इस्लामाबाद, 23 दिसंबर (हि.स.)। पाकिस्तान के अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा के करक के गुरगुरी इलाके में आज एक पुलिस वैन पर हुए हमले में पांच कांस्टेबल मारे गए। जिला पुलिस अधीक्षक शौकत खान ने घटना और हताहत कांस्टेबलों की संख्या की पुष्टि की है।
डान अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, जिला पुलिस अधीक्षक खान ने बताया कि शहीद पुलिसकर्मियों की पहचान कांस्टेबल शाहिद इकबाल, समीउल्लाह, आरिफ, सफदर और मोहम्मद अबरार के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि इलाके को घेर लिया गया है। हमलावरों की तलाश की जा रही है। दुनिया न्यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, पांचों कांस्टेबल रोज की तरह गश्त पर निकले थे। हमलावरों ने घात लगाकर उनकी वैन पर गोलियां चला दीं।
दुनिया न्यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल (2025) अब तक खैबर पख्तूनख्वा में हुएआतंकी हमलों में सुरक्षा अधिकारियों सहित 502 लोग मारे गए। खैबर पख्तूनख्वा पुलिस के अनुसार, कुल 1,588 आतंकवादी घटनाएं हुईं, जिनमें 223 नागरिकों की मौत हुई और 570 घायल हुए। इसके अलावा, 137 पुलिस अधिकारी शहीद हुए और 236 अन्य घायल हुए, जबकि विभिन्न एजेंसियों के 18 कानून प्रवर्तन कर्मियों ने भी अपनी जान गंवाई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन हमलों में फेडरल कांस्टेबुलरी के 124 कर्मी शहीद हुए और 244 घायल हुए। इस दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकवाद से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभिन्न अभियानों के दौरान 348 आतंकवादियों को मार गिराया गया। आतंकवाद से संबंधित सबसे ज्यादा 394 घटनाएं बन्नू क्षेत्र में हुईं। 41 पुलिस अधिकारी शहीद हो गए और 89 घायल हुए। इस क्षेत्र में 54 नागरिकों की मौत और 125 घायल होने की भी सूचना मिली।
डेरा इस्माइल खान, उत्तरी वजीरिस्तान और दक्षिणी वजीरिस्तान जैसे अन्य क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में घटनाएं हुईं। अकेले उत्तरी वजीरिस्तान में 181 मामले दर्ज किए गए, जिसके परिणामस्वरूप 38 नागरिकों की मौत हुई और 182 घायल हुए। दक्षिणी वजीरिस्तान में, 103 दर्ज मामलों में 39 नागरिक मारे गए और 86 घायल हुए।
नई दिल्ली, 23 दिसंबर (हि.स.)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने पांच दिवसीय जर्मनी दौरे के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर भारतीय संविधान की मूल भावना को कमजोर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा संविधान में निहित समान अधिकार, राज्यों की समानता, भाषाई विविधता और धार्मिक समानता के विचार को समाप्त करना चाहती है।
कांग्रेस नेता राहुल ने बर्लिन स्थित हर्टी स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ संवाद करने का सोमवार रात लगभग एक घंटे का वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया। इस वीडियो में राहुल ने लोकतंत्र, संस्थाओं और वैश्विक हालात पर विचार रखे।
उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर पा रही हैं। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय जैसी एजेंसियों का विरोधियों के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग किया जा रहा है। कांग्रेस की लड़ाई केवल भाजपा से नहीं, बल्कि संस्थागत ढांचे और एजेंसियों पर कथित कब्जे के खिलाफ भी है।
