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इतिहास के पन्नों में 16 जनवरी : आज ही के दिन दूसरी अंतरिक्ष यात्रा पर रवाना हुई थीं कल्पना चावला

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16 जनवरी भारत के लिए गर्व और प्रेरणा की एक यादगार तारीख है। इस दिन भारतीय मूल की अंतरिक्ष वैज्ञानिक कल्पना चावला ने अमेरिका से अंतरिक्ष में अपनी दूसरी उड़ान भरी। सात समंदर पार अपने सपने को सच करते हुए उन्होंने नासा के स्पेस शटल कोलंबिया से अंतरिक्ष यात्रा की।

हालांकि यह यात्रा उनके लिए अंतिम साबित हुई। 16 दिन के मिशन के बाद 01 फरवरी 2003 को पृथ्वी पर लौटते समय स्पेस शटल दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें कल्पना चावला और उनके छह साथियों की मृत्यु हो गई।

कल्पना चावला ने न केवल विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत का नाम रोशन किया, बल्कि अनगिनत युवा, खासकर लड़कियों को अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा भी दी।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र

1547 – इवान चतुर्थ ‘इवान द टैरिबल’ रूस का जार बना।

1556 – फिलिप द्वितीय स्पेन के सम्राट बने।

1581 – ब्रिटिश संसद ने रोमन कैथोलिक मत को ग़ैर क़ानूनी घोषित किया।

1681- महाराष्ट्र के रायगढ़ किले में क्षत्रपति शिवाजी के पुत्र संभाजी का भव्य राज्याभिषेक हुआ।

1761 – पांडेचेरी पर से अंग्रेज़ों ने फ़्राँसीसियों का अधिकार हटा दिया।

1769 – कलकत्ता (अब कोलकाता) के अकरा में पहली बार सुनियोजित घुड़दौड़ का आयोजन किया गया।

1920 – ‘लीग ऑफ़ नेशंस’ ने पेरिस में अपनी पहली काउंसिल मीटिंग की।

1943 – इंडोनेशिया के अंबोन द्वीप पर अमेरिकी वायुसेना का पहला हवाई हमला।

1947 – विंसेंट ऑरियल फ्रांस के राष्ट्रपति चुने गये।

1955 – पुणे में खड्वासला राष्ट्रीय रक्षा अकादमी का औपचारिक रूप से उद्घाटन।

1969 – सोवियत अंतरिक्ष यानों ‘सोयुज 4’ और ‘सोयुज 5’ के बीच पहली बार अंतरिक्ष में सदस्यों का आदान-प्रदान हुआ।

1973 – तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति निक्सन ने इस दिन उत्तरी वियतनाम पर की जा रही बमबारी रोकने के आदेश दे दिए थे।

1979 – ‘शाह ऑफ़ ईरान’ सपरिवार मिस्र पहुँचे।

1989 – सोवियत संघ ने मंगल ग्रह के लिए दो साल के मानव अभियान की अपनी योजना की घोषणा की।

1991 – ‘पहला खाड़ी युद्ध’ (अमेरिका की इराक के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई शुरू)।

1992 – भारत एवं ब्रिटेन के बीच प्रत्यर्पण संधि।

1995 – चेचेन्या में चल रहे गृहयुद्ध को रोकने के लिए रूसी प्रधानमंत्री विक्टर चेर्नोमिर्दिन एवं चेचेन्या प्रतिनिधिमंडल के बीच समझौता।

1996 – हब्बल अंतरिक्ष दूरबीन के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में 100 से अधिक नये आकाशगंगा को खोज निकालने का दावा किया।

1999 – भारत के अनिल सूद विश्व बैंक के उपाध्यक्ष बने, टोक्यो (जापान) पुन: विश्व का सबसे मंहगा शहर घोषित।

2000 – चीन सरकार ने दो वर्षीय तिब्बती बालक को ‘साकार बुद्ध’ के पुरावतार के रूप में मान्यता प्रदान की।

2003 – भारतीय मूल की कल्पना चावला दूसरी अंतरिक्ष यात्रा पर रवाना।

2005 – जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख अज़हर पर शिंकजा कसने के लिए एफ़.बी.आई. ने भारत से मदद मांगी।

2006 – समाजवादी नेता माइकल बैशलेट चिली की प्रथम महिला राष्ट्रपति चुनी गयीं।

2008 – सेतुसमुद्रम परियोजना पर योजना का मसौदा पेश करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार को दो हफ्ते का समय दिया।

2008 – पाकिस्तान में वजीरिस्तान में वाना क्षेत्र में आतंकी हमले में 30 सैनिक लापता हुए।

2009- उत्तर प्रदेश को हराकर मुम्बई ने रिकार्ड 38वीं बार रणजी चैम्पियनशिप जीती।

2013 – सीरिया के इदलिब में बम धमाकों में 24 लोगों की मौत।

2020 – केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गुजरात के सूरत में स्थित हजीरा लार्सन एंड टुब्रो आर्मर्ड सिस्टम कॉम्प्लेक्स में 51वीं के-9 वज्र-टी तोप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

जन्म

1926 – ओ. पी. नैय्यर- प्रसिद्ध संगीतकार।

1927 – कामिनी कौशल – हिन्दी फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री तथा टीवी कलाकार।

