नई दिल्ली, 23 दिसंबर (हि.स)। हफ्ते के दूसरे दिन मंगलवार को शेयर बाजार में पिछले दो कारोबारी सत्रों से जारी तेजी पर विराम लग गया। उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में बाजार के दोनों मानक सूचकांक लगभग स्थिर रुख के साथ बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 42 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी मामूली लाभ में रहा।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 42.63 अंक यानी 0.050 फीसदी की गिरावट के साथ 85,524.84 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 85,704.93 अंक के उच्चतम स्तर तक गया और उसके बाद 85,342.99 अंक के न्यूनतम स्तर तक आया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 4.75 अंक यानी 0.018 फीसदी बढ़कर 26,177.15 के स्तर पर बंद हुए।
सूचना प्रौद्योगिकी और औषधि बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली से शेयर बाजार नीचे आया। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 17 शेयर में गिरावट दिखी। इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एयरटेल में 1.5 फीसदी तक गिरावट रही है। आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट और टीएमपीवी 1 फीसदी बढ़कर बंद हुए। सेंसेक्स के अन्य शेयरों में भारती एयरटेल, अडाणी पोर्ट्स, सन फार्मा, टेक महिंद्रा, इटर्नल, एक्सिस बैंक और मारुति प्रमुख रूप से नुकसान में रहे।
लाभ में रहने वाले शेयरों में आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील और एचडीएफसी बैंक शामिल हैं। इसके साथ ही निफ्टी के 50 में से 26 शेयर गिरकर बंद हुए। एनएसई के आईटी, फार्मा और बैंकिंग सेक्टर में गिरावट रही, जबकि एफएमसीजी, मीडिया और मेटल ऊपर बंद हुए। इसके अलावा एशिया के अन्य शेयर बाजारों में शामिल दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की और चीन का शंघाई कम्पोजिट सकारात्मक दायरे में रहे, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ बंद हुआ है। यूरोप के बाजारों में दोपहर कारोबार में मिला-जुला रुख देखने को मिला।
उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले सेंसेक्स 638.12 अंक यानी 0.75 फीसदी की उछाल के साथ 85,567.48 पर बंद हुआ। एनएसई का निफ्टी भी 206 अंक यानी 0.79 फीसदी चढ़कर 26,172.40 के स्तर पर बंद हुआ था।
उत्तरकाशी, 23 दिसंबर (हि.स.)। विकास खंड भटवाडी़ ग्राम लाटा -कुमाल्टी गांव में दो आवासीय भवनों अचानक आग लगने से पूरे गांव में अफरातफरी मच गई । घटना मंगलवार दोपहर बाद की है जब अचानक दो घरों में लगी आग से पशुओं के लिए रखा सुखा घास से देखते देखते दो घर जल कर राख हो गये। घटना की सूचना जिला परिचालन केंद्र उत्तरकाशी में को दी गई।
जिला परिचालन केंद्र ने बताया कि अग्निकांड की सूचना पर फायर सर्विस, पुलिस, एसडीआरएफ समेत राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और आग पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया लिया गया है। जबकि पूर्व ग प्रधान कुमाल्टी पृत सिंह नेगी और
बलवीर सिंह का भवन पूर्ण रूप से जलकर राख हो गया है।
अन्य किसी प्रकार की कोई जन व पशु हानि की सूचना नहीं है।
सड़क सुरक्षा मित्र कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 28 जनपदों के लिए 14 लाख का बजट आवंटित
गोल्डन आवर में दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने वाले राहवीर को मिलता है 25,000 का इनाम, यूपी में 5 राहवीर का चयन
लखनऊ, 23 दिसंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ‘सड़क सुरक्षा मित्र’ कार्यक्रम और ‘राहवीर’ योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीएम के निर्देश के बाद इन दोनों योजनाओं के तहत प्रदेश के सभी जनपदों में सक्रियता बढ़ाई गई है। इन योजनाओं का उद्देश्य युवाओं में सड़क सुरक्षा जागरूकता फैलाना और दुर्घटना पीड़ितों की त्वरित सहायता और चिकित्सकीय सुविधा सुनिश्चित कराना है। जिससे एक ओर तो रोड एक्सीडेंट के मामलों में प्रभावी कमी लाई जा सके, दूसरी ओर दुर्घटना की स्थिति में मौत की संख्या को कम कियाजा सके। राज्य सरकार ने इनकी निगरानी के लिए जिला सड़क सुरक्षा समितियों को जिम्मेदारी सौंपी है, जिसके माध्यम से सड़क सुरक्षा को जन-आंदोलन का रूप दिया जा रहा है।
