आज संसद में भारी राजनीतिक हलचल, तीखी बहसों और महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ

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​आज सोमवार संसद के शीतकालीन सत्र का एक महत्वपूर्ण दिन रहा, जिसमें दोनों सदनों में मुख्य रूप से ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष चर्चा हुई। हालाँकि, विपक्ष के हंगामे और कुछ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों के कारण सदन की कार्यवाही बाधित भी हुई, जिसके परिणामस्वरूप कुछ समय के लिए स्थगन करना पड़ा।

​लोकसभा की कार्यवाही

​लोकसभा की कार्यवाही आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ पर विशेष चर्चा की शुरुआत के साथ आरंभ हुई। यह चर्चा राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी। प्रधानमंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ की गौरवशाली यात्रा को याद किया और बताया कि कैसे यह गीत अंग्रेजों की साजिशों के खिलाफ एकता का प्रतीक बना।

​वंदे मातरम् पर चर्चा: चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राष्ट्रगीत के विभिन्न पहलुओं, इतिहास और इसके उपयोग को लेकर तीखी बहस हुई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद बसवराज बोम्मई ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के एक प्रस्ताव में ‘वंदे मातरम्’ के कुछ छंदों को बदल दिया गया था, जिससे राष्ट्रगीत के साथ अन्याय हुआ। उन्होंने देश की भावी पीढ़ी को यह जानने की आवश्यकता पर जोर दिया कि किन लोगों की मंशा के कारण इसके साथ अन्याय हुआ।

​विपक्ष की प्रतिक्रिया: विपक्ष की ओर से कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने चर्चा की शुरुआत की, जबकि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के सांसद ए. राजा ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ पर विभाजन मुसलमानों ने नहीं, बल्कि भाजपा ने पैदा किया। कांग्रेस ने घोषणा की कि वह राष्ट्रगीत के उपयोग की समीक्षा करेगी। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव सुधारों पर बोलने की बात कही।

​सदन का स्थगन: सत्र की शुरुआत में विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी थी, हालाँकि ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा के लिए इसे दोबारा शुरू किया गया और इसके लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है।

​राज्यसभा की कार्यवाही

​राज्यसभा में भी कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिले, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण उच्च सदन की कार्यवाही भी बाधित हुई।

​हंगामे और स्थगन: राज्यसभा में विपक्ष ने मुख्य रूप से एसआईआर (संभवतः सुरक्षा संबंधी कोई मुद्दा) के मामले पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए हंगामा किया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को महत्वपूर्ण बताते हुए चर्चा पर जोर दिया। लगातार शोर-शराबे और विपक्ष के हंगामा जारी रखने के कारण सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

​विधेयक और प्रस्ताव: उच्च सदन में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कल लोकसभा में लाए गए तीनों विधेयकों (संविधान 130वां संशोधन विधेयक 2025, संघ राज्य क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2025, और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक 2025) को एक संयुक्त समिति को सौंपे जाने का प्रस्ताव रखा जाएगा।

​अन्य मुद्दे: तृणमूल सांसद डेरेक ओब्रायन ने शून्यकाल में सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से सदस्यों के ‘व्यवस्था का प्रश्न’ (Point of Order) उठाने के अधिकार की रक्षा करने की अपील की। इसके अतिरिक्त, इंडिगो एयरलाइन संकट और सांसदों को अपने क्षेत्र में आने-जाने में होने वाली दिक्कतों का मुद्दा भी उठाया गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज बजट पर हुई चर्चा का जवाब दे सकती हैं और सीमा शुल्क टेरिफ अधिनियम 1975 की दूसरी अनुसूची में संशोधन के संबंध में भी वक्तव्य दे सकती हैं।

​समीक्षा और निष्कर्ष

​आज की संसदीय कार्यवाही की समीक्षा करने पर यह स्पष्ट होता है कि दोनों सदनों में उत्पादकता और हंगामे का मिला-जुला माहौल रहा। जहाँ एक ओर लोकसभा ने ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगाँठ पर एक महत्वपूर्ण विशेष चर्चा को प्राथमिकता दी, वहीं दूसरी ओर विपक्ष द्वारा एसआईआर जैसे मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग ने दोनों सदनों में कार्यवाही को बाधित किया। इस तरह के व्यवधान सत्र की समग्र उत्पादकता को प्रभावित करते हैं, जो पहले से ही लगभग 32% (लोकसभा) और 36% (राज्यसभा) के आसपास बताई जा रही है। राजनीतिक दलों के बीच राष्ट्रगीत जैसे भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व के विषय पर भी विभाजनकारी दृष्टिकोण सामने आया, जो एक स्वस्थ संसदीय बहस के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
​सत्र का अंतिम सप्ताह होने के कारण सरकार के लिए लंबित विधेयकों को पारित कराना और विपक्ष के लिए अपने मुद्दों पर जवाब मांगना, दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। उम्मीद है कि आगामी दिनों में सदन में और अधिक रचनात्मक और सार्थक चर्चाएँ होंगी।

पहला अनुच्छेद लोकसभा की कार्यवाही से आरंभ हुआ, जहाँ सदस्यों ने देश के आर्थिक हालत, मूल्यवृद्धि, कृषि संकट और बेरोज़गारी पर चिंता व्यक्त की। सदन के आरंभ में ही विपक्ष ने मूल्यवृद्धि पर तत्काल चर्चा की मांग रखते हुए सरकार पर निशाना साधा। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि लगातार बढ़ती महँगाई ने आम नागरिकों का जीवन कठिन बना दिया है और सरकार इसके समाधान में असफल रही है। सत्ता पक्ष ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सरकार ने कई राहतकारी कदम उठाए हैं और वैश्विक कारणों से प्रभावित आर्थिक स्थिति को स्थिर करने हेतु नीतिगत कदम लगातार लागू किए जा रहे हैं।

