प्रधानमंत्री की फर्टिलाइजर परियोजना के लॉन्च की तैयारियों का जायजा लिया

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केंद्रीय पतन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने रविवार में डिब्रूगढ़ जिले में नामरूप फर्टिलाइजर कॉम्प्लेक्स का दौरा किया। 21 दिसंबर को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इसकी आधारशिला रखेंगे ।

नया ब्राउनफील्ड अमोनिया-यूरिया कॉम्प्लेक्स ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीवीएफसीएल) के मौजूदा परिसर में ₹10,000 करोड़ से अधिक के निवेश से स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना को असम के औद्योगिक आधार को मजबूत करने और पूरे पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में उर्वरक की उपलब्धता को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

साइट पर दौरे के दौरान सोनोवाल ने प्रधानमंत्री जी के कार्यक्रम के लिए लॉजिस्टिक्स इंतजाम, सुरक्षा तैयारियों और कुल मिलाकर सारी तैयारियों का जायजा लिया। सोनोवाल ने शुरुआती कामों की प्रगति की भी समीक्षा की और अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया, जिससे यह पक्का हो सके कि शिलान्यास समारोह की सभी तैयारियां आसानी से और समय पर पूरी हो जाएं।

सोनोवाल जी ने कहा, “यह परियोजना असम के लोगों की लंबे समय से चली आ रही इच्छा को पूरा करती है,” और बताया कि नामरूप में चौथे प्लांट की मांग दशकों से की जा रही थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का इस परियोजना को शुरू करने का फैसला पूर्वोत्तर के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता और भारत के कृषि और औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत करने के वादे को प्रतिबिंबित करता है।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने जगह की समीक्षा के बाद कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी और निर्णायक नेतृत्व में, असम के लोगों की दशकों पुरानी मांग आखिरकार पूरी हो गई है। नामरूप में चौथा फर्टिलाइजर प्लांट पूर्वोत्तर के प्रति प्रधानमंत्री जी की गहरी प्रतिबद्धता और भारत की कृषि और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के उनके संकल्प को दिखाता है।”

अधिकारियों ने जानकारी दी कि एक बार शुरू होने के बाद, नई फर्टिलाइजर इकाई से पूर्वोत्तर में यूरिया और संबंधित उत्पादों की सप्लाई चेन में काफी विस्तार होने की उम्मीद है, जिससे दूर के उत्पादन केंद्रों पर निर्भरता कम होगी और किसानों को समय पर उपलब्धता बेहतर होगी। इस प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता लगभग 1.25 मिलियन मीट्रिक टन होगी और इससे काफी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार निर्माण की उम्मीद है।

सर्बानंद सोनोवाल जी ने प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में असम और पूर्वोत्तर में हो रहे बड़े विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग क्षमता में बड़े निवेश का जिक्र किया, जिससे पूरे इलाके में युवाओं, किसानों और मजदूरों के लिए नए मौके बने हैं।

निरीक्षण के दौरान केंद्रीय मंत्री जी के साथ राज्य के वरिष्ठ मंत्री, स्थानीय विधायक, जिला प्रशासन के अधिकारी और नागरिक और विकास निकायों के प्रतिनिधि मौजूद थे। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे आपस में तालमेल बनाकर काम करें, जिससे प्रधानमंत्री जी का दौरा और शिलान्यास समारोह सफलतापूर्वक पूरा हो सके।

केंद्रीय मंत्री जी ने साइट पर अधिकारियों के साथ समीक्षा के बाद कहा, “21 दिसंबर को नामरूप में प्रधानमंत्री जी का दौरा असम के लिए गर्व का पल है। हम पूरी लगन से यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि शिलान्यास समारोह बिना किसी कमी के हो, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के बदलाव लाने वाले विकास एजेंडा और पूर्वोत्तर पर उनके खास ध्यान को प्रदर्शित करे।”

