शांति का पाठ पढ़ाने वाली ब्रह्माकुमारी संस्था के आंतरिक ढांचे में कुछ ‘शांत’ नहीं

0
19

– आध्यात्मिक संस्था ब्रह्माकुमारी की कार्यप्रणाली पर सवाल

– राजस्थान के ब्रह्मकुमारी आश्रम में क्या हुआ उस रात?

– कई परिवारों के बिखरने का दावा, निष्पक्ष जांच की मांग

– साेशल मीडिया पर वीडियाे वायरल, पीड़िताें ने लगाई गुहार

लखनऊ, 09 फरवरी (हि.स.)। दुनिया भर में शांति, पवित्रता और अहिंसा का संदेश देने वाली ब्रह्माकुमारी संस्था एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। जिस संस्था ने आत्मिक उत्थान और संयम का मार्ग दिखाने का दावा किया, उसी के भीतर अब हिंसा, भय और टूटते रिश्तों की कहानियां सामने आ रही हैं। ब्रह्माकुमारी जैसी अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक संस्था को लेकर यह आरोप लगातार गहराता जा रहा है कि उसके आंतरिक ढांचे में सब कुछ ‘शांत’ नहीं है।

हाल ही में माउंट आबू स्थित पांडव भवन से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि संस्था की एक सीनियर बीके दीदी (पीड़िता) के साथ उसी परिसर में रहने वाली एक अन्य बीके बहन (कथित आरोपी) ने मारपीट की। बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान पीड़िता को इतनी बुरी तरह पीटा गया कि उनके शरीर पर कई स्थानों पर गंभीर चोट के निशान आ गए। यह घटना कथित तौर पर जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह की बताई जा रही है।

वहीं राजस्थान के सिरोही जिले के आबू रोड स्थित ब्रह्मकुमारी आश्रम पर गुजरात की एक चर्चित मॉडल एक्टर ने दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग, मानसिक उत्पीड़न और संस्थागत दबाव जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। पीड़िता का दावा है कि आश्रम से जुड़े एक व्यक्ति अमित राठौड़ ने उसके साथ दुष्कर्म किया। जबकि सिक्योरिटी इंचार्ज सती समेत अन्य लोगों ने मामले को दबाने, धमकाने और करियर खत्म करने की धमकी दी। युवती ने यह आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सामने सार्वजनिक रूप से लगाए हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में ब्रह्मकुमारी संस्था की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

‘जो नहीं होना चाहिए था, वो हुआ’

पीड़िता का कहना है कि आश्रम से जुड़े लोगों के संपर्क में आने के बाद उसे एक कार्यक्रम के दौरान प्रसाद (टोली) दिया गया, जिसके बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, दृष्टि धुंधली होने लगी और शारीरिक नियंत्रण कमजोर पड़ गया। उसका आरोप है कि इसी अवस्था का फायदा उठाकर उसके साथ जबरदस्ती की गई। बाद में जब उसने सवाल उठाए तो आरोपी ने घटना से इनकार किया, लेकिन फिर वीडियो कॉल, मैसेज और धमकियों के जरिए उसे चुप रहने को मजबूर किया गया। पीड़िता के अनुसार, उसे वीडियो और फोटो वायरल करने की धमकी दी गई। संस्था के सर्कल में घुमाने और बीवी की तरह ट्रीट करने जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। विरोध करने पर जान से मारने और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गई।

पुलिस पर भी सवाल

पीड़िता का दावा है कि उसने पुलिस में शिकायत की, लेकिन वहां से भी उसे संरक्षण नहीं मिला। आरोप है कि शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा उसे चेतावनी दी गई कि संस्था के खिलाफ बोलने पर अंजाम बुरा होगा। यह मामला अब महिला सुरक्षा बनाम संस्थागत प्रभाव की बहस को जन्म दे रहा है।

परिवार टूटने के आरोप और ‘कल्ट’ का सवाल

इस विवाद के बीच कई ऐसे पूर्व अनुयायी भी सामने आए हैं जो ब्रह्मकुमारी संस्था को आध्यात्मिक संगठन से अधिक एक नियंत्रित कल्ट सिस्टम बताते हैं। एक पूर्व अनुयायी अरुण (नाम परिवर्तित) का दावा है कि उनकी पत्नी और परिवार संस्था से जुड़ने के बाद उनसे अलग हो गया। बच्चों तक को प्रभावित किया गया। आर्थिक, मानसिक और सामाजिक दूरी पैदा कर दी गई। उनका आरोप है कि संस्था में सवाल पूछना अपराध माना जाता है। ईश्वरीय आदेश के नाम पर मानसिक दबाव बनाया जाता है। दान और समर्पण को मोक्ष से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता है।

न पुलिस कार्रवाई, न आधिकारिक बयान

फिलहाल इस घटना को लेकर किसी पुलिस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही ब्रह्माकुमारी संस्था की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या आध्यात्मिकता के आवरण में सच्चाई को दबाया जा रहा है? और क्या टूटते परिवारों, आंतरिक हिंसा और शिकायतों की कभी निष्पक्ष जांच हो पाएगी? जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक शांति और अहिंसा का दावा करने वाली इस संस्था पर उठे ये आरोप आस्था से अधिक संदेह पैदा करते रहेंगे।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें