भगवान श्रीसांवरिया सेठ का चांदी का ‘आधार कार्ड’ बना आस्था और कला का अनूठा संगम

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भीलवाड़ा, 19 जनवरी (हि.स.)। भीलवाड़ा जिले में आस्था और शिल्पकला का एक अनोखा उदाहरण सामने आया है, जहां मेवाड़ के आराध्य भगवान श्रीसांवरिया सेठ का चांदी से निर्मित आधार कार्ड तैयार किया गया है। यह विशेष आधार कार्ड पूरी तरह शुद्ध चांदी से बनाया गया है और इसमें बारीक व आकर्षक नक्काशी की गई है। यह कृति आसींद निवासी स्वर्ण-चांदी कलाकार धनराज सोनी द्वारा तैयार की गई है, जो इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

कलाकार द्वारा निर्मित यह चांदी का आधार कार्ड भारत सरकार द्वारा जारी आधार कार्ड की तर्ज पर बनाया गया है। पतली चांदी की प्लेट पर अत्यंत सूक्ष्म नक्काशी के माध्यम से भारत का राजचिह्न अशोक स्तंभ, आधार कार्ड की संरचना और भगवान श्रीसांवरिया सेठ की छवि को उकेरा गया है। पहली नजर में यह कार्ड असली आधार कार्ड जैसा प्रतीत होता है।

इस अनूठे कार्ड पर भगवान श्रीसांवरिया सेठ का नाम, लिंग (पुरुष) तथा जन्म तिथि के रूप में ‘भाद्रपद कृष्ण अष्टमी 3112 ईसा पूर्व’ अंकित की गई है, जिसे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के रूप में जाना जाता है। इसके साथ ही नाम-पता और आधार नंबर भी कलात्मक शैली में दर्शाए गए हैं। कार्ड के निचले हिस्से में लिखा गया संदेश “मेरे सरकार मेरी पहचान” भक्त और आराध्य के बीच के भावनात्मक संबंध को दर्शाता है।

स्वर्ण कलाकार धनराज सोनी ने बताया कि यह कृति क्षेत्र के एक श्रद्धालु की विशेष मांग पर तैयार की गई है, जो भगवान श्रीसांवरिया सेठ के प्रति अपनी श्रद्धा को स्थायी और अलग रूप में व्यक्त करना चाहता था। उन्होंने बताया कि इससे पहले भगवान के लिए चांदी के सिंहासन, मुकुट और आभूषण बनाए जाते रहे हैं, लेकिन आधार कार्ड के रूप में यह प्रयोग नया और अनूठा है। चांदी के आधार कार्ड के सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और आमजन में खासा उत्साह देखा जा रहा है। लोग इसे भक्ति की आधुनिक अभिव्यक्ति और राजस्थानी शिल्पकला की बेजोड़ मिसाल बता रहे हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में भी यह कृति तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है।

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