नंदिनी माथुर का यूथ आइकन−पाथ ब्रेकर के रूप चयन

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उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर जनपद की नंदिनी माथुर का चयन विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 में यूथ आइकन एवं पाथ ब्रेकर के रूप में हुआ है। यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर का आयोजन भारत सरकार के युवा कार्य एवं खेल मंत्रालय द्वारा 9 से 12 जनवरी 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। जहाँ नंदिनी देश के प्रधानमंत्री की उपस्थिति में राष्ट्रीय मंच पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगी।
​नंदिनी माथुर बनस्थली विद्यापीठ की विधि छात्रा हैं तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों की भी अध्ययनरत हैं। वे महिलाओं के अधिकारों, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में निरंतर कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे UNICEF India की यूथ क्रिएटर भी हैं और जमीनी स्तर पर सामाजिक परिवर्तन हेतु सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
​केंद्रीय मंत्री एवं जनप्रतिनिधियों से सार्थक संवाद


इस विशेष अवसर पर नंदिनी ने भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्य एवं खेल मंत्री श्री मनसुख मांडविया से शिष्टाचार भेंट की और विभिन्न युवा केंद्रित मुद्दों पर संवाद किया। इसके साथ ही उन्होंने कई अन्य सांसदों (MPs) और विधायकों (MLAs) से भी मुलाकात कर सामाजिक न्याय और युवाओं की भागीदारी पर चर्चा की। अनुभवी राजनेताओं के साथ इस वार्ता ने उनके विजन को और मजबूती प्रदान की है।
​शोध, विश्लेषणात्मक सोच और प्रभावी अभिव्यक्ति नंदिनी की विशेष पहचान है। उनका उद्देश्य समान विचारधारा वाले व्यक्तियों और संगठनों के साथ मिलकर लैंगिक समानता, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाना है।
​विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 में उनका चयन और राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ उनका यह संवाद बिजनौर और उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायी उपलब्धि है।

इतिहास के पन्नों में 14 जनवरी :1761–पानीपत का तीसरा युद्ध

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इस तारीख यानी 14 जनवरी 1761 को हरियाणा के पानीपत के मैदान में भारत के इतिहास की सबसे निर्णायक लड़ाइयों में से एक, पानीपत का तीसरा युद्ध, लड़ा गया। यह युद्ध मराठा साम्राज्य और अफगान शासक अहमदशाह अब्दाली (अहमदशाह दुर्रानी) के बीच हुआ था। इस संघर्ष में मराठा सेना का नेतृत्व सदाशिवराव भाऊ कर रहे थे, जबकि अहमदशाह अब्दाली अफगान और उसके सहयोगी बलों के साथ मैदान में उतरा था।

यह युद्ध अत्यंत भीषण और रक्तरंजित रहा, जिसमें लाखों सैनिकों की जान गई। अंततः इस युद्ध में अहमदशाह अब्दाली की विजय हुई और मराठा शक्ति को भारी क्षति पहुंची। पानीपत की इस तीसरी लड़ाई ने उत्तर भारत की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया और मराठा साम्राज्य के विस्तार को अस्थायी रूप से रोक दिया। इतिहास में यह युद्ध शक्ति-संतुलन बदलने वाली घटना के रूप में जाना जाता है, जिसने आने वाले वर्षों में भारत के राजनीतिक परिदृश्य की दिशा तय की।

महत्वपूर्ण घटनाचक्र

1514 – पोप लियो एक्स ने दासता के विरुद्ध आदेश पारित किया।

1641 – यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी ने मलक्का शहर पर विजय प्राप्त की।

1659 – एलवास के युद्ध में पुर्तगाल ने स्पेन को पराजित किया।

1758 – इंग्लैंड के सम्राट के एक अधिकार पत्र के तहत ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में कंपनी या सम्राट के खिलाफ किसी भी युद्ध में लूटे गये धन एवं सम्पत्ति को रखने का अधिकार मिला।

1758 – ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में लड़ाई में जीती हुई संपत्ति अपने पास रखने का अधिकार इंग्लैंड नरेश ने दिया।

1760 – फ्रांसीसी जनरल लेली ने पांडिचेरी अंग्रेज़ों के हवाले कर दिया।

1761 – पानीपत की तीसरी लड़ाई मराठों और अहमदशाह अब्दाली के बीच हुई।

1761 – भारत में मराठा शासकों और अहमदशाह दुर्रानी के बीच पानीपत का तीसरा युद्ध हुआ।