1931 – सुभाष मुखोपाध्याय – भारत के ‘प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी’ के जनक चिकित्सक व वैज्ञानिक थे।

1946 – मुनीश्वर चन्द्र डावर- भारतीय चिकित्सक हैं। उनकी नि:स्वार्थ सेवाओं के लिये भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।

1946 – कबीर बेदी – भारतीय फिल्म अभिनेता हैं, जो सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि यूनाइटेड स्टेट और इटली में भी सक्रिय हैं।

1950 – वी. एस. संपत – भारत के भूतपूर्व 18वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे।

2001 – श्रीहरि नटराज – भारतीय तैराक हैं।

निधन

1901 – महादेव गोविन्द रानाडे – भारत के प्रसिद्ध राष्ट्रवादी, समाज सुधारक, विद्वान् और न्यायविद।

1938 -शरत चंद्र चट्टोपाध्याय- बांग्ला भाषा के अमर कथाशिल्पी और सुप्रसिद्ध उपन्यासकार।

1962 -रामनरेश त्रिपाठी- प्राक्छायावादी युग के महत्त्वपूर्ण कवि।

1966 – टी. एल. वासवानी – प्रसिद्ध लेखक, शिक्षाविद और भारतीय संस्कृति के प्रचारक।

1988 – एल. के. झा – भारतीय रिज़र्व बैंक के आठवें गवर्नर थे।

1989 – प्रेम नजीर (अब्दुल खादिर) – मलयालम सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में से एक इनके नाम सबसे अधिक 600 फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाने का विश्व रिकार्ड है।

महत्वपूर्ण दिवस

अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह दिवस (10 दिवसीय)

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह 11 जनवरी- 17 जनवरी तक

नोटा नहीं, उपलब्ध उम्मीदवारों में सर्वश्रेष्ठ का चयन करेंः डॉ. भागवत

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नागपुर, 15 जनवरी (हि.स.) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने कहा कि, मतदान के दौरान सभी उम्मीदवारों को नकारने (नोटा) के बजाय उपलब्ध विकल्पों में से योग्य उम्मीदवार का चयन करना अधिक उचित है।

महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव के लिए गुरुवार को मतदान हो रहा है। डॉ. मोहन भागवत और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश उपाख्य ‘भैय्याजी’ जोशी ने गुरुवार को महाल स्थित नागपुर नाइट हाईस्कूल के मतदान केंद्र पर मतदान किया। मतदान के लिए पहुंचने वालों में ये दोनों सबसे पहले थे।

मतदान के बाद डॉ. भागवत ने कहा कि ‘नोटा’ का प्रयोग सभी उम्मीदवारों को नकारने के समान है और यह लोकतंत्र की सबसे खराब स्थिति मानी जा सकती है। इससे वास्तव में अवांछित उम्मीदवारों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलता है। इसलिए उपलब्ध उम्मीदवारों में से योग्य और सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार का चयन किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदान अत्यंत महत्वपूर्ण है और यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। जनहित को ध्यान में रखकर मतदान किया जाना चाहिए। अराजकता का अर्थ राजा या नेतृत्व के अभाव की स्थिति है, जो समाज के लिए घातक होती है।

उन्होंने महाभारत का संदर्भ देते हुए बताया कि उसमें भी सही नेतृत्व के चयन के महत्व को रेखांकित किया गया है। डॉ. भागवत ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा मतदान को लेकर लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनका प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई देगा। उन्होंने एक बार फिर ‘नोटा नहीं, उपलब्ध विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ के चयन का आह्वान किया।

पहली बार गंगासागर मेले में पहुंचे तृतीय लिंग के साधु

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मकर संक्रांति पर 85 लाख श्रद्धालुओं के पुण्य स्नान का दावा

कोलकाता, 15 जनवरी (हि.स.)। त्रेता युग में गंगासागर तट पर जिस पुन्य मुहूर्त में मां गंगा ने राजा सगर के पुत्रों को स्पर्श कर मोक्ष प्रदान किया था, उसी शुभ मुहूर्त में पुण्य स्नान के लिए इस बार करीब 85 लाख लोग पहुंचे हैं। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से जारी आंकड़े के अनुसार गुरुवार सुबह गंगासागर तट पर इन लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई है।

इस वर्ष गंगासागर मेले में एक खास दृश्य देखने को मिला। पहली बार तृतीय लिंग (किन्नर) साधुओं की संगठित उपस्थिति दर्ज की गई। उनके लिए विशेष अखाड़ा स्थापित किया गया है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। अब तक किन्नर साधु अलग-अलग रूप में मेले में आते थे, लेकिन इस बार अन्य साधु-संतों के सहयोग से उन्हें अपना अलग अखाड़ा मिला है। जूना अखाड़े से कुल 12 किन्नर साधु गंगासागर पहुंचे हैं।

मकर संक्रांति के अवसर पर गंगासागर मेला पूरी तरह श्रद्धा और आस्था के रंग में रंगा नजर आया। पवित्र स्नान के लिए अब तक करीब 85 लाख श्रद्धालु गंगासागर पहुंच चुके हैं। दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन के अनुसार गुरुवार दोपहर तक स्नान का शुभ मुहूर्त रहने के कारण रात तक श्रद्धालुओं की संख्या एक करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। कपिल मुनि आश्रम के मुख्य महंत ज्ञान दास जी महाराज ने बताया कि गुरुवार सुबह से ही श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगानी शुरू कर दी है।

