नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स)। वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट एक फरवरी को 11 बजे लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। आम तौर पर केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश किया जाता है, लेकिन इस वर्ष रविवार को पड़ने की वजह से अनिश्चितता थी, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को इसकी पुष्टि कर दी है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पोस्ट पर लिखा कि भारत सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बजट सत्र 2026 के लिए संसद के दोनों सदनों को बुलाने की मंजूरी दे दी है। यह सत्र 28 जनवरी को शुरू होगा और 2 अप्रैल तक चलेगा। पहला चरण 13 फरवरी को समाप्त होगा। दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होगा। इससे पहले आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को 29 जनवरी को लोकसभा में पेश किया जाएगा।
केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश करने की परंपरा 2017 से शुरू हुई थी, लेकिन रविवार को बजट पेश होना बहुत कम देखने को मिलता है। इससे पहले 28 फरवरी 1999 को तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने रविवार के दिन आम बजट पेश किया था। केंद्र सरकार ने 2017 में बजट की तारीख 28 फरवरी से बदलकर 1 फरवरी इसलिए की थी, ताकि नए वित्त वर्ष की शुरुआत यानी 1 अप्रैल से पहले ही फंड का सही तरीके से इस्तेमाल किया जा सके।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार जब बजट पेश करेंगी, तो यह उनका लगातार 9वां बजट होगा। इसके साथ ही वह पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के 10 बार बजट पेश करने के रिकॉर्ड के काफी करीब पहुंच जाएंगी। हालांकि, निर्मला सीतारमण पहले ही रिकॉर्ड बना चुकी हैं कि उन्होंने एक ही वित्त मंत्री के रूप में लगातार सबसे ज्यादा बजट पेश किए हैं।
-केंद्रीय मंत्री ने चार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनने पर आयोजन को ऑनलाइन संबोधित किया
नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्वस्तरीय राजमार्ग परियोजना और बड़े पैमाने पर परियोजना क्रियान्वयन में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
नितिन गडकरी ने आज आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में एनएच-544जी बेंगलुरु-कडप्पा-विजयवाड़ा आर्थिक गलियारा (कॉरिडोर) पर बनाए गए चार गिनीज विश्व रिकॉर्ड के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित किया। कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू, एनएचएआई के अध्यक्ष संतोष यादव, सांसद पार्थसारथी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि भारत की इंजीनियरिंग क्षमता, नई तकनीकों के उपयोग और गुणवत्ता के साथ गति बढ़ाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और अनुबंधकर्ता राजपथ इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड को बधाई देते हुए कहा कि सरकार का मिशन लागत कम करते हुए गुणवत्ता में सुधार करना और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना है।उन्होंने कहा कि नवाचार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के जरिए ज्ञान को संपदा में बदलना ही देश के भविष्य की दिशा तय करेगा और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति से असंभव को भी संभव किया जा सकता है।
गडकरी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में सरकार लगातार नई तकनीकों का उपयोग कर रही है और गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि राजमार्ग निर्माण की गति लगातार बढ़े, लागत घटे और साथ ही पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। अलग-अलग प्रकार की नई सामग्री और नवोन्मेषी (इनोवेटिव) तकनीकों का उपयोग कर सड़क निर्माण को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा रहा है। हाल ही में केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) और वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के वैज्ञानिकों ने धान की पराली से बिटुमेन बनाने में सफलता हासिल की है और इस तकनीक को 15 उद्योगों को पेटेंट के रूप में प्रदान किया जा चुका है। अब देश में पराली से बिटुमेन का उत्पादन शुरू हो गया है, जिससे प्रदूषण की समस्या कम होगी और किसानों को भी लाभ मिलेगा।