1809 – इंग्लैंड और स्पेन ने ‘नेपोलियन बोनापार्ट’ के खिलाफ गठबंधन किया।

1784 – अमरीका ने ब्रिटेन के साथ शांति संधि की पुष्टि की।

1858 – नेपोलियन तृतीय की हत्या की साजिश का भंडाफोड़ हुआ।

1867 – पेरू ने स्पेन के ख़िलाफ जंग का ऐलान किया।

1907 – जमैका में भूकंप से किंगस्टन शहर तबाह हो गया और एक हज़ार से अधिक लोग मारे गये।

1907 – जमायका में आये भूकम्प में करीब 1000 लोगों की मौत हो गई।

1912 – रेमंड पोंकारे फ्रांस के प्रधानमंत्री बने।

1918 – फ्रांस के पूर्व प्रधानमंत्री जोसेफ कैलाक्स को देशद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किया गया।

1950 – ईरान में मुहम्मद सईद ने सरकार का गठन किया।

1954 – जगदगुरु कृपालु महाराज ने 7 दिनों तक 500 हिन्दू विद्वानों के समक्ष भाषण दिया। उन्हें पाँचवाँ जगदगुरु चुना गया।

1962 – अल्जीरिया के शहरों में आतंकवादी हमलों में 6 लोग मारे गये।

1966 – इंडोनेशिया ने राष्ट्रसंघ स्थित अपना मिशन बंद कर दिया।

1966 – भारत के दक्षिणी राज्य मद्रास का नाम बदलकर तमिलनाडु किया गया।

1974 – विश्व फुटबाल लीग की स्थापना की गयी।

1975 – सोवियत संघ ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को समाप्त किया।

1982 – इंदिरा गांधी ने 20 सूत्री कार्यक्रम की घोषणा की।

1985 – हुन सेन कंबोडिया के प्रधानमंत्री निर्वाचित।

1986 – मध्य अमेरिकी देश ग्वाटेमाला में संविधान लागू हुआ।

1986 – ग्वाटेमाला में विनिसियों केरजो 6 वर्षों में पहले असैनिक राष्ट्रपति बने।

1989 – इलाहबाद में बारह वर्ष बाद कुम्भ का मेला प्रारम्भ हुआ।

1992 – इजराइल ने जार्डन के साथ शांतिवार्ता शुरू की।

1992 – पौलैंड के एक जहाज के बाल्टिक सागर में डूब जाने से 54 लोग मारे गये।

1994 – यूक्रेन, रूस तथा संयुक्त राज्य अमेरीका द्वारा मास्को में परमाणु अस्त्र कम करने सम्बन्धी समझौते पर हस्ताक्षर।

1998 – पाकिस्तान में एक अफगान कार्गो जहाज के दुर्घटनाग्रस्त होने से करीब 50 लोगों की मौत हो गई।

1999 – भारत का पहला अत्याधुनिक ‘हवाई यातायात परिसर’, दिल्ली राष्ट्र को समर्पित किया गया।

1999 – बुलंट इसेविट तुर्की के नये प्रधानमंत्री नियुक्त।

2000 – कम्प्यूटर बादशाह बिल गेट्स ने स्टीव वाल्मर को विश्व की सबसे बड़ी कम्प्यूटर साफ्टवेयर कम्पनी सौंपी।

2001 – अल साल्वाडोर में भूकम्प, 234 लोग मारे गये।

2001 – मैच फ़िक्सिंग के प्रकरण में भारतीय सटोरिया संजीव चावला लंदन में गिरफ्तार व जमानत पर रिहा।

2002 – भारत के रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडीज ने कहा कि आतंकवाद की समाप्ति के बाद ही सेना सीमा से हटेगी।

2002 – आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में चीन भारत के साथ, न्यूयार्क में रक्षामंत्री जार्ज फ़र्नांडीस ने आतंकवाद की समाप्ति से पहले सीमा से भारतीय सेनाएं हटाने से इन्कार किया।

2005 – जम्मू – कश्मीर में दो मुठभेड़ों में पांच आतंकवादी मारे गये।

2007 – नेपाल में अंतरिम संविधान को मंजूरी मिली।

2008 – उत्तर प्रदेश शासन की निविदा मूल्यांकन कमेटी ने जेपी समूह को एक हजार किमी लम्बी ‘गंगा एक्सप्रेस वे योजना’ का काम सौंपने की संस्तृति की।

2008 – फ्रांस के मुख्य विपक्षी दल ने यूरोपीय संघ के पहले राष्ट्रपति पद के लिए पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के नाम के प्रस्ताव को खारिज किया।

2009 – सरकार ने विदेशी पत्रों के फेसीमाइल (प्रति) संस्करणों से शत-प्रतिशत विदेशी निवेश को मंज़ूरी देने की घोषणा की।

2017- बिहार के पटना में गंगा नदी में नाव डूबने से कम से कम 24 लोगों की मृत्यु।

2020 – केरल सरकार ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। केरल नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाने वाला पहला राज्य बना।

