र ही इस पुल से वाणिज्यिक गतिविधियां प्रारंभ होंगी, जिससे भारत–नेपाल व्यापारिक एवं सामाजिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। डॉ. शर्मा ने कहा कि चंपावत जनपद के बनबसा पुल के बाद यह उत्तराखंड काे नेपाल को जोड़ने वाला दूसरा मोटरपुल है, जो दोनों देशों के बीच आवागमन, व्यापार और आपसी सहयोग को सुदृढ़ करेगा।

निरीक्षण के दौरान नेपाल के राजदूत के साथ उप-मिशन प्रमुख (डीसीएम) डॉ. सुरेन्द्र थापा, राजनयिक अम्बिका जोशी एवं प्रकाश मल्ला, तथा सहयोगी रविन्द्र जंग थापा और भीष्म प्रसाद भुर्येल भी उपस्थित रहे।

राज्य लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिशासी अभियंता अरुण ने बताया कि 110 मीटर स्पैन का पुल लगभग पूर्ण हो चुका है, जिसकी कुल चौड़ाई 10.50 मीटर एवं 7.5 मीटर कैरिज-वे है। उन्होंने बताया कि राजमार्ग से पुल को जोड़ने वाली 150 मीटर लंबी संपर्क सड़क मार्च 2026 तक पूर्ण कर ली जाएगी, जबकि दूसरी ओर की संपर्क सड़क इस माह के अंत तक तैयार हो जाएगी। पीडब्ल्यूडी अस्कोट खंड के अधिशासी अभियंता ने स्पष्ट किया कि भारत एवं नेपाल—दोनों ओर संपर्क सड़कों के निर्माण तथा सुरक्षा एवं कस्टम्स के लिए शेडों के निर्माण के पश्चात यह परियोजना संचालन के लिए पूर्णतः तैयार हो जाएगी।

इस संबंध में जिलाधिकारी पिथौरागढ़ आशीष भटगांई ने गत सप्ताह आयोजित बैठक में पुल को शीघ्र खोलने के उद्देश्य से सुरक्षा एवं कस्टम्स के लिए अस्थायी शेडों के निर्माण के निर्देश पीडब्ल्यूडी को दिए हैं। वहीं, धारचूला के उपजिलाधिकारी जितेन्द्र वर्मा ने बताया कि भारतीय प्राधिकरण दोनों ओर संपर्क सड़कों के निर्माण कार्य में तेजी से जुटे हैं।

उल्लेखनीय है कि भारत–नेपाल सीमा पर स्थित इस महत्वपूर्ण मोटरपुल की आधारशिला वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रखी थी। यह पुल सीमांत क्षेत्र के विकास, व्यापार विस्तार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का सशक्त माध्यम बनेगा।

सीसीपीए ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के परिणामों पर भ्रामक विज्ञापन देने वाले कोचिंग संस्थान पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के उल्लंघन में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2022 और 2023 के परिणामों से संबंधित अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए विजन आईएएस (अजयविजन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड) पर 11 लाख रूपए का जुर्माना लगाया है।संस्थान ने “सीएसई 2023 में शीर्ष 10 में 7 और शीर्ष 100 में 79 चयन” और “सीएसई 2022 में शीर्ष 50 में 39 चयन” जैसे दावों का विज्ञापन किया था, जिसमें सफल उम्मीदवारों के नाम, तस्वीरें और रैंक प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए थे।

जांच करने पर, सीसीपीए ने पाया कि संस्थान ने श्री शुभम कुमार (यूपीएससी सीएसई 2020 में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले) द्वारा चुने गए विशिष्ट पाठ्यक्रम, अर्थात् जीएस फाउंडेशन बैच (कक्षा छात्र) का खुलासा तो किया, लेकिन जानबूझकर अन्य सफल उम्मीदवारों द्वारा चुने गए पाठ्यक्रमों के बारे में जानकारी छिपा दी, जिनके नाम और तस्वीरें उसी वेबपेज पर उनके साथ प्रदर्शित की गई थीं।