प्रदेश के 28 जनपदों में सक्रिय है सड़क सुरक्षा मित्र कार्यक्रम
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि केंद्र सरकार का ‘सड़क सुरक्षा मित्र’ कार्यक्रम वर्तमान में प्रदेश के 28 जनपदों में सक्रिय है, यह योजना युवाओं को सड़क सुरक्षा अभियानों में सक्रिय भागीदार बनाने पर केंद्रित है। कार्यक्रम के तहत यूपी में अब तक 423 युवा स्वयंसेवकों ने ‘माय भारत’ पोर्टल पर पंजीकरण कराया है और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसके तहत राज्य लोक सेवा फाउंडेशन ने गौतम बुद्ध नगर, नोएडा में पहला प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था, जिसमें स्वयंसेवकों को सड़क सुरक्षा नियमों, दुर्घटना प्रबंधन और जागरूकता अभियानों की ट्रेनिंग दी गई। इस कार्यक्रम के लिए 14 लाख रुपये का बजट अनुमोदित किया गया है, जिसमें सभी 28 जनपदों के लिए 50,000 रुपये का प्रावधान है। यह धनराशि सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण, जागरूकता और क्षेत्रीय गतिविधियों के लिए उपयोग की जाएगी। सड़क सुरक्षा मित्र कार्यक्रम के सफल संचालन से प्रदेश में न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि युवाओं में जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना का भी विकास होगा।
बस्ती, कौशांबी, सीतापुर, अलीगढ़ और कासगंज से चुने जा चुके हैं 5 राहवीर
‘राहवीर’ योजना सड़क दुर्घटनाओं के गोल्डन आवर, दुर्घटना के पहले एक घंटे में त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर फोकस करती है। सड़क एवं परिवहन मंत्रालय द्वारा शुरू की गई यह योजना आम नागरिकों को प्रेरित करती है कि वे दुर्घटना पीड़ितों की तत्काल सहायता प्रदान करें। योजना के तहत, जो राहवीर पीड़ित को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाता है, उसे 25,000 रुपये का पुरस्कार दिया जाता है। इसका उद्देश्य रोड एक्सीडेंट के मामलों में मौत की संख्या में कमी लाना है। प्रत्येक जनपद में सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को इस योजना का नोडल अधिकारी बनाया गया है। यूपी में इस योजना के तहत अब तक पांच ‘राहवीर’ चुने जा चुके हैं जो जनपद बस्ती, कौशांबी, सीतापुर, अलीगढ़ और कासगंज से संबंधित हैं। ये योजनाएं उत्तर प्रदेश जैसे सबसे ज्यादा हाईवे और विशाल रोड नेटवर्क वाले राज्य में सड़क सुरक्षा को नया आयाम दे रही हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में राज्य परिवहन विभाग ने आगामी महीनों में और अधिक प्रशिक्षण शिविरों की योजना तैयार की है। साथ ही नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं से अपील है कि वे इन योजनाओं में सक्रिय रूप से भागीदारी करें और प्रदेश की सड़कों को सुरक्षित बनाने में योगदान दें।
सागर, 23 दिसंबर (हि.स.)। दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के रास्ते मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से होते हुए सोमवार रात सागर जिले की सीमा में पहुंचा। देर रात यह काफिला कंटनी मंदिर के पास रुका। यहां दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। इसके बाद यह 210 टन वजनी शिवलिंग मंगलवार सुबह महाराजपुर और देवरी पहुंचा। यहां भी लोगों की भीड़ जुट गई। इस विशालकाय शिवलिंग को देखने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
इस शिवलिंग को बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड अंतर्गत कैथवलिया गांव (जानकीनगर) में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाएगा। विगत 21 नवंबर को 33 फुट ऊंचे एवं 210 मीट्रिक टन वजनी शिवलिंग को तमिलनाडु के महाबलीपुरम से रवाना किया गया। इसे 110 पहियों वाले विशेष वाहन से लाया जा रहा है। इस शिवलिंग के निर्माण में करीब 10 वर्षों का समय लगा है। करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से एक ही ग्रेनाइट पत्थर को तराश कर शिल्पकार लोकनाथ की टीम ने शिवलिंग को तैयार किया है। शिवलिंग का वजन इतना ज्यादा है कि ट्रक महज 5 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहा है। एक महीने में महाबलीपुरम से 1593 किमी की दूरी तय कर काफिला सागर पहुंचा है। बिहार पहुंचने में अभी करीब 20 दिन और लगेंगे।