जन्म

1551 – अबुल फजल – मुगल काल में अकबर के नवरत्नों में से एक।

1804 – जॉन पार्क – मशहूर संगीतकार का जन्म हुआ।

1892 – डी. बी. देवधर – भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी थे, जिनके नाम पर क्रिकेट टूर्नामेंट ‘देवधर ट्रॉफी’ खेला जाता है।

1886 – मंगूराम – समाज सुधारक थे।

1896 – सी. डी. देशमुख, ब्रिटिश शासन के अधीन आई.सी.एस. अधिकारी और स्वतंत्रता के बाद भारत के तीसरे वित्त मंत्री।

1899 – ब्रिगेडियर राजेन्द्र सिंह – ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित भारतीय सैन्य अधिकारी थे।

1905 – दुर्गा खोटे, हिन्दी व मराठी फ़िल्मों की प्रसिद्ध अभिनेत्री।

1918 – सुधाताई जोशी – पुर्तग़ाली साम्राज्यवादियों से गोवा की मुक्ति के स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख नेता थीं।

1921 – बिन्देश्वरी दुबे – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ तथा बिहार के मुख्यमंत्री थे।

1926 – महाश्वेता देवी – भारत की सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका।

1934 – दशरथ मांझी – एक ऐसे भारतीय व्यक्ति थे, जिन्हें ‘बिहार का माउंटेन मैन’ कहा जाता है।

1942 – योगेश कुमार सभरवाल – भारत के सर्वोच्च न्यायालय के 36वें भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश।

1950 – रामभद्राचार्य – एक हिंदू धर्मगुरु, शिक्षक, संस्कृत के विद्वान, बहुभाषाविद, लेखक, दार्शनिक व नाटककार हैं।

1951 – ओ. पन्नीरसेल्वम – भारतीय राजनीतिज्ञ, जो तमिलनाडु के भूतपूर्व छठे मुख्यमंत्री रहे हैं।

1967 – अमेरिकी अभिनेत्री एमिली वॉटसन का जन्म हुआ।

1977 – नारायण कार्तिकेयन – भारत के एकमात्र फ़ॉरमूला वन चालक।

निधन

1742 – एडमंड हैली, एक प्रसिद्ध खगोलशास्त्री।

2017 – सुरजीत सिंह बरनाला – पंजाब के राजनीतिक दल शिरोमणि अकाली दल के राजनीतिज्ञ तथा भूतपूर्व मुख्यमंत्री थे।

2024 – मुनव्वर राणा – भारतीय उर्दू कवि थे। उनकी कविता ‘शहदबा’ के लिए 2014 में ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ मिला था।

महत्वपूर्ण दिवस

-मकर संक्रांति।

-अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह दिवस (10 दिवसीय)।

-राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह (11 जनवरी- 17 जनवरी तक)।

उत्तराखंड के बागेश्वर में भूकंप के झटके,घरों से बाहर निकले लोग

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देहरादून, 13 जनवरी (हि.स.)। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के बागेश्वर में आज सुबह 7:25 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 3.5 मापी गई है। सुबह-सुबह भूकंप के झटके महसूस होने लोग घरों से बाहर निकल गए।

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, बागेश्वर में भूकंप का केंद्र था। जमीन के 10 किलोमीटर नीचे केंद्र होने के कारण लोगों को झटके महसूस हुए। भूकंप का असर बागेश्वर से 174 किलोमीटर दूर ऋषिकेश और 183 किलोमीटर दूर हरिद्वार तक महसूस किया गया। राज्य आपदा प्रधिकरण से मिली जानकारी के अनुसार भूकंप के बाद से स्थानीय प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है। इससे किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। कुछ लोगों ने बताया कि झटकों के साथ गड़गड़ाहट जैसी आवाज सुनाई दी, जिससे डर और बढ़ गया।

प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों के अनुसार कम तीव्रता का भूकंप आमतौर पर नुकसानदेह नहीं होता, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्कता बरतना जरूरी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने विनय कटियार का हाथ जोड़कर किया स्वागत

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-अयोध्या में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का मेगा शो

अयोध्या, 13 जनवरी (हि.स.)। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का अयोध्या में यह पहला आगमन था। पहली बार पार्टी में ऐसा जोश किसी प्रदेश अध्यक्ष के लिए दिखा। ऐसा नहीं कि कुर्मी बिरादरी से पंकज चौधरी पहले प्रदेश अध्यक्ष हैं। इससे पहले ओमप्रकाश सिंह विनय कटियार व स्वतंत्र देव सिंह प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। इनमें विनय कटियार तो वही हैं जो अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का दावा कर भाजपा के गले की हड्डी बन चुके हैं।

