दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता को खराब करने में वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण का सबसे अधिक योगदानः सीएक्यूएम

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नई दिल्ली, 21 जनवरी (हि.स.)। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने कहा है कि दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता को खराब करने में वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण का सबसे अधिक योगदान है। आयोग ने उच्चतम न्यायालय को वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजना पेश करते हुए कहा है कि दिल्ली एनसीआर में खराब होते एक्यूआई को बेहतर बनाने के लिए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाने, प्रदूषण नियंत्रक प्रमाणपत्र समेत कई उपायों की सिफारिश की है।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने आयोग के उपायों को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निकायों और एनसीआर में शामिल राज्यों की अन्य एजेंसियों को वायु प्रदूषण संकट को हल करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की लंबी अवधि के उपायों को लागू करने के लिए अपनी ‘कार्य योजना’ रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने ने इसके लिए सभी हितधारकों को चार सप्ताह का समय दिया।

सुनवाई के दौरान एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि 2015 से 2025 तक की अध्ययन के मेटा-एनालिसिस से पता चलता है कि दिल्ली में पीएम-2.5, एनसीआर के भीतर के सोर्स से होने वाले प्राइमरी उत्सर्जन और सेकेंडरी पार्टिकुलेट बनने के मिश्रण की वजह से है। भाटी ने कोर्ट को एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अवधि के उपायों की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने संबंधित एजेंसियों की भी पहचान की है जो इन लंबी अवधि के उपायों को लागू करने में सक्षम और जो पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क फंड प्रदान कर सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 06 जनवरी को सुनवाई के दौरान वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के रवैये पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि आयोग गंभीर नहीं है। प्रदूषण के कारणों की तह तक जाने और इससे निपटने के लिए कोई दूरगामी समाधान खोजने में आयोग को कोई जल्दी नहीं है। कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को निर्देश दिया था कि वो दो हफ्ते में विशेषज्ञों की बैठक बुलाए। बैठक में प्रदूषण के जिम्मेदार कारणों पर विचार विमर्श हो। इसको लेकर रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए ताकि लोग भी जागरूक हो सके। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आयोग प्रदूषण की रोकथाम के लिए दूरगामी उपायों पर विचार करें। सबसे पहले उन वजहों का समाधान खोजा जाए, जिनके चलते सबसे ज्यादा प्रदूषण हो रहा है।

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