एसआईआर पर ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- पश्चिम बंगाल निशाने पर क्यों

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नई दिल्ली, 04 फ़रवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार काे राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने करीब 20 मिनट अपनी बात रखी। ममता बनर्जी के आरोपों पर उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को जवाब देने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।

जब ममता बनर्जी अपनी बात रख रही थीं तो कोर्ट ने उन्हें कई बार टोका, पर ममता बार-बार आग्रह करती रहीं। ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें कहीं इंसाफ नहीं मिल रहा है। इंसाफ दम तोड़ रहा है। ममता ने कहा कि उन्होंने निर्वाचन आयोग को छह पत्र लिखे, लेकिन आयोग ने पत्रों के जवाब तक नहीं दिए, जिसके बाद उन्हें कोर्ट आना पड़ा। मैं न्याय के लिए कहां जाऊं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि सिर्फ पश्चिम बंगाल को ही टारगेट क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब असम और अन्य उत्तरी राज्य, जहां चुनाव होने वाले हैं, वहां एसआईआर नहीं कराया जा रहा, तो फिर सिर्फ पश्चिम बंगाल में ही यह प्रक्रिया क्यों अपनाई जा रही है। दूसरे राज्यों में ऐसी शर्ते नहीं रखी जाती।

ममता बनर्जी ने कहा कि एसआईआर केवल डिलीशन (हटाने) के लिए है, जोड़ने (इंक्लूजन) के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि एक लड़की ससुराल जाती है, तो उसके सरनेम को लेकर भी उसका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि माइक्रो आब्जर्वर्स भाजपा शासित राज्यों से लाए जा रहे हैं। तब निर्वाचन आयोग ने कहा कि राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही है, इसलिए माइक्रो ऑब्जर्वर्स दूसरे राज्यों से लाये जा रहे हैं। तब चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने उन्हें आश्वस्त किया कि वो कोशिश करेंगे कि किसी वाजिब मतदाता का नाम न छूटे।ममता बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय से खुद दलीलें रखने के लिए अनुमति मांगी थी। ममता बनर्जी ने कहा था कि वो एसआईआर प्रक्रिया से पश्चिम बंगाल के लोगों को हो रही परेशानियों को समझती हैं। इसलिए वे इस मामले में खुद दलीलें पेश करना चाहती हैं।

ममता बनर्जी ने राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती दी है। इस मामले में निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी पर एसआईआर की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। आयोग ने उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामे में कहा है कि ममता बनर्जी ने एसआईआर की प्रक्रिया को बाधित करने के लिए भड़काऊ भाषण दिया।

हलफनामे में निर्वाचन आयोग ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ हिंसा और धमकियों का माहौल है, जो अन्य राज्यों से अलग है। आयोग ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार, मुख्यमंत्री और प्रशासन चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ काम कर रहे हैं।इससे इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

उच्चतम न्यायालय ने 19 जनवरी को पश्चिम बंगाल के सवा करोड़ से ज्यादा मतदाताओं की ‘तार्किक विसंगति’ सूची को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि जिन मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगति की सूची में है उसे सार्वजनिक किया जाए।

कोर्ट ने कहा था कि यह सूची ग्राम पंचायत भवनों, तालुका स्तर के ब्लॉक कार्यालयों और और वार्ड कार्यालयों में लगाई जाए, ताकि आम लोग इसे आसानी से देख सकें। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया था कि यह विसंगतियां मुख्य रूप से 2002 की मतदाता सूची से वंश (प्रोजेनी) मिलान के दौरान सामने आई हैं। इसमें मतदाता और उसके माता-पिता के नाम में मेल न होना, मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र का अंतर 15 साल से कम या 50 साल से ज्यादा होना जैसे प्रावधान शामिल है।

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