गडकरी ने कहा कि नवाचार, उद्यमिता, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के माध्यम से ज्ञान को संपदा में बदलना ही देश के भविष्य की दिशा तय करेगा। सरकार का स्पष्ट मिशन है कि निर्माण लागत को कम करते हुए गुणवत्ता में सुधार किया जाए और इसके लिए विश्व की सर्वश्रेष्ठ तकनीकों और सफल प्रयोगों को अपनाया जा रहा है। ऐसे रिकॉर्ड मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के बिना संभव नहीं होते। केंद्र सरकार की नीतिगत स्पष्टता, ठेकेदारों की प्रतिबद्धता और आंध्र प्रदेश सरकार तथा मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के सहयोग से यह ऐतिहासिक उपलब्धि संभव हो पाई है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की सोच हमेशा नए प्रयोगों, नई तकनीकों और विकासोन्मुख पहलों को प्रोत्साहित करने वाली रही है।
उल्लेखनीय है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने निर्माणाधीन एनएच-544जी बेंगलुरु–कडप्पा–विजयवाड़ा आर्थिक गलियारा (कॉरिडोर) पर कुल चार गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाए हैं। 6 जनवरी को आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी के पास पहले दो रिकॉर्ड स्थापित किए गए, जिनमें 24 घंटे के भीतर 28.89 लेन किलोमीटर या तीन लेन चौड़े 9.63 किलोमीटर लंबे खंड में बिटुमिनस कंक्रीट की सबसे लंबी लगातार बिछावट और 24 घंटे में 10,655 मीट्रिक टन बिटुमिनस कंक्रीट की सबसे अधिक मात्रा लगातार बिछाने का रिकॉर्ड शामिल है। दोनों रिकॉर्ड छह लेन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के तहत पहली बार विश्व स्तर पर बनाए गए। इसके बाद 11 जनवरी को दो और गिनीज विश्व रिकॉर्ड बनाए गए, जिनमें 57,500 मीट्रिक टन बिटुमिनस कंक्रीट की निरंतर बिछावट और 156 लेन किलोमीटर या तीन लेन चौड़े 52 किलोमीटर लंबे खंड की लगातार पेविंग का रिकॉर्ड शामिल है। इस दौरान 84.4 लेन किलोमीटर या दो लेन चौड़े 42.2 किलोमीटर लंबे खंड के पिछले विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया गया। ये रिकॉर्ड बेंगलुरु–कडप्पा–विजयवाड़ा आर्थिक गलियारा (कॉरिडोर) के पैकेज-2 और पैकेज-3 में बनाए गए।
एनएचएआई ने कंसेशनर एमएस राजपथ इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर अत्याधुनिक निर्माण तकनीक और मशीनरी का उपयोग करते हुए यह उपलब्धि हासिल की। निर्माण कार्य में 70 टिप्पर, पांच गरम मिश्रण संयंत्र (हॉट मिक्स प्लांट), एक पेवर और 17 रोलर लगाए गए। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आईआईटी बॉम्बे सहित प्रमुख संस्थानों और मूल उपकरण निर्माता (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स) द्वारा सख्त गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी की गई, जिससे सुरक्षा और गुणवत्ता के उच्चतम मानकों का पालन सुनिश्चित हुआ। 343 किलोमीटर लंबा यह प्रवेश-नियंत्रित (एक्सेस-कंट्रोल्ड) छह लेन आर्थिक गलियारा (कॉरिडोर) पूरा होने के बाद यात्रा दूरी को मौजूदा 635 किलोमीटर से घटाकर 535 किलोमीटर कर देगा और यात्रा समय को लगभग 12 घंटे से घटाकर करीब 8 घंटे कर देगा। यह गलियारा (कॉरिडोर) बेंगलुरु को विजयवाड़ा से जोड़ते हुए रायलसीमा क्षेत्र, आंध्र प्रदेश के तटीय और उत्तरी इलाकों तथा कोपार्थी औद्योगिक नोड के साथ संपर्क को मजबूत करेगा। एनएचएआई द्वारा बनाए गए ये गिनीज विश्व रिकॉर्ड देश में सुरक्षित, तेज़ और आधुनिक राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माने जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा— नशा कारोबारियों की जब्त होगी संपत्ति और जाएंगे जेल
-स्वामी विवेकानंद जयंती पर आयाेजित कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री -पूरी दुनिया देख रही विश्व गुरु बनने की ओर से अग्रसर है भारत—मुख्यमंत्री
लखनऊ, 12 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रहना चाहिए और लोगों को भी जागरुक करना चाहिए। उन्होंने नशे का कारोबार करने वालों को आगाह करते हुए अगर बाज नहीं आए तो न केवल उन्हें जेल भेजा जाएगा बल्कि उनकी संपत्ति भी जब्त होगी, क्योंकि ऐसे लोग देश और समाज को खोखला कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ साेमवार काे स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर प्रदेश के युवा एवं खेलकूद विभाग की ओर से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान लखनऊ में आयोजित युवा महाेत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर विभिन्न जिलों के युवा व महिला मंगल दलों को नशा