उन्होंने दावा किया कि भारत के हरियाणा प्रांत की मतदाता सूची में एक विदेशी महिला का नाम पाए जाने का मुद्दा उठाया गया, लेकिन निर्वाचन आयोग से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। राहुल ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल किए। राहुल ने कहा कि भारत में व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन के लिए विनिर्माण क्षेत्र का मजबूत होना आवश्यक है। भाजपा सरकार ने कुछ बड़े उद्योग समूहों को प्राथमिकता दी। नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर जैसी नीतियों से छोटे और मध्यम उद्योगों को नुकसान पहुंचा है।
राहुल गांधी ने कहा कि भारत इतना बड़ा और विविध देश है कि उसका भविष्य किसी एक व्यक्ति द्वारा तय नहीं किया जा सकता। संविधान भारत को राज्यों का संघ मानता है, लेकिन मौजूदा सरकार इस पर व्यापक चर्चा के लिए तैयार नहीं है।
–मृतक आश्रित में नियुक्ति को लेकर कोर्ट की टिप्पणी
प्रयागराज, 23 दिसम्बर (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक आदेश में कहा है कि सरकारी प्राधिकरणों में काम कर रहे अधिकारी कानून की जानकारी नहीं रखते हैं। इस कारण अदालतों में अनावश्यक मुकदमों की बाढ़ आ जाती है और उनका रोस्टर अवरुद्ध हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की लापरवाही न केवल अदालत के समय की बर्बादी है बल्कि आम नागरिकों को भी अनावश्यक रूप से मुकदमेबाजी के लिए मजबूर करती है।
न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें एक अशिक्षित याची ने अपनी ही संविदात्मक अनुकम्पा नियुक्ति को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने कहा कि यह अनुभव में आया है कि कई मामलों में जिम्मेदार सरकारी अधिकारी न केवल वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी करते हैं, बल्कि कानून की स्थापित स्थिति के विपरीत भी कार्य करते हैं। इसका सीधा परिणाम यह होता है कि ऐसे मामले अदालतों में पहुंचते हैं और न्यायिक प्रणाली पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।
मामले के अनुसार याची के पिता की सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उसकी मां ने संबंधित प्राधिकरण को पत्र लिखकर पुत्र के बालिग होने पर उसे अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान करने का अनुरोध किया।
वर्ष 2007 में याची को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में मृतक आश्रित कोटे के तहत कंडक्टर के पद पर नियुक्त किया गया। यह नियुक्ति संविदात्मक प्रकृति की थी। याची को अपनी नियुक्ति की प्रकृति और उससे संबंधित कानून की जानकारी नहीं थी। इसी कारण उसने कई वर्षों तक सेवा के बाद अपनी संविदात्मक नियुक्ति को चुनौती दी और इसके समर्थन में इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुछ पूर्व निर्णयों का हवाला दिया।
वहीं, निगम की ओर से यह दलील दी गई कि याची इतने लंबे समय तक काम करने के बाद अपनी नियुक्ति को चुनौती नहीं दे सकता। हाईकोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य और उसके उपक्रमों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत निष्पक्षता और तर्कसंगतता के साथ कार्य करें। विशेषकर तब, जब उन्हें ऐसे लोगों के प्रति अपने दायित्व निभाने हों, जो कानून और प्रक्रिया की बारीकियों से परिचित नहीं हैं। कोर्ट ने अर्बन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट बीकानेर बनाम मोहन लाल मामले में सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया कि राज्य को अनावश्यक मुकदमेबाजी समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि इससे अदालतों में मामलों का अंबार लगता है और त्वरित न्याय में बाधा आती है।