प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार दोपहर तीन बजे तक 85 लाख से अधिक पुण्यार्थी गंगासागर में मौजूद थे। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य के विभिन्न जिलों के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगासागर की ओर रवाना हो रहे हैं। गुरुवार दोपहर एक बजकर 19 मिनट तक पुण्य स्नान का शुभ समय है, इसी को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त तैयारियां की हैं।

राज्य के मंत्री अरूप विश्वास ने बताया कि मेले में पेयजल, ठहरने और स्वास्थ्य सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि बाहर से आए श्रद्धालु भी व्यवस्थाओं से संतुष्ट हैं। मेले में करीब 150 स्वयंसेवी संगठन और लगभग 10 हजार कर्मी दिन-रात सेवा कार्य में जुटे हुए हैं।

इस बीच मेले में अब तक एक श्रद्धालु की मौत की सूचना मिली है। मृतक असम का निवासी बताया गया है, जिसका नाम मित्थू मंडल है। इसके अलावा पांच श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एयरलिफ्ट कर बेहतर इलाज के लिए भेजा गया है। स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन, मंत्री, अधिकारी और स्वयंसेवी संस्थाएं लगातार मौके पर निगरानी कर रही हैं।

गंगासागर मेले में हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में साधु-संत पहुंचे हैं। भस्म लगाए नागा साधु, एलईडी लाइट से सजे ‘लाइट बाबा’ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वहीं नागा संन्यासियों ने राज्य सरकार से भत्ते के साथ बिजली और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई है।

बिखरते रिश्त समाज की जटिल सच्चाई बन गए हैं

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बाल मुकुन्द ओझा

परिवार के सम्बन्ध में देशभर से मिल रही ख़बरे बेहद चिंताजनक है। परिवार को हमारे समाज में सामाजिक और सार्वभौमिक संस्था के रूप में स्वीकारा गया है। अनुशासन, आपसी स्नेह और भाईचारा तथा मर्यादा, परिवार को एक खुशहाल परिवार बना देता है। बुजुर्गों का कहना है जिस परिवार में एकता की भावना होती है, उसी घर में ही सुख-शांति और सम्पन्नता का निवास होता है। यही सामाजिक संस्था आज खंडित होने की स्थिति में है। परिवार और बिखरते रिश्ते आज समाज की एक जटिल सच्चाई बन गए हैं।  परिवार की व्यवस्था आज की नहीं है, बल्कि ऋषि-मुनियों की देन है। लेकिन आज दरकते रिश्तों से परिवार व्यवस्था टूट रही है जो समाज के लिए ठीक नहीं है। आज भी देश और दुनियां, परिवार और संयुक्त परिवार की अहमियत को लेकर विवादों में उलझी है। भारत में संयुक्त परिवार प्रणाली बहुत प्राचीन समय से ही विद्यमान रही है। वह भी एक जमाना था जब भरा पूरा परिवार हँसता खेलता और चहकता था और एक दूसरे से जुड़ा रहता था। बच्चों की किलकारियों से मोहल्ला गूंजता था। पैसे कम होते थे पर उसमे भी बहुत बरकत होती थी। घर में कोई हंसी खुशी की बात होती थी तो बाहर वालों को बुलाने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी। आज परिवार  छोटे हो गए हैं और टूटते जा रहे हैं। हमारे रिश्ते बिखरते जा रहे हैं। संयुक्त परिवार की आज के समय में महती आवश्यकता है। संयुक्त परिवारों के अभाव में भाईचारा एवं पारिवारिक वातावरण खत्म होने लगा है। परिवार में रिश्तो की नीरसता और संवादहीनता को दूर करने परस्पर भाईचारे व तालमेल को बैठाने के लिए रिश्तो में सकारात्मक सोच को बढ़ाने की जरुरत है। परिवार के सभी छोटे हुए बड़े सदस्यों की भावनाओ का सम्मान करे तथा दिन भर  घटित होने वाली छोटी-छोटी बातों और दुख-सुख को आपस में बांटे करे।

संयुक्त राष्ट्र ने 1994 को अंतर्राष्ट्रीय परिवार वर्ष घोषित किया था। समूचे संसार में लोगों के बीच परिवार की अहमियत बताने के लिए हर साल 15 मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाने लगा है। आज बहुत.से ऐसे परिवार हैं जिन्हें एक.दूसरे से खुलकर बात करने के लिए ज्यादा वक्त नहीं मिल पाता। आज के जमाने में लाइफ स्टाइल कितनी बदल गयी है। बच्चे बहुत छोटी उम्र में ही स्कूल जाना शुरू कर देते हैं। बहुत.से माता.पिता  काम पर चले जाते हैं। जो थोड़ा.बहुत समय वे साथ होते भी हैं वह भी टीवी.कंप्यूटर या फोन पर चला जाता है। बहुत.से परिवारों में बच्चे और माता.पिता अजनबियों की तरह अपनी.अपनी जिंदगी जीते हैं। उनके बीच जरा.भी बातचीत नहीं होती। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में परिजनों से आपस में बात करने में जो खुशी और आनंद मिलता है उसकी कल्पना शब्दों में नहीं की जा सकती। परिजनों से बात करने का सुख अब बिरलों को ही मिल पाता है। इससे तनाव कम होने के साथ विभिन्न पारिवारिक दिक्कतों और समस्याओं का एक ही जाजम पर हाथोंहाथ निपटारा हो जाता है। परिवार मर्यादा और आदर्श का जीवंत उदहारण है। यह सामाजिक संगठन की मौलिक इकाई है। परिवार के अभाव में मानव समाज का अस्तित्व नामुमकिन है। फैमिली की बुनियाद उनके बीच का प्यार है जो सबको एक साथ जोड़ कर रखता है। अक्सर देखा जाता है परिजन रहते एक छत के नीचे है मगर उनमें आपसी बातचीत नहीं हो पाती है। इससे परिवार में घुटन और तनाव के साथ असुरक्षा का भाव रहता है। यदि एक दिन में एक घंटे भी परिजन साथ बैठ कर बातचीत करलें तो परिवार की खुशियां द्विगुणित हो सकती है।

