बेघर लोगों को शेल्टर देने की संवैधानिक जिम्मेदारी से सरकार पल्ला नहीं झाड़ सकती : हाई कोर्ट

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नई दिल्ली, 14 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि भारत एक सामाजिक कल्याण वाला देश है और लोगों को शेल्टर के अधिकार से वंचित करना जीवन के अधिकार से वंचित करने जैसा है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि बेघर लोगों को शेल्टर देने के अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से सरकार पल्ला नहीं झाड़ सकती है। उच्च न्यायालय ने दिल्ली में पड़ रही कड़ाके की ठंड के बीच एम्स और दूसरे अस्पतालों के बाहर मरीज़ों और उनके तीमारदारों की खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के मामले पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की। इस मामले पर अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज इस मामले पर कई दिशा-निर्देश जारी किए। कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद, दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन, पीडब्ल्यूडी, डीडीए, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली पुलिस आयुक्त के अलावा दिल्ली के सभी बड़े अस्पतालों को पक्षकार बनाने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने एम्स के अलावा सफदरजंग अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और राम मनोहर लोहिया अस्पताल को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।

उच्च न्यायालय ने इस बात पर गौर किया कि ठंड में बेघरों, मरीजों और उनके तिमारदारों की सुरक्षा के लिए इंतजाम नाकाफी हैं। कोर्ट ने कहा कि विंटर एक्शन प्लान को लागू करने की प्रभावी योजना नहीं है। शेल्टर होम की कमी है। अस्पतालों के पास बेघर आबादी का गलत सर्वे और उनके लिए शेल्टर होम की जरुरत और क्षमता के आंकड़ों में काफी अंतर है।

उच्च न्यायालय ने इस बात पर भी गौर किया कि दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड ने एम्स, वीएमसीसी और लेडी हार्डिंग अस्पताल को पत्र लिखकर अस्पाताल के खुले स्थानों पर पैगोडा टेंट स्थापित करने की अनुमति मांगी थी। सुनवाई के दौरान एम्स ने कहा कि उसने शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को पैगोडा टेंट स्थापित करने की अनुमति देने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि वर्तमान में पर्याप्त उपाय हैं और पैगोगा टेंट से सुरक्षा की चिंताएं बढ़ सकती हैं।

उच्च न्यायालय ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को निर्देश दिया कि वो अस्पतालों के आसपास के सबवे को अपने हाथों में ले और वहां पर्याप्त शेल्टर होम्स स्थापित करे। बोर्ड अस्पतालों के नजदीक खाली स्थानों की पहचान करेगा और वहां टेंट या पंडाल स्थापित करेगा। इसमें सभी प्राधिकार सहयोग करेंगे. अगर कोई अधिकारी इसमें सहयोग नहीं करेगा को उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उच्च न्यायालय ने साकेत कोर्ट के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज की अध्यक्षता में 15 जनवरी को बैठक करने का आदेश दिया। इस बैठक में दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद, दिल्ली मेट्रो, एम्स, शहरी आश्रय बोर्ड, वीएमसीसी, एम्स, राममनोहर लोहिया अस्पताल, दिल्ली पुलिस, डीडीए समेत दूसरे प्राधिकारों के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे और शॉर्ट टर्म योजना बनाएंगे और उसी दिन उस पर अमल करेंगे। उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर किसी मसले पर मतभेद होता है तो प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज की ओर से हस्तक्षेप कर रास्ता निकाला जाएगा। कोर्ट ने प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज को निर्देश दिया कि वो सुनवाई की अगली तिथि को इस संबंध में रजिस्ट्रार जनरल के जरिये रिपोर्ट दाखिल करेंगे।

बता दें कि उच्च न्यायालय ने 12 जनवरी को इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया था। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि ईश्वर न करें, लेकिन हमे कभी ऐसे खुले आसमान के नीचे रात गुजरानी पड़े तो हम पर न जाने क्या बीतेगी। सरकारी महकमे को इसे लेकर और ज़्यादा संवेदनशील होने की जरूरत है। उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि वो राजधानी के शेल्टर होम में पर्याप्त जगह और सुविधाएं उपलब्ध कराए।

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