उम्मीद है कि नामरूप प्रोजेक्ट असम की औद्योगिक प्रगति में एक नया अध्याय शुरू करेगा, पूर्वोत्तर के लिए फर्टिलाइजर सुरक्षा को मजबूत करेगा और कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान देगा।

केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ अन्य अधिकारियों के बीच असम सरकार में मंत्री प्रशांत फुकन और जोगेन मोहन; विधायक तरंगा गोगोई, बिनोद हजारिका, चक्रधर गोगोई, तेराश गोवाला, भास्कर शर्मा और धर्मेश्वर कोंवर; असम पर्यटन विकास निगम (एटीडीसी), अध्यक्ष, रितुपर्णा बरुआ; डिब्रूगढ़ नगर निगम (डीएमसी), महापौर, सैकत पात्रा और उप महापौर, उज्ज्वल फुकन; डिब्रूगढ़ विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अध्यक्ष, असीम हजारिका; सोनोवाल कचारी स्वायत्त परिषद (एसकेएसी) के मुख्य कार्यकारी सदस्य, टंकेश्वर सोनोवाल; और उपायुक्त बिक्रम कैरी भी उपस्थित थे।

चेन्नई में छह करोड़ से ज्यादा का प्रतिबंधित लाला चंदन बरामद, चार गिरफ्तार

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राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने 6.26 करोड़ रुपये मूल्य के प्रतिबंधित/वर्जित लाल चंदन का अवैध रूप से निर्यात करने के प्रयास को नाकाम कर दिया है। अलग-अलग गोदामों से कुल 15 एमटी लाल चंदन जब्त किया गया और इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। लाल चंदन (टेरोकार्पस सैंटालिनस) सीआईटीईएस के परिशिष्ट II और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-IV में सूचीबद्ध है और विदेश व्यापार नीति के तहत इसके निर्यात पर प्रतिबंध/रोक है।

डीआरआई के अधिकारियों को खास जानकारी मिली थी कि चेन्नई और उसके आस-पास के इलाकों में अलग-अलग गोदामों में लाल चंदन छिपाकर रखा जा रहा है और उसे चेन्नई से दिल्ली के रास्ते निर्यात करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बाद, डीआरआई के अधिकारियों ने 09.12.2025 से 11.12.2025 तक तीन जगहों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।

एक जगह से ग्रेड ए क्वालिटी के कुल 169 लाल चंदन के लट्ठे बरामद किए गए, जिनका वजन 5.55 एमटी  था। इनमें से 76 लट्ठों को सफेद एचडीपीई पैकिंग सामग्री में लपेटकर  छुपाया गया था और उन्हें ‘घरेलू सामान’ की आड़ में अवैध रूप से दिल्ली ले जाने के लिए ट्रक में लादने की तैयारी थी। सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत अवैध निर्यात के लिए रखे गए सामान और कवर सामान को जब्त कर लिया गया। अन्य दो जगहों से लट्ठों, जड़ों और फर्नीचर के रूप में 9.55 एमटी लाल चंदन बरामद और जब्त किया गया।

गिरफ्तार किए गए चार लोगों में मुख्य संचालक, लाल चंदन की पैकिंग एवं परिवहन में शामिल उसके दो साथी और आपूर्तिकर्ता पक्ष का एक बिचौलिया शामिल है। आगे की जांच जारी है।

विशाखापट्टनम नेवी  मैराथन में  17,000 से अधिक धावकों ने भाग लिया

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आज रविवार को आयोजित विशाखापट्टनम नेवी में मैराथन में 17 देशों के विदेशी नागरिकों सहित 17,000 से अधिक धावकों ने भाग लिया।मैराथन का 10वां संस्करण शानदार तरीके से संपन्न हुआ। इस आयोजन में जबरदस्त उत्साह और खेल भावना देखने को मिली। इस प्रतिष्ठित मैराथन में 17 देशों के विदेशी नागरिकों सहित 17,000 से अधिक धावकों ने भाग लिया, जिससे यह आयोजन एक नई मिसाल बन गया। 10 लाख रुपये से अधिक की इनामी राशि के साथ इस मैराथन ने देश-विदेश के खिलाड़ियों और फिटनेस प्रेमियों को एक मंच पर एकजुट किया।