हमारा देश भारत, विश्व में परिवार मर्यादा और आदर्श का जीवंत उदहारण है। यह सामाजिक संगठन की मौलिक इकाई है। परिवार के अभाव में मानव समाज का अस्तित्व नामुमकिन है। पहले मानव एक कबीले के रूप में रहता था। सभ्यता और संस्कृति के विकास के साथ परिवार की परिभाषा भी बदलती गई। आज संयुक्त परिवार भी विघटन के कगार पर है। लोग एकाकी रहने लगे है। सियासी प्रगति की अंधी दौड़ में हमने दुनिया को अवश्य अपनी मुट्ठी में कर लिया है मगर परिवार नामक संस्था से विमुख होते जा रहे है। इसी का नतीजा है देश में पारिवारिक समस्याएं बढ़ती जा रही है जिसका खामियाजा बच्चे से बुजुर्ग तक को उठाना पड़ रहा है। एक ही परिवार में धीरे धीरे एक दूसरे से आपसी बातचीत बंद होने से अनेक समस्याएं उठ खड़ी हुई है। समय रहते बातचीत का रास्ता नहीं खुला तो तनाव, घुटन और अवसाद का सामना करना पड़ सकता है। बातचीत और आपसी संवाद खुशियों का खजाना है जिससे मरहूम होना किसी भी परिवार के लिए संभावित व्याधि को आमंत्रित करना है। महानगरीय संस्कृति ने परिवार व्यवस्था को मटियामेट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है फलस्वरूप मानव को अनेक संकटों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर परिवार विघटित होने से समाज व्यवस्था गड़बड़ाने लगी है।

बाल मुकुन्द ओझा

वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

डी .32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर

                                                                  

शिक्षा और सुरक्षा के बीच फँसी छात्राएँ

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यौन शोषण के अड्डे बनते स्कूल-कॉलेज

– डॉ. प्रियंका सौरभ

शिक्षा को भारतीय समाज में ‘मंदिर’ कहा जाता रहा है—एक ऐसा पवित्र स्थान जहाँ ज्ञान, संस्कार और भविष्य का निर्माण होता है। लेकिन हाल के वर्षों में जिस तरह से शिक्षण संस्थानों से यौन उत्पीड़न, मानसिक शोषण, डर और असुरक्षा की खबरें सामने आ रही हैं, उसने इस धारणा को गहरी चोट पहुँचाई है। सवाल यह नहीं है कि घटनाएँ हो रही हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या हमारे स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय वास्तव में छात्राओं के लिए सुरक्षित हैं?

हरियाणा सहित देश के अनेक राज्यों में शिक्षा संस्थानों से जुड़े यौन उत्पीड़न के मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समस्या किसी एक संस्थान या एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। प्रोफेसरों पर आरोप, प्रबंधन की भूमिका, शिकायतों को दबाने की प्रवृत्ति और पीड़िताओं को चुप कराने का सामाजिक दबाव—ये सब मिलकर एक ऐसी संरचना बनाते हैं, जहाँ अपराध से ज्यादा खतरनाक हो जाता है उसका छिपाया जाना।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अधिकांश मामलों में पीड़ित सामने आने से डरती हैं। डर—करियर के खत्म हो जाने का, बदनामी का, संस्थान से निकाले जाने का और समाज द्वारा दोषी ठहरा दिए जाने का। यही डर अपराधियों को ताकत देता है और व्यवस्था को मौन रहने का बहाना। जब शिकायत करना ही जोखिम बन जाए, तब कानून की मौजूदगी भी बेमानी लगने लगती है।

कानून अपने स्तर पर मौजूद है। यौन उत्पीड़न से जुड़े नियम, आंतरिक शिकायत समितियाँ (आईसीसी), विशाखा दिशानिर्देश और पोश अधिनियम—सब कुछ कागजों में है। लेकिन वास्तविकता यह है कि कई संस्थानों में ये समितियाँ या तो नाममात्र की हैं या फिर प्रबंधन के प्रभाव में काम करती हैं। शिकायतकर्ता को न्याय दिलाने के बजाय मामले को “संस्था की छवि” के नाम पर दबाने की कोशिश की जाती है। यही कारण है कि न्याय की प्रक्रिया पीड़िता के लिए एक और मानसिक उत्पीड़न बन जाती है।