सोहावल के कांटा में स्थित मां वैष्णो देवी महिला महाविद्यालय में प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत में प्रदेश अध्यक्ष जिस अंदाज में विनय कटियार से मिले, उसने सभी को चौंका दिया। पर्दे के पीछे प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत कार्यक्रम की व्यवस्था भाजपा नेता सत्य प्रकाश वर्मा पप्पू के हवाले रही जो महाविद्यालय प्रबंधन से जुड़े हैं। कटियार के नजदीकी लोगों में शामिल हैं।जिले में प्रदेश अध्यक्ष का स्वागत अभूतपूर्व हुआ। स्वागत के पीछे पार्टी का नजरिया चाहे पूर्वांचल में बिदके कुर्मी वोटो को साधने का रहा हो या फिर कोई अन्य। विनय कटियार राम मंदिर आंदोलन के नेता रहे हैं। तीन बार अयोध्या के सांसद हुए दो बार के राज्यसभा सदस्य होने के बावजूद वह केंद्रीय मंत्री तो कभी नहीं बने लेकिन उनका व्यक्तिव राष्ट्रीय परिचय को भी मोहताज नहीं रहा। इधर कटियार अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की अंगड़ाई लेने लगे हैं जो विधानसभा चुनाव के करीब आते आते केंद्रीय व प्रांतीय नेतृत्व दोनों के सामने संकट खड़ा करेगा। अयोध्या सीट से दो बार जीते विधायक वेद प्रकाश गुप्त तीसरी बार चुनाव लड़ने की तैयारी में स्वयं या पुत्र अमल गुप्त को लेकर हैं तो पूर्व सांसद लल्लू सिंह सांसद बनने से पहले पांच बार इसी सीट से विधायक रह चुके हैं। अयोध्या सीट से लोकसभा चुनाव हारने के बाद उनके भी विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने की चर्चा धीरे-धीरे तेजी पकड़ने लगी है। वैसे तो टिकट के दावेदार कई है।विनय कटियार ने जिस तरह से दावेदारी की है, उसे अन्य दावेदारों का परेशान होना स्वाभाविक है। ऐसे में यह कटियार के लिए भी किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं। अगर पार्टी नेतृत्व उनको अयोध्या सीट से टिकट नहीं देता है तो उनके चाहने के बावजूद भी जिले में उनका सजातीय कुर्मी वोटर भाजपा के साथ रहेगा, यह कहना मुश्किल है। भाजपा के लिए यही वह समीकरण है जो कमजोर कड़ी बनने के साथ डंके की चोट पर कटियार के विधानसभा चुनाव में अयोध्या सीट से लड़ने के ऐलान को मजबूती देता है। यह वैसा धर्म संकट है जो कटियार को हाशिए पर धकेलने वालों को आने वाले दिनों में बहुत परेशान करेगा।

‘बलोचिस्तान में पाक की सेना के काफिले पर हमला ,छह जवान मरे’

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क्वेटा (बलोचिस्तान), 13 जनवरी (हि.स.)। बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) के प्रवक्ता मेजर घोरम बलोच ने दावा किया है कि नौ जनवरी को पाकिस्तान की सेना के काफिले पर फ्रंट के हमले में छह जवान मारे गए। प्रवक्ता ने मीडिया को भेजे बयान में कहा कि फ्रंट के लड़ाकों ने दोपहर करीब एक बजे सेंट्रल हाइवे पर ओरनाच क्रॉस पर सेना के काफिले पर घात लगाकर हमला किया।

द बलोचिस्तान पोस्ट के अनुसार, प्रवक्ता ने कहा कि सैन्य काफिले के एक वाहन पर भीषण हमला हुआ। इस वाहन में सवार छह जवान मौके पर ही मारे गए। सैन्य वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मेजर घोरम बलोच ने कहा कि बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट ने ओरनाच में कब्जा करने वाली पाकिस्तान की सेना के काफिले पर हमले में छह कर्मियों की हत्या की जिम्मेदारी लेता है।

उल्लेखनीय है कि बीएलएफ बलोचिस्तान की आजादी के लिए लंबे समय से संघर्ष कर है। बलोचिस्तान में आजादी का आंदोलन 1947 में भारत के विभाजन के बाद शुरू हुआ। कलात रियासत को पाकिस्तान में जबरन मिलाने के बाद तब से बलोच राष्ट्रवादी अपने क्षेत्र की पूर्ण स्वतंत्रता और अपने प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। 2004 से बीएलएफ, बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) और बलोच रिपब्लिकन आर्मी (बीआरए) जैसे विद्रोही समूह सक्रिय हैं।

