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प्रकृति के अनुरूप ही खेती को अपनायें, बनेंगे समृद्धशाली : आचार्य बालकृष्ण

हरिद्वार, 25 दिसंबर (हि.स.)। पतंजलि की ओर से आयोजित समृद्ध ग्राम पतंजलि प्रशिक्षण केंद्र में तीन दिवसीय एकीकृत कृषि क्लस्टर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज समापन आध्यात्मिक ऊर्जा एवं शैक्षणिक प्रभाव के साथ संपन्न हुआ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण समृद्धि के उद्देश्य से एकीकृत एवं सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया। जिसमें 150 से अधिक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों ने आवासीय सुविधा के साथ सक्रिय सहभागिता की।

प्रशिक्षण के अंतिम दिवस का शुभारंभ हवन के साथ हुआ। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि एकीकृत एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियां ही आत्मनिर्भर गांव और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रकृति के अनुरूप खेती अपनाने और कृषि को बहुआयामी स्वरूप देने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त व्यावहारिक ज्ञान एवं क्षेत्रीय अनुभव के प्रति संतोष व्यक्त किया। इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) बहादराबाद मानस मित्तल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि एकीकृत कृषि मॉडल गांव स्तर की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ किसानों एवं एसएचजी सदस्यों की आजीविका को स्थायी रूप से मजबूत करता है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सचिव पर्यावरण एवं वन मंत्रालय नेपाल सरकार गोविंद प्रसाद शर्मा ने सतत कृषि, पर्यावरण संरक्षण एवं सीमा-पार सहयोग पर अपने विचार साझा करते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भविष्य की आवश्यकता बताया। उनके साथ श्री नेपाल सरकार में अवर सचिव भारत खंडेल की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय महत्व प्रदान किया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को आवासीय व्यवस्था के अंतर्गत सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों प्रकार का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण की प्रमुख विशेषताओं में मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर, धरती का डॉक्टर कृषि प्रशिक्षण, तथा एफएमसीजी उत्पादों की गुणवत्ता नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। इन विषयों पर विशेषज्ञों की ओर से विस्तृत तकनीकी सत्र संचालित किए गए, जिससे प्रतिभागियों को आय-वर्धन के नए अवसरों की जानकारी मिली।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एक बार फिर पतंजलि की एकीकृत, सतत एवं किसान-केंद्रित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो समग्र ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम है।

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