मोदी 2029 में भी बनेंगे प्रधानमंत्री, राहुल बाबा हार से न थकें : अमित शाह

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विपक्ष हमेशा उन्हीं बातों का विरोध करता है, जो जनता को पसंद है : केंद्रीय गृह मंत्री

अहमदाबाद, 28 दिसंबर (हि.स.)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “राहुल बाबा, हार से थकिए मत।” वर्ष 2029 में भी नरेन्द्र मोदी ही देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष हमेशा उन्हीं बातों का विरोध करता है, जो जनता को पसंद आती हैं। “जनता को जो अच्छा लगता है, आप उसका ही विरोध करते हो, तो फिर आपको वोट कहां से मिलेंगे?”

केंद्रीय गृह मंत्री शाह रविवार को अहमदाबाद के पश्चिमी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक से बिना खड्डा खोदे तैयार की गई 27 किलोमीटर लंबी ड्रेनेज लाइन के लोकार्पण अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नई ड्रेनेज लाइन को इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए विकास कार्यों की सराहना की है।

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि आज का दिन आनंद देने वाला है। वणझर क्षेत्र में 1973 के बाद जिन लोगों ने सब कुछ खो दिया था, वे यहां आकर बसे। करीब 50 वर्षों से कई परिवार रह रहे थे, लेकिन किसी कारणवश प्लॉट की मालिकी अटकी हुई थी। उन्होंने कहा कि इस समस्या का समाधान कर फाइलों को अंतिम रूप दिया गया और आज से यह प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी हो गई है, जिससे लोगों के जीवन में एक बड़ा बदलाव आया है।

15 लाख लोगों की गटर समस्या का हुआ स्थायी समाधान

केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि अहमदाबाद के 9 वार्डों में रहने वाले करीब 15 लाख लोग और 4500 सोसायटियां वर्षों से गटर के पानी की निकासी की समस्या से जूझ रहे थे। क्षेत्र गांव से शहर में तब्दील हो चुका था, लेकिन बुनियादी ढांचा नहीं था। करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बड़े व्यास की पाइपलाइन बिछाकर यह समस्या दूर की गई। गटर के पानी के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को भी समाप्त किया गया है।उन्होंने कहा कि 15 लाख की आबादी अपने आप में एक शहर के बराबर होती है और इस परियोजना से उस पूरे शहर की समस्या का समाधान हो गया है। कम समय में यह काम पूरा होगा, इसका उन्हें भी पहले विश्वास नहीं था, लेकिन यह कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

शाह ने राहुल गांधी पर बोला हमला

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि राहुल गांधी ने संसद में सवाल किया कि वे हर चुनाव क्यों हार जाते हैं। इस पर उन्होंने कहा,“राहुल गांधी अगर ये दो कार्यक्रम समझ लें, तो उन्हें खुद समझ आ जाएगा कि वे चुनाव क्यों हारते हैं?” उन्होंने कहा कि वर्षों पुरानी मांग बिना किसी आंदोलन के, संवेदनशीलता के साथ पूरी की गई। जनता मांग करे या न करे, जनता का काम करना भाजपा और नरेन्द्र मोदी की सरकार का दायित्व है।

उन्होंने विपक्ष को घेरते हुए कहा, “हम राम मंदिर बनाते हैं, आप विरोध करते हैं। सर्जिकल स्ट्राइक करते हैं, विरोध करते हैं। एयर स्ट्राइक, अवैध घुसपैठियों को बाहर करना, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, तीन तलाक, अनुच्छेद 370 हटाना, समान नागरिक संहिता—हर चीज का आप विरोध करते हैं। जनता को जो पसंद है, उसका विरोध करोगे तो वोट कहां से मिलेंगे?” उन्होंने कहा कि बंगाल और तमिलनाडु में भी भाजपा की जीत तय है और एक बार फिर मोदी सरकार बनेगी। उन्होंने कहा, “जिसे अपनी ही पार्टी समझा नहीं पाई, उसे हम कैसे समझा सकते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि 15 लाख लोगों की गटर व्यवस्था नहीं होने के बावजूद कभी कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ, फिर भी सरकार ने समस्या का समाधान किया।