इस छिपाव से यह भ्रामक धारणा बनी कि शेष सभी उम्मीदवार भी जीएस फाउंडेशन बैच क्लासरूम कोर्स में नामांकित थे, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं था। इसके अतिरिक्त, उसी विज्ञापन में संस्थान ने अपने “फाउंडेशन कोर्स” का प्रमुखता से प्रचार किया, जिसकी फीस लाखों रुपये में है। इस प्रकार के आचरण से छात्रों को झूठे, बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए और असत्यापित दावों के आधार पर संस्थान के कार्यक्रमों में दाखिला लेने के लिए प्रेरित किया गया।

विस्तृत जांच के बाद सीसीपीए ने पाया कि संस्थान ने यूपीएससी सीएसई 2022 और 2023 में 119 से अधिक सफल उम्मीदवारों का दावा किया था। हालांकि, केवल तीन उम्मीदवारों ने फाउंडेशन कोर्स में दाखिला लिया था, जबकि शेष 116 उम्मीदवारों ने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए टेस्ट सीरीज, अभ्यास टेस्ट (एक बार के टेस्ट) और मॉक इंटरव्यू प्रोग्राम जैसी सेवाओं का विकल्प चुना था। महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाने से उम्मीदवारों और अभिभावकों को यह विश्वास हो गया कि विजन आईएएस यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के सभी चरणों में उम्मीदवारों की सफलता के लिए जिम्मेदार था, जिससे यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28) के तहत एक भ्रामक विज्ञापन बन गया।

प्राधिकरण ने आगे कहा कि संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर सफल उम्मीदवारों के नाम और तस्वीरों के साथ बड़े दावों वाले विज्ञापन भ्रामक थे। छात्रों की उचित अनुमति या सहमति के बिना ऐसे दावे प्रदर्शित करके संस्थान ने संभावित उम्मीदवारों को गुमराह किया। प्रिंट मीडिया के विपरीत वेबसाइट वैश्विक स्तर पर सुलभ होती है और लंबी अवधि तक उपलब्ध रहती है। यह वह प्राथमिक मंच भी है जिसके माध्यम से उम्मीदवार, विशेष रूप से डिजिटल युग में, कोचिंग संस्थानों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं, उनके दावों का मूल्यांकन करते हैं और सूचित विकल्‍प चुनते हैं।

सीसीपीए ने यह भी संज्ञान लिया कि विजन आईएएस के खिलाफ पहले भी भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए कार्रवाई की जा चुकी है। नियामक हस्तक्षेप और सावधानी के बावजूद संस्थान ने अपने बाद के विज्ञापनों में भी इसी तरह के दावे करना जारी रखा, जो उचित सावधानी और नियामक अनुपालन की कमी को दर्शाता है। उल्लंघन की पुनरावृत्ति को देखते हुए वर्तमान मामले को बाद के उल्लंघन के रूप में माना गया, जिसके चलते उपभोक्ताओं के संरक्षण के हित में अधिक जुर्माना लगाना उचित था।

प्राधिकरण ने आगे कहा कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा जैसी अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में, जहां लाखों उम्मीदवार पर्याप्त समय, प्रयास और वित्तीय संसाधन निवेश करते हैं, इस तरह के अधूरे और चयनात्‍मक खुलासे छात्रों और अभिभावकों को परिणामों और कोचिंग सेवाओं की प्रभावशीलता के बारे में झूठी उम्मीदें पैदा करके गुमराह करते हैं।

अब तक सीसीपीए ने भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के लिए विभिन्न कोचिंग संस्थानों को 57 नोटिस जारी किए हैं। 28 कोचिंग संस्थानों पर 1,09,60,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, साथ ही ऐसे भ्रामक दावों को बंद करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्राधिकरण ने इस बात पर जोर दिया है कि सभी कोचिंग संस्थानों को अपने विज्ञापनों में जानकारी का सत्य और पारदर्शी प्रकटीकरण सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि छात्र निष्पक्ष और सूचित शैक्षणिक निर्णय ले सकें।

