श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया तथा माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ श्री सत्य नडेला की उपस्थिति में माइक्रोसॉफ्ट के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए । यह सहयोग रोजगार संबंधों को व्यापक बनाने, एआई आधारित कौशल विकास को बढ़ावा देने और भारत के कार्यबल को वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस साझेदारी की एक प्रमुख विशेषता माइक्रोसॉफ्ट की यह प्रतिबद्धता है कि वह अपने व्यापक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से 15,000 से अधिक नियोक्ताओं और भागीदारों को मंत्रालय के राष्ट्रीय करियर सेवा (एनसीएस) प्लेटफॉर्म पर आने के लिए प्रोत्साहित करेगी । इससे रोजगार के अवसर काफी व्यापक होंगे, उच्च विकास वाले क्षेत्रों को समर्थन मिलेगा और भारत न केवल घरेलू मांग बल्कि विश्व के लिए भी कुशल कार्यबल विकसित करने में सक्षम होगा, जिससे भारतीय पेशेवरों और युवाओं की अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता के मार्ग मजबूत होंगे !
स समझौता ज्ञापन के तहत डिजीसक्षम के माध्यम से एआई-आधारित कौशल विकास पहलों का विस्तार किया जाएगा, जिससे लाखों युवाओं को एआई, क्लाउड टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और उत्पादकता उपकरणों में भविष्य के लिए तैयार क्षमताएं मिलेंगी। ये प्रयास वैश्विक मानकों और उभरती उद्योग आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यबल के निर्माण में योगदान देंगे।
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस साझेदारी का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत के अनुकूल जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, डिजिटल रूप से कुशल तथा भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बनाने की साझा महत्वाकांक्षा को दर्शाती है । उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि माइक्रोसॉफ्ट की भागीदारी से रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे, कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक श्रम गतिशीलता में भारत का नेतृत्व मजबूत होगा।
रूस के राष्ट्रपति के दो दिवसीय भारत दौरे को इसलिए भी याद रखा जाएगा कि अमेरिका व कई यूरोपीय देशों के जबरदस्त दबाव और दुनिया में व्याप्त शदीद तनाव के बावजूद व्लादिमीर पुतिन का भारत में बड़ी गर्मजोशी से स्वागत किया गया। दौरे की अहमियत का अंदाजा इसी से हो जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रॉटोकॉल को दरकिनार कर स्वयं पालम एयरपोर्ट पहुंचे और गले लगाकर पुतिन का इस्तकबाल किया। इससे पहले वह दिसंबर 2021 में मात्र छह घंटे के लिए भारत आए थे। सदी के अहम दौरों में से एक इस हालिया दौरे से दुनिया की सियासत में एक नई कूटनीतिक गूंज पैदा हुई। पीएम मोदी ने दिल्ली के मास्को के साथ ऐतिहासिक रिश्तों को ध्रुव तारे के समान सशक्त और अटल करार दिया। पुतिन के भारत आगमन और 23 वें रूस-भारत शिखर सम्मेलन में लिए गए फैसलों से न केवल दोनों देशों के संबंधों में बेहतरी आई, बल्कि इससे विश्व पटल पर यह संदेश भी गया कि रूस और भारत किसी की परवाह किए बिना बड़ी बेबाकी से एक दूसरे के साथ खड़े हैं। दोनों के बीच यह दोस्ती कोई नई या अस्थाई नहीं है, बल्कि पुरानी और मजबूत है। यह मित्रता तब भी कायम थी, जब रूस संयुक्त सोवियत संघ था और आज भी सशक्त है जब वह रूस है। इस शानदार और मजबूत रिश्ते की बुनियाद दशकों की कड़ी मेहनत और ईमानदारी का परिणाम है। दरअसल, अमेरिका समेत कई देश चाहते हैं कि भारत, रूस के साथ अपने संबंध कम कर दे, जबकि नई दिल्ली के शिखर सम्मेलन की गुफ्तुगू ने एक बार पुनः सिद्ध कर दिया कि भारत की विदेश नीति पूरी तरह से स्वतंत्र है और आगे भी स्वतंत्र रहेगी। भारत हित में आर्थिक और कूटनीतिक फैसले लिए जाते रहेंगे। मतलब साफ कि भारत अमेरिका के भारी दबाव और बढ़ाए टैरिफ की परवाह किए बिना रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। भारत को तेल आपूर्ति करने वाले देशों में रूस पहले स्थान पर है। भारत अपनी खरीद का एक तिहाई से अधिक करीब 1.6 मिलियन बैरल तेल रोजाना रूसी तेल कंपनियों से खरीदता है। दूसरी ओर यह बात भी काफी विचित्र है कि अमेरिका स्वयं तो रूस से ईंधन खरीदने का अधिकार रखे और भारत पर तेल नहीं खरीदने का दबाव बनाए। मोदी ने हैदराबाद हाउस में कहा कि पिछले आठ दशकों की चुनौतियों के बावजूद रूस और भारत की मित्रता