ऐतिहासिक तथ्य है कि 1947 में कलात रियासत ने खुद को स्वतंत्र घोषित किया, मगर 1948 में पाकिस्तान की सेना ने इसे जबरन पाकिस्तान में मिला लिया। बलोच विद्रोही अपने क्षेत्र की स्वतंत्रता, राजनीतिक स्वायत्तता और प्राकृतिक संसाधनों (जैसे गैस और खनिज) पर नियंत्रण चाहते हैं। बलोच राष्ट्रवादियों का मानना है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) उनकी जमीन पर विदेशी कब्जे को मजबूत करता है। यह गलियारा नहीं बनना चाहिए। आज बलोचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा और सबसे कम विकसित प्रांत है। बलोच राष्ट्रवादियों और इस्लामाबाद के बीच संघर्ष जारी है। बलोच अपने शोषण और उपेक्षा के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं।

बलोचिस्तान में डीआरए की मांग को लेकर सरकारी कर्मचारी सड़कों पर

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क्वेटा (बलोचिस्तान), 13 जनवरी (हि.स.)। पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलोचिस्तान में असमानता न्यूनीकरण भत्ता (डिसपैरिटी रिडक्शन अलाउंस ‘डीआरए’) की मांग को लेकर सरकारी कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध कर दिया है। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

द बलोचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, क्वेटा समेत बलोचिस्तान के विभिन्न जिलों में दर्जनों सरकारी कार्यालयों से जुड़े कर्मचारी पिछले सात महीनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बलोचिस्तान ग्रैंड अलायंस के बैनर तले संगठित कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि उन्हें 30 प्रतिशत डीआरए दिया जाए, जैसा कि अन्य प्रांतों और संघीय सरकार में लागू है। बलोचिस्तान ग्रैंड अलायंस के नेताओं का कहना है कि राज्यपाल भवन, मुख्यमंत्री सचिवालय, सिविल सचिवालय, विधानसभा सचिवालय और उच्च न्यायालय सहित कुछ संस्थानों में एक ही श्रेणी के कर्मचारियों को अधिक वेतन दिया जा रहा है, जबकि अन्य अदालतों में एक ही श्रेणी के कर्मचारी कम वेतन पर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस अंतर को दूर करने के लिए नवीकरणीय राजस्व अधिनियम अपरिहार्य है। सरकार की समिति ने भी इसकी सिफारिश की है लेकिन मुख्यमंत्री ने अभी तक इन सिफारिशों को लागू नहीं किया है। विरोध आंदोलन की शुरुआत के बाद सरकार और कर्मचारियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। बातचीत का हर दौर बेनतीजा रहा।

ईरान ने ट्रंप की चुनौती स्वीकार की,कहा-अमेरिका से युद्ध के लिए तैयार

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तेहरान/वाशिंगटन, 13 जनवरी (हि.स.)। इस्लामिक गणराज्य ईरान में 28 दिसंबर को महंगाई के खिलाफ शुरू प्रदर्शन देश के सर्वोच्च शासक अली खामेनेई को हटाने के आंदोलन के रूप में बदल गया है। समूचे ईरान में लोग सड़कों पर हैं। इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। सुरक्षा बलों की गोलियों से अब तक कम से कम 2000 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की खबरें हैं। लोग लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। खामेनेई का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को अमेरिका भड़का रहा है। उधर, अमेरिकी ने कई बार चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर दमन जारी रहा तो मजबूत सैन्य हमले के लिए ईरान तैयार रहे। ईरान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा कि वह हर तरह से युद्ध के लिए तैयार हैं।

ईरान ने कई देशों के राजदूतों को तलब किया

ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान पर बहुत मजबूत सैन्य हमले पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि तेहरान को प्रदर्शनकारियों पर दमन न करने की चेतावनी की अनदेखी करना बहुत महंगा पड़ेगा। इस पर ईरान के विदेशमंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान निष्पक्ष बातचीत के लिए भी तैयार है, लेकिन वह युद्ध के लिए भी हर तरह से तैयार है। ईरान के स्वास्थ्य अधिकारियों ने दावा किया है कि दो हफ्ते से ज्यादा समय से जारी अशांति में मरने वालों की शुरुआती संख्या हाल के दिनों में बढ़कर कम से कम 2,000 पहुंच गई है। ईरान ने ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और इटली के राजदूतों को तलब किया है। ईरान ने उनकी सरकारों पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने और उसके आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया।