जुबेदा से बेगम पारा तक का सफर,फिल्मी दुनिया की एक नेत्री

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जुबेदा उल हक का जन्म 25 दिसंबर 1926 को भारत के पंजाब प्रांत (अब पंजाब, पाकिस्तान में ) के झेलम में एक कुलीन पंजाबी मुस्लिम परिवार में हुआ था। वे एक भारतीय हिंदी फिल्म अभिनेत्री थीं और बेगम पारा के नाम से मशहूर थीं। वे मुख्य रूप से 1940 और 1950 के दशक में सक्रिय रहीं। लगभग 50 वर्षों के अंतराल के बाद, उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म सांवरिया (2007) में सोनम कपूर की दादी की भूमिका के साथ फिल्मों में वापसी की। 1950 के दशक में, उन्हें बॉलीवुड की ग्लैमर गर्ल माना जाता था, यहाँ तक कि लाइफ पत्रिका ने उनकी खूबसूरत और आकर्षक तस्वीरों के लिए एक विशेष सत्र आयोजित किया था।

उनके पिता, मियां एहसान-उल-हक, जालंधर के न्यायाधीश थे , जिन्होंने अपने जीवन के किसी मोड़ पर बीकानेर रियासत (जो अब उत्तरी राजस्थान का हिस्सा है) की न्यायिक सेवा में प्रवेश किया , जहाँ वे अंततः सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने। वे अपने समय के एक कुशल क्रिकेटर थे। उनका परिवार अलीगढ़ में बस गया। उनका पालन-पोषण बहुत ही अनुशासित लेकिन उदार तरीके से हुआ। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की । उनकी बड़ी बहन, ज़रीना हक, का विवाह मदन मोहन बिम्बेट से हुआ और इस दंपति की एक बेटी मीनू बिम्बेट (जो बाद में रुखसाना सुल्ताना के नाम से अपने राजनीतिक सक्रियता के लिए जानी गईं) हुई। [ 8 ] बिम्बेट की बेटी अमृता सिंह (पारा की पोती) 1980 के दशक में बॉलीवुड स्टार बन गईं। इसके अलावा, पारा के बड़े भाई मसरुल हक, 1930 के दशक के अंत में अभिनेता बनने के लिए बॉम्बे चले गए थे। वहाँ उनकी मुलाकात बंगाली अभिनेत्री प्रतिमा दासगुप्ता से हुई और उन्हें उनसे प्यार हो गया, और उन्होंने उनसे शादी कर ली।

जब भी वह बॉम्बे में उनसे मिलने जातीं, तो अपनी भाभी की चकाचौंध भरी दुनिया से बेहद प्रभावित हो जातीं। वह कई मौकों और समारोहों में उनके साथ जाया करती थीं। लोग उनकी खूबसूरती से काफी प्रभावित होते थे और उन्हें कई भूमिकाओं की पेशकश करते थे। ऐसा ही एक प्रस्ताव उन्हें सशाधर मुखर्जी और देविका रानी की तरफ से मिला था।

बेगम पारा को पहली बड़ी सफलता 1944 में पुणे के प्रभात स्टूडियो की फिल्म ‘चांद’ से मिली । प्रेम अदीब फिल्म के हीरो थे और सितारा देवी ने वैम्प का किरदार निभाया था। फिल्म ने ज़बरदस्त सफलता हासिल की और पारा को लगभग 1500 रुपये प्रति माह मिलने लगे। इसके तुरंत बाद, उन्होंने और उनकी भाभी प्रतिमा ने उपन्यास ‘पिग्मेलियन’ पर आधारित फिल्म ‘ छमिया ‘ (1945) बनाई, जो एक बार फिर बड़ी सफलता साबित हुई। ‘ छमिया ‘ के बाद पारा ने कई फिल्में साइन कीं , लेकिन वह एक अभिनेत्री के रूप में अपनी पहचान पूरी तरह स्थापित नहीं कर पाईं। उनकी छवि बेहद विवादास्पद होने के कारण, उन्हें ज्यादातर फिल्मों में ग्लैमर डॉल की भूमिका ही दी जाती थी। उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं थी क्योंकि वह हमेशा पर्दे पर खुद को ही निभाती थीं।