शाब्दिक नहीं, बल्कि हकीकत पर आधारित है। शिखर सम्मेलन में विजन 2030 रोडमैप की घोषणा हुई, जिसका लक्ष्य वार्षिक व्यापार को 2030 तक बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक ले जाना है। पुतिन के दौरे से भारत को रक्षा सहयोग में बढ़ोतरी, आर्थिक संबंधों में मजबूती, ऊर्जा क्षेत्र में सहभागिता और विज्ञान एवं तकनीकी जैसे क्षेत्रों में फायदा हुआ। विशेषकर रक्षा एवं परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल हुईं। इससे भारत की रक्षा क्षमताएं बढ़ीं और स्ट्रेटेजिक रिश्ते मजबूत हुए। भारत को एस-400 मिसाइल प्रणाली और अन्य हथियार समेत आधुनिक रक्षा प्रणाली की सप्लाई जारी रखने का वादा किया गया। भारत में न्यूक्लियर पावर प्लांट निर्माण समेत न्यूक्लियर एनर्जी प्रोजेक्ट्स में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। तेल, गैस और कोयले में सहयोग बढ़ाने और समय पर आपूर्ति का वादा किया गया। रक्षा, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों समेत द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के उपायों पर विचार के अलावा अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का फैसला लिया गया। वायु रक्षा, हाईटेक विमान, अंतरिक्ष अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमतता और वैज्ञानिक परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने के समझौते हुए। सिविल न्यूक्लियर क्षेत्र में कुडनकुलम प्लांट के छह रिएक्टर की पूर्ति, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर और तैरते न्यूक्लियर पावर प्लांट्स पर सहयोग को साझी प्राथमिकता बताया गया। यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ व्यापारिक समझौते, प्रवास, बंदरगाहांे, जहाजरानी, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य रूपरेखा पर हस्ताक्षर किए गए। पांच लाख भारतीय अर्द्ध कुशल श्रमिक के रूस जाने को आसान बनाया गया। सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती के लिए रूसी नागरिकों को 30 दिनी निःशुल्क ई-टूरिस्ट और ग्रुप वीजे की घोषणा की गई। दोनों नेताओं की बैठक और समझौतों में जहां शानदार भविष्य की झलक मौजूद है, वहीं साझेदारी, स्थिरता और आत्मविश्वास की दुनिया में राजनीति, संस्कृति, ऊर्जा, परमाणु विज्ञान और मानव संसाधन क्षेत्र में सशक्त दोस्ती की संभावना है। वर्तमान परिस्थितियों में जहां कुछ देश अपने रवैये में तब्दीली लाने को तैयार नहीं हैं, वहीं भारत को भी यह समझने की जरूरत है कि उसके साथ कौन देश खड़ा है? रूस और भारत के बीच परमाणु, ऊर्जा, तकनीकी, सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान प्रदान में वद्धि हो रही है। उन्हें रक्षा क्षेत्र में भी एक साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। भारत आतंक, उग्रवाद, सरहद पार सुनियोजित अपराध, मनीलांड्रिंग, आतंकवाद की वित्तीय सहायता और ड्रग्स की तस्करी जैसी चुनौतियों और खतरों से निपटने के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने का इच्छुक है। भारत शांति का पक्षधर है। शांति बहाली पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। युद्ध से रूस दुनिया में अकेला पड़ गया तथा उसके विकास पर नकारात्मक प्रभावित पड़ा। इस कारण भारत को रक्षा एवं दूसरे उत्पादों की आपूर्ति में देरी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, पश्चिमी देशों की रूस को अलग-थलग करने की नीति सफल नहीं रही। भारत, चीन, अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के दक्षिणी देशों में पुतिन का स्वागत इस बात का प्रमाण है कि जिन देशों का रूस ने साथ दिया, वे आज उसके साथ खड़े हैं। एक शांतिपूर्ण और विकसित भारत के लिए एक शांतिपूर्ण और विकसित रूस जरूरी है। दोनों देशों के बीच व्यापार में बड़ा बदलाव आया है। पांच वर्ष पहले जो व्यापार आठ बिलियन डॉलर था, वह बढ़कर 68 बिलियन डॉलर हो गया है। दुनिया के सियासी मंज़रनामे में बदलाव प्राकृतिक प्रक्रिया है। रूस व चीन के रिश्ते बेहतर हुए। अमेरिका, भारत पर जिस तरह का दबाव बनाने की मुहिम में लगा है, उसे देखते हुए रूस और भारत के बीच रिश्तों की मजबूती बहुत जरूरी थी। पुतिन के दौरे की एक अच्छी बात यह रही कि वह अकेले नहीं आए, उनके साथ बड़ी संख्या में रूसी नागरिक और व्यापारी भी आए, जो भारत के साथ जुड़ना और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। इससे पता चलता है कि रूस