ट्रंप को तीन विकल्पों की जानकारी दी गई

सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप को सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों से ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए तीन विकल्पों की जानकारी दी है। पहला- सैन्य हमला। दूसरा- साइबर ऑपरेशन। तीसरा -प्रदर्शनकारियों का सहयोग करने के लिए मनोवैज्ञानिक रणनीति। अधिकारियों ने कहा कि यह तीनों एक साथ भी हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, “दो अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और कूटनीतिक दरवाजे खुले हुए हैं।”

ऑस्ट्रेलिया ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की निंदा की

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा की निंदा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान के लोग मौजूदा सरकार को हटाकर एक लोकतांत्रिक ईरान स्थापित करेंगे, जहां मानवाधिकारों का सम्मान किया जाएगा।

मंगलवार को कैनबरा में एक संवाददाता सम्मेलन में अल्बानीज ने कहा, “हम ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं जो एक दमनकारी शासन के खिलाफ लड़ रहे हैं। मुझे उम्मीद है, लोग खामेनेई को हटा देंगे।” विदेशमंत्री पेनी वोंग ने कहा कि मौजूदा ईरानी सरकार की कोई वैधता नहीं है। वह सत्ता बचाने के लिए अपने ही नागरिकों की हत्या कर रही है।

इजराइल में अमेरिकी राजदूत ने कहा- ट्रंप ईरान में नरसंहार नहीं होने देंगे

इजराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप मूकदर्शक नहीं बने रहेंगे। वह ईरान में प्रदर्शनकारियों का चल रहा नरसंहार जारी नहीं रहने देंगे। माइक हकाबी ने सोमवार को स्काई न्यूज से कहा, ” ट्रंप लोगों को मरते हुए नहीं देखेंगे। वह यकीनन दखल देंगे। उन्होंने कहा, ” ईरान के लोग खामेनेई का इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे अपने परिवारों को खाना नहीं खिला सकते। पानी की कमी है। महंगाई इतनी ज्यादा है कि एक ब्रेड का पैकेट खरीदना मुश्किल है।

अमेरिका ने अपने नागरिकों से तुरंत ईरान छोड़ने की अपील की

अमेरिकी दूतावास ईरान ने सोमवार को एक वर्चुअली सुरक्षा परामर्श जारी किया। इसमें अमेरिकी नागरिकों से देश भर में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच तुरंत ईरान छोड़ने की अपील की गई। नागरिकों को सलाह दी गई है कि अमेरिकी सरकार की मदद पर निर्भर हुए बिना अपने खुद के इंतजाम से तुरंत ईरान छोड़ दें।

ईरान पुलिस प्रमुख ने ट्रंप को चुनौती दी

ईरान के पुलिस प्रमुख अहमदरेज़ा रादान ने सोमवार को प्रदर्शनकारियों की हत्याओं को लेकर इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप की धमकी का जवाब देते हुए कहा: “उन्होंने एक बार यह गलती की थी और उन्हें जवाब मिल गया था, लेकिन अगर वे फिर से आते हैं, तो हम उनकी सेवा के लिए तैयार हैं।” उन्होंने कहा: “हमारे पिछले हमले के जवाब को पचाने में उन्हें बहुत समय लगेगा।” इस बीच निर्वासित राजकुमार रजा पहलवी ने सोमवार को सीबीएस न्यूज पर प्रसारित एक इंटरव्यू में कहा कि वह ट्रंप प्रशासन के सीधे संपर्क में हैं। यह वक्त गेम-चेंजर हो सकता है। पहलवी ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के अंत और सोवियत संघ के पतन का उदाहरण देते हुए कहा, “कोई भी मुक्ति अभियान तब सफल हुआ है जब दुनिया ने आखिरकार दमनकारी सरकारों को ललकारा।

खामेनेई ने कहा-अमेरिका की साजिश विफल

अली खामेनेई ने सोमवार को एक संदेश में इस्लामिक शासन खत्म करने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को अमेरिका समर्थित भाड़े के सैनिक बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने अमेरिकी साजिश को विफल कर दिया है। संदेश में कहा गया कि ” महान ईरान राष्ट्र ने अपने संकल्प और पहचान के साथ खुद को अपने दुश्मनों के सामने पेश किया। यह अमेरिकी राजनेताओं के लिए एक चेतावनी थी कि वे अपना धोखा बंद करें और धोखेबाज भाड़े के सैनिकों पर भरोसा करना बंद करें।”

मुरादाबाद रेल मंडल के लक्सर स्टेशन पर चार रेलगाड़ियों का ठहराव शुरु

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मुरादाबाद, 12 जनवरी (हि.स.)। मुरादाबाद रेल मंडल

