
मुरादाबाद, 26 जनवरी (हि.स.)। पुलिस-प्रशासन को संतों के प्रति मर्यादित और संवेदनशील रहना चाहिए। जिस संत ने भगवा कपड़े धारण कर लिए हैं, जिसने धर्म और आस्था के लिए खुद को समर्पित कर दिया है, उसका सम्मान सभी को करना चाहिए। यह बातें प्रसिद्ध कवि डॉ कुमार विश्वास ने सोमवार को मुरादाबाद में प्रसिद्ध शायर मंसूर उस्मानी के आवास पर मीडियाकर्मियों को सम्बोधित करते हुए कही।
मुरादाबाद निवासी सुप्रसिद्ध शायर मंसूर उस्मानी की पुत्री का बीते दिनों आकस्मिक घटना के दौरान निधन हो गया था, जिस पर दु:ख व्यक्त करने के लिए प्रख्यात कवि डॉक्टर कुमार विश्वास आज बारादरी स्थित उनके आवास पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की। डॉ विश्वास मुरादाबाद में उदीषा : साहित्योत्सव चौपाला कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए सोमवार को मुरादाबाद आए हुए हैं। डॉ. विश्वास ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के हिंदी विरोधी रुख पर गहरा दु:ख प्रकट किया है।
डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि भाषाएं संवाद का माध्यम हैं, विरोध का नहीं। कुमार विश्वास ने कहा सामान्य आस्तिक होने के नाते वे शंकराचार्य जी के प्रति केवल श्रद्धा रखते हैं और किसी भी पक्ष द्वारा की गई भूल के लिए क्षमाप्रार्थी हैं। शंकराचार्य विवाद पर गहराई से बात करते हुए कुमार विश्वास ने दो प्रमुख पक्षों को रेखांकित किया। प्रख्यात कवि ने कहा कि प्रशासन को भगवाधारी संतों और धर्म-संस्कृति के रक्षकों से संवाद करते समय अपनी मर्यादा और जिम्मेदारी का विस्मरण नहीं करना चाहिए, कुमार विश्वास ने सात्विक क्रोध को त्यागने की प्रार्थना करते हुए शंकराचार्य से सभी पर आशीर्वाद बनाए रखने का आग्रह किया।
भाषा विवाद पर कुमार विश्वास ने कहा एम.के. स्टालिन के बयानों को ‘क्षोभजनक’ बताया, कुमार विश्वास ने तर्क दिया कि जिनके पिता का नाम ‘करुणानिधि’ राम का पर्यायवाची है, उनके द्वारा राम की भाषा (हिंदी) का विरोध करना विरोधाभासी है। उन्होंने दक्षिण भारतीय भाषाओं की समृद्धि की सराहना करते हुए उत्तर भारतीयों से भी सुब्रमण्यम भारती और तिरुवल्लुवर जैसे विद्वानों को पढ़ने का आह्वान किया ताकि भाषाई खाई को पाटा जा सके।इस दौरान पुलिस अधीक्षक नगर कुमार रणविजय सिंह, सदर कोतवाली इंस्पेक्टर राजेश कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे।