बीएचयू स्थापना दिवस पर भारतीयता के रंग में रंगा परिसर

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झांकियों ने मोहा मन

—विरासत और नवीनता के संग ‘समग्रता के साथ निरंतरता’ का संदेश

वाराणसी, 23 जनवरी (हि.स.)। महामना मदन मोहन मालवीय की बगिया काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) शुक्रवार को अपने 111वें स्थापना दिवस पर भारतीय संस्कृति, परंपरा और आधुनिकता के रंगों में सराबोर नजर आया। वर्ष 1916 में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर स्थापित इस विश्वविद्यालय का संपूर्ण परिसर स्थापना दिवस समारोह की आभा से आलोकित रहा। विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विश्वविद्यालय परिवार ने इस विशेष दिन को उत्साह और उल्लास के साथ मनाया।

समारोह का शुभारंभ विश्वविद्यालय के स्थापना स्थल पर विधिवत हवन-पूजन के साथ हुआ। इसमें कुलपति प्रोफेसर अजित कुमार चतुर्वेदी, परीक्षा नियंता एवं कला संकाय की संकाय प्रमुख प्रोफेसर सुषमा घिल्डियाल, छात्र अधिष्ठाता प्रोफेसर रंजन कुमार सिंह, मुख्य आरक्षाधिकारी प्रोफेसर संदीप पोखरिया सहित विभिन्न संकायों के प्रमुख, निदेशक, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर चतुर्वेदी ने समस्त विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं।

स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों, केन्द्रों और संस्थानों द्वारा “भारत: समग्रता के साथ निरंतरता” विषय पर आधारित भव्य झांकियां प्रस्तुत की गईं। झांकियों की शोभा यात्रा का शुभारंभ लक्ष्मण दास अतिथि गृह चौराहे से कुलपति प्रोफेसर अजित कुमार चतुर्वेदी एवं मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रोफेसर आनंद कुमार त्यागी ने हरी झंडी दिखाकर किया। इस अवसर पर आईआईटी (बीएचयू) के निदेशक प्रोफेसर अमित पात्रा भी उपस्थित रहे।

कुल 31 झांकियों की इस भव्य शोभा यात्रा ने भारत की विविधता, सांस्कृतिक विरासत, ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक प्रगति और विकास गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। मालवीय भवन से गुजरती झांकियों में ऋषि-मुनियों से लेकर अंतरिक्ष यात्रियों तक, वैदिक गणित से ब्रह्मोस मिसाइल तक, पारंपरिक कृषि से जैविक कृषि, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और सामाजिक समरसता जैसे विषयों को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। विद्यार्थियों की रचनात्मकता, ऊर्जा और उत्साह ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया।

मुख्य मंच के समक्ष प्रस्तुतियों में सेन्ट्रल हिन्दू गर्ल्स स्कूल की छात्राओं ने सरस्वती वंदना पर नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं सेन्ट्रल हिन्दू ब्वायज स्कूल ने लोकनृत्यों, अंतरिक्ष विज्ञान, स्वदेशी विचारधारा और खेल उपलब्धियों को झांकी के माध्यम से दर्शाया। रणवीर संस्कृत विद्यालय, महिला महाविद्यालय, कला, सामाजिक विज्ञान, शिक्षा, विज्ञान, प्रबंधन, वाणिज्य, कृषि, पशु विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान तथा अन्य संकायों की झांकियों ने भारत की ज्ञान परंपरा और आधुनिक प्रगति के समन्वय को रेखांकित किया।

आईआईटी (बीएचयू) की झांकी में नवाचार और राष्ट्र निर्माण में योगदान को उगते सूर्य के प्रतीक के रूप में प्रदर्शित किया गया। भारत कला भवन ने पहली बार अपनी झांकी प्रस्तुत कर प्राचीन भारतीय मूर्तिकला और चित्रकला की झलक दिखाकर विशेष आकर्षण बटोरा। वहीं राष्ट्रीय सेवा योजना की झांकी ने यह संदेश दिया कि “नवीन कभी नकारा नहीं जाता और प्राचीन कभी बोझ नहीं बनता।”इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न छात्रावासों एवं नगर निकायों में सरस्वती पूजा का आयोजन भी किया गया। समग्र रूप से बीएचयू का 111वां स्थापना दिवस भारतीयता, विरासत और आधुनिक भारत की चेतना का सजीव उत्सव बनकर उभरा।

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