फुल मैराथन (42 किमी) को हरी झंडी दिखाने और पुरस्कार वितरण समारोह की शोभा वाइस एडमिरल संजय भल्ला, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ईस्टर्न नेवल कमांड ने बढ़ाई। हाफ मैराथन और संकल्प रन को श्रीमती प्रिया भल्ला, अध्यक्ष, एनडब्ल्यूडब्ल्यूए (पूर्वी क्षेत्र) ने हरी झंडी दिखाकर उद्देश्य, एकता और सामुदायिक सहभागिता की भावना को मजबूत किया। 10 किमी दौड़ को जिला कलेक्टर तथा 5 किमी दौड़ को पुलिस आयुक्त ने हरी झंडी दिखाई। इस भव्य आयोजन में फ्लैग ऑफिसर्स, जीवीएमसी आयुक्त, वरिष्ठ पूर्व सैनिकों तथा भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) जैसे प्रमुख साझेदारों के वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई अन्य विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम की शोभा और बढ़ गई।

बारीक प्लानिंग और बिना किसी रुकावट के एग्जीक्यूशन ने सभी पार्टिसिपेंट्स के लिए एक शानदार अनुभव पक्का किया, जिसमें डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन, सिटी पुलिस और लोकल कम्युनिटी का पूरा सपोर्ट मिला।

इस एडिशन में कई नए और बेहतर फीचर्स पेश किए गए, जिसमें रनर्स के लिए आकर्षक डिस्काउंट और डिलीवरेबल्स का एक बेहतर पैकेज शामिल था। इसके अलावा, सभी पार्टिसिपेंट्स को इंश्योरेंस कवर भी दिया गया, जिससे पूरे इवेंट के दौरान उनकी सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित हुई।

अपनी बढ़ती पहचान को दिखाते हुए, इस मैराथन में विदेशी देशों के एथलीटों ने हिस्सा लिया, जिससे इसकी बढ़ती इंटरनेशनल अपील साबित हुई और यह इस क्षेत्र की प्रमुख मैराथनों में से एक के रूप में मज़बूती से स्थापित हो गई।/

विशाखापट्टनम नेवी मैराथन 2025 इसमें शामिल सभी लोगों के समर्पण, टीम वर्क और जुनून का सबूत थी। यह इवेंट आने वाले सालों में और ज़्यादा तरक्की के लिए तैयार है। फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ईस्टर्न नेवल कमांड ने बेहतरीन प्रदर्शन करने वालों, सभी धावकों और आयोजकों को दिल से शुभकामनाएं दीं और इस इवेंट को ज़बरदस्त सफल बनाने में उनके समर्थन और भागीदारी के लिए जिला प्रशासन, शहर पुलिस और स्वयंसेवी संगठनों का आभार व्यक्त किया।

विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत और सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था अनिवार्य

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स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत और सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था अनिवार्य है। उत्तराखण्ड जैसे पहाड़ी और दुर्गम राज्य में टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ सेवाएं एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई हैं। इन माध्यमों से अब विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं।

पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (PRSI) के 47वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन “2047 तक भारत को किस तरह विकसित किया जा सकता है” विषय पर चर्चा की गई। इस मौके पर प्रशासन, मीडिया, शिक्षा और जनसंचार क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब नीतियों के साथ-साथ उनका प्रभावी संप्रेषण भी सुनिश्चित किया जाएगा। वक्ताओं ने भारत को वर्ष @ 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में प्रभावी संवाद, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, जिम्मेदार मीडिया और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सबसे अहम आधार बताया।अपर सचिव मुख्यमंत्री श्री बंशीधर तिवारी ने कहा कि सुशासन की सफलता प्रभावी, पारदर्शी और संवेदनशील संचार पर निर्भर करती है। सरकार की योजनाएं तभी सफल होती हैं जब उनकी सही और समय पर जानकारी जनता तक पहुंचे। उन्होंने डिजिटल सूचना प्रणाली और सोशल मीडिया के माध्यम से जनसंपर्क को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने उत्तराखण्ड के 25 वर्ष के विकास की तस्वीर पेश करते हुए कहा कि प्रदेश में धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ा है। अकेले चारधाम में इस साल 50 लाख से भी अधिक श्रद्धालु आए हैं। चारधाम के अलावा आदि कैलाश, जागेश्वर धाम और कैंची धाम के साथ ही मानस खंड मंदिरमाला को भी विकसित किया जा रहा है। प्रदेश में हर साल लगभग सात-आठ करोड़ पर्यटक पहुंच रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय और GDP में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शिता और मार्गदर्शन में अब पहाड़ों में रिवर्स माइग्रेशन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार की 35 नीतियां तैयार की गयी हैं। मूलभूत सुविधाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

UCOST के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने कहा कि विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान विकसित भारत की आधारशिला हैं। उन्होंने युवाओं को वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि विज्ञान संचार के माध्यम से शोध को समाज से जोड़ा जाना चाहिए। यह नवाचार को जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सत्र का संचालन करते हुए श्री संजीव कंडवाल ने कहा कि मीडिया, शासन और समाज के बीच संवाद की कड़ी है।

दूसरे सत्र में मीडिया, शिक्षा और लोकतंत्र पर संवाद किया गया। इस अवसर पर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. नितिन उपाध्याय ने कहा कि सूचना का प्रभावी प्रसार शासन की सफलता की कुंजी है। Digital Platforms के माध्यम से सरकारी योजनाओं और नीतियों को तेजी और पारदर्शिता के साथ आम जनता तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संचार प्रणाली को समय के अनुरूप लगातार अपडेट करना आवश्यक है।

CIMS कॉलेज के Chairman एडवोकेट श्री ललित जोशी ने कहा कि शिक्षा और मीडिया का समन्वय समाज को जागरूक और सशक्त बनाता है।

NDTV नई दिल्ली के सीनियर एडिटर डॉ. हिमांशु शेखर ने डिजिटल युग में फेक न्यूज़ को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि मीडिया की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सूचना की विश्वसनीयता बनाए रखना है। उन्होंने पत्रकारों से तथ्य, संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकारों के साथ काम करने का आह्वान किया।

वरिष्ठ पत्रकार श्री अनुपम त्रिवेदी ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। जनसंचार के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन संभव है।

IIMC नई दिल्ली की प्रोफेसर डॉ. सुरभि दहिया ने कहा कि संचार शिक्षा का उद्देश्य केवल पेशेवर तैयार करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनाना होना चाहिए।

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बिछाया ‘रेड कार्पेट

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मध्य प्रदेश में भोपाल से जबलपुर को जोड़ने वाला और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले इस हाईवे के करीब दो किलोमीटर हिस्से को लाल रंग की विशेष उभरी हुई मार्किंग से सजाया गया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने नरसिंहपुर–जबलपुर के बीच स्थित अति संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र में एक ऐसी तकनीक अपनाई है, जो यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा भी कर रही है।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले इस हाईवे के करीब 2 किलोमीटर हिस्से को लाल रंग की विशेष उभरी हुई मार्किंग से सजाया गया है। सड़क पर की गई इस पांच मिमी मोटी ‘रेड लेयर’ पर वाहन के गुजरते ही हल्का झटका लगता है, जिससे ड्राइवर की रफ्तार अपने आप नियंत्रित हो जाती है।

सड़क पर बिछा यह लाल रंग यात्रियों को संकेत देता है कि वे एक ‘डेंजर ज़ोन’ में प्रवेश कर चुके हैं। यही कारण है कि वाहन चालक स्वाभाविक रूप से गति कम कर देते हैं। इसकी खूबसूरती और अनोखेपन से प्रभावित होकर स्थानीय लोग और यात्री इसे प्यार से ‘रेड कार्पेट रोड’ कहते है।

