सैन्य इतिहास में पहली बार सेना की रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया

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– गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सेना के पशुओं के साथ गहरे रिश्तों का प्रदर्शन

नई दिल्ली, 26 जनवरी (हि.स.)। इस साल गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर हिम योद्धा, बैक्ट्रियन कैमल, ज़ानिस्कारी पोनी, ब्लैक काइट्स (शिकारी शिकारी पक्षी) दिखाए गए। परेड के दौरान अटैक और पेट्रोल डॉग के तौर पर प्रशिक्षित पांच देसी नस्ल के कुत्ते मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई, कोम्बाई और राजपलायम भी कदमताल करते दिखे। भारतीय सेना ने इन जानवरों के साथ अपने अनोखे सहयोग को दिखाया, जो देश के सबसे मुश्किल इलाकों में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं।

इस साल की गणतंत्र दिवस परेड में भारत की सैन्य ताकत के साथ-साथ एनिमल लॉजिस्टिक्स और नेचुरल डिफेंस सिस्टम पर खास फोकस किया गया। सेना ने पशुओं के साथ अपने अनोखे सहयोग को दिखाया, जो देश के सबसे मुश्किल इलाकों में अहम भूमिका निभाते हैं। सेना का यह प्रदर्शन मुश्किल माहौल में सेना की जानवरों पर निर्भरता को दिखाता है। सैन्य इतिहास में पहली बार भारतीय सेना के रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। ‘साइलेंट वॉरियर्स’ के नाम से जाने जाने वाले ये जानवर उन मुश्किल इलाकों में ऑपरेशन के लिए बहुत ज़रूरी हैं, जहां आधुनिक तकनीक अक्सर कमियों का सामना करती है। इस टुकड़ी में दो शानदार बैक्ट्रियन ऊंट, चार जांस्कर पोनी, चार ब्लैक काइट (रैप्टर) – होशियार और चौकस पक्षी, दस इंडियन ब्रीड के आर्मी डॉग (मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई, कोम्बाई, और राजपलायम) के साथ-साथ छह आम मिलिट्री डॉग शामिल रहे, जो पहले से ही सर्विस में हैं।

इस रोमांचक टुकड़ी के साथ भारतीय सशस्त्र बल के हिम योद्धा भी रहे, जो बुलेट-रेसिस्टेंट जैकेट, कैमरा, जीपीएस, रेडियो और एडवांस्ड सर्विलांस सिस्टम से लैस थे। जानवरों का यह दस्ता लद्दाख और सियाचिन जैसे बहुत ज़्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में जानवरों की भूमिका को दिखाता है। परेड में खास तौर पर बनाई गई भैरव लाइट कमांडो बटालियन ने भी प्रदर्शन किया। साथ ही ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद भारत की सैन्य एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन किया गया। कुल 30 झांकियों ने ‘आजादी का मंत्र: वंदे मातरम और समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ थीम के तहत कर्त्तव्य पथ पर मार्च किया। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की 17 झांकियां थीं, जिनमें असम की टेराकोटा शिल्प, मणिपुर की कृषि प्रगति और हिमाचल प्रदेश की देवभूमि के रूप में पहचान शामिल है।

परेड से पहले कर्तव्य पथ और रायसीना हिल पर बहु-चक्रीय व्यवस्था के साथ राष्ट्रीय राजधानी को कड़ी सुरक्षा के तहत रखा गया। परेड में भारतीय सेना ने चरणबद्ध युद्ध सरणी प्रदर्शन, मशीनीकृत कॉलम, मार्चिंग टुकड़ी, सैन्य बैंड और ‘ऑपरेशन सिंदूर: संयुक्तता के माध्यम से विजय’ नामक एक त्रि-सेवा झांकी दिखाई। वायु सेना की ‘वेटरन्स झांकी’ ने पूर्व सैनिकों के योगदान को श्रद्धांजलि दी।

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