कोर्ट ने कहा कि जब निगम स्वयं कानून की स्थिति से अवगत था तो उसकी जिम्मेदारी थी कि याची को इस प्रकार की नियुक्ति न देता। निगम की लापरवाही का खामियाजा याची को नहीं भुगतना चाहिए। कोर्ट ने निगम को मामले पर पुनर्विचार करने और कानून के अनुरूप आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। श्री मोदी ने कहा, “उन्होंने अपना जीवन समाज के वंचित वर्गों के कल्याण के साथ-साथ कृषि की प्रगति और किसानों की समृद्धि के लिए समर्पित कर दिया। एक कृतज्ञ राष्ट्र, देश के निर्माण में उनके योगदान को कभी नहीं भूल सकता।”चौधरी चरण सिंह को जयंती पर राष्ट्र ने भी दी श्रद्धांजलि।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा:
“पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के कल्याण के साथ-साथ कृषि की प्रगति और किसानों की समृद्धि के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को कृतज्ञ राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता।”
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री, महान किसान नेता, भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी को उनकी जयंती पर नमन किया।
X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा “पूर्व प्रधानमंत्री, महान किसान नेता, भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी को उनकी जयंती पर नमन करता हूँ। चौधरी चरण सिंह जी का जीवन कृषि व्यवस्था के उत्थान, किसानों के कल्याण और समाजसेवा को समर्पित रहा था। उन्होंने किसान और किसानी को शासन के केंद्र में स्थापित करने का साहसिक कार्य किया। आपातकाल और तानाशाही सत्ता को उखाड़ फेंकने में भी उनकी बड़ी भूमिका रही थी।
चौधरी चरण सिंह को जयंती पर राष्ट्र ने दी श्रद्धांजलि
नई दिल्ली, 23 दिसंबर (हि.स.)। पूरे राष्ट्र ने पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की जयंती के अवसर पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की और देशवासियों को किसान दिवस की शुभकामनाएं दीं।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने एक्स पोस्ट में कहा, “मैं दिवंगत चौधरी चरण सिंह की जयंती पर उन्हें भावपूर्ण नमन करता हूं! वे भारतीय राजनीति में गांव, किसान और श्रमिकों की आवाज थे।“
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री, किसान नेता चौधरी चरण सिंह को उनकी जयंती पर नमन! उनका पूरा जीवन कृषि व्यवस्था के उत्थान, किसानों के कल्याण और समाजसेवा को समर्पित रहा।“
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह दिन राष्ट्रीय किसान दिवस के रूप में उस विचारधारा का स्मरण है, जिसने किसान को नीति और राष्ट्र के केंद्र में रखा। देश के विकास में और किसानों के कल्याण के लिए चौधरी चरण सिंह का जो योगदान रहा है, उसे हमेशा याद रखा जाएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न चौधरी चरण सिंह ने अपने कार्यकाल में किसानों के जीवन को बेहतर बनाने का हर संभव प्रयास किया। राष्ट्रीय किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि किसानों के मुखर राजनेता, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर नमन व सभी देशवासियों को किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिहं शेखावत ने कहा कि देश की समृद्धि का रास्ता गांवों के खेतों और खलिहानों से होकर गुजरता है। किसानों के मसीहा भारत रत्न’ पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत चौधरी चरण सिंह की जयंती पर शत-शत नमन!
केन्द्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि देश के अन्नदाता किसान भाइयों एवं समस्त देशवासियों को राष्ट्रीय किसान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में चौधरी चरण सिंह के विचार सदैव प्रासंगिक रहेंगे। राष्ट्रोत्थान एवं किसानों के कल्याण के लिए समर्पित आपका जीवन देशवासियों को अन्नदाता की भलाई और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए सर्वदा प्रेरित करता रहेगा।
संस्कृति राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि चौधरी चरण सिंह के विचार और नीतियां आज भी किसानों के हित में मार्गदर्शक हैं।
अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव की रणभेरी बज उठी है। चुनाव मार्च-अप्रैल 2026 के आसपास कराए जाने की संभावना है, हालांकि आधिकारिक तारीख की फिलहाल घोषणा नहीं हुई है। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस से निलंबित नेता और बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा दांव खेलते हुए जनता उन्नयन पार्टी नामक नई पार्टी बनाकर राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। हुमायूं कबीर का यह फैसला ममता की मुश्किलें बढ़ा सकता है। अब तक मुस्लिम मत ममता की पार्टी को मिलते रहे है। हुमायूँ कबीर इनमें दो फाड़ करने में सफल होते है तो यह ममता के लिए अपनी गद्दी बचाना बड़ी चुनौती होंगी।
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के बंगाल दौरे के बाद भाजपा ने आक्रामक रूख अख्तियार कर लिया है। मोदी ने बंगाल में महा जंगलराज को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया है। उन्होंने बिहार चुनाव परिणामों का हवाला देते हुए बंगाल में भाजपा की जीत की उम्मीद जताई। मोदी ने कहा, जिस प्रकार बिहार की जनता ने विकास के लिए जंगलराज को एक स्वर से नकार दिया है, उसी प्रकार अब बंगाल की बारी है।
निश्चय ही यह चुनाव भाजपा के लिए करो या मरो साबित होंगे, इसमें कोई संशय नहीं है। बिहार चुनाव जीतने के बाद भाजपा के हौसले बुलंदी पर है। इसी के साथ विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं वैसे वैसे भाजपा और टीएमसी के बीच सियासी टकराव बढ़ता ही जा रहा हैं। भाजपा ने विधानसभा चुनाव की सियासी जंग फतह करने के लिए अपना एजेंडा सेट करना शुरू दिया है तो टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी अपनी सत्ता को बचाए रखनी की कवायद में है। देश की सत्ता पर भाजपा तीसरी बार काबिज है, लेकिन बंगाल में अभी तक कमल नहीं खिल सका है। नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा को बंगाल में उम्मीद की किरण दिखाई दी है, जिसके चलते 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी के सियासी दुर्ग में भाजपा अपनी सियासी बेस को बनाने की एक्सरसाइज शुरू कर दी है। बंगाल में एनडीए का मतलब भाजपा और इंडिया गठबंधन का अर्थ टीएमसी है। लोकसभा और विधान सभा में कांग्रेस और कम्युनिष्टों का सूपड़ा साफ़ हो चुका है। ममता इंडिया में जरूर है मगर बंगाल के चुनाव में किसी भी सहयोगी पार्टी को पास फटकने नहीं दे रही है। एनडीए में भाजपा को छोड़कर किसी सहयोगी दल का अस्तित्व नहीं है। ऐसे में भाजपा और टीएमसी में सीधा मुकाबला होगा। ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है तो भाजपा ममता की चालों को धराशाही करने के लिए कमर कस ली है। बंगाल का चुनाव बेहद दिलचस्प और धूम धड़ाके वाला होगा और पूरे देश की निगाह इस पर टिकी होंगी।
बंगाल की राजनीति और हिंसा का गहरा सम्बन्ध है। यह गहन शोध का विषय है की आखिर बंगाल में जब भी चुनाव आते हैं तब यहाँ क्यों खून बहता है। कम्युनिष्ट नेता चारू मजूमदार और कानू सान्याल ने बंगाल में वर्ष 1967 में नक्सलबाड़ी से हिंसक राजनीतिक विरोध की शुरुआत की थी। तत्कालीन सरकार ने हिंसक हो चुके नक्सलबाड़ी आंदोलन पर पुलिस बल का प्रयोग करके उसे कुचलने का प्रयास किया और उसके बाद कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी के बीच शुरू हुई राजनीतिक हिंसा की बेहद खराब परंपरा बंगाल में आज और ज्यादा वीभत्स रूप में बनी हुई है। एक लम्बे वामपंथी शासन से यह रक्तरंजित शुरुआत हुई जो ममता बनर्जी शासन में लगातार जारी है। यहाँ पिछले पचास वर्षों में शासन सत्ता जरूर बदली मगर हिंसा कभी नहीं थमी जिसके फलस्वरूप हजारों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा और यह खूनी खेल आज भी बदस्तूर जारी है।
बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष कराना चुनाव आयोग के सामने बड़ी चुनौती है। यहाँ रक्तरंजित चुनाव से इंकार नहीं किया जा सकता। प्रमुख दलों ने अभी से बड़ी बड़ी रैलियों का आगाज कर प्रचार शरू कर दिया है। पार्टियों में रोज ही मारकाट होती है। एक दूसरे पर हमले हो रहे है। बीजेपी जिस तरह से ममता बनर्जी को हिंदुत्व के मुद्दे पर घेरने में जुटी है, उसके जवाब में ममता बनर्जी बंगाल की अस्मिता का मुद्दा बना सकती है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी ने बीजेपी के हिंदुत्व पॉलिटिक्स के सामने मां, माटी और मानुष के भरोसे सियासी जंग फतह करने में कामयाब रहीं। बीजेपी 2026 के चुनाव में जिस तरह हिंदुत्व के मुद्दे को धार देने में जुटी है, उसके चलते माना जा रहा है कि ममता बनर्जी फिर से बंगाल अस्मिता वाले हथियार का इस्तेमाल कर सकती हैं।
जम्मू, 23 दिसंबर (हि.स.)। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात के लिए बहाल है जबकि मुगल रोड तथा एसएसजी रोड बर्फबारी के चलते बंद हैं। वहीं जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर छोटेे और बड़े वाहनों को आज राजमार्ग के दोनों तरफ से जाने की अनुमति दी गई है।
जानकारी के अनुसार आज छोटे और बड़े दोनों प्रकार के वाहनों को श्रीनगर से जम्मू और जम्मू से श्रीनगर दोनों तरफ से रवाना किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार कट आफ समय के बाद किसी भी वाहन को आवाजाही की इजाजत नहीं होगी। अधिकारियों ने जाम की स्थिति से बचने के लिए वाहन चालकों को अपनी लाइन में चलने की हिदायत भी दी है।
इसी बीच एसएसजी रोड और मुगल रोड ताजा बर्फबारी के चलते वाहनों की आवाजाही के लिए बंद हैं। दोनों मार्गों पर बर्फबारी के कारण फिसलन बढ़ गई। जिसके चलते दोनों मार्ग बंद किए गए हैं।
प्रीति सप्रू भारतीय फिल्म जगत की एक जानी-मानी अभिनेत्री हैं जिन्होंने अपने अभिनय कौशल से दर्शकों के दिलों में विशेष स्थान बनाया। उन्होंने हिंदी, तेलुगु और तमिल सिनेमा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उनकी सुंदरता और अभिनय क्षमता ने उन्हें फिल्म उद्योग में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि प्रीति सप्रू का जन्म भारत में एक सामान्य परिवार में हुआ था। उनका बचपन सामान्य परिवेश में बीता जहाँ उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की। बचपन से ही उन्हें अभिनय और कला के प्रति विशेष रुझान था। उनके परिवार ने उनके सपनों को साकार करने में भरपूर सहयोग दिया। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने अपनी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया और अपने व्यक्तित्व को निखारने का प्रयास किया। फिल्मी सफर की शुरुआत प्रीति सप्रू ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत दक्षिण भारतीय सिनेमा से की। उन्होंने तेलुगु फिल्मों में अपना पदार्पण किया और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। उनकी पहली फिल्में दर्शकों द्वारा सराही गईं और उन्हें एक होनहार अभिनेत्री के रूप में पहचाना जाने लगा। उनके अभिनय में स्वाभाविकता और सहजता थी जो दर्शकों को बहुत पसंद आई। दक्षिण भारतीय सिनेमा में सफलता प्राप्त करने के बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी काम करना शुरू किया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण फिल्मों में अभिनय किया और अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी फिल्मों में उनका किरदार निभाने का तरीका बेहद प्रभावशाली रहा। प्रमुख फिल्में और भूमिकाएं प्रीति सप्रू ने अपने करियर में विभिन्न प्रकार