लोगों के बीच संबंध बढ़ाने का इच्छुक है। भारत ने भी लोगों के आपसी जुड़ाव के मामले में सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उम्मीद की जानी चाहिए कि दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज (10 दिसंबर को) नई दिल्ली में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मानवाधिकार दिवस समारोह में शामिल हुईं । इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि मानवाधिकार दिवस हमें यह याद दिलाता है कि सर्व-जन मानवाधिकार अलग नहीं किए जा सकते हैं और वे एक न्यायपूर्ण, समतावादी और करुणामय समाज की आधार हैं। सतहत्तर वर्ष पहले, विश्व एक सरल लेकिन क्रांतिकारी सत्य को व्यक्त करने के लिए एकजुट हुआ था कि प्रत्येक मनुष्य गरिमा और अधिकारों में स्वतंत्र और समान पैदा होता है। मानवाधिकारों के वैश्विक ढांचे को आकार देने में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने मानवीय गरिमा, समानता और न्याय पर आधारित विश्व की कल्पना की थी।
राष्ट्रपति ने अंत्योदय दर्शन के अनुरूप, वंचित लोगों सहित सभी के मानवाधिकारों की गारंटी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में राष्ट्र के विकास पथ में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। तभी विकास को सही मायने में समावेशी कहा जा सकता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि मानवाधिकार हमारे संविधान की परिकल्पना में निहित हैं। मानवाधिकार सामाजिक लोकतंत्र को बढ़ावा देते हैं। मानवाधिकारों में भयमुक्त जीवन जीने का अधिकार, बाधाओं के बिना शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार, शोषण मुक्त होकर काम करने का अधिकार और गरिमापूर्ण तरीके से वृद्धावस्था गुजारने का अधिकार शामिल है। हमने विश्व को यह याद दिलाया है कि मानवाधिकारों को विकास से अलग नहीं किया जा सकता। साथ ही, भारत ने हमेशा इस चिरस्थायी सत्य का पालन किया है: ‘न्याय के बिना शांति नहीं और शांति के बिना न्याय नहीं।’
राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, न्यायपालिका और नागरिक समाज, सभी ने मिलकर हमारे संवैधानिक विवेक के सतर्क प्रहरी के रूप में कार्य किया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लोगों के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों से संबंधित कई मुद्दों का स्वतः संज्ञान लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि मानवाधिकार आयोग ने इस वर्ष अपने स्थापना दिवस समारोह के दौरान कैदियों के मानवाधिकारों के विषय पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन चर्चाओं से उपयोगी परिणाम प्राप्त होंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण और उनका कल्याण मानवाधिकारों के प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थलों में महिलाओं की सुरक्षा पर एक सम्मेलन का आयोजन किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलनों से प्राप्त निष्कर्ष महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) राज्य और समाज के कुछ आदर्शों को साकार रूप देता है। भारत सरकार इन आदर्शों को अभूतपूर्व पैमाने पर क्रियान्वित कर रही है। पिछले एक दशक में हमने अपने राष्ट्र को एक अलग दृष्टिकोण अपनाते हुए देखा है – विशेषाधिकार से सशक्तिकरण की ओर और दान से अधिकारों की ओर। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है कि स्वच्छ जल, बिजली, खाना पकाने की गैस, स्वास्थ्य सेवा, बैंकिंग सेवाएं, शिक्षा और बेहतर स्वच्छता जैसी दैनिक आवश्यक सेवाएं सभी को उपलब्ध हों। इससे प्रत्येक परिवार का उत्थान होता है और उनकी गरिमा सुनिश्चित होती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि हाल ही में सरकार ने वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा एवं व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों से संबंधित चार श्रम संहिताओं के माध्यम से एक महत्वपूर्ण सुधार को लागू करने की अधिसूचना जारी की है। यह क्रांतिकारी बदलाव भविष्य के लिए तैयार कार्यबल और अधिक सुदृढ़ उद्योगों की नींव रखता है।
राष्ट्रपति ने प्रत्येक नागरिक से यह समझने का आह्वान किया कि मानवाधिकार केवल सरकारों, एनएचआरसी, नागरिक समाज संगठनों और ऐसे अन्य संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अपने नागरिकों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना एक साझा कर्तव्य है। एक दयालु और जिम्मेदार समाज के सदस्य के रूप में यह कर्तव्य हम सबका है।