उन्मूलन, पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन, जनता लाइब्रेरी, खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए प्रशस्ति पत्र व राशि प्रदान की। इससे पहले युवा एवं खेलकूद मंत्री गिरीश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्वागत किया और विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, विधायक डाॅ नीरज बोरा, ओपी श्रीवास्तव व लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। समाराेह में मुख्यमंत्री ने 40 कराेड़ रुपये अधिक की परियाेजनाओं का लाेकार्पण व शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वामी विवेकानंद को नमन करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने दुनिया की प्राचीनतम संस्कृति भारतीय सनातन संस्कृति को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। दुनिया काे बताया कि भारतीय संस्कृति किसी भी समाज पर जबरिया अपने विचार नहीं थाेपती है और दुनियाभर से काेई भी पीड़ित मानवता भारत आई ताे भारत ने उसे स्वीकार किया। स्वामी विवेकानंद ने भारत काे विश्व गुरु का सपना देखा था, उसे आज पूरा हाेते हुए पूरी दुनिया देख रही है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आज जीजाबाई माई साहब को उनकी जयंती पर नमन करता हूं, जिनके पालन पोषण और संस्कारों में पले बढे़ छत्रपति शिवाजी ने हिंदवी स्वराज की स्थापना की।
संकल्प लें तो मिलेगी मंजिल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवा महोत्सव में युवाओं को स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्रान करते हुए कहा कि अगर संकल्पवान होकर लक्ष्य के लिए आगे बढ़ते हैं तो सफलता जरूर मिलेगी लेकिन अक्सर युवा मंजिल के नजदीक आने पर लापरवाही कर जाते हैं जबकि उन्हें बिना निराश हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए तो एक न एक दिन जरूर मंजिल मिलेगी।
पर्यावरण , खेल व जल संरक्षण पर कार्य करें मंगल दल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस समारोह में विभिन्न कार्यों के लिए युवक व महिला मंगल दल को सम्मानित किया गया है। मंगल दल एक पेड़ मां के नाम पर पेड़ लगाएं। पुराने नदी- नालों, कुओं का संरक्षण करें। मंगल दलों को स्पोटर्स किट दी गई उसका गांव के युवाओं को खेल प्रतिभा विकसित करने में उपयोग करें। साथ ही ग्राम, न्याय, जिला, मंडल और प्रदेश स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जायं और युवाओं को पुरस्कृत किया। जुलाई से प्रदेश में वन महोत्सव शुरु किया जाएगा और करोड़ पौधे रोपे जाएंगे। वन क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में पूरे भारत में प्रथम है।
युवाओं को मिल रहा रोजगार
समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं काे स्वराेजगार के लिए प्रेरित करने के लिए पीएम व सीएम योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं को रोजगार के लिए ऋण दिए जा रहे हैं। स्किल को बढाने के लिए ट्रेनिंग कराई जा रही है और सरकारी नौकरियों में बिना किसी भेदभाव के चयन किया जा रहा है। पहले पैसे वसूल कर नौकरी बांटी जाती थी लेकिन अब ऐसा करने वालों को जेल भेजा जा रहा है।
प्रदेश में अच्छी कानून व्यवस्था से आ रहा भारी निवेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले व्यापारी सहमे रहते थे और कोई निवेश नहीं आ रहा था लेकिन वर्ष 2017 के बाद से स्थितियां बदल गई हैं। अब करोड़ाें रुपए के निवेश आ रहे हैं और युवाओं को रोजगार मिल रहा है। प्रयागराज में सफल महाकुंभ के आयोजन में करोड़ाें लोग आए। प्रदेश में करोड़ाें पर्यटक आने से युवाओं को रोजगार मिल रहा है। यह स्थिति आने वाले दिनों में और अधिक बेहतर होने वाली है।
विकसित भारत का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी के विजन की सराहना करते हुए योगी ने कहा कि देश को आजादी तो मिली लेकिन इसके जश्न में हर भारतीय शामिल नहीं हो पाया लेकिन अब पीएम मोदी ने आजादी के सौ साल पूरे होने पर 2047 में विकसित भारत का लक्ष्य तय किया है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश भर में विभिन्न कार्यक्रम और अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी प्रकार हर घर तिरंगा अभियान से लाेगाें काे देश और समाज के प्रति अपने दायित्व काे बाेध कराया गया। समाराेह में विभागीय याेजनाओं की एक प्रस्तुति भी दी गई।
देश की बहुरंगी लोकसंस्कृति का महत्वपूर्ण त्योहार लोहड़ी मकर संक्रान्ति के एक दिन पहले मनाया जाता है। इस साल लोहड़ी पर्व 13 जनवरी को मनाया जाएगा। लोहड़ी का पर्व फसल से जुड़ा है। यह पर्व नई फसल की बुआई और पुरानी फसल की कटाई से संबंधित है। विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा सहित उत्तर भारत में यह त्योहार परंपरागत हंसी ख़ुशी, उमंग – उत्साह के साथ मनाया जाता है। प्रवासी भारतवासी विदेशों में भी अपने रंगीले त्योहार की खुशियां गीत, संगीत और नृत्य के साथ बांटते है। लोहड़ी का त्योहार हर साल 13 जनवरी को मनाया जाता है। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, यह त्योहार सूर्य की उत्तरी गोलार्ध की यात्रा का प्रतीक है। मुख्यतः पंजाब और हरियाणा सहित उत्तर भारत के इस लोकप्रिय फसल उत्सव में अच्छी फसल के लिए आभार व्यक्त करने और ईश्वर से सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना करने के लिए पवित्र अलाव जलाया जाता है।
लोहड़ी मनाने के पीछे भी एक कहानी है जिसके नायक दुल्ला भट्टी है। बताया जाता है कि सांदल बार इलाके के जागीरदार ने एक ब्राह्मण की दो बेटियों को उठा लिया था। यह इलाका अब पाकिस्तान के मुल्तान शहर के पास है। दुल्ला मुगलों के खिलाफ तब गुरिल्ला लड़ाई कर रहे थे। कहानी के मुताबिक कि दुल्ला भट्टी ने दोनों लड़कियों को छुड़ाया और खद गरीब ब्राह्मण की जगह उनका बाप बना। लड़कियों के सिर के सालू (पल्लू) को बेटियों की इज्जत माना जाता था जिसे उसने रखवाया। तब किसी गरीब के हक में और वह भी लड़कियों के हक में खड़े होना बड़ी बात थी।
हर त्योहार की तरह यह भी दोस्तों, परिवार और रिश्तेदारों के साथ मिलकर मनाया जाता है। उपले और लकड़ी की मदद से बोनफायर जलाया जाता है। पंजाब में लोहड़ी का त्योहार प्रमुख रूप से बड़ी धूमधाम के साथ मनाई जाती है। ऐसा मान्यता है कि इस दिन दिन छोटा और रात काफी बड़ी होती है। फसल कटाई के मौके पर मनाए जाने वाले इस त्योहार को बोनफायर जलाकर सेलिब्रेट किया जाता है। वहीं लोग इसके चारों तरफ घूमकर नाचते हैं और आग में प्रसाद डालते हैं। वैसे तो यह त्योहार मूल रूप से पंजाबियों का है लेकिन पूरे उत्तर भारत में इसे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। मुख्य रूप से पंजाब के अलावा हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों में इसकी धूम होती है। पारिवारिक समूह के साथ लोहड़ी पूजन करने के बाद उसमें तिल, गुड़, रेवडी एवं मूँगफली का भोग लगाया जाता है। ढोल की थाप के साथ गिद्दा और भाँगड़ा नृत्य इस अवसर पर विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं। पंजाबी समाज में इस पर्व की तैयारी कई दिनों पहले ही शुरू हो जाती है। इसका संबंध मन्नत से जोड़ा गया है अर्थात् जिस घर में नई बहू आई होती है या घर में संतान का जन्म हुआ होता है तो उस परिवार की ओर से खुशी बाँटते हुए लोहड़ी मनाई जाती है। सगे-संबंधी और रिश्तेदार उन्हें आज के दिन विशेष सौगात के साथ बधाइयाँ भी देते हैं।
लोहड़ी से 10-12 दिन पहले ही बच्चे ‘लोहड़ी’ के लोकगीत गाकर दाने, लकड़ी और उपले इकट्ठे करते हैं। इस सामग्री से चौराहे या मुहल्ले के किसी खुले स्थान पर आग जलाई जाती है। रेवड़ी और मूंगफली अग्नि की भेंट किए जाते हैं तथा ये ही चीजें प्रसाद के रूप में सभी लोगों को बाँटी जाती हैं। घर लौटते समय ‘लोहड़ी में से दो चार कोयले प्रसाद के रूप में, घर पर लाने की प्रथा भी है। लोग अग्नि के चारो ओर चक्कर काटते हुए नाचते-गाते हैं व आग मे रेवड़ी, मूंगफली, खील, मक्की के दानों की आहुति देते हैं । आग के चारो ओर बैठकर लोग आग सेंकते हैं व रेवड़ी, खील, गज्जक, मक्का खाने का आनंद लेते हैं। जिस घर में नई शादी हुई हो या बच्चा हुआ हो उन्हें विशेष तौर पर बधाई दी जाती है। पहले बेटा होने पर त्योहार मनाया जाता था मगर अब कन्या होने पर दूने जोश और उत्साह से कन्या लोहिड़ी का पर्व मनाया जाता है। इस आयोजन का उद्देश्य बेटियों को समाज में बेटों के बराबर मान-सम्मान मिले व लोगों की नकारात्मक सोच को बदलना है। आज लोहड़ी के त्योहार की पवित्रता सैकड़ों गुणा बढ़ गई है क्योंकि यहां भारतीय संस्कृति में देवी के रूप में पूजी जाने वाली कन्याओं की लोहड़ी मनाई जा रही है। सच है जिनके यहां बेटी ने जन्म लिया है वे समाज की रूढियों को तोड़कर बेटी की पहली लोहड़ी हर्षोल्लास से मना रहे हैं। पंजाबी समाज ने कन्या लोहड़ी मनाने की पहल कर देशवाशियों का ध्यान बेटी के मान सम्मान से जोड़कर पर्व मानाने की पवित्रता को द्विगुणित किया है।