के लक्सर स्टेशन पर गाड़ी संख्या 12358 अमृतसर -कोलकाता दुर्गियाना एक्सप्रेस सहित 4 गाड़ियों के ठहराव दिए जाने के अवसर पर सोमवार को कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अमृतसर से कोलकाता जाने वाली गाड़ी संख्या 12358 दुर्गियाना एक्सप्रेस को हरिद्वार के सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत और अपर मंडल रेल प्रबंधक पारितोष गौतम ने हरी झंडी दिखाकर गाड़ी को रवाना किया।

उत्तर रेलवे के मुरादाबाद रेल मंडल में वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक आदित्य गुप्ता ने बताया कि मंडल के लक्सर स्टेशन पर नगर क्षेत्र के यात्रियों की सुविधा हेतु लंबी दूरी की 04 गाड़ियां 14627 (सहरसा- छैहरटा अमृत भारत एक्सप्रेस ),गाड़ी संख्या 14628 ( छैहरटा-सहरसा अमृत भारत एक्सप्रेस ), गाड़ी संख्या 12357 ( कोलकाता-अमृतसर दुर्गियाना एक्सप्रेस ) एवं गाड़ी संख्या 12358 ( अमृतसर-कोलकाता दुर्गियाना एक्सप्रेस ) का लक्सर स्टेशन पर ठहराव दिया गया है।

इस सुअवसर पर गाड़ी संख्या 12358 (अमृतसर कोलकाता दुर्गियाना एक्सप्रेस) के लक्सर स्टेशन पर ठहराव समय 12:18- 12: 20 बजे पर गाड़ी के स्वागत हेतु एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

मुरादाबाद रेल मंडल सहित मंडल के वरिष्ठ अधिकारी तथा अनेक संख्या में नगर क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, यात्रीगण, रेलवे कर्मचारीगण, अनेक संख्या में मीडिया बंधुगण, मुरादाबाद मंडल सांस्कृतिक टीम, भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, उत्तर रेलवे मुरादाबाद मंडल की टीम उपस्थित रहीं।

निम्नलिखित गाड़ियों का उनके संचालन दिवस पर लक्सर स्टेशन पर नियमित ठहराव दिया गया है –

1. गाड़ी संख्या 12358 (अमृतसर-कोलकाता दुर्गियाना एक्सप्रेस) जिसका नियमित आगमन व प्रस्थान समय 12:18-12:20 बजे रहेगा I (संचालन दिवस-अमृतसर स्टेशन से प्रत्येक सोमवार एवं प्रत्येक गुरुवार)।

2. गाड़ी संख्या 14627 (सहरसा- छैहरटा अमृत भारत एक्सप्रेस) का जेसीओ 12.01.2026 को सहरसा से चलकर लक्सर स्टेशन पर कल दिनांक 13.01.2025 को आगमन व प्रस्थान समय साय: 18:32-18:34 बजे रहेगा I (संचालन दिवस :- सहरसा से प्रत्येक सोमवार को केवल) I

3. गाड़ी संख्या 14628 (छैहरटा-सहरसा अमृत भारत एक्सप्रेस ) का जेसीओ 17.01.2026 को छैहरटा से चलने वाली का लक्सर स्टेशन पर दिनांक 18.01.26 को आगमन व प्रस्थान समय प्रातः 06:21-06:23 बजे रहेगा I (संचालन दिवस – छैहरटा स्टेशन से प्रत्येक शनिवार केवल) I

4. गाड़ी संख्या 12357 (कोलकाता-अमृतसर दुर्गियाना एक्सप्रेस) जेसीओ 13.01.2026 को कोलकाता से चलने वाली गाड़ी का लक्सर स्टेशन पर दिनांक 14.01.2026 को आगमन व प्रस्थान समय प्रातः 09:42-09:44 बजे रहेगा I (संचालन दिवस :- कोलकाता से प्रत्येक मंगलवार एवं प्रत्येक शनिवार केवल )

विवेक विश्वविद्यालय में रन फाॅर स्वदेशी आयोजित

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प्रत्येक विद्यार्थियों को हो स्वदेशी के मूल्य और आत्मनिर्भर भारत की समझ – अमित गोयल
उत्तर प्रदेश के बिजनौर के विवेक विश्वविद्यालय की ओर से स्वामी विवेकानंद के 164 वी जयंती के अवसर पर ”एक दौड़ स्वदेशी” के लिए रन फोर स्वदेशी का आयोजन किया गया। इस दौड का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अमित गोयल, प्रतिकुलाधिपति इं. दीपक मित्तल, कुलपति एन. के. गुप्ता, कुलसचिव डा. हितेश शर्मा ने संयुक्त रूप से झंडी दिखाकर किया।