काशी तमिल संगमम् 4.0 में नमो घाट पर चल रही प्रदर्शनी में स्टॉल संख्या–28 ‘थंजावुर थलैयाट्टी बोम्मई’ पारंपरिक हस्तशिल्प प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस स्टॉल के संचालक श्री हरि प्रसंथ बूपाथी, जो तमिलनाडु के थंजावुर से आए हैं, पहली बार वाराणसी पहुंचे हैं और अपने साथ दक्षिण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत लेकर आए हैं।
थलैयाट्टी बोम्मई (हिलने-डुलने वाली गुड़िया) का यह पारंपरिक शिल्प उनके परिवार की छठी पीढ़ी द्वारा संरक्षित और संवर्धित किया जा रहा है। यह कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है और आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है। श्री हरि प्रसंथ बूपाथी इन गुड़ियों का अमेरिका, कनाडा सहित कई देशों में निर्यात करते हैं।
इन पारंपरिक गुड़ियों की विशेषता यह है कि ये थंजावुर के बृहदीश्वर मंदिर की स्थापत्य शैली से प्रेरित हैं और उसी की तरह आपदा-प्रतिरोधक (डिजास्टर प्रूफ) मानी जाती हैं। मुख्य रूप से ये गुड़ियां राजा–रानी की आकृतियों पर आधारित होती हैं, जो दक्षिण भारतीय संस्कृति और शाही परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं।
श्री हरि प्रसंथ बूपाथी न केवल व्यवसाय में अग्रणी हैं, बल्कि कला के प्रसार में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे स्कूलों, कॉलेजों में कार्यशालाओं के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान करते हैं तथा केंद्र सरकार के हस्तशिल्प प्रशिक्षण मंच पर सरकारी मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केंद्र भी संचालित करते हैं। उनका संपूर्ण व्यवसाय B2B मॉडल पर आधारित है और वे थंजावुर में इस कला के प्रमुख उद्यमियों में गिने जाते हैं।
काशी तमिल संगमम् 4.0 के दौरान उनके स्टॉल पर आने वाले दर्शक और पर्यटक इन गुड़ियों को देखकर अत्यंत उत्साहित नज़र आए और बड़ी संख्या में लोग इस अनूठी कला के प्रति आकर्षित हुए।
आलोक पुराणिक गालिब शायरी के वह सूरज हैं, जिनके करीब के बड़े सितारों की चमक भी मद्धम दिखती है। जौक शायरी के ऐसे सितारे हैं, जिनकी चमक मद्धम दिखती है गालिब की रोशनी के सामने। पर जौक जौक हैं, उर्दू शायरी में अपना मुकाम रखते हैं, बल्कि जौक का मुकाम आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के दरबार में बहुत ऊंचा था। जफर जौक को अपना उस्ताद मानते थे। गालिब को कहीं ना कहीं यही बात चुभती थी। गालिब फब्ती कसते थे जौक पर कुछ इस तरह से-
हुआ है शह का मुसाहिब फिरे है इतराता वगरना शहर में ग़ालिब की आबरू क्या है
चोट सीधी जौक पर थी, शाह का दरबारी हो गया है जौक, तो ही इज्जत है, वरना जौक को कौन पूछता है, यह कहना चाहते हैं गालिब। पर वक्त सबको खाक करता है दोनों शायर दिल्ली में खाक हुए। दोनों की शायरी वक्त के पार आकर हम तक पहुंचती है। कुछ शेर देखिये जौक के-
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से सुल्तानपुर मेट्रो स्टेशन पर महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण पर एक माह की दिल्ली मेट्रो अभियान की शुरुआत की। 10 दिसंबर से 10 जनवरी 2026 तक चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य मेट्रो ट्रेनों और चुनिंदा स्टेशनों पर प्रदर्शित संदेशों के माध्यम से लाखों यात्रियों तक पहुंचना है। इन संदेशों में महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के महत्व पर प्रकाश डाला गया है; डिजिटल विभाजन को कम करना; महिलाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता की पहुंच में सुधार करना; प्रसवोत्तर रोग निवारण एवं बाल रोग निवारण और तपेदिक के बारे में जागरूकता फैलाना शामिल है।
इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाओं के स्वस्थ होने के बिना कोई भी परिवार या राष्ट्र सही मायने में प्रगति नहीं कर सकता। महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। दिल्ली मेट्रो के इस अभियान के माध्यम से हम इस संदेश को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाना चाहते हैं। यह संदेश को सीधे लोगों तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है।
उन्होंने यह भी बताया कि टीबी जागरूकता, डिजिटल विभाजन को कम करने, गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (पीसी एंड पीएनडीटी) अधिनियम, 1994 और अन्य प्रमुख मुद्दों पर संदेश मेट्रो के डिब्बों के अंदर और बाहर दोनों जगह प्रदर्शित किए गए हैं।
