उरई, 22 दिसम्बर (हि.स.)। जालौन में वर्ष 2021 में हुए सनसनीखेज हत्याकांड में न्यायालय ने चार साल बाद अहम फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एससी-एसटी) उरई सुरेश कुमार गुप्ता ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मुख्य आरोपित जितेंद्र यादव उर्फ मोटे यादव को दोषी ठहराते हुए सोमवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं, साक्ष्य के अभाव में इस मामले में नामजद छह अन्य आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया गया।
घटना 18 जून 2021 की रात जालौन कोतवाली क्षेत्र के सेगर कॉलोनी हाईवे पर हुई थी। मोहल्ला रापटगंज कस्बा जालौन निवासी शाहिदा पत्नी स्वर्गीय शाकिर ने 19 जून 2021 को कोतवाली में प्रार्थना पत्र देकर मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने बताया था कि उनका पुत्र नौशाद खां मजदूरी के सिलसिले में बाहर रहता था। पुत्री की तबीयत खराब होने की जानकारी मिलने पर नौशाद 18 जून को जालौन आया था। प्रार्थिनी के अनुसार उसी रात करीब 11 बजे आशीष यादव नौशाद को घर से बुलाकर सेगर कॉलोनी हाईवे स्थित पुलिया के पास ले गया, जहां पहले से मौजूद कई लोगों ने उसे घेर लिया। आरोप है कि सभी ने एक राय होकर नौशाद के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान जितेंद्र यादव उर्फ मोटे यादव ने अवैध तमंचे से नौशाद के सिर में गोली मार दी। गोली लगने से नौशाद गंभीर रूप से घायल होकर सड़क किनारे गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां से गंभीर हालत में कानपुर रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान 19 जून 2021 को नौशाद की मौत हो गई।
घटना के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया और मामला एससी-एसटी कोर्ट में ट्रायल के लिए चला। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता बृजराज राजपूत ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से भी दलीलें दी गईं।
न्यायालय ने सभी साक्ष्यों, गवाहों और परिस्थितिजन्य तथ्यों का गहन परीक्षण करते हुए जितेंद्र यादव उर्फ मोटे यादव को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अन्य छह आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया गया। फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने न्यायालय के निर्णय को न्याय की बड़ी जीत बताया।
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