संसद में आज कृषि संकट भी एक प्रमुख विषय बना रहा। विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों के किसानों की समस्याएँ सदन में रखीं। फसलों की लागत बढ़ने, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर स्पष्टता, किसानों के बकाया भुगतान और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान पर विस्तृत चर्चा हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार किसानों की सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और देशभर में नई योजनाओं के माध्यम से उत्पादन तथा आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा रही है। हालांकि विपक्ष ने इन आश्वासनों को अपर्याप्त बताते हुए व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान श्रमिकों की स्थिति, उद्योगों में छंटनी, और रोज़गार सृजन को लेकर भी सार्थक बहस हुई। कई सदस्यों ने शिकायत की कि नए उद्योग और निवेश के दावे ज़मीनी स्तर पर दिखाई नहीं देते। सरकार की ओर से श्रम मंत्रालय ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश में रोजगार के नये अवसर बढ़ रहे हैं और कई प्रमुख क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। हालांकि विपक्ष और कुछ स्वतंत्र सदस्यों ने इन आंकड़ों पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए अधिक पारदर्शिता की मांग की।

आज लोकसभा में सामाजिक न्याय, आरक्षण नीति और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के मुद्दे भी उठे। कई सदस्यों ने सामाजिक असमानता और भेदभाव के मामलों को गंभीरता से रखा। सरकार की ओर से कहा गया कि संवैधानिक व्यवस्थाओं के अनुरूप सभी वर्गों को सुरक्षा और अवसर प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालांकि, विपक्ष ने हाल के कुछ घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया।

दोपहर के बाद सदन में सरकार द्वारा प्रस्तुत विधेयक पर चर्चा शुरू हुई। यह विधेयक प्रशासनिक संरचना में व्यापक बदलाव से संबंधित था। सत्ता पक्ष ने इसे देश में सुशासन स्थापित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम कहा। वहीं विपक्ष ने इसे जल्दबाजी में लाया गया विधेयक बताते हुए कई धाराओं पर आपत्ति जताई। बहस के दौरान दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, जिसके कारण सदन के अध्यक्ष को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा। अंततः लंबी चर्चा के बाद विधेयक को बहुमत से पारित कर दिया गया।

अब बात राज्यसभा की, जहाँ आज की कार्यवाही अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण लेकिन गहन रही। राज्यसभा में राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव, आंतरिक शांति और सुरक्षा बलों की चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। कई सदस्यों ने सीमा क्षेत्रों में हो रही घुसपैठ की घटनाओं और पड़ोसी देशों की गतिविधियों का उल्लेख करते हुए सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की। रक्षा मंत्री ने सदन को आश्वासन दिया कि देश की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सुरक्षा बल पूरी तरह सक्षम हैं।

राज्यसभा में आज शिक्षा सुधार, विद्यालयों में बढ़ती समस्याएँ, उच्च शिक्षा में गुणवत्ता की कमी और विश्वविद्यालयों में लगातार हो रहे विवादों पर भी चर्चा हुई। कई सदस्यों ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया। सरकार की ओर से उत्तर देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था का क्रियान्वयन तेज गति से हो रहा है और इससे भारत की शिक्षा प्रणाली को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।

राज्यसभा की कार्यवाही में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, दवाओं की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी पर भी सवाल उठे। कई सदस्यों ने महामारी के बाद स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और चिकित्सा क्षेत्र में अधिक निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया। सरकार ने इस दिशा में किए गए नए निवेशों, चिकित्सालयों के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में नये स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की योजना की जानकारी दी।

दोनों सदनों में आज पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के मुद्दे बार-बार उठे। खासकर वायु प्रदूषण, नदियों की सफाई, जंगलों की कटाई और प्राकृतिक संपदा के क्षरण पर कई सदस्यों ने चिंता व्यक्त की। सरकार ने बताया कि देशभर में नए अभियान चलाए जा रहे हैं, परंतु विपक्ष और कुछ पर्यावरण विशेषज्ञ सदस्यों ने कहा कि ज़मीनी स्तर पर इन कार्यक्रमों का असर पर्याप्त नहीं दिखता।

आज की कार्यवाही में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि संसद के बाहर उठ रहे कई मुद्दे सदन के भीतर भी गूंजते रहे। विपक्ष ने कई बार सरकार से संवेदनशील मामलों पर बयान की मांग की, जिसमें युवा वर्ग की समस्याएँ, छात्रों में बढ़ता तनाव और समाज में फैलते असंतोष शामिल रहे। सरकार ने इन सभी मामलों में उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया, परंतु विपक्ष संतुष्ट नहीं दिखा।

दिनभर की कार्यवाही में कई बार सदन के भीतर शोरगुल, नारेबाजी और असहमति की स्थिति बनी, जिसके कारण कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित भी करना पड़ा। हालाँकि संसद के अध्यक्षों और सभापति ने संयम और अनुशासन बनाए रखने की अपील करते हुए कार्यवाही को आगे बढ़ाया।

कुल मिलाकर, आज का दिन संसद में भारी राजनीतिक हलचल, तीखी बहसों और महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श का रहा। दोनों सदनों में उठाए गए प्रश्नों और चर्चाओं ने यह स्पष्ट किया कि देश कई क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना कर रहा है और इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार तथा विपक्ष को संयुक्त रूप से आगे बढ़ना होगा। संसद का आज का दिन लोकतांत्रिक विमर्श की उपयोगिता और ताकत को एक बार फिर रेखांकित करता है।चैट जीपीटी

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