लिंग निर्धारण और चयन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों की बढ़ती सुलभता पर बोलते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि पहले लोग भ्रूण का लिंग निर्धारित करने के लिए अल्ट्रासाउंड पर निर्भर थे। अब इसी उद्देश्य के लिए नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन प्रथाओं को बंद करना होगा और लोगों को इसके प्रति जागरूक करना आवश्यक है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन, दक्षिण पूर्व एशिया की प्रभारी अधिकारी डॉ. कैथरीना बोहेम ने कहा कि इस मेट्रो स्टेशन पर कुछ यात्राएं समाप्त होती हैं और कुछ शुरू होती हैं। आज लैंगिक हिंसा के खिलाफ 16 दिनों के अभियान का अंतिम दिन है। और जैसे ही यह अभियान समाप्त होता है, एक नया अभियान शुरू होता है। हमें महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए दिल्ली मेट्रो अभियान शुरू करते हुए गर्व हो रहा है, जो दो सरल और चिरस्थायी सत्यों पर आधारित है: स्वस्थ महिलाएं = स्वस्थ राष्ट्र, और #क्योंकि वह महत्वपूर्णहै।
डॉ. बोहेम ने आगे कहा कि स्वस्थ महिलाएं एक स्वस्थ परिवार, समुदाय और एक स्वस्थ राष्ट्र के स्तंभ हैं। इसलिए महिलाओं और लड़कियों का स्वास्थ्य, जिसमें उनका मानसिक स्वास्थ्य भी शामिल है, न केवल उनके कल्याण के लिए, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण रूप से हमारे कल्याण के लिए भी महत्वपूर्ण है।
रत, स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृव अभियान, मिशन शक्ति, निर्भया कोष और आयुष्मान भारत जैसी विभिन्न राष्ट्रीय पहलों के माध्यम से महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तीकरण को लगातार मजबूत कर रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव सुश्री पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र की सहयोगी एजेंसियों के साथ मिलकर इस पहल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस शुभारंभ कार्यक्रम में महिलाओं के बैंड वेबहोर की प्रस्तुति भी शामिल थी, जो अभियान की सामूहिक भावना को दर्शाती है और महिलाओं के लचीलेपन, गरिमा और सशक्तीकरण का जश्न मनाती है। इसके बाद गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों ने उद्घाटन अभियान की सवारी में भाग लिया, जो महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण को बढ़ावा देने की साझा जिम्मेदारी को दर्शाती है।
दिल्ली मेट्रो को पूरे शहर में इन सशक्त संदेशों को प्रसारित करने के लिए धन्यवाद देते हुए डॉ. बोहेम ने इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया, “इस महत्वपूर्ण यात्रा में सहयात्री बनने के लिए मैं आप सभी का धन्यवाद करती हूं। इस संदेश को फैलाने में मदद करें और एकजुट हों क्योंकि स्वस्थ महिलाएं स्वस्थ राष्ट्रों का निर्माण करती हैं।”
स्वच्छ भारत मिशन–अर्बन 2.0के तहत कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश में बायो गैस उत्पादन करने वाले अत्याधुनिक बायो-CNG प्लांट का प्रयागराज में शुभारंभ किया गया। यह देश के आधुनिक वेस्ट टू एनर्जी मॉडल्स में शामिल है। यह संयंत्र न केवल शहर को कचरा मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि स्वच्छ और ग्रीन ऊर्जा उत्पादन और स्थानीय किसानों को सशक्त करने का भी एक बड़ा माध्यम बन रहा है।
प्रयागराज में विकसित यह प्रोजेक्ट विविध प्रकार के कार्बनिक कचरे को संसाधित कर Bio-CNG उत्पन्न करने में सक्षम है। इस संयंत्र में प्रतिदिन कुल 343 टन ऑर्गेनिक वेस्ट को प्रोसेस करने की क्षमता है, जिससे लगभग 21 टन प्रतिदिन बायो-CNG का उत्पादन हो रहा है। कृषि अवशेष—जैसे कि धान की पुआल, गोबर और मुर्गी शाला के अवशेष से कंप्रेस्ड बायो-गैस उत्पादित हो रही है। नगर निगम प्रयागराज के इस सराहनीय कदम के फलस्वरूप वर्तमान में लगभग 125 मैट्रिक टन गीला कचरा उपलब्ध कराया जा रहा है जो शुरुआती दौर में मात्र 7-8 मीट्रिक टन ही था। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका मल्टी-फीडस्टॉक मॉडल है, जिसमें नगर निगम का ठोस कचरा, पुआल, गोबर और पोल्ट्री लिटर सभी का कुशलतापूर्वक उपयोग किया जाता है। इससे न केवल स्वच्छ ईंधन का उत्पादन हो रहा है, बल्कि पराली जलाने जैसी समस्याओं पर भी नियंत्रण रखा जा सकेगा। साथ ही, यह परियोजना प्रतिदिन 28 टन उच्च गुणवत्ता वाली कम्पोस्ट भी तैयार कर रही है। यह कम्पोस्ट स्थानीय किसानों को उपलब्ध करा, Regenerative Farming को भी बढ़ावा मिल रहा है।
