संसद का तीसरा दिन — सामान्य आवागमन के साथ कामकाज पुनरारंभ

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आज Lok Sabha और Rajya Sabha, दोनों सदनों में तीसरे दिन की कार्रवाई सुचारू रूप से शुरू हुई। पिछले दो दिनों में हंगामे व विपक्ष–सरकार के बीच गतिरोध के बाद, आज सरकार व विपक्ष के बीच हुई सर्वदलीय बैठक के बाद सदन नियमित कार्यवाही के लिए सहमत हुए। इस समझौते के कारण सांसदों ने शांतिपूर्ण तरीके से सदन की प्रक्रियाओं को फिर से आगे बढ़ाने का फैसला लिया।

तीसरे दिन की शुरुआत लोकसभा में प्रश्नकाल (Question Hour) के साथ हुई। इस दौरान सांसदों ने जनवितरण प्रणाली (PDS), खाद्य एवं वितरण व्यवस्था, सार्वजनिक वितरण तथा अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं से संबंधित सवाल पूछे। सरकार की ओर से प्रल्हाद जोशी (मंत्री, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण) ने विस्तृत जवाब दिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि आवश्यक हुआ, तो खाद्य कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के गोदाम बढ़ाए जाएंगे तथा सुनिश्चित किया जाएगा कि लाभार्थियों को समय-समय पर अनाज प्राप्त हो।

इस तरह, प्रश्नकाल ने आज के दिन जनता की रोजमर्रा की समस्याओं व सरकार की जवाबदेही दोनों पहलुओं को सक्रिय रूप से सामने रखा।

प्रश्नकाल के बाद लोकसभा में एक नया विधेयक — Central Excise (Amendment) Bill, 2025 — पेश किया गया। इसके माध्यम से कई आर्थिक व कारपोरेट नीतियों में सुधार लाने का प्रस्ताव है। इस बिल पर सदन में बहस हुई, जिसमें आंध्र प्रदेश से जुड़ी सांसद डी. पुरंदेश्वरी ने इसके लाभों पर जोर दिया और सदन से इसका समर्थन व पारित कराने की अपील की।

यह कदम यह संकेत देता है कि सरकार आर्थिक व व्यापारिक नीतियों पर काम दोबारा गति से शुरू करना चाहती है — विशेषकर उन विधानों को पारित कराने पर जो देश के राजस्व, व्यापार और उद्योग को प्रभावित करते हैं।

हालाँकि हंगामा नहीं हुआ, मगर विपक्ष ने आज भी कई मुद्दों को सदन में उठाया। कुछ सांसदों ने श्रम कानूनों पर आपत्ति जताई और कार्यकर्ताओं व मजदूरों के हित में चर्चा करने की मांग की। इसके अलावा, वायु-प्रदूषण, प्रदूषण नियंत्रण, दिल्ली जैसे क्षेत्रों में हो रही प्रदूषण समस्या, तथा सामाजिक न्याय से जुड़े अन्य विषयों पर भी सुझाव और सवाल उठाए गए।

इस प्रकार, विपक्ष ने दिखा दिया कि वह सिर्फ प्रदर्शन नहीं, बल्कि सदन में मुद्दों की सुनवाई और समाधान चाहता है।

आज संसद भवन परिसर में सिर्फ चर्चा-बहस ही नहीं हुई, बल्कि राजनीतिक दलों की उच्च स्तरीय बैठकें भी हुईं। भाजपा अध्यक्ष के नाम को लेकर मंथन हुआ, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल के सांसदों से मुलाकात की — जिसमें चुनावी रणनीति, भविष्य की तैयारी और सरकार की नीतियों पर चर्चा बताई जा रही है।

उधर, विपक्षी दलों (INDIA ब्लॉक) ने भी रणनीति तैयार की; उन्होंने आज SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) व अन्य संवेदनशील विषयों पर आगे की कार्रवाई व चर्चा की रूपरेखा तय की। इससे संकेत मिलता है कि आगामी दिनों में संसद में जोरदार बहसें देखने को मिल सकती हैं।

इस सत्र की शुरुआत पहले दो दिन हंगामे व गतिरोध से हुई थी। विपक्ष ने SIR व मतदाता सूची संशोधन जैसे विषयों पर चर्चा मांग कर सदन को बाधित किया। परिणामस्वरूप पहले दो दिन संसद का अधिकांश काम नहीं हो पाया।

लेकिन आज तीसरे दिन, दोनों पक्षों की सहमति व वार्ता से यह स्थिति बदली। सभी ने मिलकर कार्यवाही को दोबारा सुचारू बनाने का निर्णय लिया — और परिणाम स्वरूप प्रश्नकाल, नए विधेयक, सामान्य बहस आदि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अंतर्गत सम्पन्न हुए। यह एक सकारात्मक संकेत है कि संवैधानिक संस्था के प्रति प्रतिबद्धता और लोकतांत्रिक मर्यादा की रक्षा प्राथमिकता बनी हुई है।


आगे की आशाएँ — वंदे मातरम्, चुनावी सुधार और SIR पर बहस

सरकार व विपक्ष के बीच हुई बैठक में सहमति बनी है कि आने वाले दिनों में वंदे मातरम् बहस (राष्ट्रीय गीत पर बहस) होगी। इसके बाद, चुनावी सुधारों (मतदाता सूची, SIR आदि) पर विस्तृत चर्चा किया जाएगा।

अगर ये वाद-विवाद संयम व संवाद के साथ होंगे, तो आने वाला समय संसद की सार्थक कार्यवाही का समय साबित हो सकता है — जहाँ जनता की आवाज, शासन की जवाबदेही और हितकारी कानूनों पर विचार सर्वाधिक प्राथमिकता बने।

आज संसद के तीसरे दिन की कार्रवाई ने यह दिखाया कि लोकतंत्र में संवाद व संधि का महत्व कितना है। हंगामे व विरोध के बाद जब दोनों पक्षों ने सहमति दिखाई, तो संसद फिर से कामकाजी तस्वीर में लौट आई।

लोकसभा में प्रश्नकाल, नए विधेयक पर चर्चा, सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर बहस, और विपक्ष की मांगों को सुनने की प्रवृत्ति — सबने यह स्पष्ट किया कि संसदीय लोकतंत्र के मूल्यों को बचाये रखना अभी भी संभव है।

आने वाले दिनों में यदि दोनों पक्ष इसी प्रकार गंभीरता व संयम से काम करें, तो अब जो सुझाव व विधेयक प्रस्तावित हो रहे हैं — चाहे वो श्रम कानून, मतदान सुधार, सामाजिक कल्याण या राष्ट्रीय प्रतीकों पर बहस हों — उन्हें देशहित में सार्थक निर्णयों में बदलने की पूरी संभावना है।

इस प्रकार, आज का दिन सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि इस सत्र के लिए एक नया आरम्भ है — उम्मीद है कि आगे की कार्रवाई भी इसी सकारात्मकता व जिम्मेदारी के साथ होगी।

(चैट जीपीटी)

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