
हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस, नए निर्माण पर रोक
जोधपुर, 19 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने हल्दीघाटी दर्रा और रक्त तलाई के ऐतिहासिक स्थलों पर बढ़ते अतिक्रमण और उपेक्षा के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। मीडिया में आई रिपोर्ट के बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। न्यायाधीश पीएस भाटी और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इन स्थलों की बिगड़ती हालत पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किए हैं।
हाईकोर्ट ने 28 फरवरी 2026 तक के लिए अंतरिम निर्देश दिए हैं। कोर्ट की अनुमति के बिना कोई भी नया निर्माण या विस्तार गतिविधि नहीं होगी। कचरा और खरपतवार हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। ऐतिहासिक ढलानों पर अस्थायी रूप से वाहन पार्किंग पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।
गंदगी फैलाने पर ऐसी गतिविधियों पर जुर्माना लगाया जाएगा, जो स्थलों की पवित्रता को भंग करती है। खुले सीवरेज के बहाव को मोडऩे और जलभराव की समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं। इन स्थलों की सुरक्षा के लिए 24×7 निगरानी व्यवस्था की जाएगी। रिपोर्ट में सामने आया कि हल्दीघाटी में चौड़ीकरण के दौरान 200 से अधिक पेड़ काटे गए। पहाडिय़ों को समतल किया गया, और संभावित पुरातात्विक अवशेष दब गए। रक्त तलाई में गंदगी, शराब की बोतलें और अवैध अतिक्रमण मिले।
कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए, और 2024 के बजट में घोषित 100 करोड़ की महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट योजना की प्रगति पर भी चिंता जताई। मामले की अगली सुनवाई 28 फरवरी 2026 को होगी, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार को हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट : हल्दीघाटी और रक्त तलाई पर अतिक्रमण करने वालों की खैर नहीं


