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पश्चिम बंगाल के डीजीपी को सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर भाजपा का वार

कहा- ममता बनर्जी पूरे देश को कर रहीं भ्रमित

नई दिल्ली, 09 फ़रवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) ने पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जनता को गुमराह करने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के खिलाफ भ्रामक दलीलें पेश कीं थी। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ा झटका लगा। पात्रा के मुताबिक चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित हिंसा के मामलों पर चुनाव आयोग की याचिका पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को व्यक्तिगत हलफ़नामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह आश्वासन देना होगा कि राज्य में हिंसा नहीं होने दी जाएगी।

सोमवार को पत्रकार वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने बंगाल में अपनी भाषणों से हिंसा को आगे बढ़ाने की कोशिश की। लोगों को एसआईआर के खिलाफ भड़काकर सड़क पर हिंसा फैलाने की कोशिश की। ये सारी बातें सुप्रीम कोर्ट में दायर पेटीशन से भी उजागर होता है।यही नहीं, जो जिले में ब्लॉक्स होते हैं, उसमें कई ब्लॉक्स में तृणमूल के गुंडों और विधायकों द्वारा प्रोयोजित दंगे किए गए।

सांसद संबित पात्रा ने कहा,

“अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि 8505 ग्रुप-बी अधिकारी कल शाम 5 बजे तक अपने-अपने डीसी (जिला कलेक्टर) या ईआरओ (निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी) के पास चुनाव ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करें। पिछले कई महीनों से ममता बनर्जी ने एक तरह का असहयोग आंदोलन चलाने का पक्का फैसला कर रखा था। न तो वह एसआईआर के लिए अपने अधिकारियों को सहयोग दे रही थीं और न ही उन्हें ड्यूटी पर तैनात कर रही थीं।

आज सुप्रीम कोर्ट ने यह बात ममता बनर्जी को बिल्कुल साफ कर दी है। यह एक तरह से ममता बनर्जी की जिद का अंत है। माइक्रो-ऑब्ज़र्वर्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की ओर से दी गई सफाई को स्वीकार कर लिया है। सफाई यह थी कि बंगाल सरकार अधिकारी उपलब्ध नहीं करा रही थी, जिसके कारण माइक्रो-ऑब्ज़र्वर्स को वे काम करने पड़ रहे थे जो उनके लिए निर्धारित नहीं थे।”

उन्होंने कहा,

“जब हिंसा हुई, तो बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आपत्ति प्रपत्रों को ब्लॉक कार्यालय के सामने जला दिया गया। इसके लिए तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता जिम्मेदार थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर कोई आपत्ति दर्ज कराई गई है, तो ईआरओ (निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी) के लिए उसकी जांच करना एक वैधानिक कर्तव्य है। चाहे आपत्ति दर्ज कराने वाला व्यक्ति उनके सामने उपस्थित हो या न हो, जो दस्तावेज उनके पास आया है, उस पर कार्रवाई किए बिना ईआरओ के पास कोई विकल्प नहीं है।

आज सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र को एक बड़ी जीत मिली है, और ममता बनर्जी जो पीड़ित होने का कार्ड खेल रही थीं, वह अब उनके हाथ से वो कार्ड निकल चुका है।”

संबित पात्रा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलीलों के दौरान ममता बनर्जी ने ऐसा प्रस्तुत किया जैसे बंगाल में अत्याचार हो रहे हों, और उनके शब्द आपत्तिजनक थे। पात्रा ने कहा कि ममता ने यहां तक कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के हाथों में खून है।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान स्पष्ट कर दिया कि एसआईआर किसी भी हाल में रोका नहीं जाएगा। यदि किसी को किसी मुद्दे पर स्पष्टीकरण चाहिए, तो सुप्रीम कोर्ट उसकी व्याख्या देगा।

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