की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने रोमांटिक, नाटकीय और पारिवारिक फिल्मों में समान रूप से काम किया। उनकी कुछ फिल्में व्यावसायिक रूप से सफल रहीं और आलोचकों द्वारा भी सराही गईं। उन्होंने अपने हर किरदार को जीवंत और यथार्थवादी बनाने का प्रयास किया। उनकी अभिनय शैली में गहराई और संवेदनशीलता थी। वे अपने किरदारों में पूरी तरह से डूब जाती थीं और उन्हें प्रामाणिकता प्रदान करती थीं। दर्शकों को उनके अभिनय में विश्वसनीयता महसूस होती थी। उनकी फिल्मों में उनका स्क्रीन प्रेजेंस काफी प्रभावी रहा। अभिनय कौशल और विशेषताएं प्रीति सप्रू की अभिनय क्षमता उनकी सबसे बड़ी ताकत रही। उन्होंने भावनात्मक दृश्यों को बेहद संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया। उनकी आंखों में गहराई थी जो बिना संवाद के भी कहानी कह देती थी। वे हंसी और आंसू दोनों को समान रूप से प्रभावी ढंग से पर्दे पर उतार सकती थीं। उनकी सुंदरता और आकर्षक व्यक्तित्व ने उन्हें कैमरे के सामने और भी प्रभावशाली बना दिया। उनका सौंदर्य केवल बाहरी नहीं था बल्कि उनके अभिनय में एक आंतरिक चमक थी। उन्होंने विभिन्न प्रकार के किरदारों को निभाने में सफलता प्राप्त की। दक्षिण भारतीय सिनेमा में योगदान तेलुगु और तमिल सिनेमा में प्रीति सप्रू का योगदान महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने कई लोकप्रिय अभिनेताओं के साथ काम किया और यादगार फिल्में दीं। दक्षिण भारतीय दर्शकों ने उन्हें बहुत प्यार दिया और उन्हें अपना माना। उनकी फिल्में उस समय के सिनेमा में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। उन्होंने दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग में एक सेतु का काम किया और विभिन्न भाषाओं की फिल्मों में समान रूप से सफल रहीं। उनकी बहुभाषी क्षमता ने उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में लोकप्रिय बनाया। व्यक्तिगत जीवन और मूल्य प्रीति सप्रू अपने व्यक्तिगत जीवन में सादगी और विनम्रता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने हमेशा अपने पारिवारिक मूल्यों को महत्व दिया। फिल्म जगत की चमक-दमक के बीच भी वे अपनी जड़ों से जुड़ी रहीं। उनका व्यवहार सभी के साथ मित्रवत और सम्मानजनक रहा। उन्होंने अपने करियर और निजी जीवन में संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया। उनकी सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण था। वे अपने काम के प्रति बेहद गंभीर और ईमानदार थीं। फिल्म उद्योग में विरासत प्रीति सप्रू ने भारतीय सिनेमा को अपने अभिनय से समृद्ध किया। उनकी फिल्में आज भी याद की जाती हैं और देखी जाती हैं। उन्होंने अपने समय में कई युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं। उनका योगदान भारतीय फिल्म इतिहास में महत्वपूर्ण है। उन्होंने दिखाया कि प्रतिभा और मेहनत से कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है। उनकी विनम्रता और पेशेवर दृष्टिकोण ने उन्हें एक सम्मानित कलाकार बनाया। प्रीति सप्रू का नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।(सोनेट)
24 दिसंबर, 1924 को जन्मे मोहम्मद रफ़ी भारतीय फिल्म संगीत के स्वर्णिम युग के ऐसे महान पार्श्व गायक थे, जिनकी आवाज ने भावनाओं को अमर बना दिया। उनकी गायकी में करुणा, प्रेम, उल्लास, भक्ति और देशभक्ति—हर भाव सहज रूप से उतर आता था। यही कारण है कि वे दशकों तक हिंदी सिनेमा की सबसे विश्वसनीय और लोकप्रिय आवाज़ बने रहे।
मोहम्मद रफ़ी ने अपने लंबे करियर में हज़ारों गीत गाकर संगीत को अनमोल धरोहर दी। उनके रोमांटिक गीत “चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे”, “गुलाबी आंखें” और “सुहानी रात ढल चुकी” आज भी श्रोताओं के दिलों को छू लेते हैं। शास्त्रीय और भक्ति भाव में “मधुबन में राधिका नाचे रे” तथा “मन तड़पत हरि दर्शन को आज” उनकी गायन क्षमता की ऊंचाई को दर्शाते हैं। वहीं दर्द और दर्शन से भरे गीत “यह दुनिया यह महफिल” और “बहारे फिर भी आएंगी” आज भी उतने ही प्रभावशाली हैं।
