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उत्तराखंड पुलिस ने अंकिता भंडारी प्रकरण पर दी जानकारी,वीआईपी एंगल खारिज

देहरादून, 03 जनवरी (हि.स.)। उत्तराखंड पुलिस ने अंकिता भंडारी प्रकरण में सोशल मीडिया और कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल रही अफवाहों का खंडन किया और पूरे मामले की जांच प्रक्रिया स्पष्ट की। पुलिस का कहना है कि इस प्रकरण में कोई वीआईपी संलिप्तता नहीं है। यह तथ्य न्यायालय भी स्वीकार किया जा चुका है।

एसएसपी कार्यालय देहरादून में एसपी शेखर चंद्र सुयाल ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि वायरल ऑडियो और कथित अफवाहों की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया गया। इसने रिसोर्ट और संबंधित सभी व्यक्तियों की गहन जांच की।प्रारंभिक जांच के कुछ ही घंटों में सभी अभियुक्त गिरफ्तार किए गए थे और अब तक न्यायालय के आदेशानुसार जेल में हैं। जांच के दौरान प्राप्त साक्ष्यों और एसआइटी की निष्पक्ष विवेचना के आधार पर तीनों अभियुक्तों को दोषी ठहराकर सजा सुनाई जा चुकी है।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में कोई साक्ष्य नष्ट या छिपाए नहीं गए। जिस कमरे को लेकर अफवाह फैली थी कि उसे साक्ष्य मिटाने के लिए तोड़ा गया, उसकी वीडियोग्राफी सहित सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।

अभियुक्तों ने रिमांड के दौरान स्वीकार किया कि उन्होंने अंकिता पर “एक्स्ट्रा सर्विस” देने का दबाव बनाया और सहमति न मिलने पर अपराध किया। पूछताछ में यह भी सामने आया कि अंकिता मानसिक रूप से परेशान थी और वहां से जाना चाहती थी, लेकिन आरोपितों ने उसे जबरन अपने साथ ले गए।शव की बरामदगी अभियुक्तों की ओर से बताए गए स्थान के आधार पर पूरी तरह विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत की गई।

उर्मिला सनावर के फेसबुक लाइव और ऑडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए भी अलग एसआईटी का गठन किया गया है। उन्हें अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है, लेकिन जांच में सहयोग के लिए नोटिस जारी किया गया है। पुलिस ने यह स्पष्ट किया कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार का खतरा महसूस होता है, तो पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

पुलिस ने मीडिया और जनता से अपील की कि यदि किसी के पास इस प्रकरण से संबंधित अतिरिक्त जानकारी या साक्ष्य हैं, तो वे आगे आएं और जांच में सहयोग करें। जांच पूरी तरह निष्पक्ष, तथ्यपरक और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की गई है और किसी को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया गया।

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