महिलाओं की निर्णायक भागीदारी ही वास्तविक सशक्तीकरणः रेखा गुप्ता

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नई दिल्ली, 29 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को कहा कि आज महिलाएं केवल सुझाव देने तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने और उन्हें लागू करने की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। यही सशक्तीकरण का वास्तविक अर्थ है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता यहां भारत मंडपम में राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) द्वारा आयोजित ‘शक्ति संवाद: दो दिवसीय क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण’ कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों से आई महिला आयोग की अध्यक्षों, सदस्यों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए महिला सशक्तीकरण, सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे। इस अवसर पर एनसीडब्ल्यू की चेयरपर्सन विजया रहाटकर, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव बी. राधिका चक्रवर्ती समेत आयोग की अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के उद्देश्य लीगल अवेयरनेस, ग्रीवेंस रिड्रेसल, पॉलिसी कंसल्टेशन और क्षमता निर्माण की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास देश की करोड़ों बेटियों में साहस और आत्मविश्वास जगाने का माध्यम बनेंगे। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा, उनका आर्थिक सशक्तीकरण और निर्णय व नेतृत्व में उनकी सहभागिता जैसी तीन प्रमुख प्राथमिकताओं पर सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने दिल्ली सरकार द्वारा महिलाओं के लिए उठाए गए ठोस कदमों का उल्लेख करते हुए बताया कि महिलाओं को नाइट शिफ्ट में कार्य करने की अनुमति दी गई है, बशर्ते सुरक्षा मानकों का पालन हो। कामकाजी महिलाओं, विशेषकर श्रमिक बहनों के बच्चों के लिए 500 ‘पालना केंद्र’ स्थापित किए गए हैं, ताकि वे निश्चिंत होकर काम कर सकें। आर्थिक सशक्तीकरण के लिए महिलाओं को 10 करोड़ रुपये तक का बिना गारंटी वाला लोन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है, जिससे वे अपना बिज़नेस शुरू कर सकें। सुरक्षा के क्षेत्र में 10,000 अत्याधुनिक कैमरे और एक लाख स्मार्ट सेंसर्ड एलईडी लाइटें लगाई जा रही हैं। न्याय की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 53 नए न्यायिक पदों को स्वीकृति देकर फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों के गठन का मार्ग प्रशस्त किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘शक्ति संवाद’ केवल थीम नहीं, बल्कि महिलाओं की सामूहिक शक्ति और आपसी संवाद से भविष्य का मार्ग तय करने का माध्यम है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप भारत आज महिला सशक्तीकरण से आगे बढ़कर वुमन-लेड गवर्नेंस और वुमन-लेड डिसीजन मेकिंग के दौर में प्रवेश कर चुका है। गणतंत्र दिवस परेड में, सशस्त्रबलों में महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका, साहसिक प्रदर्शनों, राष्ट्रपति के रूप में आदिवासी परिवार से देश के सर्वोच्च पद तक पहुंची महिला की यात्रा और संसद में महिला नेतृत्व, ये सभी उदाहरण भारत में महिलाओं की बढ़ती निर्णायक भूमिका को दर्शाते हैं।

मुख्यमंत्री ने ‘बेटी बचाओ’ से ‘बेटी पढ़ाओ’ और अब ‘बेटी बढ़ाओ’ तक के सामाजिक परिवर्तन का उल्लेख करते हुए कहा कि आज देश उस चरण में है जहां बेटियों के सपनों और आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए अवसरों का विस्तार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिला आयोग वह शक्ति और भरोसे का केंद्र है, जहां पीड़ित महिला सबसे पहले सहायता की उम्मीद करती है और यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि उस तक समय पर पहुंचकर न्याय, संबल और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने देश के दूरदराज क्षेत्रों खासकर उत्तर-पूर्वी राज्यों से आई महिला आयोग अध्यक्षों के समर्पण और जज्बे की सराहना की और महिला आयोग के 34 वर्षों के संघर्षपूर्ण और प्रेरक सफर को नमन किया।

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