हर साल 14 जनवरी को हम मकर संक्रांति मनाते हैं। यह एकमात्र भारतीय त्योहार है जो सौर कैलेंडर के दिन मनाया जाता है। बाकी सभी भारतीय त्योहार चंद्र कैलेंडर के अनुसार मनाए जाते हैं इसलिए सौर कैलेंडर के अनुसार उनके मनाने के दिन हर साल बदलते रहते हैं। खगोल विज्ञान, गणित और ज्यामिति सहित प्राचीन भारतीय विषयों में संस्कृत तकनीकी शब्द “संक्रांति” का इस्तेमाल किया जाता था।
महत्वपूर्ण हिंदू त्योहारों में से एक, मकर संक्रांति भारत के कई क्षेत्रों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन आधिकारिक तौर पर नई फसल का मौसम शुरू होता है। हालांकि, मकर संक्रांति का सांस्कृतिक महत्व इस बात पर निर्भर करता है कि आप कहाँ रहते हैं; अलग-अलग राज्य इसे अलग-अलग नामों से मनाते हैं लेकिन उसी स्नेह के साथ।
मकर संक्रांति का त्योहार एक खगोलीय घटना पर आधारित हैः सूर्य का दक्षिणी से उत्तरी गोलार्ध में स्पष्ट ग्रहण संबंधी बदलाव। विज्ञान के अनुसार, यह सूर्य के खगोलीय भूमध्य रेखा को पार करने का संकेत देता है, जो शीतकालीन संक्रांति के बाद सूर्य के उत्तर की ओर बढ़ने की खगोलीय घटना है। सनातनी सूर्य की पूजा करते हैं और उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, उसे एक खगोलीय पिंड और एक सचेत देवता दोनों के रूप में देखते हैं।
मकर संक्रांति पर सुबह से शाम तक, चैतन्य चारों ओर व्याप्त रहता है। इसलिए, साधना (आध्यात्मिक अभ्यास) में लगे साधक को अधिक चैतन्य का सबसे बड़ा लाभ मिल सकता है। चैतन्य के परिणामस्वरूप साधकों में परम अग्नि सिद्धांत, या तेजतत्व भी बढ़ता है। मकर संक्रांति साधना के लिए एक उत्कृष्ट दिन है।
सूर्य का उत्तर की ओर गमन सर्दियों के अंत और उत्तरी गोलार्ध में अधिक दिन की रोशनी का संकेत देता है।
अतीत में, यह कृषि चक्रों के साथ-साथ होता था: फसलें कट जाती थीं, फसलें भंडारित की जाती थीं और नई खेती की तैयारी शुरू हो जाती थी। अलाव जलाना, पतंग उड़ाना और नदी में नहाना व्यावहारिक मूल के सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के उदाहरण हैं, जैसे गर्मी देना, लंबे दिनों का स्मरण करना और मौसमी नदी प्रवाह और फसल कटाई के बाद खाली समय से जुड़े औपचारिक शुद्धिकरण। मकर संक्रांति उत्सव का एक अनिवार्य घटक छत पर इकट्ठा होना और सूरज के नीचे पतंग उड़ाना है। इस प्राचीन प्रथा का वैज्ञानिक महत्व है क्योंकि, लंबी सर्दियों के बाद, सूर्य अंततः हमारी ऊर्जा को फिर से भरता है और हमारे शरीर को बैक्टीरिया और बीमारियों से शुद्ध करता है, हम खुशी-खुशी पतंग उड़ाते हैं।
सार्वभौमिक त्योहार
देश के अलग-अलग हिस्सों में इस दिन के उत्सवों को अलग-अलग नामों से जाना जाता है: मध्य भारत में सुकरात, असमिया हिंदुओं में भोगली बिहू, तमिल और अन्य दक्षिण भारतीय हिंदुओं में पोंगल और उत्तर भारतीय हिंदुओं और सिखों में लोहड़ी। जिस तरह भारत के कई हिस्सों में मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है, उसी तरह एशिया के अन्य हिस्सों में भी इसे दूसरे नामों से और इसी तरह के कारणों से मनाया जाता है। उदाहरण के लिए, मकर संक्रांति उत्सव को थाईलैंड में सोंगक्रान और कंबोडिया में मोहा संगक्रांता के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा, दुनिया भर के लोग, खासकर भारतीय मूल के लोग, अपनी विरासत से जुड़ाव के कारण मकर संक्रांति मनाते हैं।
अनोखे लड्डू बनाने के लिए जो सच में इस मौके को खास बना दें, तिल और गुड़ का एक खास मिश्रण तैयार किया जाता है। इन लड्डुओं को खाने का कारण यह है कि तिल के हर दाने में तेल से मिलने वाले तत्व होते हैं। सर्दियों में त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है और उसे सुरक्षा और मुलायम बनाए रखने के लिए नमी की ज़रूरत होती है। इसलिए, तिल के लड्डू खाना, जो इस उत्सव का एक ज़रूरी हिस्सा है, यह त्वचा को नमी देता है। अक्सर तिल-गुड़ कहे जाने वाली ये मिठाइयाँ मकर संक्रांति उत्सव की परंपराओं को दिखाती हैं और माना जाता है कि ये समुदाय में सद्भाव बढ़ाती हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और सामाजिक समरसताः
रा स्व संघ जाति, धन और सामाजिक अन्याय के कारण समाज में आई कमियों को दूर करने की कोशिश कर रहा है। छह उत्सवों में से मकर संक्रांति ऐसा उत्सव है जो समाज में सद्भाव और आत्म-सम्मान को बढ़ावा देने के लिए छुआछूत और पुरानी गलत परंपराओं को खत्म करने का प्रयास करता है। इस उत्सव का लक्ष्य आंतरिक जागरूकता जगाना और भारत को उसकी पूर्व गरिमा और शान वापस दिलाने के लिए करना है। हिंदू सभ्यता बनाने वाली अलग-अलग जातियों को एक साथ आना होगा। डॉ. हेडगेवार जी के अनुसार, जब तक हिंदू समाज बंटा हुआ है, भारत माता का अस्तित्व खतरे में रहेगा। ये उत्सव डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार जी ने सामाजिक समता, ममता, समरसता और हिंदू एकता की विशेषताओं के अनुसार मनाना शुरु किया था, जिन्हें वे समाज के लिए ज़रूरी मानते थे।