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रतन टाटा की जयंती पर राष्ट्र ने किया नमन, नेताओं ने उनके नैतिक नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण में योगदान को किया याद

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नई दिल्ली, 28 दिसम्बर (हि.स.)। भारत के अग्रणी उद्योगपति और पद्म विभूषण रतन टाटा की जयंती के अवसर पर रविवार को देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जगत की प्रमुख हस्तियों ने उनके नैतिक नेतृत्व, परोपकार, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान को स्मरण किया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “रतन टाटा ने यह सिद्ध किया कि सच्ची सफलता केवल व्यावसायिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा में निहित होती है। उनकी विरासत आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रतन टाटा को दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में नवाचार और करुणा का अनूठा संगम देखने को मिला। उन्होंने भारतीय उद्यमिता को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई और राष्ट्रीय विकास में उद्योग की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित किया।

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि रतन टाटा का जीवन सत्यनिष्ठा, विनम्रता और मानवीय करुणा से ओत-प्रोत था। उन्होंने उद्योग जगत में नैतिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रतन टाटा को भारतीय उद्योग जगत का दिग्गज और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देकर देश के भविष्य को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि रतन टाटा के नेतृत्व में भारतीय उद्योग ने मूल्यों से समझौता किए बिना वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उन्होंने यह साबित किया कि नैतिकता और व्यावसायिक सफलता एक साथ चल सकती हैं।

अभिनेता और नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने रतन टाटा को सच्चे अर्थों में ‘भारत रत्न’ बताते हुए कहा कि वे उदार हृदय वाले, अद्भुत इंसान और अत्यंत विनम्र व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने समाज को सेवा और संवेदनशीलता का संदेश दिया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि रतन टाटा का संपूर्ण जीवन व्यापार में उत्कृष्टता और परोपकार को समर्पित रहा। उन्होंने न केवल उद्योग जगत को नई दिशा दी, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी को भी व्यवसाय का अभिन्न अंग बनाया।

उल्लेखनीय है कि रतन टाटा को भारतीय उद्योग के आधुनिकीकरण, वैश्वीकरण और सामाजिक सरोकारों को सशक्त करने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। उनकी जयंती पर राष्ट्र ने एक बार फिर उनके विचारों, मूल्यों और राष्ट्रहित में किए गए कार्यों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

(वार्षिकी) भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम ने 2025 में जीते दो महत्वपूर्ण पदक

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नई दिल्ली, 28 दिसंबर (हि.स.)। भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम ने 2025 को एक बेहद सफल वर्ष के रूप में समाप्त किया। इस वर्ष जूनियर टीम ने ने सिर्फ मजबूत प्रदर्शन किया, बल्कि दो प्रमुख पदक (रजत और कांस्य) भी हासिल किए। इस वर्ष सफल अभियान की नींव टीम के कोच पीआर श्रीजेश के मार्गदर्शन में पूरे वर्ष आयोजित गहन राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों की एक श्रृंखला के माध्यम से रखी गई थी। इन शिविरों के माध्यम से कोच ने एक टीम का गठन किया और खिलाड़ियों को इस साल के अंत में तमिलनाडु में हुए हुए ह़ॉकी जूनियर विश्व कप 2025 की ओर बढ़ते हुए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए तैयार किया।

भारत की प्रतिस्पर्धी तैयारियों की शुरुआत जून में हुए फोर नेशंस टूर्नामेंट से हुई, जिसने यूरोपीय देशों की मजबूत टीमों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण तैयारी का मौका दिया। मेजबान जर्मनी, स्पेन और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों का सामना करते हुए भारतीय जूनियर टीम ने अपनी रणनीति का परीक्षण किया और टूर्नामेंट में तीसरा स्थान हासिल किया। तीसरे/चौथे स्थान के मैच में ऑस्ट्रेलिया पर 2-1 की महत्वपूर्ण जीत दर्ज की। इस टूर्नामेंट ने टीम को बहुमूल्य मैच अनुभव और रणनीति संयोजनों को लेकर स्पष्टता प्रदान की, जिससे टीम ने विश्व कप की तैयारियों को जारी रखा।