इस शिवलिंग को लेकर जा रहे ट्रक चालक आलोक सिंह ने बताया कि शिवलिंग की ऊंचाई और गोलाई दोनों 33-33 फुट है। इसे ले जाना सौभाग्य की बात है, लेकिन यह चुनौती भरा काम है। करीब दो लाख 10 हजार किलो वजन होने के कारण रास्ते में पड़ने वाले पुल-पुलिया पर डर बना रहता है। तमिलनाडु से सुरक्षित सागर आ गए हैं, आगे भी भोलेनाथ ही मंदिर तक पहुंचाएंगे।
यह विश्व का सबसे ऊंचा सहस्त्र शिवलिंग है, जिसके निचले हिस्से में 1008 शिवलिंग की आकृति उकेरी गई है। फरवरी में इस शिवलिंग को मंदिर में विधिवत स्थापित करने की योजना है। मंदिर प्रबंधन द्वारा यात्रा को लगातार ट्रैक किया जा रहा है। यह यात्रा सकुशल अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही है। यात्रा के क्रम में श्रद्धालु जगह-जगह शिवलिंग की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। इसके कारण भी यात्रा की गति धीमी है।———–
दिल्ली में भी हिंदू युवक की हत्या के विरोध में बांग्लादेश उच्चायोग पर प्रदर्शन
कोलकाता, 23 दिसंबर (हि.स.)। बांग्लादेश के मयमनसिंह में हिंदू युवक दीपु चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या किए जाने के विरोध में मंगलवार को कोलकाता में बंगीय हिंदू जागरण के आह्वान पर निकाले गए विरोध मार्च के दौरान भारी हंगामा हो गया। सियालदह से शुरू होकर बेकबागान स्थित बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन के घेराव के लिए निकाले गए इस मार्च के दौरान हालात बेकाबू हो गए, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ यह विरोध मार्च दोपहर करीब दो बजे जैसे ही बेकबागान स्थित बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन के पास पहुंचा, प्रदर्शनकारी उग्र हो गए और पुलिस बैरिकेड तोड़ कर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। एक बैरिकेड टूटने के बाद कुछ प्रदर्शनकारी आयोग कार्यालय के काफी नजदीक पहुंच गए, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
हालात काबू के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसके बाद इलाके में अफरातफरी मच गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस की लाठियों से कई लोगों के सिर फट गए और कई अन्य घायल हो गए। पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को जब वैन में बिठाकर ले जाया जा रहा था उस समय प्रदर्शनकारियों ने वाहन को घेर कर विरोध शुरू कर दिया। पुलिस ने किसी तरह वाहन को वहां से निकाला गया।
इस बीच पुलिस ने हिंदू जागरण सभा को अवैध घोषित कर दिया और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक इलाके को खाली करने की अपील की। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स तैनात की गई है। पुलिस प्रशासन पूरे इलाके में हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है।
हिंदू युवक की हत्या के विरोध में बांग्लादेश उच्चायोग पर प्रदर्शन
नई दिल्ली, 23 दिसंबर (हि.स.)। बांग्लादेश में एक हिंदू युवक की निर्मम हत्या के विरोध में मंगलवार को राजधानी दिल्ली में माहौल गरमा गया। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और अन्य हिंदू संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता बांग्लादेश उच्चायोग के सामने सड़कों पर उतर आए और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही।
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा बांग्लादेश में 18 दिसंबर को हुई उस घटना को लेकर था, जिसमें उग्र भीड़ द्वारा दीपू चंद्र दास नामक एक हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद उसके शव को चौराहे पर लटकाया गया, लाठियों से पीटा गया और बाद में आग के हवाले कर दिया गया। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भारत ही नहीं, बल्कि नेपाल सहित कई देशों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