यहां पर 25 अंडरपास (पुलिया) बनाए गए हैं, ताकि बाघों समेत अन्य जंगली जानवर बिना किसी खतरे के हाईवे के नीचे से सुरक्षित आवाजाही कर सकें। यह इलाका पहले वन्यजीवों की लगातार मूवमेंट के कारण बड़ा ‘ब्लैक स्पॉट’ माना जाता था।

करीब 122.25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई 11.96 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में सड़क को 2 लेन से 4 लेन किया गया है। उद्देश्य साफ है—यात्रियों की जान बचाना और जंगल के निवासियों के लिए सुरक्षित गलियारा सुनिश्चित करना।

मिजोरम को पहली बार रेल से कारें मिलीं

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119 मारुति कारों को लेकर मिजोरम सैरांग के रेलवे स्टेशन पर पहली बार सीधे ऑटोमोबाइल रैक आया। यह ऐतिहासिक कदम आइजोल में गाड़ियों की उपलब्धता बढ़ाएगा/ लंबे सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करेगा, और मिजोरम के ऑटोमोबाइल सेक्टर, जिसमें डीलर्स, सर्विस प्रोवाइडर्स और ग्राहक शामिल हैं, को फायदा पहुंचाएगा, जो राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उपलब्धि इंडियन रेलवे की कनेक्टिविटी बढ़ाने, क्षेत्रीय विकास को सपोर्ट करने और पूरे देश में समावेशी विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दर्शाती है।

बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन मिजोरम के लिए बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दुर्गम भूभाग से सावधानीपूर्वक काटकर बनाई गई यह लाइन 51.38 किलोमीटर लंबी है और 45 सुरंगों से होकर गुजरती है। यह रेलवे लाइन क्षेत्र के देश के शेष भाग के साथ रणनीतिक एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इस रेल लाइन का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 13 सितंबर 2025 को किया था। इस अवसर पर उन्होंने आइजोल (सैरांग) और दिल्ली (आनंद विहार टर्मिनल) के बीच राजधानी एक्सप्रेस, आइजोल (सैरांग) और गुवाहाटी के बीच मिजोरम एक्सप्रेस और आइजोल (सैरांग) और कोलकाता के बीच एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही मिजोरम का भारत के राष्ट्रीय रेल नेटवर्क में पूर्ण एकीकरण हो गया।

नई रेल सेवाओं को लेकर यात्रियों की प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है। तीनों ट्रेनें पूरी क्षमता के साथ चल रही हैं, जिनमें सैरांग-आनंद विहार टर्मिनल राजधानी एक्सप्रेस 147 प्रतिशत, सैरांग-गुवाहाटी मिजोरम एक्सप्रेस 115 प्रतिशत और सैरांग-कोलकाता एक्सप्रेस 139 प्रतिशत शामिल हैं। यात्रियों के लिए ये ट्रेनें सुविधाजनक, किफायती और समय बचाने वाली हैं। रेल संपर्क से प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों तक यात्रा आसान हो गई है। साथ ही, आसपास के राज्यों में शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच भी बेहतर हुई है।

बैराबी-सैरांग लाइन पर माल ढुलाई का काम उद्घाटन के तुरंत बाद शुरू हो गया। 14 सितंबर 2025 को पहली माल ढुलाई में असम से आइजोल तक 21 सीमेंट वैगन ले जाए गए। तब से, इस मार्ग पर सीमेंट, निर्माण सामग्री, वाहन, रेत और पत्थर के टुकड़े जैसी आवश्यक वस्तुओं का परिवहन किया जा रहा है।