शिक्षण संस्थानों में सत्ता का असंतुलन भी इस समस्या की जड़ में है। शिक्षक, प्रबंधन और प्रशासन के पास मूल्यांकन, नियुक्ति, प्रमोशन और भविष्य तय करने की शक्ति होती है। इस शक्ति का दुरुपयोग जब व्यक्तिगत इच्छाओं के लिए किया जाता है, तो छात्रा या जूनियर स्टाफ खुद को असहाय महसूस करता है। यही असहायता अपराध को जन्म देती है और अपराधी को संरक्षण।

एक और गंभीर मुद्दा है—संवेदनशीलता की कमी। शिक्षा केवल पाठ्यक्रम और डिग्री तक सीमित हो गई है। नैतिकता, लैंगिक सम्मान और मानवीय मूल्यों की बात भाषणों तक सिमट गई है। जब शिक्षक ही मर्यादा लांघते दिखाई दें, तो छात्रों को समाज से क्या संदेश जाता है? ऐसे में “शिक्षा का मंदिर” कहना एक विडंबना बनकर रह जाता है।

राज्य सरकारों और शिक्षा विभागों की जिम्मेदारी यहीं खत्म नहीं होती कि वे आदेश जारी कर दें या हेल्पलाइन नंबर छपवा दें। ज़रूरत है प्रभावी निगरानी की, नियमित ऑडिट की और स्वतंत्र शिकायत तंत्र की। शिकायत समिति में बाहरी, निष्पक्ष और महिला प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए। शिकायत की गोपनीयता और पीड़िता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हो—यह केवल नियम नहीं, व्यवहार में दिखना चाहिए।

समाज की भूमिका भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। जब तक हम पीड़िता से सवाल पूछते रहेंगे—“वहाँ क्यों गई?”, “पहले क्यों नहीं बताया?”—तब तक अपराधी बेखौफ रहेगा। दोषी कौन है, यह तय करने की जिम्मेदारी कानून की है, लेकिन सहानुभूति और समर्थन समाज को देना होगा। चुप्पी तटस्थता नहीं, बल्कि अपराध के पक्ष में खड़ा होना है।

आज आवश्यकता है भरोसे की—ऐसे भरोसे की, जिसमें छात्रा निडर होकर शिकायत कर सके; शिक्षक अपने आचरण के प्रति जवाबदेह हों; और संस्थान अपनी छवि से ज्यादा अपने छात्रों की सुरक्षा को महत्व दें। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि सुरक्षित और संवेदनशील नागरिक तैयार करना भी है।

यदि सच में हमें शिक्षा को मंदिर बनाए रखना है, तो पहले उसे डर, शोषण और मौन की संस्कृति से मुक्त करना होगा। कानून मजबूत है, पर उससे ज्यादा मजबूत होना चाहिए संस्थानों का नैतिक साहस। क्योंकि जब शिक्षा असुरक्षित हो जाती है, तो केवल वर्तमान नहीं, पूरा भविष्य खतरे में पड़ जाता है।

-प्रियंका सौरभ 

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस,

कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार,

विद्युत दुर्घटनाएं रोकने हेतु कारपोरेशन अध्यक्ष का कड़ा रूख

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अधिशाषी अभियन्ता को निलम्बित करनें, तथा अधीक्षण अभियन्ता एंव मुख्य अभियन्ता को कारण बताओं नोटिस जारी करने के आदेश

विद्युत दुर्घटनाएं अत्यन्त दुखद इस पर जीरो टालरेन्स नीति

लखनऊ,
विद्युत दुर्घटनाओं पर उ0प्र0 पावर कारोरेशन के अध्यक्ष डा0 आशीष गोयल ने सख्त रूख अख्तिियार करते हये विगत नवम्बर में शाहजहापुर में हई दुर्घटना पर अधिशाषी अभियन्ता को भी निलम्बित करनें के निर्देश दिये। इस प्रकरण में अवर अभियन्ता एवं सहायक अभियन्ता को पहले ही निलम्बित किया जा चुका है।
शाहजहॉपुर जनपद के जलालाबाद में नवम्बर 2025 में अनुरक्षण कार्य करते हुये संविदा कर्मी की स्पर्शाधात से मृत्यु हो गयी थी। समीक्षा बैठक में उन्होनें पूॅछा की अधिशाषी अभियन्ता को क्यों छोडा गया। सुरक्षा उपकरण पहने बगैर कार्य क्यों कराया गया । इस सन्दर्भ में पहले ही निर्देश जारी किये जा चुके है कि जहॉ भी विद्युत दुर्घटना होगी वहॉ अधिशाषी अभियन्तापर भी कार्यवाही होगी।
अध्यक्ष ने शाहजहॉपुर के अधीक्षण अभियन्ता तथा मुख्य अभियन्ता को भी इस प्रकरण में नियम 10 के तहत कारण बताओं नोटिस जारी करनें के निर्देश दिया।
उन्होनें कहा कि विद्युत दुर्धटनायें रोकनी हैं इसके लिये जीरों टालरेन्स की नीति है यह अत्यन्त पीड़ा दायी हे। बिना सुरक्षा उपकरण पहनें कोई भी अनुरक्षण कार्य नहीं कराया जाये। यदि कहीं भी दुर्धटना होगी तो सख्त कार्यवाही होगी।
उन्होनें कहा कि अनुरक्षण कार्याे में सुरक्षा उपकरण अनिवार्य से रूप से पहन कर कार्य करें और उसको सोशल मीडिया पर भी ड़ाले।
डा0 आशीष कुमार गोयल ने कार्य में प्रगति न होने एवं खराब परर्फामेन्स को लेकर प्रयागराज, के अधीक्षण अभियन्ता एवं मुख्य अभियन्ता, मेरठ-1 के मुख्य अभियन्ता, अलीगड़ के मुख्य अभियन्ता को शो कॉज नोटिस देने के निर्देश दिये। साथ ही बादां और झॉसी में खराब राजस्व वसूली को लेकर दोनों जगहों के जेई, एस0डी0ओ0, अधिशासी अभियन्ता, अधीक्षण अभियन्ता, मुख्य अभियन्ता को नियम 10 के तहत नोटिस देने एवं एडवर्स इंन्ट्री देने के निर्देश दिये। अध्यक्ष ने कहा कि विद्युत बिल वसूली में किसी प्रकार की कोई कोताही नही बरती जायेगी जहॉ भी वसूली कम होगा वहा के समस्त जिम्मेदारों पर कार्यवाही होगी।
अध्यक्ष ने कहा कि समस्त प्रकार के ट्रांसफार्मर छतिग्रसतता रूकनी चाहिए। लगातार इसके लिये प्रयासरत रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहाकि जहॉ भी ट्रांसफार्मर डैमेज कम नहीं हुआ है वहॉ सख्त कार्यवाई करिये। अभी तक क्यों कार्यवाई नहीं हुई। ट्रांसफार्मर डैमेज पर सभी डिस्कॉम कार्यवाई करें। इसमें लापरवाही बरदास्त नहीं की जायेगी। दिसम्बर से लेकर अब तक जहॉ भी ट्रांसफार्मर डैमेज हो रहे हैं वहॉ जिम्मेदारी तय करते हुये सख्त कार्यवाई करिये। उन्होंने कहाकि मेन्टेनेन्स एवं बिजनेस प्लान का पूरा पैसा दिया जा रहा है फिर ट्रांसफार्मर डैमेज क्यों हो रहे हैं।
उ0प्र0 पावर कारपोरेशन अध्यक्ष डॉ0 आशीष गोयल ने कहा है कि विगत 1 दिसम्बर 2025 से पूरे प्रदेश में प्रारम्भ हुयी बिजली बिल राहत योजना को उपभोक्ताओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है। लेकिन अभी और अधिक मेहनत करने की आवश्यकता है। सभी वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि अपने अपने क्षेत्रों में योजना के पात्र उपभोक्ताओं का पंजीकरण कराकर बकाया जमा करायें।
अध्यक्ष ने कहा कि प्रत्येक उपभोक्ता से सम्पर्क करें। उसे फोन काल करें और व्यक्तिगत रूप से भी उससे सम्पर्क करके उसे योजना का लाभ लेने के लिये सहमत करें। अध्यक्ष ने कहा हर उपभोक्ता तक मुनादी पहॅुचायें। सम्पर्क करें तथा उसे बकाये की नोटिस दें तथा योजना के पाम्पलेट एवं सूचना पर्ची दें। माइक्रो प्लान बनाकर हर कार्मिक एजेन्सी (फिनटेक) को इसमें लगाकर कार्य करायें।
अध्यक्ष ने कहा कि बिजली चोरी के मामलों में बतायें कि योजना के माध्यम से मुकदमा तथा एफ.आई.आर का निस्तारण करायें, कोर्ट कचेहरी के चक्कर से बचें।
अध्यक्ष ने कहाकि विद्युत बिल वसूलने के लिये अभियान चलाइये। अध्यक्ष ने कहा कि बेहतर विद्युत व्यवस्था के लिये यह जरूरी है कि जितनी बिजली दे उतना राजस्व वसूलें और लाइन हानियॉ कम करेें।
अध्यक्ष ने कहाकि जहॉ भी एटीएण्डसी हानियॉ ज्यादा है वहॉ योजना बनाकर व्यवस्था सुधारें। सबस्टेशन वाइज रणनीति बना ली जाये। डॉ0 गोयल ने कहा कि फीडर वाइस मैनेजर के कार्यों की रेग्यूलर समीक्षा करिये।
अध्यक्ष ने कहा कि निवेश मित्र, झटपट पोर्टल तथा सोलर रूफटॉप में पेन्डेन्सी की शिकायतें नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहाकि सोलर रूफटॉप कनेक्शन में उपभोक्ताओं की अनेक शिकायते हैं। इस पर ध्यान देकर समस्या हल करायें।
कारपोरेशन के प्रबन्ध निदेशक पंकज कुमार ने भी बैठक की समीक्षा की। शक्ति भवन में सम्पन्न इस बैठक में सभी डिस्कॉमों के प्रबन्ध निदेशक तथा निदेशक तकनीकी एवं वाणिज्य के अतिरिक्त पावर कारपोरेशन के सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बेघर लोगों को शेल्टर देने की संवैधानिक जिम्मेदारी से सरकार पल्ला नहीं झाड़ सकती : हाई कोर्ट