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत संचालित यह संयंत्र शहर के होटलों, रेस्टोरेंट्स, अपार्टमेंट और अन्य संस्थानों से उत्पन्न होने वाले थोक कचरे का समाधान प्रदान करता है। तैयार बायो-CNG को CBG-CGD Synchronization Scheme के तहत बिक्री की जा रहा है, जिसमें ईंधन कैस्केड रूट के माध्यम से वितरित किया जा रहा है। यह स्वच्छ ऊर्जा शहर के परिवहन में काम आ रहा है, एवं आगामी समय में 45,000 घरों को भी पाइपलाइन के माध्यम से गैस उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। जिससे शहर में ईंधन पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में 57000 MT वार्षिक उल्लेखनीय कमी आएगी।
इस बायो-CNG प्लांट की शुरुआत के साथ उत्तर प्रदेश ने हरित ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। यह परियोजना न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है, बल्कि कचरे से कंचनबनाने के मिशन को भी साकार करती है।
काशी तमिल संगमम् 4.0 में तमिलनाडु से काशी आने वाले समूह का सिलसिला जारी है। तमिलनाडु से काशी तमिल संगमम् 4.0 में शामिल होने के लिए पांचवां दल विशेष ट्रेन से बनारस रेलवे स्टेशन पहुंचा। जिसमें बड़ी संख्या में पेशेवर और कारीगर शामिल थे। स्टेशन पर उतरते ही मेहमानों का पारंपरिक तरीके से डमरू वादन,पुष्प वर्षा और ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘वणक्कम् काशी’ के उद्घोष से भव्य स्वागत किया गया। इन मेहमानों के स्वागत के लिए पुलिसकर्मी स्टेशन पर मौजूद रहे।
स्टेशन पर पारंपरिक स्वागत देखकर तमिल दल के सदस्यों में खासा उत्साह देखने को मिला। कई लोगों ने कहा कि काशी में मिल रही गर्मजोशी और आध्यात्मिक वातावरण उनके लिए अविस्मरणीय है। डमरू वादन की ध्वनि से पूरा परिसर शिवमय हो गया और काशी व तमिलनाडु की सांस्कृतिक एकता की झलक साफ दिखाई दी।
स दल में शामिल लोगों ने कहा कि काशी आध्यात्मिक नगरी है। यहां बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने के बाद हम लोग एकेडमिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। वहां बहुत कुछ सीखने और जानने को मिलेगा। कुछ ऐसे भी डेलीगेट दिखे जो काशी की धरती पर उतरते ही दंडवत लेट गए उन्होंने कहा कि यह पवित्र धरती है यहां आकर बहुत खुशी हुई है दो राज्यों के संस्कृति और भाषा का मिलन हो रहा है यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना एक भारत श्रेष्ठ भारत का मजबूत स्तंभ है।
काशी तमिल संगमम् 4.0 का आयोजन 2 दिसंबर से हो रहा है। इस आयोजन में तमिलनाडु से अलग-अलग समूह काशी, प्रयागराज और अयोध्या का भ्रमण करेगा। इस दौरान तमिल समूह को विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से रुबरु कराया जाएगा।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दीपावली को आज यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में शामिल किये जाने पर प्रसन्नता और गर्व व्यक्त किया।
यूनेस्को के हैंडल एक्स पर एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्री मोदी ने कहा:
‘‘भारत और दुनिया भर के लोग रोमांचित हैं।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने दीपावली को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करने के यूनेस्को के निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह वैश्विक मान्यता प्रत्येक भारतीय के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है।
सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीपावली केवल एक त्यौहार नहीं है, बल्कि एक सभ्यतागत परंपरा है जो राष्ट्र को एकजुट करती है और विश्व भर में गूंजती है। उन्होंने कहा कि यह पर्व भारत की बहुसंस्कृतिवाद, विविधता और सामाजिक एकता का प्रतीक है, साथ ही आशा, सद्भाव और अंधकार पर प्रकाश तथा अधर्म पर धर्म की विजय का शाश्वत संदेश भी देता है।
हमारे लिए, दीपावली हमारी संस्कृति और लोकाचार से बहुत गहराई से जुड़ी हुई है। यह हमारी सभ्यता की आत्मा है। यह प्रकाश और धार्मिकता का प्रतीक है। दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में शामिल करने से इस पर्व की वैश्विक लोकप्रियता और भी बढ़ेगी।
भारत में व्यापक रूप से मनाई जाने वाली जीवंत परंपराओं में से एक दीपावली को आज नई दिल्ली के लाल किले में आयोजित यूनेस्को अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र के दौरान मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में अंकित किया गया है।