सैरांग से पहली पार्सल खेप भी 19 सितंबर 2025 को बुक की गई थी, जब एंथुरियम के फूलों को पार्सल वैन (सैरांग-आनंद विहार टर्मिनल राजधानी एक्सप्रेस) के माध्यम से आनंद विहार टर्मिनल तक पहुंचाया गया था। 17 सितंबर से 12 दिसंबर 2025 के बीच कुल 17 रेक संचालित किए गए। ये विकासक्रम दर्शाते हैं कि यह लाइन एक विश्वसनीय लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर बन रही है, जिससे परिवहन लागत कम हो रही है और मिजोरम के आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास में समर्थन मिल रहा है।

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आईएनएएस 335 (ओएसपीआरईवाईएस) का कमीशन 17 को

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भारतीय नौसेना 17 दिसंबर को गोवा स्थित आईएनएस हंसा में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी की उपस्थिति में अपने दूसरे एमएच 60आर हेलि‍कॉप्टर स्क्वाड्रन, आईएनएएस 335 (ओएसपीआरईवाईएस) को कमीशन करेगी। यह अवसर आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि की दिशा में भारतीय नौसेना के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण क्षण होगा।

उन्नत हथियारों, सेंसरों और एवियोनिक्स प्रणालियों से युक्त यह हेलिकॉप्टर भारतीय नौसेना के लिए एक बहुपयोगी और सक्षम संसाधन सिद्ध होता है, जो पारंपरिक तथा असममित दोनों प्रकार के खतरों से प्रभावी रूप से निपटने की उन्नत क्षमताएं प्रदान करता है।

यह विमान नौसेना संचालन में पूरी तरह से एकीकृत हो चुका है और अनेक अवसरों पर अपनी उपयोगिता साबित कर चुका है। स्क्वाड्रन के शुरू होने से भारतीय नौसेना की समग्र विमानन क्षमताओं को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।

बिहार सरकार के मंत्री नितिन नबीन बने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष

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बिहार सरकार के मंत्री नितिन नबीन को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने एक आदेश में कहा गया है कि इस नियुक्ति को पार्टी के संसदीय बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। वर्तमान में नितिन नबीन बिहार सरकार में सड़क निर्माण विभाग के मंत्री हैं।

यह संगठनात्मक फेरबदल ऐसे समय में हुआ है जब पार्टी अपने शीर्ष नेतृत्व ढांचे में बदलाव कर रही है। मौजूदा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जनवरी 2020 में नियुक्त हुए थे और उन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों सहित कई महत्वपूर्ण मौकों पर पार्टी का नेतृत्व करने के लिए कार्यकाल में एक्सटेंशन दिया गया था

नितिन नबीन बिहार के एक अनुभवी बीजेपी नेता हैं। पटना में जन्मे नितिन नबीन दिवंगत नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा के बेटे हैं। दिवंगत नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा स्वयं एक अनुभवी बीजेपी नेता और पूर्व विधायक थे। अपने पिता के निधन के बाद नितिन नबीन ने सक्रिय चुनावी राजनीति में कदम रखा।नितिन नबीन पटना में बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। नबीन 2006 में उपचुनाव जीतने के बाद से लगातार चार बार विधायक चुने गए हैं। वह राज्य में पार्टी के सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वालों में से एक माने जाते हैं। हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में, उन्होंने बांकीपुर से शानदार जीत हासिल की थी। चुनाव में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 51,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराया था।

भारतीय रेलवे ने इस साल  4,224 से अधिक एलएचबी कोचों का निर्माण किया

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भारतीय रेलवे ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 (नवंबर 2025 तक) के दौरान कुल 4,224 से अधिक एलएचबी कोचों का निर्माण किया गया है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि में उत्पादित 3,590 कोचों की तुलना में 18% की वृद्धि दर्शाता है। उत्पादन में यह वृद्धि रेलवे इकाइयों में विनिर्माण क्षमता के निरंतर सुदृढ़ीकरण और बेहतर उत्पादन नियोजन को प्रदर्शित करती है।