उन्होंने ईश्वरलाल और दीक्षित के साथ सोहनी माहीवाल (1946) और ज़ंजीर (1947) में अभिनय किया ; राज कपूर के साथ नील कमल (1947) ; नरगिस के साथ मेहंदी (1947) ; भरत भूषण और गीता बाली के साथ सुहाग रात (1948) ; झलक (1948); और अजीत खान के साथ मेहरबानी (1950) में अभिनय किया । उन्होंने उस्ताद पेड्रो (1951) में भी काम किया , जिसका निर्माण और निर्देशन उस समय के जाने-माने अभिनेता शेख मुख्तार ने किया था। यह एक मनोरंजक फिल्म थी, जो एक्शन, रोमांस और स्टंट से भरपूर थी।

1951 में उन्होंने लाइफ पत्रिका के फोटोशूट के लिए फोटोग्राफर जेम्स बर्क के सामने पोज दिया । पारा की आखिरी भूमिका 1956 में फिल्म कर भला में थी। उन्हें मुगल-ए-आजम (1960) में निगार सुल्ताना की भूमिका ‘बहार’ निभाने का प्रस्ताव भी दिया गया था । हालाँकि, उन्होंने यह भूमिका निभाने से इनकार कर दिया।

उन्होंने अभिनेता नासिर खान से शादी की, जो एक अभिनेता और फिल्म निर्माता थे और बॉलीवुड स्टार दिलीप कुमार के छोटे भाई थे । उनके तीन बच्चे थे, लुबना, नादिर और अभिनेता अयूब खान । उनकी तीन पोतियां थीं, किचु डांडिया (एक आभूषण डिजाइनर), ताहूरा खान और ज़ोहरा खान। उनके पति का 1974 में निधन हो गया। अपने पति की मृत्यु के बाद, वह 1975 में अपने परिवार के साथ रहने के लिए कुछ समय के लिए पाकिस्तान चली गईं , दो साल बाद वह वापस भारत लौट आईं।

9 दिसंबर 2008 को 81 वर्ष की आयु में नींद में ही उनका निधन हो गया।


बेगम पारा की निजी जिंदगी भी काफी दिलचस्प रही। उनका विवाह फ़िल्म निर्माता नासिर खान से हुआ था, जो अभिनेता दिलीप कुमार के बड़े भाई थे। इस विवाह ने उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन को प्रभावित किया। हालांकि, बाद में उनका तलाक हो गया। इसके बावजूद, बेगम पारा ने अपने करियर को जारी रखा और फ़िल्मों में काम करती रहीं।
1960 के दशक के बाद बेगम पारा ने धीरे-धीरे फ़िल्मों से दूरी बना ली। उन्होंने फ़िल्म उद्योग की चमक-दमक से परे एक शांत जीवन जीने का फैसला किया। उनकी आखिरी फ़िल्में ज्यादा सफल नहीं रहीं, लेकिन उनके शुरुआती करियर का योगदान अविस्मरणीय रहा। उन्होंने फ़िल्म उद्योग को तब छोड़ा जब नई पीढ़ी की अभिनेत्रियां सामने आ रही थीं।
भारतीय सिनेमा में बेगम पारा का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने उस दौर में काम किया जब हिंदी सिनेमा अपनी पहचान बना रहा था। उनकी फ़िल्में आज भी क्लासिक मानी जाती हैं और पुराने सिनेमा प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं। बेगम पारा ने अपनी सादगी, प्रतिभा और समर्पण से फ़िल्म जगत में एक विशेष स्थान बनाया।