इस शिलालेख को केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल, संस्कृति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और 194 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और यूनेस्को के वैश्विक नेटवर्क के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में अपनाया गया।
श्री शेखावत ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए कहा कि यह शिलालेख भारत और विश्वभर के उन समुदायों के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है जो दीपावली की शाश्वत भावना को जीवित रखते हैं। उन्होंने कहा कि यह त्योहार ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ के सार्वभौमिक संदेश का प्रतीक है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने की भावना को दर्शाता है और आशा, नवजीवन तथा सद्भाव का प्रतिनिधित्व करता है।
केंद्रीय मंत्री ने त्योहार की जीवंतता और जन-केंद्रित प्रकृति का उल्लेख करते हुए इस बात पर बल दिया कि दीपावली उत्सव के पीछे लाखों लोगों का योगदान होता है, जिनमें दीये बनाने वाले कुम्हार, उत्सव की सजावट करने वाले कारीगर, किसान, मिठाई बनाने वाले, पुजारी और सदियों पुरानी परंपराओं को निभाने वाले परिवार शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि यह मान्यता उस सामूहिक श्रम को श्रद्धांजलि है जो इस परंपरा को कायम रखता है।
केंद्रीय मंत्री ने प्रवासी भारतीयों की जीवंत भूमिका को भी स्वीकार किया, जिनके दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका, खाड़ी देशों, यूरोप और कैरेबियन में मनाए जाने वाले दीपावली समारोहों ने दीपावली के संदेश को महाद्वीपों में फैलाया है और सांस्कृतिक सेतुओं को मजबूत किया है।
इस शिलालेख के साथ ही इस विरासत की रक्षा करने और इसे भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने की नई जिम्मेदारी भी आती है। केंद्रीय मंत्री ने नागरिकों से दीपावली की एकता की भावना को अपनाने और भारत की समृद्ध अमूर्त सांस्कृतिक परंपराओं का समर्थन जारी रखने का आग्रह किया।
दीपावली को इसकी गहरी सांस्कृतिक महत्ता और विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों तथा वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय में मनाए जाने वाले जन त्योहार के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह एकता, नवीनीकरण और सामाजिक सामंजस्य के सिद्धांतों का प्रतीक है। दीये जलाना, रंगोली बनाना, पारंपरिक शिल्पकला, अनुष्ठान, सामुदायिक समारोह और पीढ़ी दर पीढ़ी ज्ञान का हस्तांतरण जैसी इसकी विविध प्रथाएं त्योहार की शाश्वत जीवंतता और भौगोलिकता की सीमाओं के भीतर अनुकूलन करने की क्षमता को दर्शाती हैं।
संगीत नाटक अकादमी के माध्यम से संस्कृति मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए इस नामांकन में भारतभर के कलाकारों, शिल्पकारों, कृषि समुदायों, प्रवासी समूहों, विशेष आवश्यकताओं वाले व्यक्तियों, ट्रांसजेंडर समुदायों, सांस्कृतिक संगठनों और परंपरा के वाहकों के साथ व्यापक राष्ट्रव्यापी परामर्श किया गया। उनके सामूहिक अनुभवों ने दीपावली के समावेशी स्वरूप, समुदाय-आधारित निरंतरता और कुम्हारों और रंगोली कलाकारों से लेकर मिठाई बनाने वालों, फूल विक्रेताओं और शिल्पकारों तक आजीविका के व्यापक इकोसिस्टम को उजागर किया।
यूनेस्को के शिलालेख में दीपावली को एक जीवंत विरासत के रूप में मान्यता दी गई है जो सामाजिक आपसदारी को मजबूत करती है। यह त्योहार पारंपरिक शिल्प कौशल का समर्थन करता है, उदारता और कल्याण के मूल्यों को सुदृढ़ करता है तथा आजीविका संवर्धन, लैंगिक समानता, सांस्कृतिक शिक्षा और सामुदायिक कल्याण सहित कई सतत विकास लक्ष्यों में सार्थक योगदान देता है।
संस्कृति मंत्रालय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह शिलालेख भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के बारे में वैश्विक जागरूकता को बढ़ावा देगा तथा भावी पीढ़ियों के लिए समुदाय-आधारित परंपराओं की रक्षा के प्रयासों को सुदृढ़ करेगा।
