पद्मश्री से सम्मानित होंगे नीलेश मांडलेवाला, सूरत को दी ‘ऑर्गन डोनर सिटी’ की पहचान

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सूरत, 25 जनवरी (हि.स.)। देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्मश्री पुरस्कार 2026 से गुजरात के सूरत के समाजसेवी और टेक्सटाइल कारोबारी नीलेश मांडलेवाला भी सम्मानित होंगे। ऑर्गन डोनेशन के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान ने सूरत को टेक्सटाइल और डायमंड सिटी के साथ-साथ ‘ऑर्गन डोनर सिटी’ के रूप में नई पहचान दिलाई है।

नीलेश मांडलेवाला की यह यात्रा किसी सरकारी योजना से नहीं, बल्कि एक बेटे की पीड़ा से शुरू हुई थी। वर्ष 1997 में उनके 70 वर्षीय पिता की किडनी खराब हो गई थी। इलाज मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में कराया गया, लेकिन 2004 में एंजियोप्लास्टी में लगाया गया स्टेंट फेल हो गया और उन्हें डायलिसिस पर आना पड़ा। नीलेश और उनके अमेरिका में रहने वाले भाई ने पिता को किडनी देने की इच्छा जताई, लेकिन पिता ने मना कर दिया।

इसके बाद पिता का डायलिसिस सूरत के महावीर अस्पताल में शुरू हुआ। अस्पताल में लगातार आना-जाना करते हुए नीलेश मांडलेवाला ने देखा कि ऑर्गन फेल होने वाले मरीज और उनके परिजन किस तरह संघर्ष कर रहे हैं। यहीं से उन्होंने इस दिशा में काम करने का निश्चय किया।

जागरूकता से शुरुआत

सबसे पहले उन्होंने किडनी रोग की रोकथाम को लेकर जनजागृति अभियान शुरू किया। अस्पतालों के आईसीयू में ब्रेन डेड मरीजों के मामलों को समझा और न्यूरो सर्जन व चिकित्सकों से संपर्क स्थापित किया। विगत 12 जनवरी 2006 को सूरत के अशक्ता आश्रम अस्पताल में एक मरीज को ब्रेन डेड घोषित किया गया। उन्होंने परिजनों को समझाकर ऑर्गन डोनेशन के लिए तैयार किया। अहमदाबाद के आईकेडीआरसी अस्पताल की टीम ने आकर किडनी ट्रांसप्लांट किया। यह गुजरात में पहला इंटरसिटी कैडेवर ट्रांसप्लांट था।

इसके बाद स्मीमेर अस्पताल में ब्रेन डेड हुए युवक की किडनी अहमदाबाद और लीवर हैदराबाद भेजा गया। उस समय गुजरात में लीवर ट्रांसप्लांट की सुविधा नहीं थी। इसी वर्ष साढ़े चार साल के बच्चे का ऑर्गन डोनेशन भी कराया गया, जो उस समय देश का सबसे कम उम्र का डोनर माना गया।

ट्रस्ट बना मिशन

2013 में सूरत में पदस्थ इनकम टैक्स कमिश्नर संदीप कुमार को किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ी। एक ब्रेन डेड महिला के ऑर्गन डोनेशन से उन्हें जीवन मिला। इसके बाद ट्रस्ट बनाने का विचार सामने आया। एक साल की चर्चा के बाद 4 दिसंबर 2014 को ट्रस्ट रजिस्टर हुआ और 20 दिसंबर 2014 को उसका शुभारंभ किया गया।

डोनेट लाइफ के संस्थापक नीलेश मांडलेवाला के अनुसार, अब तक उनके प्रयासों से एक हजार से अधिक ऑर्गन और टिश्यू डोनेशन कराए जा चुके हैं, जिससे मरीजों को नया जीवन मिला है। इनमें किडनी, लीवर, हार्ट, फेफड़े, हाथ और आंखें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में हड्डी दान की शुरुआत हुई और 2019 में गुजरात का पहला लंग्स डोनेशन कराया गया। वर्ष 2017 में 14 महीने के बच्चे का हार्ट दान कर मुंबई में एक बच्ची को प्रत्यारोपित किया गया। कोरोना काल के दौरान भी लगभग 200 ऑर्गन और टिश्यू डोनेट किए गए।

नीलेश मांडलेवाला बताया कि एक व्यक्ति के अंगदान से 8 से 9 लोगों को नया जीवन मिल सकता है। उन्होंने कहा कि अंगदान केवल दान नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा और एक ऐसी विरासत है, जो कई परिवारों के आँसू को मुस्कान में बदल देती है। उन्होनें बताया कि अब तक 1300 आर्गन डोनेशन करवाया जा चुका है।

नीलेश मांडलेवाला के इस अभियान ने सूरत को मानवता की सेवा में अग्रणी शहरों की सूची में खड़ा कर दिया है। ऑर्गन डोनेशन के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2026 में पद्मश्री सम्मान देने का निर्णय लिया है।

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