रन फौर स्वदेशी में विज्ञान, नर्सिंग, फार्मेसी और आयुर्वेद स्कूल के विद्यार्थियों ने भागीदारी की। राष्ट्रीय युवा दिवस के इस अवसर पर कुलाधिपति ने खेलों के महत्व और युवा जोश के महत्व को बताते हुए कहा की भारत एक युवा देश है युवाओं को स्वदेशी का मूल्य एवं आत्मनिर्भर भारत का प्रत्यय ना केवल समझना है बल्कि उसके नए प्रतिमान भी स्थापित करने हैं। कुलपति प्रो0 एन0 के0 गुप्ता ने अपने संबोधन में युवाओं को शारीरिक संतुलन, अनुशासन, टीम वर्क और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों को समझने तथा बढाने की प्रेरणा देते हुए कहा कि इसी से देश का विकास होगा तथा भारत विश्वगुरु के पद पर अग्रसर होगा। कुलसचिव डा हितेश शर्मा ने स्वदेशी बनाने और स्वदेशी अपनाने और स्वदेशी बढाने पर जोर देते हुए विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। रन फौर स्वदेशी को सफल बनाने में डा0 संजय त्यागी, डा मीना चैधरी, डा प्रदीप शर्मा कुमार शर्मा, डा विशाल कुमार, डा. रंगनाथन, डा माया देवी, डा सतीश चंद्र, डा मीनाक्षी, डा विनेश कुमार आदि ने अपना सहयोग दिया।

बीएसई−एनएसई के बाद देश को मिलेगा तीसरा स्टॉक एक्सचेंज एमएसई

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बीएसई और एनएसई के बाद अब देश को मिलेगा तीसरा स्टॉक एक्सचेंज एमएसई

– अगले दो सप्ताह में मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज शुरू हो सकती है एक्टिव ट्रेडिंग

नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के बाद अब देश को जल्दी ही मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (एमएसई) के रूप में एक तीसरा स्टॉक एक्सचेंज मिलने वाला है। माना जा रहा है कि अगले दो सप्ताह में मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज में एक्टिव ट्रेडिंग की शुरुआत हो सकती है। जानकारी के अनुसार मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए इस एक्सचेंज में खास योजना तैयार की गई है, जिसके तहत फिलहाल मार्केट मेकर्स की नियुक्ति की जा रही है। इस एक्सचेंज के जरिए फिलहाल 130 शेयरों के लिए लिक्विडिटी देने की तैयारी की गई है।

मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (एमएसई) के एक्टिव होने का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। शुरुआती कारोबार के लिए एमएसई ने दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो चरणों में 1,240 करोड़ रुपये जुटाए हैं। मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज में ग्रो और जेरोधा जैसी प्रमुख ब्रोकरेज फर्म ने मुख्य रूप से निवेश किया है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (एमएसई) के लिए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के मुकाबले खड़ा होना आसान नहीं होगा‌। फिलहाल बीएसई और एनएसई की पकड़ काफी मजबूत बनी हुई है। इसलिए एमएसई के लिए इसको तत्काल चुनौती देना आसान नहीं होगा। कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान का मानना है कि बीएसई और एनएसई की मजबूत पकड़ के साथ ही फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट में मार्केट रेगुलेटर सेबी के नियम भी एमएसई के लिए मुश्किल बढ़ाने का काम करेंगे।

सेबी के नियमों के अनुसार फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में वीकली एक्सपायरी मंगलवार और गुरुवार को होती है। फिलहाल इसमें बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है। मौजूदा व्यवस्था में निफ्टी की एक्सपायरी मंगलवार को होती है, जबकि सेंसेक्स की एक्सपायरी गुरुवार को होती है। अगर सेबी के नियमों में बदलाव नहीं हुआ, तो एमएसई को भी एक्सपायरी के लिए मंगलवार या गुरुवार में से किसी एक दिन का चयन करना होगा। ऐसी स्थिति में एमएसई के लिए डेरिवेटिव्स में पकड़ बना पाना आसान नहीं होगा।

दिल्ली स्टॉक एक्सचेंज, कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज, मगध स्टॉक एक्सचेंज जैसे छोटे स्टॉक एक्सचेंजों का दौर खत्म होने के बाद अब देश में स्टॉक मार्केट की लगभग पूरी गतिविधि बीएसई और एनएसई के जरिए ही होती है। जहां तक मार्केट शेयर की बात है, तो फिलहाल एनएसई के पास सबसे अधिक हिस्सेदारी है। कैश में एनएसई की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक है। वहीं स्टॉक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में इसकी हिस्सेदारी 95 प्रतिशत है, जबकि इंडेक्स फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में एनएसई की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत है। दूसरी ओर, कैश में बीएसई की हिस्सेदारी 9 से 10 प्रतिशत के बीच है। स्टॉक फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में बीएसई की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत तथा इंडेक्स फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है।