सुल्तान ऑफ जोहोर कप में जीता रजतइसके बाद टीम ने इस लय और सीख को अक्टूबर में आयोजित सुल्तान ऑफ जोहोर कप 2025 में बरकरार रखा, जहां भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। टीम ने ग्रेट ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और मलेशिया पर महत्वपूर्ण जीत दर्ज की और पाकिस्तान के खिलाफ 3-3 से ड्रॉ खेला। लीग चरण में अच्छे प्रदर्शन के बाद टीम फाइनल में पहुंची। हालांकि फाइनल मुकाबले में भारत ने 59वें मिनट में एक दुर्भाग्यपूर्ण गोल खा लिया और ऑस्ट्रेलिया से 1-2 से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

हॉकी जूनियर विश्व कप में हासिल किया कांस्य पदक सभी तैयारियों के दम पर टीम ने तमिलनाडु में आयोजित एफआईएच हॉकी पुरुष जूनियर विश्व कप 2025 में भाग लिया, जहां जूनियर टीम ने घरेलू मैदान पर एक यादगार प्रदर्शन किया। भारत ने पूल चरण में चिली, ओमान और स्विट्जरलैंड पर तीन आसान जीत के साथ अपने अभियान की शुरुआत की और नॉकआउट राउंड में प्रवेश किया।क्वार्टर फाइनल निर्णायक साबित हुआ, क्योंकि भारतीय टीम ने धैर्य बनाए रखते हुए शूटआउट में बेल्जियम को 4-3 से हराकर सेमीफाइनल में जगह पक्की कर ली। गोलकीपर प्रिंस दीप सिंह ने शूटआउट में दो महत्वपूर्ण बचाव करके शानदार कौशल और साहस का परिचय दिया और भारत को टूर्नामेंट में आगे बढ़ने में मदद की। दुर्भाग्यवश, भारतीय टीम सेमीफाइनल में जर्मनी से 1-5 से हार गईं, लेकिन तीसरे/चौथे स्थान के प्लेऑफ में उसने दृढ़ निश्चय दिखाया और अर्जेंटीना के खिलाफ अविश्वसनीय वापसी करते हुए कांस्य पदक हासिल किया।

महत्वपूर्ण मौकों पर खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन जैसे-जैसे साल आगे बढ़ा, भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम एक स्थिर और आत्मविश्वासी इकाई के रूप में उभर कर सामने आई, जिसमें कई खिलाड़ियों ने महत्वपूर्ण मौकों पर शानदार प्रदर्शन किया। कप्तान रोहित पूरे सीजन में एक सशक्त लीडर के रूप में उभरे और साथ ही उन्होंने अपने ड्रैगफ्लिकिंग कौशल को भी निखारा, जो महत्वपूर्ण मैचों में एक अहम हथियार साबित हुआ। आक्रमण में दिलराज सिंह और अर्शदीप सिंह ने लगातार अच्छा स्कोर किया, जिससे भारत को फॉरवर्ड लाइन में मजबूती मिली। डिफेंस में प्रिंस दीप सिंह एक भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में परिपक्व हुए और दबाव वाली स्थितियों में संयमित प्रदर्शन किया। अनमोल एक्का टीम के मुख्य खिलाड़ी बनकर उभरे, जो खेल को नियंत्रित करते हुए मिडफील्ड से डिफेंस और अटैक को जोड़ते थे।

(वार्षिकी) लखनऊ में स्मार्ट पुलिसिंग के जरिए महिला सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और यातायात में सुधार

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लखनऊ, 28 दिसंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की लखनऊ पुलिस ने वर्ष 2025 में मिशन शक्ति और स्मार्ट पुलिसिंग के जरिए महिला सुरक्षा, साइबर नियत्रंण, अपराध रोकथाम और यातायात सुधार में ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज की। राजधानी का पुलिस ने तकनीक और त्वरित न्याय के समन्वय से संगठित अपराध को कंट्रोल करने में सफल रहे।

