
कानपुर, 08 फरवरी (हि.स.)। 61वें स्थापना दिवस के अवसर पर कुलपति ने रविवार को कहा कि छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) परंपरा के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शोध, नवाचार और कौशल-आधारित शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नैक से ए प्लस ग्रेड, सस्टेनेबिलिटी और फार्मेसी जैसे क्षेत्रों में बेहतर रैंकिंग विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
एक पुरातन छात्र का आत्मीय जुड़ाव
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष एवं पुरातन छात्र सतीश महाना ने कहा कि सीएसजेएमयू उनके जीवन की मजबूत आधारशिला रहा है। यहां से मिली शिक्षा और संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व और सार्वजनिक जीवन को दिशा दी। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परंपरा, शोध और नवाचार पर दिए जा रहे बल की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है।
शिक्षा से सेवा तक की यात्रा
वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. ए. एस. प्रसाद ने कहा कि सीएसजेएमयू ने उन्हें केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि अनुशासन, संवेदनशीलता और सेवा भाव भी सिखाया। विश्वविद्यालय का शैक्षणिक वातावरण विद्यार्थियों को जिम्मेदार और समाज के प्रति समर्पित पेशेवर बनने की प्रेरणा देता है।
शोध और स्वास्थ्य का समन्वय
रीजेंसी हॉस्पिटल के संस्थापक डॉ. अतुल कपूर ने कहा कि सीएसजेएमयू पिछले छह दशकों से उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान, तकनीक और एआई आधारित शोध में हो रहे बदलावों का उल्लेख करते हुए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।
एल्युमनाई की सहभागिता, विकास की कुंजी
एल्युमनाई एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष डॉ. उमेश पालीवाल ने कहा कि सीएसजेएमयू से मिला ज्ञान और अनुशासन उनके जीवन और कार्यक्षेत्र की मजबूत नींव बना। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विकास में पुरातन छात्रों की सक्रिय सहभागिता, मेंटरशिप और अनुभव-साझाकरण की अहम भूमिका है।