इस अवधि के दौरान कारखानेवार प्रदर्शन की बात करें तो, इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), चेन्नई ने 1,659 एलएचबी कोचों का उत्पादन किया है, इसके बाद मॉडर्न कोच फैक्ट्री (एमसीएफ), रायबरेली ने 1,234 कोचों का और रेल कोच फैक्ट्री (आरसीएफ), कपूरथला ने 1,331 कोचों का उत्पादन किया है। इन सभी ने मिलकर एलएचबी कोच उत्पादन में समग्र वृद्धि में योगदान दिया है।

दीर्घकालिक तुलना की जाए तो हाल के वर्षों में हासिल की गई उल्लेखनीय प्रगति साफ दिखाई देती है। 2014 और 2025 के बीच, भारतीय रेलवे ने 42,600 से अधिक एलएचबी कोचों का उत्पादन किया, जो 2004 और 2014 के बीच निर्मित 2,300 कोचों की तुलना में 18 गुना अधिक है। यह विस्तार एलएचबी कोचों को व्यापक रूप से अपनाकर यात्री परिवहन को आधुनिक बनाने पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने को रेखांकित करता है, जो अपने बेहतर सुरक्षा मानकों और कम रखरखाव की ज़रुरतों के लिए जाने जाते हैं।

घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाकर और आयात पर निर्भरता कम करके भारतीय रेलवे, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के लक्ष्यों में लगातार महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। यह संगठन देश की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने और यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और अधिक आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए अपनी उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने पर केंद्रित है।

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सीआईसीटी का स्टॉल बना तमिल भाषा-संस्कृति का सेतु, ‘तमिल करकलाम’ से सरल हो रहा भाषा अध्ययन

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तमिलनाडु से  सातवां आध्यात्मिक दल विशेष ट्रेन से बनारस रेलवे स्टेशन पहुंचा।

काशी तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत केंद्रीय शास्त्रीय भाषा संस्थान (सीआईसीटी) का स्टॉल तमिल भाषा, साहित्य और संस्कृति को समझने का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। इस स्टॉल का उद्देश्य “तमिल करकलाम” (तमिल सीखें) पहल के माध्यम से तमिल शास्त्रीय भाषा को सरल, सुलभ और बहुभाषी स्वरूप में प्रस्तुत करना है।उधर काशी तमिल संगमम 4.0 में शामिल होने के लिए तमिलनाडु से  सातवां आध्यात्मिक दल विशेष ट्रेन से बनारस रेलवे स्टेशन पहुंचा।

सीआईसीटी द्वारा तमिल शास्त्रीय ग्रंथों का हिन्दी अनुवाद कर समस्त पुस्तकें स्टॉल पर उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही यहाँ हिन्दी, तमिल, अंग्रेज़ी, थाई सहित कई अन्य भाषाओं में भी पुस्तकें प्रदर्शित की गई हैं, जिससे काशी और तमिलनाडु से आए प्रतिनिधि तमिल साहित्य को सहजता से समझ सकें।

स्टॉल पर विशेष रूप से तिरुक्कुरल ग्रंथ उपलब्ध है, जो लगभग 300 वर्ष पुराना माना जाता है और तमिल साहित्य की अमूल्य धरोहर है। यह ग्रंथ तीन भागों में विभाजित है प्रथम भाग में धर्म, द्वितीय भाग में अर्थ और तृतीय भाग में प्रेम के दर्शन प्रस्तुत किए गए हैं। जैसे हिन्दी में अर्थशास्त्र का महत्व है, उसी प्रकार तिरुक्कुरल तमिल समाज का नैतिक और दार्शनिक आधार है।

काशी तमिल संगमम् के बाद सांस्कृतिक एकता को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सीआईसीटी ने “Kashi as etched on the Tamil Indian Book” नामक एक विशेष अंतर-सांस्कृतिक पुस्तक भी प्रकाशित की है, जो काशी और तमिल संस्कृति के ऐतिहासिक व भावनात्मक संबंधों को रेखांकित करती है।