सयुंक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था बबलू कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस साल हत्या के अपराधों में कमी दर्ज की गई। हत्या जैसे गंभीर मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए लखनऊ पुलिस ने 525 अभियुक्तों को जेल भेजा। तीन अभियुक्तों को एनएसए के तहत कार्रवाई की गई। इसके अलावा पुलिस की प्रभावी गश्त की वजह से इस साल एक भी डकैती की घटना नहीं हुई।

110 इनामी अपराधी गिरफ्तारलखनऊ पुलिस कमिश्रेट ने अपराध पर अकुंश लगाने और अपराधियों पर कार्रवाई करते हुए 110 इनामी अपराधी गिरफ्तार किए हैं। इनमें 55 अपराधी मुठभेड़ में गिरफ्तार हुए। इसमें तीन घायल अभियुक्तों की इलाज के दौरान मृत्यु हई है।

196 पर गैंगस्टर की कार्रवाई, 4.90 करोड़ की संपति कुर्कलखनऊ पुलिस ने गैंगस्टर और माफियाओं की भी कमर तोड़ दी। संगठित गिरोह के जरिए अवैध तरीके से बनायी संपत्तियों को कुर्क किया। इस एक साल के भीतर 41 अभियोगों में 196 अभियुक्तों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की गई। 16 अभियुक्तों के विरुद्ध 14 (1) गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 4 करोड़ 90 लाख 48 हजार 35 रुपये की अवैध संपति कुर्क की गई है। 2020 से अब तक दो अरब 21 करोड़ 65 लाख 14 हजार 2 सौ 71 रुपये की अवैध संपति कुर्क की जा चुकी है।

एक दोषी को मृत्युदंड, 46 दोषियों को आजीवन कारावासपुलिस महानिदेशक की ओर प्रदेश में चलाए गए ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत लखनऊ पुलिस कमिश्रेट प्रभावी पैरवी कर 829 अपराधियों को न्यायालय से सजा दिलाने में सफल रही। महिला एवं बालिका संबधित गंभीर अपराधों में 139 दोषियों को सजा दिलाई गई। एक दोषी को मृत्युदंड की सजा और 46 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई हैं।

53 मिशन शक्ति केंद्रो की स्थापनामहिला संबधी अपराध और उन्हें तत्काल सहायता एवं काउसंलिंग के लिए लखनऊ जिले में प्रत्येक थाने पर 53 मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना की गई है। जिम्मेदार अधिकारियों को 53 विशेष सीयूजी नंबर आवंटि किए गए, जिससे जनसंपर्क सीधे बन सकें। 99 पिंक बूथ स्थापित हुए। महिला बीट प्रभारियों एवं पुलिस सार्वजनिक स्थानों पर जाकर महिलाओं और बालिकाओं की काउंसलिंग की गई। महिला संबंधी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की, जिसका औसत रिस्पांस टाइम मात्र 8 मिनट रहा। पिंक बूथ की टीम ने 53,244 स्थानों पर जाकर 2,96,340 लोगों को जागरूक किया।

साइबर सेल ने 6,456 शिकातयों पर कार्रवाई कीसयुंक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि डिजिटल युग की चुनौतियों का सामना करते हुए साइबर सेल ने 6,456 शिकातयों पर त्वरित कार्रवाई की। इसका निस्तारण दर 90 फीसदी रही। साइबर ठगों द्वारा ठगे गए नागरिकों के लगभग 11.68 करोड़ रुपये रिफंड व फ्रीज कर सुरक्षित किए गए।

इतना ही नहीं भविष्य में साइबर अपराध को रोकने के लिए 10 हजार से अधिक संदिग्ध मोबाइल नंबर को ब्लॉक कराया गया है। सोशल मीडिया और डार्क वेब की निरंतर निगरानी के माध्यम से आपत्तिजनक खातों को हटवाया गया और नागरिक को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।