दिल्ली में प्रदर्शन की शुरुआत दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैम्पस मेट्रो स्टेशन के पास से हुई। यहां से सैकड़ों प्रदर्शनकारी बांग्लादेश उच्चायोग ओर बढ़ने लगे। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने बहुस्तरीय बैरिकेडिंग कर रखी थी, लेकिन गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कई जगह बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। स्थिति को काबू में करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।
पोस्टर बैनर लेकर आए थे लाेग
हाथों में बैनर-पोस्टर लिए प्रदर्शनकारी “बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार बंद करो”, “दीपू चंद्र दास को न्याय दो” और “मानवाधिकारों की रक्षा करो” जैसे नारे लगा रहे थे। कई प्रदर्शनकारियों की आंखों में आंसू थे। एक भावुक प्रदर्शनकारी ने कहा, “मैं भी दीपू हूं और आप भी दीपू हैं। आज अगर हम चुप रहे तो कल किसी और दीपू की जान जाएगी।” वहीं इस प्रर्दशन में छह साल के बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक’शामिल हुए।
प्रदर्शन के दौरान धार्मिक भावनाएं भी खुलकर सामने आईं। एक शख्स ने रोते हुए कहा, “यह राम और कृष्ण का देश है। हम किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन बांग्लादेश में हमारी बहन-बेटियों की इज्जत और सुरक्षा खतरे में है। वहां हिंदुओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।”
प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद युनूस के खिलाफ भी नाराजगी जाहिर की और उनका पुतला फूंका। उनका आरोप था कि बांग्लादेश सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में पूरी तरह विफल रही है और ऐसी घटनाओं पर आंखें मूंदे बैठी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन को देखते हुए पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रदर्शनकारियों को हाई कमिशन तक पहुंचने से रोकने के लिए छह लेयर में बैरिकेडिंग की गई थी। पुलिस ने संयम बरतते हुए स्थिति को नियंत्रण में रखा और किसी बड़ी अप्रिय घटना से बचाव किया।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। भारत में विभिन्न हिंदू संगठनों के साथ-साथ आम नागरिक भी इन घटनाओं पर चिंता जता रहे हैं और केंद्र सरकार से कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। दिल्ली में हुआ यह प्रदर्शन न सिर्फ एक हत्या के खिलाफ आक्रोश का प्रतीक था, बल्कि पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता का भी संकेत था। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा नहीं रुकी, तो उनका आंदोलन और तेज किया जाएगा।
‘सनम तेरी कसम’ और ‘एक दीवाने की दीवानियत’ जैसी फिल्मों से पहचान बनाने वाले हर्षवर्धन राणे इन दिनों लगातार नई परियोजनाओं से जुड़ते जा रहे हैं। एक तरफ वह निर्देशक ओमंग कुमार की अपकमिंग फिल्म ‘सिला’ की शूटिंग में व्यस्त हैं, तो दूसरी ओर एकता कपूर की बहुचर्चित फिल्म ‘शूटआउट एट दुबई’ का भी हिस्सा बन चुके हैं। इस फिल्म को लेकर काफी समय से चर्चाएं चल रही थीं और अब इससे जुड़ी एक बड़ी जानकारी सामने आई है। फिल्म के फ्लोर पर जाने से पहले ही इसके डिजिटल राइट्स बिक चुके हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘शूटआउट एट दुबई’ के डिजिटल स्ट्रीमिंग अधिकार नेटफ्लिक्स ने हासिल कर लिए हैं। बॉक्स ऑफिस वर्ल्डवाइड की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह एक हाई-ऑक्टेन एक्शन-थ्रिलर होगी, जिसे पहले सिनेमाघरों में रिलीज किया जाएगा और उसके बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम किया जाएगा। गैंगस्टर ड्रामा होने के चलते फिल्म में जबरदस्त एक्शन और थ्रिल देखने को मिलेगा। हालांकि, यह डील कितने करोड़ में हुई है, इसका खुलासा फिलहाल नहीं किया गया है।
‘शूटआउट एट दुबई’ का निर्माण बालाजी टेलीफिल्म्स के बैनर तले किया जा रहा है। फिल्म में हर्षवर्धन राणे मुख्य भूमिका में नजर आएंगे और खास बात यह है कि वह पहली बार अपनी रोमांटिक इमेज से हटकर एक गैंगस्टर के किरदार में दिखाई देंगे। फिलहाल निर्माताओं ने फिल्म की कहानी, बाकी कलाकारों और रिलीज डेट को लेकर कोई जानकारी शेयर नहीं की है, लेकिन इसके बावजूद हर्षवर्धन के फैंस इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