स्टॉल पर इंटरैक्टिव लर्निंग सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं, जहाँ शिक्षक पाँच प्रमुख पुस्तकों के माध्यम से सरल व्याकरण, तमिल शब्दकोश, संवाद अभ्यास और तमिल अक्षर लेखन सिखा रहे हैं। चार्ट और दृश्य सामग्री के प्रयोग से बच्चों एवं नवशिक्षार्थियों के लिए सीखना और अधिक सहज हो गया है।

इसके अतिरिक्त पीएम ई-विद्या पहल के अंतर्गत ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से भी तमिल भाषा का शिक्षण कराया जा रहा है। स्टॉल पर तमिल की प्रथम व्याकरणिक पुस्तक तोळ्काप्पियम (Tolkappiyam), संगम साहित्य, पोस्ट-संगम साहित्य, कला साहित्य (18 भागों में) तथा तमिल शोध से संबंधित अनेक पुस्तकें भी उपलब्ध हैं।

इस स्टॉल का संचालन सीआईसीटी के निदेशक डॉ. आर. चन्द्रशेखर, रजिस्ट्रार डॉ. आर. भुवनेश्वरी के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। स्टॉल टीम में डॉ. देवी, डॉ. कार्तिक एवं डॉ. पियरस्वामी सक्रिय रूप से सहभागिता निभा रहे हैं।

सीआईसीटी का यह प्रयास तमिल भाषा को सीखने, समझने और भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हो रहा है।

स्टॉल पर तमिल भाषा सीख रही वाराणसी के स्थानीय निवासी साजिया ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सीआईसीटी का यह प्रयास अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया, पहले मुझे लगता था कि तमिल भाषा सीखना कठिन होगा, लेकिन यहाँ ‘तमिल करकलाम’ के माध्यम से बहुत ही सरल और रोचक तरीके से पढ़ाया जा रहा है। हिन्दी में अनुवादित पुस्तकों, चार्ट और संवाद अभ्यास से भाषा समझना आसान हो गया है।”

साजिया ने कहा कि इंटरैक्टिव क्लास और शिक्षकों का मार्गदर्शन उन्हें तमिल अक्षर, शब्द और सामान्य बातचीत सीखने में आत्मविश्वास दे रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के मंच स्थानीय युवाओं को नई भाषाएँ सीखने और अन्य संस्कृतियों को समझने का बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं।

उन्होंने सीआईसीटी और काशी तमिल संगमम् 4.0 की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को वास्तविक रूप में साकार करते हैं और युवाओं को ज्ञान व संस्कृति से जोड़ते हैं।

काशी तमिल संगमम 4.0 में शामिल होने के लिए तमिलनाडु से  सातवां आध्यात्मिक दल विशेष ट्रेन से बनारस रेलवे स्टेशन पहुंचा। स्टेशन पर उतरते ही इस दल  का पारंपरिक तरीके से डमरू वादन,पुष्प वर्षा और ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘वणक्कम काशी’ के उद्घोष से भव्य स्वागत किया गया। स्टेशन पर पारंपरिक स्वागत देखकर तमिल दल के सदस्यों में खासा उत्साह देखने को मिला।

कई लोगों ने कहा कि काशी में मिल रही आध्यात्मिक वातावरण उनके लिए अविस्मरणीय है। डमरू वादन की ध्वनि से पूरा परिसर शिवमय हो गया और काशी व तमिलनाडु की सांस्कृतिक एकता की झलक साफ दिखाई दी।

इस दल में शामिल रामानुज ने कहा कि यह पहल भारत की दो प्राचीन सभ्यताओं काशी और तमिलनाडु के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों का उत्सव है। सदियों से तीर्थयात्रियों, विद्वानों और साधकों ने दोनों क्षेत्रों के बीच ज्ञान, भाषा और परंपराओं का आदान-प्रदान किया है। संगमम उसी ऐतिहासिक जुड़ाव को आधुनिक संदर्भ में पुनर्स्थापित करता है। हम काफी उत्साहित हैं काशी, प्रयागराज और अयोध्या भ्रमण करने के लिए।