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मप्रः भारतीय ज्ञान परंपरा, उपलब्धियों को लेकर आयोजित दो दिवसीय बैठक संपन्न

भोपाल, 16 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एमपीटी पलाश रेजीडेंसी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा, उपलब्‍धि‍यां एवं योजनाओं को लेकर उच्‍च शिक्षा विभाग द्वारा समीक्षात्‍मक बैठक का आयोजन किया गया। गुरुवार को प्रारंभ हुई बैठक का शुक्रवार को समापन हो गया।

इस अवसर पर भारतीय ज्ञान परंपरा को व्यवहारिक, शोधपरक और समाजोपयोगी स्वरूप देने के लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा महाविद्यालयों एवं विश्‍वविद्यालयों के लिए विस्‍तृत कार्ययोजना के बारे में जानकारी दी गई। बैठक के अंतिम दिन उच्च शिक्षा विभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्‍त संचालक, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्‍सीलेंस, स्‍वाशासी महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं महाविद्यालयों के भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्‍ठ के नोडल अधि‍कारियों ने अपने-अपने महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ़यक्रमों से जोड़ने के लि‍ए किए गए नवाचारों का प्रस्‍तुतिकरण किया। दो दिवसीय समीक्षा बैठक में विषय विशेषज्ञों ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को अपने–अपने विषय के क्षेत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े कार्यों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए शोध, लेखन और सामाजिक उपयोगिता से जोड़ने पर बल दिया।

म.प्र. शुल्क विनियामक आयोग भोपाल के अध्‍यक्ष डॉ. रविंद्र कान्हेरे ने कहा कि महाविद्यालयों में विगत दो वर्षों के दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की समीक्षा के उद्देश्य से बैठक का आयोजन किया गया है। मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन प्रारंभ हुआ। इस प्रक्रिया में अनेक चुनौतियां सामने आईं, लेकि‍न आप सभी के सहयोग से योजनाओं में आवश्यक संशोधन करते हुए नीति का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।

राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण उद्देश्य शिक्षा का भारतीयकरण और भारतीय ज्ञान परंपरा को सम्मानित स्थान देना रहा है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए 18 विषयों का चयन करते हुए 18 विश्वविद्यालयों को और प्रत्येक संभाग स्तर पर कार्यशाला करने की योजना विगत 2 वर्ष पहले बनी थी। साथ ही सभी महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की स्थापना, प्रभारी अधिकारियों की नियुक्ति और संदर्भ ग्रंथों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।

बैठक के दौरान डॉ. रविंद्र कान्हेरे ने आगामी कार्ययोजना के बारे में अवगत करते हुए बताया कि अब अगला चरण भारतीय ज्ञान परंपरा को विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का है। यह विषय अब मध्‍यप्रदेश में स्वीकार्य हो चुका है और इसकी राज्य स्तर पर नियमित निगरानी की जा रही है। बैठक का मुख्‍य उद्देश्यों में ऐसे प्राध्यापकों की पहचान भी करना है, जो भविष्य में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित लेखन और पाठ्यपुस्तक निर्माण में योगदान दे सकें। हिंदी ग्रंथ अकादमी के सहयोग से प्रकाशन कार्य किया जा रहा है। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रभावी क्रियान्वयन के लि‍ए संस्कृत के विद्वानों और अन्य विषयों के प्राध्यापकों के बीच समन्वय होना अत्‍यंत आवश्‍यक है।

उच्‍च शिक्षा के क्षेत्र में मध्‍य प्रदेश की आज एक अलग पहचान हैः अनुपम राजन

अपर मुख्‍य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रारंभ किए गए One Nation, One Subscription (ONOS) पोर्टल पर पंजीयन कराने में मध्यप्रदेश देशभर में सबसे आगे हैं। योजना के माध्‍यम से पोर्टल पर भारत सरकार द्वारा वि‌द्यार्थियों को शोध के लिए देश विदेश के 30 से अधि‍क प्रमुख प्रकाशकों की शोध पत्रिकाएं व पाठयपुस्‍तकें नि:शुल्‍क उपलब्‍ध कराई जा रही हैं। मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में महाविद्यालयों में स्‍वीकृत पदों पर लगातार भर्ती की जा रही है। उच्‍च शिक्षा के क्षेत्र में मध्‍य प्रदेश की आज एक अलग पहचान है। वर्तमान में हमारा जीआर नेशनल औसत से अधिक है। शोध और नवाचार में लगातार कार्य किया जा रहा है। एनआईआरएफ, नैक की लगातार समीक्षाएं की जा रही है। हमें शिक्षा की गुणवत्ता पर और अधिक केंद्रित होकर कार्य करना होगा। महाविद्यालयों की यह जिम्मेदारी होगी कि सभी विद्यार्थी स्वयं परीक्षा में सम्मिलित हों। साथ ही मूल्यांकन (असेसमेंट) प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। मूल्यांकन व्यवस्था से विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ती है, विश्लेषण क्षमता विकसित होती है और नवाचार को बढ़ावा मिलता है। इस दिशा में सतत कार्य की आवश्यकता है। ऑटोनोमस कॉलेज डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्‍त करें! कॉलेजों से अपेक्षा है कि वे गुणवत्ता बनाए रखें और निरंतर स्तर उन्नत करें। प्रत्येक महाविद्यालय एक आदर्श जिला मॉडल कॉलेज के रूप में विकसित हो। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि किसी जिले में केवल एक ही अच्छा कॉलेज न हो, बल्कि सभी कॉलेज अच्‍छे हो। महाविद्यालय में फैकल्‍टी, लैब सहि‍त अन्‍य सुविधाएं बेहतर हो, इस पर भी लगातार कार्य किया जा रहा है।

दो दिवसीय समीक्षात्‍मक बैठक में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी, संचालक म.प्र. हिन्दी ग्रंथ अकादमी अशोक कड़ेल, म.प्र. निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो. खेमसिंह डहेरिया, संस्कृत विश्वविद्यालय कैथल (हरियाणा) के पूर्व कुलपति डॉ. रमेशचंद्र भारद्वाज, डॉ. मनोज सिंह सहित उच्‍च शिक्षा विभाग के अतिरिक्‍त संचालक, प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्‍सीलेंस, शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य, शासकीय स्‍वाशासी महाविद्यालयों के प्राचार्य और महाविद्यालयों में गठि‍त भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्‍ठ के नोडल अधि‍कारी उपस्‍थि‍त रहे।

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