हर उत्सव किसी न किसी गुण का सम्मान करता है। मकर संक्रांति स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन का भी प्रतीक है। संघ कभी भी सतही स्तर पर काम नहीं करता। नेतृत्व और स्वयंसेवकों द्वारा लिया गया हर फैसला समुदाय के हर सदस्य के प्रति करुणा और प्रेम के साथ किया जाता है। सामाजिक सद्भाव के लिए एक सदी की प्रतिबद्धता और काम के बाद, हिंदू एकता के फायदे अब साफ दिख रहे हैं। दबे-कुचले और हाशिए पर पड़े समाजों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को ऊपर उठाने के प्रयासों से संघ में लोगों का भरोसा बढ़ा है।
पर्यावरण की देखभाल
पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना प्रकृति का सम्मान करने के अलावा मकर संक्रांति मनाना उनके लिए भारतीय परंपरा के प्रति वफादार रहने और मकर संक्रांति के सार को बनाए रखने का एक तरीका है।
बायोडिग्रेडेबल पतंग उड़ाना कुछ अनोखी पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं में से एक है जो अब मकर संक्रांति उत्सव का एक अभिन्न अंग बन गई हैं। संघ के लिए, पारंपरिक मूल्यों और मकर संक्रांति के सार का त्याग किए बिना जीवन स्थितियों और सामुदायिक लाभों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न सामाजिक अभियानों में भाग लेना उत्सव का एक और पहलू है।
समाज में सद्भाव और प्राकृतिक दुनिया के प्रति श्रद्धा को प्रोत्साहित करने के लिए, हम अपनी ऊर्जा को फिर से भर सकते हैं, अपने मन और आत्मा को खुशी से भर सकते हैं और इस भावना को दूसरों तक फैला सकते हैं। यह मकर संक्रांति के वास्तविक महत्व और उद्देश्य का सम्मान करने में योगदान देता है।
बैंक से मिले 5 लाख रुपये के ऋण से पूजा ने की ‘मां कैला देवी पोशाक केंद्र’ की शुरुआत
फिरोजाबाद, 12 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ योजना आज प्रदेश के लाखों युवाओं के सपनों को हकीकत में बदल रही है। इसी कड़ी में फिरोजाबाद जिले में रामकृष्ण नगर की रहने वाली पूजा अग्रवाल ने स्वरोजगार की एक नई मिसाल बनकर उभरी हैं। पूजा के मन में हमेशा से अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का जज्बा था, लेकिन संसाधनों और पूंजी की कमी उनके आड़े आ रही थी। प्रदेश की याेगी सरकार की युवा उद्यमी योजना ने उनकी इस बाधा को दूर किया। पूजा ने योजना के अंतर्गत आवेदन किया और विभागीय सहायता तथा बैंक के समन्वय से उन्हें अगस्त 2025 में 5 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इस वित्तीय सहायता ने उनके सपनों को हकीकत की जमीन प्रदान की।
मां कैला देवी पोशाक केंद्र’ की शुरुआत
ऋण की राशि मिलते ही पूजा ने “मां कैला देवी पोशाक केंद्र” की नींव रखी। उन्होंने लड्डू गोपाल और विभिन्न देवी-देवताओं की सुंदर एवं आकर्षक पोशाक बनाने के हुनर को एक प्रोफेशनल व्यवसाय का रूप दिया। अपनी मेहनत और सृजनात्मकता के दम पर आज उनके द्वारा बनाई गई पोशाकों की मांग स्थानीय बाजारों में तेजी से बढ़ रही है। अब उनकी बनाई पोशाकें फिरोजाबाद के अलावा आगरा, शिकोहाबाद, करौली (राजस्थान) तक के बाजारों और प्रसिद्ध मंदिरों में भेजी जा रही हैं।
पूजा ने बताया कि पहले घर की चारदीवारी तक सीमित थी लेकिन आज एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। इस व्यवसाय के माध्यम से वह हर माह 12 से 15 हजार रुपये की सम्मानजनक आमदनी कर रही हैं, जिससे वह न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने परिवार के पालन-पोषण में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
युवा उद्यमी योजना की लाभार्थी पूजा अग्रवाल का कहना है कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हृदय से धन्यवाद करती है। उनकी योजना की वजह से उन्हें बिना किसी बड़ी परेशानी के 5 लाख का लोन मिला। आज वह अपने घर से ही सम्मान के साथ काम कर रही है और अच्छी कमाई कर रही हैं। उनका कहना है यह योजना उन जैसी महिलाओं के लिए एक वरदान है जो अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं।