भुवनेश्वर, 23 दिसंबर (हि.स.)। उडीसा के मलकानगिरी जिला पुलिस के समक्ष मंगलवार को 22 माओवादियों ने हथियारों और विस्फोटक सामग्री के साथ आत्मसमर्पण किया। माओवादियों ने विभिन्न कैलिबर के 9 (नौ) आग्नेयास्त्र, 150 जीवित कारतूस, 9 मैगज़ीन, 20 किग्रा विस्फोटक, 13 आईईडी, जिलेटिन स्टिक, कोडेक्स वायर, माओवादी साहित्य तथा अन्य सामग्री सौंप दी। सभी ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) वाई.बी. खुरानिया के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
जिला पुलिस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में डीजीपी वाई. बी. खुरानिया, डीआईजी कन्वर विशाल सिंह, मलकानगिरी जिलाधिकारी सोमेश उपाध्याय, एसपी बिनोद पाटिल एच सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। डीजीपी ने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को सरकारी नीति के अनुसार पुनर्वास और विभिन्न प्रकार की सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने युवाओं से हिंसा त्याग कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों पर कुल 2 करोड़ 25 लाख रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के बाद सभी को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सुविधाएं दी जाएंगी। यह सामूहिक आत्मसमर्पण सीपीआई (माओवादी) के लिए बड़ा झटका है।
प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्राें में अटल स्मृति सम्मेलन आयोजित हाेंगे
लखनऊ, 23 दिसंबर (हि.स.)। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री और उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बताया कि अटल शताब्दी समारोह के तहत पार्टी 25 से 31 दिसंबर तक सुशासन दिवस मनाएगी। उन्होंने मंगलवार को भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि पूरे प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्राें में अटल स्मृति सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बताया कि 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाएगा। विद्यालयों में कार्यक्रम होंगे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्र, संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए चारों साहिबजादों ने अन्याय, अत्याचार के सामने झुकने से मना करते हुए धर्म परिवर्तन नहीं किया। छोटी सी आयु में भी धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के लिए बलिदान दिया। यह अडिग आस्था, वीरता और साहस की मिसाल है। उन्होंने कहा कि वीर बाल दिवस हमें साहस, सत्य, आत्मसम्मान और देश व धर्म की रक्षा के लिए बलिदान की प्रेरणा देता है। हम चारों साहिबजादों के अमर बलिदान की प्रेरक गाथा को जन-जन तक पहुंचाने का काम करेंगे।
बिजनौर, 23 दिसम्बर (हि.स.)। मुरादाबाद की एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार काे उत्तर प्रदेश के बिजनाैर जिले की सदर तहसील में एक लेखपाल को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। टीम ने लेखपाल काे शहर कोतवाली लाकर पूछताछ शुरू कर दी। इस कार्रवाई में एंटी करप्शन टीम में इंचार्ज कृष्णावतार, माेहम्मद इश्तियाक, नवल मरवा, विजय कुमार शामिल थे।
इंचार्ज कृष्णावतार ने बताया कि गांव फतेहपुर खतापुर में तैनात लेखपाल रविंद्र कुमार शर्मा पर धर्मेंद्र नाम के एक व्यक्ति से रजिस्ट्री में संशोधन करने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप है। शिकायतकर्ता हीमपुर दीपा ननूपुरा निवासी धर्मेंद्र ने एंटी करप्शन से शिकायत की थी। मंगलवार सुबह एंटी करप्शन टीम ने लेखपाल को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। टीम के सदस्य पहले जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे, जहां से जिलाधिकारी के आदेश पर दो कर्मचारियों को साथ लेकर सदर तहसील पहुंचे। तहसील के कमरा नंबर 24 से लेखपाल रविंद्र कुमार को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया| रविंद्र कुमार मूल रूप से बागपत के रहने वाले हैं| लेखपाल ने बताया कि किसान उनसे एक बैनामे में संशोधन के लिए वकील से बात करने को कह रहा था। यह पैसा वकील को ही दिया जाना था उनका इससे कोई संबंध नहीं है।
