सरकार चला रही है जागरूकता अभियान: नड्डा
नई दिल्ली, 03 फरवरी (हि.स.)। देश में अत्यधिक नमक का सेवन हाइपरटेंशन और हृदय संबंधी बीमारियों के बढ़ते मामलों का प्रमुख कारण बन रहा है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा ने मंगलवार को राज्यसभा में दी। उन्होंने बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार यह स्थिति एक “साइलेंट पैनडेमिक” का रूप ले रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह जानकारी कांग्रेस सांसद मुकुल बालकृष्ण वासनिक द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। प्रश्न में यह पूछा गया था कि अत्यधिक नमक सेवन क्या देश में हाइपरटेंशन और हृदय रोगों के लिए जिम्मेदार एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन गया है और इस दिशा में सरकार क्या कदम उठा रही है।
नड्डा ने बताया कि सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चला रही है। खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के माध्यम से ईट राइट इंडिया मूवमेंट लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देना और नमक, चीनी तथा वसा के अत्यधिक सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत “आज से थोड़ा कम” जैसे जनसंचार और सोशल मीडिया अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि लोग अपने दैनिक आहार में नमक, चीनी और वसा की मात्रा धीरे-धीरे कम करें। इसके साथ ही, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मियों के लिए ईट राइट टूलकिट तैयार की गई है, जिससे वे समुदाय स्तर पर उच्च वसा, चीनी और नमक (एचएफएसएस) युक्त खाद्य पदार्थों के सीमित सेवन को लेकर परामर्श दे सकें।
स्वास्थ्य मंत्री ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की 2025 की सिफारिशों का हवाला देते हुए कहा कि हृदय रोगों के जोखिम को कम करने के लिए प्रतिदिन सोडियम का सेवन दो ग्राम से कम रखने की सलाह दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि सामान्य परिस्थितियों में नियमित नमक के स्थान पर पोटैशियम युक्त कम-सोडियम नमक विकल्पों का उपयोग लाभकारी हो सकता है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कम-सोडियम नमक विकल्प गर्भवती महिलाओं, बच्चों तथा किडनी रोग से पीड़ित व्यक्तियों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। सरकार सुरक्षित, संतुलित और स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
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