मॉस्को, 15 जनवरी (हि.स.)। रूस और ब्रिटेन के बीच पहले से चले आ रहे तनाव में एक बार फिर तेजी आ गई है। जासूसी का आरोप लगाते हुए रूस ने मॉस्को स्थित ब्रिटिश दूतावास के एक राजनयिक को देश छोड़ने का आदेश दिया है। रूसी संघीय सुरक्षा सेवा (एफएसबी) का दावा है कि संबंधित अधिकारी ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी एमआई6 के लिए गुप्त गतिविधियों में शामिल था, हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया गया है।
रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि संबंधित राजनयिक की मान्यता रद्द कर दी गई है और उसे दो सप्ताह के भीतर रूस छोड़ना होगा। इस संबंध में ब्रिटिश दूतावास की प्रभारी अधिकारी डेने ढोलकिया को मंत्रालय में तलब कर औपचारिक नोटिस सौंपा गया। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि रूस अपने क्षेत्र में कथित रूप से गुप्त रूप से तैनात विदेशी खुफिया अधिकारियों की मौजूदगी को स्वीकार नहीं करेगा।
रूसी पक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि ब्रिटेन इस कदम के जवाब में कोई कार्रवाई करता है, तो मॉस्को भी उसी स्तर पर प्रतिक्रिया देगा। इसे दोनों देशों के बीच राजनयिक टकराव के और बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
उधर, ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने रूस के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। लंदन ने कहा है कि वह एक ब्रिटिश राजनयिक के निष्कासन के मामले की समीक्षा कर रहा है और यह आरोप पूरी तरह निराधार हैं। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि इससे पहले भी रूस ने ब्रिटिश कर्मचारियों पर बिना ठोस आधार के ऐसे आरोप लगाए हैं।
ब्रिटेन ने आरोप लगाया कि राजनयिकों को निशाना बनाने की यह कार्रवाई रूस की हताशा को दर्शाती है और इससे अंतरराष्ट्रीय राजनयिक मिशनों के सामान्य और सुरक्षित संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
गौरतलब है कि फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस की सैन्य कार्रवाई के बाद से मॉस्को और पश्चिमी देशों के रिश्ते शीत युद्ध के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। इस दौरान रूस और नाटो समर्थक देशों के बीच कई बार राजनयिकों का आपसी निष्कासन हो चुका है। मार्च 2025 में भी रूस ने जासूसी के आरोपों में दो ब्रिटिश राजनयिकों को निष्कासित किया था, जिसे ब्रिटेन ने उस समय भी बेबुनियाद करार दिया था।# russa,#british