एसडीएम सदर रितु रानी ने बताया कि बिजनौर तहसील में एंटी करप्शन टीम द्वारा रंगे हाथ पकड़े गए लेखपाल रविंद्र शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामला संज्ञान में आते ही यह कार्रवाई की गई। प्रशासन ने साफ किया है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस (25 दिसम्बर) पर विशेष
-प्रभुनाथ शुक्ल
भारत के राजनीतिक इतिहास में अटल बिहारी वाजपेयी का संपूर्ण व्यक्तित्व शिखर पुरुष के रुप में दर्ज है। उनकी पहचान कुशल राजनीतिज्ञ, प्रशासक, भाषाविद, कवि, पत्रकार व लेखक के रूप में है। अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति में उदारवाद, समता एवं समानता के सबसे बड़े समर्थक माने जाते हैं। उन्होंने राजनीति को दलगत और स्वार्थ की वैचारिकता से अलग हट कर अपनाया और उसको जिया। जीवन में आने वाली हर विषम परिस्थिति और चुनौती को स्वीकार किया। नीतिगत सिद्धांत और वैचारिकता का कभी कत्ल नहीं होने दिया। राजनीतिक जीवन के उतार-चढ़ाव में उन्होंने आलोचनाओं के बाद भी अपने को संयमित और तटस्थ रखा। राजनीति में धुर विरोधी भी उनकी विचारधारा और कार्यशैली के कायल थे लेकिन पोखरण जैसा आणविक परीक्षण कर तीसरी दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के साथ दूसरे मुल्कों को भारत की शक्ति का एहसास कराया। आपातकाल के दौरान डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की श्रीनगर में मौत के बाद सक्रिय राजनीति में दखल दिया। हालाँकि, उनके राजनीतिक मूल्यों की पहचान बाद में हुई और भाजपा सरकार में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को हुआ था। उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी शिक्षक थे। वैसे वे मूलतः उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के बटेश्वर गांव के रहने वाले थे, लेकिन पिता जी मध्य प्रदेश में शिक्षक थे। इसलिए उनका जन्म वहीं हुआ। लेकिन उत्तर प्रदेश से उनका राजनीतिक लगाव सबसे अधिक रहा। प्रदेश की राजधानी लखनऊ से वे सांसद थे। जबकि उन्हें श्रेष्ठ सांसद और लोकमान्य तिलक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
कविताओं को लेकर उन्होंने कहा था कि मेरी कविता जंग का एलान है, पराजय की प्रस्तावना नहीं। वह हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं, जूझते योद्धा का जय संकल्प है। वह निराशा का स्वर नहीं, आत्मविश्वास का जयघोष है। उनकी कविताओं का संकलन ‘मेरी इक्यावन कविताएं‘ खूब चर्चित हुई जिसमें….हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा…खास चर्चा में रही।
राजनीति में संख्या बल का आंकड़ा सर्वोपरि होने से साल 1996 में उनकी सरकार सिर्फ एक मत से गिर गई और उन्हें प्रधानमंत्री का पद त्यागना पड़ा। यह सरकार सिर्फ तेरह दिन तक रही। बाद में उन्होंने प्रतिपक्ष की भूमिका निभायी। इसके बाद हुए चुनाव में वे दोबारा प्रधानमंत्री बने। संख्या बल की राजनीति में यह भारतीय इतिहास के लिए सबसे बुरा दिन था लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी विचलित नहीं हुए, उन्होंने इसका मुकाबला किया। 16 मई से 01 जून 1996 और 19 मार्च से 22 मई 2004 तक वे भारत के प्रधानमंत्री रहे। वे साल 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष रहे।
राजनीतिक सेवा का व्रत लेने के कारण वे आजीवन कुंवारे रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय लिया था।
अटल बिहारी वाजपेयी गैर कांग्रेसी सरकार के इतर पहले प्रधानमंत्री बने जिन्होंने अपनी राजनीतिक कुशलता से भाजपा को देश में शीर्ष राजनीतिक सम्मान दिलाया। दो दर्जन से अधिक राजनीतिक दलों को मिलाकर उन्होंने राजग बनाया। जिसमें 80 से अधिक मंत्री थे, जिसे जम्बो मंत्रिमंडल भी कहा गया। सरकार ने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया।
अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति में कभी आक्रमकता के पोषक नहीं थे। वैचारिकता को उन्होंने हमेशा तवज्जो दिया।
राजनीति के शिखर पुरुष अटलजी मानते थे कि राजनीति उनके मन का पहला विषय नहीं था। राजनीति से उन्हें कभी-कभी तृष्णा होती थी लेकिन वे चाहकर भी इससे अलग नहीं हो सकते थे। क्योंकि विपक्ष उन पर पलायन का मोहर लगा देता। वे अपने राजनैतिक दायित्वों का डट कर मुकाबला करना चाहते थे।
यह उनके जीवन संघर्ष की भी खूबी रही।
वे एक कुशल कवि के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहते थे लेकिन बाद में इसकी शुरुआत पत्रकारिता से हुई।
पत्रकारिता ही उनके राजनैतिक जीवन की आधारशिला बनी। उन्होंने संघ के मुखपत्र पांचजन्य, राष्ट्रधर्म और वीर अर्जुन जैसे अखबारों का संपादन किया। अपने करिअर की शुरुआत उन्होंने पत्रकारिता से की। साल 1957 में देश की संसद में जनसंघ के सिर्फ चार सदस्य थे। जिसमें एक अटल बिहारी वाजपेयी थे। संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए हिंदी में भाषण देने वाले अटलजी पहले भारतीय राजनीतिज्ञ थे। विदेशी धरती पर हिन्दी को सम्मानित करने का काम अटल ने किया।
उन्होंने सबसे पहले साल 1955 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। बाद में साल 1957 में गोंडा की बलरामपुर सीट से जनसंघ उम्मीदवार के रूप में जीत कर लोकसभा पहुंचे। उन्हें मथुरा और लखनऊ से भी लड़ाया गया लेकिन हार गए। उन्होंने बीस साल तक जनसंघ के संसदीय दल के नेता के रूप में काम किया।
इंदिरा गांधी के खिलाफ जब विपक्ष एकजुट हुआ और बाद में जब देश में मोरारजी देसाई की सरकार बनी तो अटल बिहारी वाजपेयी को विदेशमंत्री बनाया गया। इस दौरान उन्होंने अपनी राजनीतिक कुशलता की छाप छोड़ी और विदेश नीति को बुलंदियों पर पहुंचाया। बाद में साल 1980 में उन्होंने जनता पार्टी से नाराज होकर पार्टी का दामन छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की। उसी साल उन्हें भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष की कमान सौंपी गयी। इसके बाद साल 1986 तक उन्होंने कुशलता के साथ भाजपा अध्यक्ष पद का नेतृत्व किया और इंदिरा गांधी के कार्यों की सराहना की थी।
उन्होंने इंदिरा सरकार की तरफ से साल 1975 में लगाए गए आपातकाल का विरोध किया लेकिन बांग्लादेश के निर्माण में इंदिरा गांधी की भूमिका को सराहा। उनका साफ कहना था कि जिसका विरोध जरुरी था उसका विरोध किया और जिसकी प्रशंसा चाहिए थी उसे वह सम्मान मिलना चाहिए। वाजपेयी हमेशा से समाज में समानता के पोषक थे। विदेश नीति पर उनका नजरिया साफ था। वह आर्थिक उदारीकरण एवं विदेशी मदद के विरोधी नहीं थे लेकिन वह देशहित के खिलाफ हो ऐसी नीति को बढ़ावा देने के हिमायती नहीं रहे। उन्हें विदेश नीति पर देश की अस्मिता से कोई समझौता स्वीकार नहीं था।
अटल बिहारी वाजपेयी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की तरफ से दिए गए जय जवान-जय किसान के नारे में अलग से जय विज्ञान भी जोड़ा। देश की सामरिक सुरक्षा पर उन्हें समझौता गंवारा नहीं था। वैश्विक चुनौतियों के बाद भी राजस्थान के पोखरण में 1998 में पांच परमाणु परीक्षण किए। इस परीक्षण के बाद अमेरिका, आस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों की तरफ से भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिया गया, लेकिन उनकी दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति इन परिस्थितियों में भी उन्हें अटल स्तंभ के रुप में अडिग रखा। कारगिल युद्ध की भयावहता का भी डट कर मुकाबला किया और पाकिस्तान को धूल चटाई।
दक्षिण भारत के सालों पुराने कावेरी जल विवाद का हल निकाला। इसके बाद स्वर्णिम चर्तुभुज योजना से देश को राजमार्ग से जोड़ने के लिए कारिडोर बनाया। मुख्य मार्ग से गांवों को जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री सड़क योजना बेहतर विकास का विकल्प लेकर सामने आयी। कोंकण रेल सेवा की आधारशिला उन्हीं के काल में रखी गई थी। भारतीय राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी एक अडिग, अटल और लौह स्तंभ राजनेता के रूप में आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। हमें उनकी नीतियों और विचारधराओं का उपयोग करना चाहिए।