उपायुक्त उद्योग संध्या का कहना है कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ करना है। जिले की पूजा अग्रवाल ने इस योजना का लाभ उठाकर न केवल खुद को स्थापित किया है, बल्कि वह अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बनी हैं। हमारा विभाग लगातार प्रयास कर रहा है कि जिले का हर पात्र युवा इस योजना से जुड़े और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण में अपना योगदान दे।
औरैया, 12 जनवरी (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के खेल जगत के लिए गर्व का विषय है कि जनपद औरैया के अजीतमल निवासी भानु प्रताप दुबे को यूपी सब जूनियर बालक खो-खो टीम का कोच नियुक्त किया गया है। यह टीम गुजरात के सूरत शहर में 12 जनवरी से 15 जनवरी तक आयोजित होने वाली खो-खो इंडिया सब जूनियर बालक राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करेगी।
उत्तर प्रदेश खो-खो टीम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से चयनित प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। टीम में जौनपुर से यश, लखनऊ से विराट, मुरादाबाद से अक्षित, बनारस से देवांश एवं चंद्रपाल, अयोध्या से वीर यादव, शुभांशु व नैतिक, हरदोई से जावेद व हीरालाल तथा मेरठ से वैभव व पवित्र को स्थान मिला है। यह चयन प्रदेश में खो-खो खेल की मजबूत प्रतिभा और व्यापक पहुंच को दर्शाता है।
भानु प्रताप दुबे की कोच के रूप में नियुक्ति पर खेल प्रेमियों और क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है। उनकी इस उपलब्धि पर कृष्ण मोहन उपाध्याय (अध्यक्ष, ओलंपिक संघ औरैया), होशियार सिंह (पीटीआई, जनता इंटर कॉलेज अजीतमल), प्रदेश सचिव खो-खो, तिलक महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य असमत उल्ला खां, इंद्रपाल गुर्जर, ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव मनीष मिश्रा सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों एवं क्षेत्र के लोगों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
खेल जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि भानु प्रताप दुबे के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश की टीम बेहतर प्रदर्शन करेगी और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करेगी। उनकी नियुक्ति से न केवल औरैया जनपद बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी।
लखनऊ, 12 जनवरी । उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मकर संक्रांति पर्व पर होने वाला सार्वजनिक अवकाश की तिथि में संशोधन किया है। अब राज्य में मकर संक्रांति का अवकाश 14 जनवरी के स्थान पर 15 जनवरी को हाेगा।
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने साेमवार काे बताया कि राज्य में अवकाश की सूची 17 नवंबर 2025 को जारी हुई थी। इस सूची में 14 जनवरी को मक संक्रांति का निबंधित अवकाश घाेषित था। शासन स्तर पर सम्यक विचार के बाद तय किया कि मकर संक्रांति के अवसर पर अवकाश होना चाहिए। इसलिए अब 14 जनवरी के स्थान पर 15 जनवरी (गुरुवार) को सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस दिन सभी सरकारी कार्यालय व स्कूल बंद रहेंगे। इस संबंध में शासन की ओर से साेमवार काे आदेश पत्र जारी कर दिया गया है।
देहरादून, 12 जनवरी (हि.स.)। ऊधमसिंह नगर जनपद के काशीपुर निवासी एक किसान के हल्द्वानी में आत्महत्या किए जाने के प्रकरण को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत से पूरे मामले की मजिस्ट्रेट जांच कराने और पीड़ित परिवार काे हरसंभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
साेमवार काे मुख्यमंत्री धामी ने इस संबंध में मुख्य सचिव आनंद बर्धन और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ से पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी ली।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया में कोई ढिलाई न बरती जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि घटना से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या दोष सामने आता है, तो संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री धामी ने दिवंगत किसान के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए और उन्हें न्याय दिलाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।
कंपनी ने एंकर इनवेस्टर्स से जुटाए 9.97 करोड़ रुपये
नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनी अवाना इलेक्ट्रोसिस्टम्स का 35.22 करोड़ रुपये का आईपीओ आज सब्सक्रिप्शन के लिए लॉन्च कर दिया गया। इस आईपीओ में 14 जनवरी तक बोली लगाई जा सकती है। इश्यू की क्लोजिंग के बाद 15 जनवरी को शेयरों का अलॉटमेंट किया जाएगा, जबकि 16 जनवरी को अलॉटेड शेयर डीमैट अकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाएंगे। कंपनी के शेयर 19 जनवरी को एनएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हो सकते हैं।
इस आईपीओ में बोली लगाने के लिए 56 रुपये से लेकर 59 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है, जबकि लॉट साइज 2,000 शेयर का है। अवाना इलेक्ट्रोसिस्टम्स के इस आईपीओ में रिटेल इनवेस्टर्स को दो लॉट यानी 4,000 शेयरों के लिए बोली लगाना होगा, जिसके लिए उन्हें 2,36,000 रुपये का निवेश करना होगा। इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 59,70,000 शेयर जारी हो रहे हैं। इनमें 29 करोड़ रुपये के 48,76,000 नए शेयर और पांच करोड़ रुपये के 7,94,000 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेचे जा रहे हैं।
आईपीओ खुलने से एक कारोबारी दिन पहले 9 जनवरी को अवाना इलेक्ट्रोसिस्टम्स ने 5 एंकर इनवेस्टर्स से 9.97 करोड़ रुपये जुटाए। इन एंकर इनवेस्टर्स में फॉर्च्यून हैंड्स ग्रोथ फंड सबसे बड़ा इनवेस्टर रहा। इस एंकर इनवेस्टर ने कंपनी से 5,86,000 शेयर खरीदे। इसके अलावा फॉर्च्यून कलेक्टिव फंड, अर्थ एआईएफ ग्रोथ फंड, एनएवी कैपिटल इमर्जिंग स्टार फंड और श्रेम इनवेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड जैसे प्रमुख नाम भी एंकर बुक में शामिल हुए हैं।
इस आईपीओ में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए 47.20 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व किया गया है। इसके अलावा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 33.30 प्रतिशत हिस्सा, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (एनआईआई) के लिए 14.47 प्रतिशत हिस्सा और मार्केट मेकर्स के लिए 5.03 प्रतिशत हिस्सा रिजर्व है। इस इश्यू के लिए इंडकैप एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड को बुक रनिंग लीड मैनेजर बनाया गया है, जबकि इंटीग्रेटेड रजिस्ट्री मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को रजिस्ट्रार बनाया गया है। वहीं, असनानी स्टॉक ब्रोकर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का मार्केट मेकर है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत में लगातार मजबूती आई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 92 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 4.02 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का शुद्ध लाभ उछल कर 8.31 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 की अवधि में कंपनी को 5.61 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका है।
इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी मजबूती बनी रही। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 28.59 करोड़ का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 53.26 करोड़ और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 62.93 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 की अवधि में कंपनी को 36.28 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है।
इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में उतार-चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में कंपनी पर 7.33 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 9.27 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में कम होकर 5.69 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी सितंबर 2025 तक कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ 5.68 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया था।
इस अवधि में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 8.67 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 12.69 करोड़ रुपये और 2024-25 में उछल कर 21.01 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक ये 9.95 करोड़ रुपये के स्तर पर था।
इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2022-23 में 1.92 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 7.42 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का ईबीआईटीडीए 12.52 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी 30 सितंबर 2025 तक ये 7.63 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा।