हाईकोर्ट में याचिका के बाद फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ से जुड़ी प्रचार सामग्री हटाने की घोषणा

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नई दिल्ली, 06 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर होने के बाद नेटफ्लिक्स पर आने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के निर्माता नीरज पांडेय ने इस फिल्म से जुड़ी सभी प्रचार सामग्री हटाने का फैसला लिया है। अपने साेशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ से नीरज पांडेय ने कहा है कि फिलहाल वे इस फिल्म से जुड़ी प्रचार सामग्री हटा रहे हैं।

नीरज पांडेय ने कहा है कि ये फिल्म एक फिक्शन है और इसका मकसद केवल मनोरंजन है। इस फिल्म के नाम से कुछ लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है, इसलिए वे फिलहाल फिल्म से जुड़ी प्रचार सामग्री को सभी प्लेटफॉर्म से हटा रहे हैं। नीरज पांडेय की इस घोषणा को याचिका और उनके वकील विनीत जिंदल ने इसे बड़ी जीत बताया है।

वकील विनीत जिंदल के जरिये महेंद्र चतुर्वेदी ने दायर याचिका में कहा है कि इस फिल्म के जरिये ब्राह्मण समुदाय की गरिमा और छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। याचिका में कहा गया है कि ओटीटी प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स इंडिया ने इस फिल्म का प्रमोशन किया है और इसे प्रमोट करने वाली सामग्री का वितरण किया है। इस फिल्म के जरिये पंडत को भ्रष्ट और घूसखोर बताना अनैतिक और भ्रष्ट आचरण है। याचिका में कहा गया है कि भारतीय समाज और उसकी परंपरा में ऐतिहासिक तौर पर पंडत का मतलब विद्वान, नैतिक, धार्मिक और आध्यात्म से जुड़ा हुआ माना जाता है, लेकिन फिल्म में एक समुदाय का मान-मर्दन किया गया है। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 का घोर उल्लंघन है।

याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सबको अधिकार है, लेकिन संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भी सीमा है, जो हेट स्पीच और मानहानि या सामाजिक सौहार्द्र को खराब करने वाला न हो। याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ओटीटी प्लेटफार्म पर स्वतंत्रता का बेजा दुरुपयोग करने वालों पर लगाम लगाने में नाकाम रही है। इसी नाकामी की वजह से व्यावसायिक लाभ के लिए सनसनी फैलाने वाले कंटेट परोसे जा रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय

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