
नई दिल्ली, 22 जनवरी (हि.स.)। भारतीय रेल की डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) पर संचालित ‘ट्रक्स-ऑन-ट्रेन’ सेवा ने आर्थिक, पर्यावरणीय और लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर उल्लेखनीय लाभ दिया है। रेल मंत्रालय के अनुसार इस सेवा से अब तक 131 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया गया है, जबकि सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होने से ईंधन बचत और प्रदूषण में भी बड़ी कमी आई है।
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक सेवा की शुरुआत से अब तक 1,955 से अधिक ट्रिप पूरी की जा चुकी हैं, जिनमें 10 लाख टन से अधिक माल की ढुलाई हुई है। केवल वित्त वर्ष 2025 (अप्रैल–दिसंबर) के दौरान ही 545 रेक के माध्यम से 3 लाख टन से अधिक माल ले जाया गया, जिससे 36.95 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
सबसे बड़ा लाभ पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के न्यू पालनपुर–न्यू रेवाड़ी खंड पर देखने को मिला। इस 636 किलोमीटर लंबे मार्ग पर ट्रकों की लंबी दूरी की यात्रा रेल पर स्थानांतरित होने से लगभग 48,875 ट्रक राजमार्गों से हटे। इसके परिणामस्वरूप करीब 88.81 लाख लीटर डीजल की बचत हुई और लगभग 2.30 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन रोका जा सका।
रेल मंत्रालय ने बताया कि आर्थिक दृष्टि से भी यह सेवा परिवहनकर्ताओं के लिए फायदेमंद साबित हुई है। लंबी दूरी के हाई-वे टोल से बचाव, कम ईंधन खर्च और तय समय में माल पहुंचने से लॉजिस्टिक्स लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। न्यू पालनपुर टर्मिनल से 273 रेक चलाकर 20.18 करोड़ रुपये और न्यू रेवाड़ी से 272 रेक के जरिए 16.76 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हुआ, जिससे दोनों टर्मिनलों पर संतुलित और निरंतर कारोबार सुनिश्चित हुआ।
पर्यावरणीय लाभों के साथ-साथ सामाजिक फायदे भी सामने आए हैं। ट्रकों की लंबी दूरी की यात्रा कम होने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी, चालक थकान में गिरावट और राजमार्गों पर यातायात दबाव कम हुआ है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूर्ण विद्युतीकरण के कारण यह सेवा मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में भी निर्बाध रही, जिससे आपूर्ति शृंखला की विश्वसनीयता बढ़ी है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, डेयरी क्षेत्र को विशेष लाभ मिला है। दूध टैंकरों पर जीएसटी नहीं लगने और गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (अमूल) जैसे बड़े ग्राहकों के जुड़ने से सेवा को स्थायी मात्रा मिली है।
मंत्रालय का कहना है कि ‘ट्रक्स-ऑन-ट्रेन’ सेवा से न केवल भारतीय रेल को नया और टिकाऊ राजस्व स्रोत मिला है, बल्कि देश की समग्र लॉजिस्टिक्स लागत घटाने, ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने में भी यह सेवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आने वाले समय में इसके विस्तार से लाभ और बढ़ने की उम्मीद है।
#ट्रक्स_ऑन_ट्रेन’