देशभक्ति गीत “कर चले हम फिदा” ने उन्हें राष्ट्र की आवाज़ बना दिया। अपनी सादगी, अनुशासन और सुरों की शुद्धता के कारण मोहम्मद रफ़ी न केवल एक महान गायक थे, बल्कि भारतीय संगीत की आत्मा बनकर सदैव अमर रहेंगे।
महत्वपूर्ण घटनाचक्र
1524 – यूरोप से भारत तक पहुंचने के समुद्री मार्ग का पता लगाने वाले पुर्तगाली खोजी नाविक वास्को डी गामा का कोच्चि (भारत) में निधन हो गया।
1715 – स्वीडन की सेना ने नार्वे पर कब्जा किया।
1798 – रूस और ब्रिटेन के बीच दूसरे फ्रांस विरोधी गठबंधन पर हस्ताक्षर।
1889 – भारत में पहला मनोरंजन पार्क एसेल वर्ल्ड मुम्बई में खोला गया।
1894 – कलकत्ता में पहले मेडिकल कांफ्रेस का आयोजन।
1921 – नोबेल पुरस्कार विजेता रबीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की गई।
1954 – दक्षिण पूर्वी एशियाई देश लाओस ने स्वतंत्रता हासिल की।
1962 – सोवियत संघ ने नोवाया जेमल्या में परमाणु परीक्षण किया।
1967 – चीन ने लोप नोर क्षेत्र में परमाणु परीक्षण किया।
1979 – सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर आक्रमण किया था। यह हमला 1978 की सोवियत अफगान मैत्री संधि के बहाने किया गया था।
1986 – लोटस टैंपल श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था।
1989 – देश का पहला अम्यूजमेंट पार्क ‘एसेल वर्ल्ड’ महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में खोला गया।
1996 – तजाकिस्तान में गृहयुद्ध को समाप्त करने के लिए समझौता सम्पन्न।
2000 – विश्वनाथन आनंद विश्व शतरंज चैंपियन बने।
2000 – ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम विधेयक 1986’ पारित होने की याद में इस दिन को ‘राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा।
2002 – दिल्ली मेट्रो का शुभारंभ शहादरा तीस हजारी लाइन से हुआ था।
2003 – अमेरिकी विदेश विभाग ने 30 जून, 2004 को इराक में सत्ता सौंपने की तैयारी शुरू की।
2005 – यूरोपीय संघ ने ‘खालिस्तान जिन्दाबाद फ़ोर्स’ नामक संगठन को आतंकी सूची में शामिल किया।
2006 – शिखर बैठक में फ़िलिस्तीन को इजराइल कई सुविधाएं देने के लिए तैयार।
2007 – मंगल ग्रह के रहस्यों की खोज करने के लिए यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी यान मार्स ने मंगल ग्रह की कक्षा में अपने चार हजार चक्कर पूरे किये।
2008 – जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के अन्तिम चरण में 55% वोट पड़े।
2011 – क्यूबा की सरकार ने 2900 कैदियों को रिहा करने की घोषणा की।
2014 – पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और शिक्षाविद् मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न देने की घोषणा हुई।
जन्म
1880 – भोगराजू पट्टाभि सीतारामैया – प्रसिद्ध भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, गाँधीवादी और पत्रकार।
1892 – बनारसीदास चतुर्वेदी- प्रसिद्ध पत्रकार और साहित्यकार।
1914 – बाबा आम्टे – विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता, मुख्यत: कुष्ठरोगियों की सेवा के लिए विख्यात।
1916 – पी. शीलू एओ – भारतीय राजनीतिज्ञ थे, जिनका सम्बंध राजनीतिक दल ‘नागा नेशनलिस्ट ऑर्गेनाइजेशन’ से था।
1924 – नारायण भाई देसाई, स्वतंत्रता सेनानी एवं महादेव देसाई के पुत्र।
1924 – मोहम्मद रफी, भारतीय गायक।
1930 – उषा प्रियंवदा, पत्रकार एवं साहित्यकार।
1948 – पी. एस. वीरराघवन – भारत के प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक और रॉकेट प्रौद्योगिकीविद् हैं।
