
-औषधि, सौंदर्य उत्पाद और जैव ऊर्जा बना रहे वैज्ञानिक
-त्वचा रोगों, संक्रमण, मधुमेह, हृदय रोग के उत्पाद बनाए
-इविवि एवं एनजीबीयू के वैज्ञानिकों का शोध जर्नल में प्रकाशित
प्रयागराज, 08 फरवरी (हि.स)। पूजा-पाठ में उपयोग होने वाले पुष्प अब केवल आस्था का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सौंदर्य का भी आधार बन रहे हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी की प्रो. शांथि सुंदरम और नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आदि नाथ के नेतृत्व में मंदिरों से निकलने वाले पुष्पों पर शोध कर हर्बल औषधि, सौंदर्य उत्पाद और जैव ऊर्जा से जुड़े प्रभावी उत्पाद विकसित किए हैं।
डॉ. आदि नाथ ने रविवार को बताया कि शोध में गेंदा, गुलाब, गुड़हल, धतूरा, मदार, कनेर, तुलसी, कमल, पलाश, बिल्व पत्र सहित अनेक पवित्र पौधों की जैव क्षमता का परीक्षण किया गया। डॉ. आदि नाथ की शोध छात्रा अलका ने इन पुष्पों से सनस्क्रीन लोशन, हर्बल क्रीम, सिरप, टैबलेट, शैंपू और चूर्ण तैयार किए हैं। ये उत्पाद दाद, मुंहासे, फंगल संक्रमण, बाल झड़ने, मधुमेह और हृदय रोग में उपयोगी पाए गए हैं।
कमल के एथनोलिक सत में एंटी-कैंसर गुण भी मिले हैं, जबकि मदार से बनी क्रीम त्वचा संरक्षण में सबसे अधिक प्रभावी पाई गई है। हालांकि इसमें हल्की साइटोटॉक्सिसिटी भी दर्ज हुई है। तुलसी के पुष्प में एंटी एलर्जिक गुण मिला है। यह शोध पत्र ‘‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज एंड रिसर्च’’ में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह कार्य पर्यावरण संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और मानव कल्याण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।