‘भाग्य विधाता’ एनिमेशन फिल्म की हो जांच

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ब्रह्माकुमारी संस्था पर ब्रेनवॉश के गंभीर आरोप

– भाग्य विधाता फिल्म, दैनिक मुरली और राजयोग कोर्स को लेकर उठे सवाल

लखनऊ, 10 फरवरी (हि.स.)। ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़े अवेकनिंग टीवी यूट्यूब चैनल पर प्रसारित एक हिंदी एनिमेशन फिल्म ‘भाग्य विधाता’ को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में संजीव कुमार ने आरोप लगाया है कि यह फिल्म और इसके साथ प्रसारित होने वाली दैनिक मुरली आध्यात्मिक शिक्षा के नाम पर खासकर युवतियों और लड़कियों के मानसिक प्रभाव और नियंत्रण का माध्यम बन रही हैं।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उक्त एनिमेशन फिल्म को सुबह 11:16 बजे बार-बार अग्रेषित और प्रचारित किया जा रहा है, जिसे वे एक सुनियोजित ब्रेनवॉश प्रक्रिया का हिस्सा मानते हैं। आरोप है कि इसके माध्यम से दर्शकों को ब्रह्माकुमारी संस्था की विचारधारा में ढालने और उन्हें ‘ब्रह्मकुमार–ब्रह्मकुमारी’ बनने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जाता है।

दैनिक मुरली पर भी सवाल

आरोप लगाने वालों का कहना है कि दैनिक मुरली संचार, जिसे संस्था में ईश्वरीय संदेश के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, वह केवल आध्यात्मिक उपदेश नहीं बल्कि अनुयायियों के विचार, निर्णय और जीवनशैली को नियंत्रित करने का माध्यम बन चुका है। शिकायत में दावा किया गया है कि मुरली के शब्दों का पालन न करने को आध्यात्मिक पतन से जोड़कर देखा जाता है, जिससे अनुयायी सवाल उठाने से कतराते हैं।

राजयोग सात दिवसीय कोर्स और ध्यान पद्धति की हो जांच

यह भी मांग की गई है कि ब्रह्माकुमारी संस्था की ओर से संचालित राजयोग ध्यान के सात दिवसीय पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाने वाली सामग्री की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। आरोप है कि ध्यान की यह पद्धति आत्मचिंतन से आगे जाकर मानसिक अधीनता (मेंटल कंडीशनिंग) की ओर ले जाती है, जहां व्यक्ति संस्था-निर्देशित सोच को ही अंतिम सत्य मानने लगता है।

‘देवदासी’ जैसी अवधारणा पर गंभीर सवाल

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि ब्रह्माकुमारी संस्था में आज भी ‘शिव से विवाह’ या पूर्ण समर्पण जैसी अवधारणाएं मौजूद हैं, जिसे आलोचक आधुनिक रूप में देवदासी प्रथा से जोड़कर देख रहे हैं। आरोप है कि लड़कियों को सांसारिक जीवन, विवाह और परिवार से विमुख कर संस्था के प्रति पूर्ण समर्पण के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जाता है।

संस्था की भूमिका और जवाबदेही पर प्रश्न

इन आरोपों पर ब्रह्माकुमारी संस्था के पदाधिकारियों से सम्पर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। यह मामला साेशल मीडिया पर अब धार्मिक स्वतंत्रता बनाम मानसिक शोषण और आध्यात्मिक शिक्षा बनाम ब्रेनवॉश की बहस को जन्म दे रहा है।

निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायतकर्ताओं ने संबंधित सरकारी एजेंसियों, महिला आयोग और साइबर निगरानी संस्थाओं से मांग की है कि यूट्यूब पर प्रसारित सामग्री की वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक समीक्षा हो। राजयोग और ध्यान पद्धति के प्रभावों का स्वतंत्र आकलन किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि आस्था के नाम पर किसी भी वर्ग, विशेषकर महिलाओं के मानसिक अधिकारों का उल्लंघन न हो।

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