पुस्तक समीक्षा काव्य संग्रह : जिंदगी मुस्कुराती रहे

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सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के पूर्व उप निदेशक डॉ लीलाधर दोचानियां गध और पध दोनों के विधाओं के सशक्त हस्तक्षार है। ग्रामीण परिवेश में पले बढे लीलाधर की कविताओं में साफगोई झलकती है। राजस्थान के विभिन्न जिलों में पद स्थापन के दौरान उन्होंने जो देखा, अनुभव किया वही अपनी कविताओं में परोसा। काव्य कृति के रूप में उनकी यह प्रथम पुस्तक है। अपने कविता संग्रह में गागर में सागर भरने का प्रयास किया है। जीवन की सहज अनुभूतियों और संवेदनाओं को प्रकट करता कविता संग्रह समाज और जीवन की विसंगतियों को रेखांकित करता है। विविध बुराइयों को चित्रित करती कविताएं समाज को आईना दिखती है। प्रस्तुत काव्य संग्रह में नए पुराने विषयों को बड़ी सहजता और सरलता से समेटा है।

कवि की गहन सोच शब्दों के माध्यम से प्रकट होती है। ऐसा लगता है कविताएं उनके मन की अकुलाहट और चिंतन का साक्षात परिणाम है। निश्चय ही रचनाओं में कवि के मन और भावनाओं को सुंदर शब्दों में आकार लिया है। कविताओं में विविध विषयों को सरल शब्दों के माध्यम से संप्रेषित कर एक अनूठा प्रयोग किया है। जीवन के विभिन्न पहलुओं को अपनी रचनाओं के माध्यम से सजीव रूप में परोसा गया है। कविताएं अपने व्यक्तिगत अनुभवों की श्रंखला के रूप में आकार लेती हैं साथ ही सामाजिक सच्चाइयों का संचार भी करती हैं।
113 पृष्ठ के इस कविता संग्रह में 96 काव्य रचनाएं है। पुस्तक केवल कविताओं का ही नहीं बल्कि भावनाओं, संवेदनाओं और अभिव्यक्ति का भी सशक्त संग्रह है। सभी कविताएं ह्रदय को छूने वाली है। आशा है कि यह कविता संग्रह पाठकों को पसंद आएगा।
समीक्षक कृति : जिंदगी मुस्कुराती रहे।
कवि : डॉ लीलाधर दोचानियां ।
समीक्षक : बालमुकुंद ओझा
प्रकाशक : बोधि प्रकाशन, जयपुर ।
पृष्ठ : 113 , मूल्य 199 रूपये ।

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