समय की पुकार : सूफ़ी विचारों का प्रसार

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       -निर्मल रानी 

                                    आज लगभग पूरी दुनिया स्वार्थ,नफ़रत,ईर्ष्या,विद्वेष,धार्मिक व जातीय मतभेद,वर्चस्व व विस्तारवाद की आग में जल रही है। धर्म,जाति,भाषा वर्ग व समुदाय के आधार पर लोग एक दूसरे की जान के दुश्मन बने हुये हैं। ऐसे ख़तरनाक माहौल में केवल संतों व फ़क़ीरों की शिक्षा उनके दिखाये गये मानवतावादी रास्ते,उनके परोपकारी विचार व उनकी संगत ही समाज को सद्मार्ग दिखा सकती है। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के दरबार में गत 66 वर्षों से आयोजित होता आ रहा सप्ताह भर चलने वाला यह सर्व धर्म समागम एक ऐसा ही प्रयास है जहाँ हर धर्म व हर जाति के लोग प्रत्येक आस्था व विश्वास के लोग क्या अमीर तो क्या ग़रीब, सभी समान रूप से शिरकत करते आ रहे हैं। प्रत्येक वर्ष इसी अवसर पर रामायण व भागवत गीता का अखंड पाठ आयोजित होता है साथ ही पवित्र गुरु ग्रन्थ साहब का अखंड पाठ भी रखा जाता है। इतना ही नहीं बल्कि प्रत्येक वर्ष उर्स-ए-मुबारक के अंतिम दो दिनों में यानी 19 व 20 जनवरी की रात सूफ़ी संगीत व क़व्वाली की महफ़िल भी सजाई जाती है। 

             इस पवित्र स्थान की संस्थापक मर्द – ए -क़लन्दर माता राम बाई अम्मी हुज़ूर जी का जीवन परोपकार,सर्वधर्म समभाव व मानवतावादी मूल्यों पर आधारित था। अम्मी हुज़ूर जी संतों व फ़क़ीरों की शिक्षाओं का अनुसरण करने वाली एक सच्ची व आदर्शवादी फ़क़ीर थीं। और आज अम्मी हुज़ूर जी के वारिस व गद्दी नशीन शहज़ादा पप्पू सरकार द्वारा इसी सिलसिले व रिवायत को शानदार तरीक़े से अंजाम देने की कोशिश की जा रही है। अपने निजी व्यापार तथा पारिवारिक व्यस्तताओं को छोड़ कर शहज़ादा पप्पू सरकार जी गत् चालीस वर्षों से भी लंबे समय से पूरे समर्पण,श्रद्धा तथा विश्वास के साथ अपनी गद्दीनशीनी का कर्तव्य निभाते हुए अम्मी हुज़ूर तथा सख़ी सरवर बाबा सख़ी चंद जी के सपनों को साकार करते हुए इस स्थल को चंडीगढ़ के एक सबसे विशाल,आकर्षक तथा सर्वधर्म समभाव के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में स्थापित किए जाने के प्रयास में लगे हुये हैं। उनका मानना है कि ईश्वर-अल्लाह,वाहेगुरू तथा गॉड सभी एक ही सर्वोच्च सत्ता के अलग-अलग नाम हैं। राम दरबार की परंपरा किसी भी व्यक्ति में विराजमान ‘मैं ही मैं’ को समाप्त कर ‘तू ही तू’ के विचारों को धारण कराने की है। ‘तू ही तू’ राम दरबार का मुख्य वाक्य भी है। राम दरबार की शिक्षाएं सभी धर्मों के आम लोगों को अंधविश्वास,पाखंड आदि से मुक्त कराती हैं। राम दरबार न केवल धार्मिक वैमनस्य को समाप्त कर सांप्रदायिक सद्भाव बनाने का मार्ग दिखाता है बल्कि छूआछूत व जात-पात जैसी प्राचीन विघटनकारी दक़ियानूसी परंपराओं को समाप्त करने की दिशा में भी कार्य करता है। सहभोज या सामूहिक लंगर व भंडारा इसी दिशा में उठाया गया एक सकारात्मक क़दम हैं।

सप्ताह भर चलने वालेइस पूरे आयोजन में सभी धर्मों के लोगों का एक साथ मिल-बैठ कर किसी धार्मिक समागम में शिरकत करना जहां अपने-आप में एक अनूठा प्रयास है बल्कि यह इस समय पूरे देश व दुनिया की सबसे बड़ी ज़रूरत भी है। आज जहां हमारे देश में अनेक ऐसी शक्तियां सक्रिय हैं जो लोगों को धर्मों व जातियों के नाम पर लड़वा रही हैं। वहीं शहज़ादा पप्पू सरकार की गद्दीनशीनी में संचालित होने वाला राम दरबार, भारत का एक ऐसा गौरवपूर्ण स्थान है जहाँ हर धर्म व समुदाय के लोग पूरी श्रद्धा व आस्था के साथ अपने शीश झुकाते हुए नज़र आते हैं। राम दरबार एक ऐसा स्थान है जहाँ विभिन्न धर्मों,आस्थाओं तथा विश्वासों को लेकर टकराव अथवा विवाद की बात नहीं होती बल्कि यहां मानवता का संदेश दिया जाता है। यहाँ धर्म की रूढ़िवादी व अतिवादी मान्यताओं से अलग हटकर सहनशीलता,मानवता, प्रेम,सद्भाव तथा परस्पर भाईचारे को सबसे अधिक अहमियत दी जाती है। राम दरबार के भक्तगण एक-दूसरे के खाने,पहनने,उसके धार्मिक पूर्वाग्रहों पर न तो चर्चा करना चाहते हैं न ही इन्हें परस्पर विवाद या चर्चा का विषय समझते हैं।