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नई दिल्ली, 14 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि भारत एक सामाजिक कल्याण वाला देश है और लोगों को शेल्टर के अधिकार से वंचित करना जीवन के अधिकार से वंचित करने जैसा है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि बेघर लोगों को शेल्टर देने के अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से सरकार पल्ला नहीं झाड़ सकती है। उच्च न्यायालय ने दिल्ली में पड़ रही कड़ाके की ठंड के बीच एम्स और दूसरे अस्पतालों के बाहर मरीज़ों और उनके तीमारदारों की खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के मामले पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की। इस मामले पर अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज इस मामले पर कई दिशा-निर्देश जारी किए। कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद, दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन, पीडब्ल्यूडी, डीडीए, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली पुलिस आयुक्त के अलावा दिल्ली के सभी बड़े अस्पतालों को पक्षकार बनाने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने एम्स के अलावा सफदरजंग अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और राम मनोहर लोहिया अस्पताल को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।

उच्च न्यायालय ने इस बात पर गौर किया कि ठंड में बेघरों, मरीजों और उनके तिमारदारों की सुरक्षा के लिए इंतजाम नाकाफी हैं। कोर्ट ने कहा कि विंटर एक्शन प्लान को लागू करने की प्रभावी योजना नहीं है। शेल्टर होम की कमी है। अस्पतालों के पास बेघर आबादी का गलत सर्वे और उनके लिए शेल्टर होम की जरुरत और क्षमता के आंकड़ों में काफी अंतर है।

उच्च न्यायालय ने इस बात पर भी गौर किया कि दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड ने एम्स, वीएमसीसी और लेडी हार्डिंग अस्पताल को पत्र लिखकर अस्पाताल के खुले स्थानों पर पैगोडा टेंट स्थापित करने की अनुमति मांगी थी। सुनवाई के दौरान एम्स ने कहा कि उसने शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को पैगोडा टेंट स्थापित करने की अनुमति देने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि वर्तमान में पर्याप्त उपाय हैं और पैगोगा टेंट से सुरक्षा की चिंताएं बढ़ सकती हैं।

उच्च न्यायालय ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को निर्देश दिया कि वो अस्पतालों के आसपास के सबवे को अपने हाथों में ले और वहां पर्याप्त शेल्टर होम्स स्थापित करे। बोर्ड अस्पतालों के नजदीक खाली स्थानों की पहचान करेगा और वहां टेंट या पंडाल स्थापित करेगा। इसमें सभी प्राधिकार सहयोग करेंगे. अगर कोई अधिकारी इसमें सहयोग नहीं करेगा को उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उच्च न्यायालय ने साकेत कोर्ट के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज की अध्यक्षता में 15 जनवरी को बैठक करने का आदेश दिया। इस बैठक में दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद, दिल्ली मेट्रो, एम्स, शहरी आश्रय बोर्ड, वीएमसीसी, एम्स, राममनोहर लोहिया अस्पताल, दिल्ली पुलिस, डीडीए समेत दूसरे प्राधिकारों के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे और शॉर्ट टर्म योजना बनाएंगे और उसी दिन उस पर अमल करेंगे। उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर किसी मसले पर मतभेद होता है तो प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज की ओर से हस्तक्षेप कर रास्ता निकाला जाएगा। कोर्ट ने प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज को निर्देश दिया कि वो सुनवाई की अगली तिथि को इस संबंध में रजिस्ट्रार जनरल के जरिये रिपोर्ट दाखिल करेंगे।

बता दें कि उच्च न्यायालय ने 12 जनवरी को इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि ईश्वर न करें, लेकिन हमे कभी ऐसे खुले आसमान के नीचे रात गुजरानी पड़े तो हम पर न जाने क्या बीतेगी। सरकारी महकमे को इसे लेकर और ज़्यादा संवेदनशील होने की जरूरत है। उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि वो राजधानी के शेल्टर होम में पर्याप्त जगह और सुविधाएं उपलब्ध कराए।

दुर्घटना में स्थाई दिव्यांग नाबालिग को मुआवजे का अधिकार : हाईकोर्ट

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प्रयागराज, 14 जनवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक आदेश में कहा है कि दुर्घटना में स्थाई तौर पर दिव्यांग हुए नाबालिग को कुशल श्रमिक की तरह मुआवजा पाने का अधिकार है।

यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन ने प्रयागराज के संगम लाल और न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की अपीलों पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण इलाहाबाद से निर्धारित मुआवजा बढ़ाने की अपील पर कहा कि भले ही यह मान लिया जाए कि दुर्घटना के समय दावा करने वाला केवल 16 वर्ष का था और किसी भी प्रकार की आय अर्जित नहीं कर रहा था, फिर भी उसे कुशल श्रमिक के आधार पर मुआवजा पाने का अधिकार है।

अधिकरण ने अपीलार्थी को 5,03,310 रुपये मुआवजा सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया था, जिसे दुर्घटनाग्रस्त ट्रक की बीमा कम्पनी को अदा करना था। बीमा कम्पनी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि पीड़ित को केवल 60 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता हुई है, जिसे गलत तरीके से 80 प्रतिशत मान लिया गया। वहीं पीड़ित ने मुआवजा बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि उसकी 100 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता हुई है लेकिन ट्रिब्युनल ने केवल 80 प्रतिशत माना।