बुलडोजर की गूंज एक बार फिर सुनाई देने लगी है। यूपी में खासी लोकप्रियता हासिल करने के बाद अब बिहार और गोवा में इसकी दहाड़ सुनाई दे रही है। बिहार चुनाव में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रचार के दौरान आई लव यू बुलडोजर बाबा के गायन ने धूम मचा दी थी। बिहार चुनाव जीतने के बाद नीतीश सरकार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने अपराधियों और भू माफिया के खिलाफ यूपी की तर्ज़ पर बुलडोज़र कार्यवाही की चेतावनी दे डाली और कई स्थानों पर बुलडोज़र का करिश्मा भी देखने को मिलने लगा है। बिहार में जब से नई सरकार का गठन हुआ है, तब से प्रशासन अपने कड़े रूप में नजर आ रहा है। बिहार के तमाम जिलों में अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर अभियान जारी है। वहीं बुलडोजर बिहार के बाद गोवा पहुँच गया है जहां नाइट क्लब में लगी भीषण आग के बाद सरकार ने वागाटोर इलाके में स्थित रोमियो लेन नाइट क्लब के एक हिस्से को बुलडोजर से ढहा दिया। नाइट क्लब में 7 दिसंबर को आग लग गई थी जिसमें 25 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी जबकि कई लोग बुरी तरह से झुलस भी गए थे। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, रोमिया लेन बीच नाइट क्लब का निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से किया गया है। इसीलिए इसका ध्वस्तीकरण किया जा रहा है।
बुलडोज़र की चर्चा इस समय देश के घर घर में हो रही है। चौक चौराहों पर लोगों की जुबान पर बुलडोज़र चढा हुआ है। बुलडोजर कार्रवाई सही है या फिर गलत। इस पर कानून के जानकारों का कहना है बुलडोजर संबंधी कार्रवाई अवैध संपत्तियों पर ही होती है। मूल रूप से इसके दो कारण सामने आते हैं। पहला यह कि संपत्ति सरकारी जमीन पर कब्जा करके बनाई गई हो। दूसरा यह कि कोई अपराधी फरार हो या सरेंडर ना कर रहा हो, तब उसकी संपत्ति पर कुर्की का आदेश दिया जाता है। बहरहाल बुलडोज़र यदि नियमानुसार अपनी कार्यवाही को अंजाम देता है तो अपराधी तत्व अपराध करने से पूर्व हज़ार बार सोचेगा। यह भी कहा गया कि बुलडोज़र केवल एक ही वर्ग के लोगों के घरों पर चलाया गया। सरकार ने इसका खंडन करते हुए कहा बुलडोज़र बिना जात – पांत और धर्म देखे उन सभी लोगों की सम्पतियों पर चलाया गया जिन्होंने अवैध ढंग से सम्पति खड़ी की। बुल्डोजर कानून के अंतर्गत चलता है। यूपी सहित कई प्रदेशों में आए दिन दुष्कर्म की कार्यवाही से लेकर अवैध निर्माणों को ढ़हाने में बुल्डोजर पहुंचता है। यूपी में बुलडोजर से संपत्ति ढहाने की कार्रवाई ‘उत्तर प्रदेश अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट 1973’ के तहत होती है। इसके तहत ही प्रशासन को अवैध संपत्तियों को ढहाने का अधिकार मिला हुआ है। संपत्ति गिराने की कार्रवाई तब ही होती है, जब ये सुनिश्चित कर लिया जाता है कि निर्माण अवैध है। यहाँ सवाल यह भी उठता है कि प्रभावी लोगों ने बिना नियमानुसार स्वीकृति के अवैध निर्माण कैसे खड़े कर लिए। प्रशासन की मिलीभगत के बिना ऐसा संभव नहीं है। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि बिना तय प्रक्रिया के किसी का घर तोड़ देना असंवैधानिक है। बुलडोज़र कहीं चलाया जाता है तो तय मानकों का पालन किया जाये।
बुलडोजर दरअसल एक खास तरह की मल्टी पर्पज मशीन है, जो इन दिनों खूब चर्चा में है। बुलडोजर का मतलब जबरस्ती करना होता है। इस तरह से बुलडोजिंग का मतलब रास्ते में आने वाली किसी भी बाधा को ताकत के जरिए पार करने से है। बुलडोजर मुख्यरूप से कंस्ट्रक्शन साइट्स पर ही नजर आता है, लेकिन आजकल अवैध निर्माण, अतिक्रमण, अपराधियों और माफियाओं के घरों को ध्वस्त करने में इसका बहुतायत से इस्तेमाल हो रहा है। यहां बुलडोजर और जेसीबी में फर्क करना भी जरुरी है। कई लोग बुलडोजर और जेसीबी को एक ही समझ लेते हैं। लेकिन, ऐसा है नहीं। बुलडोजर एक हेवी मशीन है और जेसीबी उसे बनाने वाली कंपनी का नाम। बुलडोज़र की कहानी उत्तर प्रदेश से हुई है। जुलाई 2020 में विकास दुबे की कोठी पर बुलडोजर चला दिया था। इसके बाद यूपी में अवैध निर्माण और अतिक्रमण करने वाले गुंडों और माफिया पर बुलडोज़र ने अपने हाथ आज़माने शुरू कर दिए। बदमाशों पर बुलडोज़र की कार्यवाही का जनता ने भी पुरजोर समर्थन किया। मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, बृजेश कुमार सिंह जैसे कुख्यात लोगों की अवैध सम्पतियों पर बुलडोज़र चलाया गया।
यूपी के बाद बिहार विधानसभा के चुनाव में बुलडोज़र काफी लोकप्रिय हुआ। बुलडोजर जुबान से उतरकर रैलियों के मंच के नीचे जगह पा गया है। भाजपा के चुनावी अभियान का सारथी बन गया। यूपी के मुख्यमंत्री बुलडोज़र बाबा के नाम से विख्यात हो गए। बुलडोज़र की कार्यवाही पर जनता का समर्थन नहीं मिलता तो यूपी बिहार में भाजपा चुनाव नहीं जीत ती।