1959 – अनिल कपूर, भारतीय अभिनेता।
1961 – प्रीति सप्रू – भारतीय हिन्दी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं।
1963 – राजू श्रीवास्तव – भारत के प्रसिद्ध हास्य कलाकार व अभिनेता थे।
1997 – नीरज चोपड़ा – भारतीय ट्रैक और फील्ड एथलीट प्रतिस्पर्धा में भाला फेंकने वाले खिलाड़ी हैं।
निधन
1973 – ई.वी. रामास्वामी नायकर – तमिलनाडु के वेल्लोर।
1979 – सतीश चंद्र दासगुप्ता – भारतीय राष्ट्रवादी, वैज्ञानिक और आविष्कारक थे।
1987 – एम. जी. रामचन्द्रन – तमिल अभिनेता और राजनेता।
1988 – जैनेन्द्र कुमार, हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कथाकार और उपन्यासकार
2005 – पी. भानुमति – भारतीय अभिनेत्री, फिल्म निर्देशक, संगीत निर्देशक, गायिका, निर्माता, उपन्यासकार और गीतकार थीं।
2016 – दीनानाथ भार्गव – भारत के प्रसिद्ध चित्रकार जो नंदलाल बोस के शिष्य थे।
गैल्वेस्टन (टेक्सास), 23 दिसंबर (हि.स.)। मैक्सिको की नौसेना का एक विमान सोमवार को टेक्सास के गैल्वेस्टन में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में कई लोगों की मौत हो गई। राहत और बचाव कार्य जारी है। मृतकों की संख्या पर रिपोर्ट अलग-अलग हैं। अमेरिकी कोस्ट गार्ड के अनुसार, इस हादसे में कम से कम पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। अन्य रिपोर्टों में पायलटों, एक डॉक्टर और मरीज सहित छह लोगों की मौत का अंदेशा जताया गया है।
द न्यूयॉर्क टाइम्स और ह्यूस्टन क्रानिकल की रिपोर्ट के अनुसार, इस विमान में चार मैक्सिकन नेवी अधिकारियों और चार नागरिकों सहित आठ लोग सवार थे। यह विमान आग में गंभीर रूप से झुलसे एक साल के बच्चे को ले जा रहा था। बताया गया है कि राहत और बचाव अभियान के दौरान कम से कम दो लोगों को बचाकर स्थानीय चिकित्सा केंद्रों में ले जाया गया। इनमें एक 27 वर्षीय महिला भी है। दुर्घटना की वजह घना कोहरा बताया गया है।
गैल्वेस्टन काउंटी शेरिफ जिमी फुलन ने कहा कि यह विमान दोपहर 3:17 बजे गैल्वेस्टन कॉज-वे के पश्चिम में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शाम पांच बजे तक छह लोगों को बाहर निकाला जा सका। मेक्सिको की नौसेना के सचिवालय ने एक्स पोस्ट में कहा, ”दुर्घटना के समय विमान मिचौ और माउ फाउंडेशन के साथ समन्वय में एक मेडिकल सहायता मिशन पर था। मिचौ और माउ फाउंडेशन मेक्सिको में आग में गंभीर रूप से झुलसे बच्चों की मदद करते हैं।” रिपोर्ट्स के मुताबिक, गैल्वेस्टन पुलिस विभाग, गैल्वेस्टन काउंटी शेरिफ कार्यालय, अमेरिकी कोस्ट गार्ड और टेक्सास सार्वजनिक सुरक्षा विभाग के अधिकारी हादसे की जांच कर रहे हैं।
हरिद्वार, 22 दिसंबर (हि.स.)। सोमवार को हरिद्वार के प्रेम नगर आश्रम में तीन दिवसीय आयुर्वेद महाकुंभ का उद्घाटन सोमवार को शंकराचार्य स्वामी राज राजेश्वराश्रम महाराज एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर आयुर्वेद से जुड़ी एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया।
इस मौके पर शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि आयुर्वेद और योग के नाम पर जो लोग दुकानदारी कर रहे हैं। जब आयुर्वेद महाकुंभ में मंथन होगा तो ऐसी ताकतें अलग हो जाएंगी और उनका कोई महत्व नहीं रह जाएगा।अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि आयुर्वेद महाकुंभ से आयुर्वेद को एक नई ताकत मिलेगी।
कार्यक्रम के प्रभारी डॉ राजीव कुरेले ने बताया कि इस तीन दिवसीय आयुर्वेद महाकुंभ में पूरे देश के सभी राज्यों से और विदेशों से 6000 से ज्यादा प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस कुंभ का समापन 24 दिसंबर को होगा। इस महाकुंभ में देश-विदेश आयुर्वेद जगत से बड़े-बड़े विद्वान विशेषज्ञ और आयुर्वेद के ज्ञाता आए हुए हैं।