पीड़ित ने बताया कि दुर्घटना में उसका दायां पैर घुटने से कट गया और बाएं पैर की दो उंगलियां भी काटनी पड़ीं, जिससे वह किसी भी प्रकार का शारीरिक श्रम करने में असमर्थ हो गया। वह खलासी (हेल्पर) के रूप में ट्रक पर काम करता था इसलिए उसकी आजीविका पूरी तरह समाप्त हो गई।

कोर्ट ने कहा कि सीएमओ प्रतापगढ़ के 60 प्रतिशत दिव्यांगता और मुंबई के नायर अस्पताल से जारी 80 प्रतिशत दिव्यांगता के प्रमाणपत्र को किसी ने चुनौती नहीं दी है। यह भी माना गया कि पीड़ित शारीरिक श्रम आधारित काम करता था और उसकी कार्यात्मक दिव्यांगता 100 प्रतिशत है। कोर्ट ने काजल बनाम जगदीश चंद, मास्टर आयुष बनाम रिलायंस जनरल इंश्योरेंस, बेबी साक्षी ग्रेओला और हितेश नागजीभाई पटेल मामलों का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति को 100 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता हो जाती है, तो उसकी आय का आकलन कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि अनुमानित रूप में। इसी के साथ कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर 16,59,510 रुपये सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दावा दाखिल करने की तिथि से भुगतान करने का आदेश दिया। यह राशि भी ट्रक की बीमा कम्पनी चुकाएगी।

वेदांता के शेयर में छह फीसदी की तेजी,बाजार पूंजीकरण 2.64 लाख करोड़ रुपये

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नई दिल्‍ली, 14 जनवरी (हि.स)। विभिन्न कारोबार से जुड़े वेदांता लिमिटेड के शेयर में आज छह फीसदी का उछाल आया, जिससे वह रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। इसके साथ कंपनी का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) 2,64,224.92 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस महीने वेदांता के शेयर में अब तक करीब 12 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है।

बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज (बीएसई) में कंपनी का शेयर बुधवार को 6.06 फीसदी की उछाल के साथ 675.70 रुपये पर बंद हुआ। वहीं, कारोबार के दौरान एक समय यह 6.63 फीसदी की बढ़त के साथ 679.40 रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा था। वहीं, नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज (एनएसई) में यह 6.04 प्रतिशत की तेजी के साथ 675.75 रुपये पर रहा। इस तेजी के साथ कंपनी का बाजार पूंजीकरण बढ़कर 2,64,224.92 करोड़ रुपये हो गया।

इस महीने अभी तक बीएसई पर कंपनी के शेयर में करीब 11.88 फीसदी का उछाल आया है। कंपनी का शेयर पिछले साल करीब 36 फीसदी चढ़ा था। हालांकि, जहां वेदांता के शेयर में तेजी आई, वहीं घरेलू शेयर बाजार में नरमी का रुख रहा। 30 शेयरों पर आधारित बीएसई का सेंसेक्स 244.98 अंक टूटकर 83,382.71 पर बंद हुआ। वहीं, 50 शेयरों पर आधारित एनएसई का निफ्टी 66.70 अंक के नुकसान के साथ 25,665.60 पर आ गया।

मकर संक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में ‘आरआरआर सेंटर’ का शुभारम्भ

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गोरखपुर, 14 जनवरी (हि.स.)। मकर संक्रांति के अवसर पर गोरखपुर नगर निगम ने स्वच्छता और सेवा का संगम प्रस्तुत करते हुए गोरखनाथ मंदिर मेला परिसर में आरआरआर (रिड्यूस, रीयूज, रिसाइकिल) केंद्र एवं अस्थाई कार्यालय का संचालन शुरू किया है।

बुधवार को महापौर डॉ. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह और एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से इन केंद्रों का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा मेले में आए श्रद्धालुओं को गर्म वस्त्र और ‘वार्षिक स्वच्छता कैलेंडर’ वितरित किए गए।

–स्वच्छता और सामाजिक सरोकार का समन्वय

महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने बताया कि महानगर को पर्यावरण-अनुकूल और संवेदनशील बनाने की दिशा में नगर निगम वर्तमान में सात आरआरआर केंद्रों का संचालन कर रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से नागरिक अपने अनुपयोगी वस्त्र, जूते, बैग और अन्य घरेलू सामान दान कर सकते हैं। यह पहल न केवल कचरा प्रबंधन में सहायक है, बल्कि इसके जरिए एकत्र सामान को छाँटकर गरीब और वंचित वर्ग के लोगों तक पहुँचाया जाता है। जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति की मदद सुनिश्चित हो रही है।

कार्यक्रम के दौरान विधायक विपिन सिंह और एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह ने नगर निगम के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। इस अवसर पर उप सभापति पवन त्रिपाठी, नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार व दुर्गेश मिश्र, मुख्य अभियंता अमित शर्मा सहित कई पार्षद और निगम के अधिकारी उपस्थित रहे।

–नागरिकों से दान की अपील

नगर निगम ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने पुराने लेकिन उपयोगी सामान को इन आरआरआर केंद्रों पर दान करें। अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने आश्वस्त किया कि निगम यह सुनिश्चित करता है कि दान किया गया सामान पूरी तरह स्वच्छ और उपयोगी स्थिति में ही जरूरतमंदों तक पहुँचे। यह अभियान शहर को स्वच्छ, सुंदर और मानवीय बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हो रहा है।