सिविल कोर्ट और हाईकोर्ट में एक साथ नहीं चल सकता मामला

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शंकराचार्य के निर्माण पर रोक लगाने वाली याचिका हाईकोर्ट से खारिज

जबलपुर, 31 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जस्टिस विशाल मिश्रा की पीठ ने सुभाष चंद जायसवाल की शंकराचार्य के निर्माण को अवैध बताकर रोकने की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि एक ही विवाद पर सिविल कोर्ट और हाईकोर्ट में केस नहीं चल सकता।

दरअसल मंगलवार को कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर भौतिक तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाने के साथ 17 दिसंबर 2025 को दिया गया अस्थायी रोक का आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा, सिविल कोर्ट ही इस पर फैसला करेगा। उक्त निर्णय 27 जनवरी को दिया गया है, किंतु 30 जनवरी 2026 रात को इसे हाईकोर्ट के जरिए सार्वजनिक किया गया।

मामले में याचिकाकर्ता सुभाष चंद जायसवाल ने हाईकोर्ट में नगर निगम जबलपुर और अन्य के खिलाफ याचिका दायर कर आरोप लगाया गया कि प्रतिवादी नंबर-2, अनंत श्री विभूषित शंकराचार्य ज्योतिष द्वारा जबलपुर के लक्ष्मीपुर क्षेत्र स्थित खसरा नंबर 153/1 की भूमि पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। यह भूमि करीब 5400 वर्गफुट क्षेत्रफल की बताई गई है। याचिका में दावा किया गया कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने इस निर्माण को अनुमति देने से इंकार कर दिया है। इसके बावजूद निर्माण जारी है, जिसे तत्काल रोका और ध्वस्त किया जाए।

जस्टिस विशाल मिश्रा ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्पष्ट कहा कि रिट याचिका और सिविल सूट में मांगी गई राहतें एक जैसी हैं। कानून समानांतर कार्यवाही की अनुमति नहीं देता। याचिकाकर्ता ने महत्वपूर्ण और भौतिक तथ्यों को छिपाकर कोर्ट को गुमराह करने का प्रयास किया। इस मामले में हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर 2025 को निर्माण पर अस्थायी रोक लगाई थी। लेकिन याचिका खारिज होने के साथ ही यह स्टे आदेश भी स्वतः समाप्त कर दिया गया।

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