                            शहज़ादा पप्पू सरकार इस आयोजन के संबंध में फ़रमाते हैं कि चूंकि मानवता धर्म से कहीं ज़्यादा बड़ी चीज़ है इसलिए सभी धर्मों के लोगों को अपने-अपने धर्म के उसी स्वरूप को मानना चाहिए तथा उन बातों पर अमल करना चाहिए जो हमें मानवता, प्रेम,सद्भाव,सहयोग तथा भाईचारे की सीख देती हों। यदि किसी भी धर्म का मानने वाला कोई भी व्यक्ति धार्मिकता का चोला लपेटकर समाज में ज़हर फैलाए,समाज को धर्म के नाम पर विभाजित करने की कोशिश करे,देश को धर्म व जाति के नाम पर बांटने या तोड़ने की कोशिश करे,धर्म के नाम पर हिंसा,आगज़नी,हत्या तथा लूटपाट को प्रोत्साहित करे या धर्म को धन संग्रह करने का धंधा बनाये, ऐसा व्यक्ति धार्मिक कहने योग्य ही नहीं है। देश के अमनपसंद लोगों को ऐसे फ़िरक़ा परस्त व सांप्रदायिकतावादी,लोभी,स्वार्थी ,दुराचारी तथा व्याभिचारी क़िस्म के तथाकथित स्वयंभू धर्मगुरुओं से दूर रहना चाहिए। और एक सच्चे व अच्छे इंसान को हमेशा यही कोशिश करनी चाहिए कि वह प्रत्येक माध्यम से संसार में मानवता व भाईचारे की शमा रौशन करे।

 दरबार की संस्थापकमर्दे क़लन्दरअम्मी हुज़ूर के तेज, उनके प्रताप व चमत्कारों से जहां चंडीगढ़ के आम लोग, प्रशासनिक अधिकारी, राजनेता,अनेक राजघरानों के लोग,बुद्धिजीवी व उद्योगपति वर्ग के लोग प्रभावित होते थे वहीं मुंबई की फि़ल्म नगरी के अनेक प्रमुख लोग भी राम दरबार के मोह से अछूते नहीं रहे। अम्मी हुज़ूर जी द्वारा सर्वधर्म संभाव व सांप्रदायिक सौहार्द्र की मशाल रौशन करने का फ़िल्म जगत के लोगों पर इतना प्रभाव पड़ा कि न केवल दरबार में विशेष हाज़िरी लगाने के लिये बल्कि जब कभी फ़िल्मी दुनिया के लोग अपनी फ़िल्म की शूटिंग के सिलसिले में भी चंडीगढ़ अथवा हिमाचल प्रदेश आते-जाते तो उनका पड़ाव राम दरबार ही रहता था। वे लोग राम दरबार में ही अम्मी हुज़ूर के सानिध्य में रहकर यहां का पवित्र व लज़ीज़ लंगर ग्रहण करते तथा बल्कि‘अम्मी हुज़ूर ‘से अपनी फ़िल्मों की व शूटिंग की सफलता के लिए आर्शीवाद लेते तथा क़व्वालियाँ सुना करते थे। मर्द-ए-क़लन्दर माता राम बाई ‘अम्मी हुज़ूर ‘ जी के फ़िल्म जगत के अनेक भक्तों में एक प्रसिद्ध अभिनेता दादा साहब फ़ाल्के अवार्ड विजेता प्रसिद्ध अभिनेता ‘प्राण ‘ भी थे। सादा जीवन उच्च विचार की प्रतिमूर्ति अम्मी हुज़ूर जी हमेशा चंडीगढ़ व आस पास प्रायः अपने निजी रिक्शे पर ही आना जाना पसंद करते थे। परन्तु अपने शिष्य शहज़ादा पप्पू सरकार जी के निवेदन पर उन्होंने दरबार में जब पहली कार लेने का विचार किया तो अभिनेता ‘प्राण ‘ ने ही दरबार में पहली फ़िएट कार जून 1981 में’ अम्मी हुज़ूर ‘ जी को तोहफ़े में पेश की थी ।            

                             दरअसल आज हमारे देश को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को किसी कट्टरपंथी विचारधारा या संकीर्णतावादी धर्म सोच या विश्वास की नहीं बल्कि मर्द – ए -क़लन्दर माता राम बाई अम्मी हुज़ूर जी जैसे मानवतावादी व परोपकारी फ़क़ीरों की सोच का अनुसरण करने की ज़रूरत है ताकि दुनिया में अमन शांति प्रेम भाईचारा व सद्भाव का पैग़ाम पहुँचाया जा सके। आज दरबार के गद्दीनशीन शहज़ादा पप्पू सरकार जी के अथक प्रयासों से अपने गुरु मर्द-ए-क़लन्दर माता राम बाई ‘अम्मी हुज़ूर ‘ जी की स्मृति में बनाया जाने वाला चंडीगढ़ का यह आलीशान ‘राम दरबार ‘ भवन व उनकी यादों को संरक्षित करने की कोशिशें रहती दुनिया तक लोगों को प्रेम सद्भाव भाईचारा व सामाजिक एकता का सन्देश देती रहेंगी। 

                                                                                                      निर्मल रानी 

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