नशा मुक्ति के खिलाफ चलाया अभियानयुवा पीढ़ी को नशे के जाल से बचाने के लिए लखनऊ पुलिस ने नशा मुक्त अभियान चलाया। इस दौरान नशे का कारोबार करने वाले लोगों और तस्करी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई। पुलिस ने 145 शातिर तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। इनके कब्जे से करोड़ो रुपये के नशीला पदार्थ की बड़ी खेप बरामद हुई। अवैध शराब के निर्माण और ब्रिकी के संलिप्त 187 अभियुक्त गिरफ्तार किए गए। इस दौरान इनके पास से कुल 31 हजार लीटर से अधिक शराब जब्त की गई।

11,64,061 वाहनों का चालानलखनऊ पुलिस ने यातायात को सुधारने और यातायात नियमों का उल्लंधन करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की है। इस साल यातायात पुलिस ने 11,64,061 वाहनों का चालान किया है। नो पार्किंग में वाहन को खड़ाकर यातायात प्रभावित करने वाले 2,62,373 वाहनों का चालान किया गया है। व्यस्त बाजारों और प्रमुख चौराहों पर जाम की समस्या से निपटने के लिए आधुनिक स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया गया है। हादसों को रोकने के लिए दुर्घटना संभावित ‘ब्लैक स्पॉट्स’ को चिन्हित किया गया और वहां तकनीकी पद्धति से विशेष सुरक्षा सुधार किए गए।

(वार्षिकी- 2025) सोने-चांदी में आई तूफानी तेजी, प्लैटिनम के भी बढ़े भाव

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नई दिल्ली, 28 दिसंबर (हि.स.)। साल 2025 सोना, चांदी और प्लैटिनम जैसी कीमती धातुओं के लिए शानदार साल साबित हुआ है। इस साल इन तीनों धातुओं के भाव में जोरदार तेजी आई। इस तेजी की वजह से साल के अंत में ये तीनों चमकीली धातुएं अपने ऑल टाइम हाई लेवल पर पहुंच गईं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 4,530 डॉलर प्रति औंस के स्तर को भी पार कर गया। इसी तरह चांदी ने भी सभी अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए 75 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार करने में सफलता हासिल कर ली। इसके अलावा तरह प्लैटिनम भी साल के अंत में 2,400 डॉलर प्रति औंस के स्तर के पार पहुंच कर कारोबार कर रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में आई तूफानी तेजी की एक बड़ी वजह दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा अपना स्वर्ण भंडार मजबूत करने के लिए की जा रही सोने की खरीदारी भी रही है। इसी तरह गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में भी इस साल लगातार भारी निवेश होता रहा है। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार अमेरिकी फेडरल रिजर्व (यूएस फेड) द्वारा ब्याज दरों में कटौती करने से भी सोने की कीमत को काफी सपोर्ट मिला है।

इस साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में तीन बार कटौती कर चुका है। अनुमान लगाया जा रहा है कि साल 2026 में भी यूएस फेड ब्याज दरों में कटौती करना जारी रख सकता है। ब्याज दरों में कमी होने से स्वाभाविक रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग में तेजी आ जाती है, जिसका असर उसकी कीमत बढ़ाने के रूप में साफ-साफ नजर आता है।

कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट मयंक मोहन के अनुसार भारत में रुपये की कीमत में भले ही गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन फॉरेक्स मार्केट में ओवरऑल डॉलर इंडेक्स कमजोर हुआ है। इसी हफ्ते ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स में 0.70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस साल जून के महीने में डॉलर इंडेक्स में आई गिरावट के बाद इस हफ्ते इस इंडेक्स में आई ये सबसे बड़ी गिरावट है।

मयंक मोहन का कहना है कि फॉरेक्स मार्केट में डॉलर में कमजोरी आने से भी सोना और चांदी जैसी चमकीली धातुओं को सपोर्ट मिलता है। इस साल भी डॉलर इंडेक्स के उतार-चढ़ाव ने सोना और चांदी की कीमत को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। साल 2025 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में लगभग 70 प्रतिशत की तेजी आई है। इसी तरह चांदी भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 150 प्रतिशत से ज्यादा उछल गया है। वर्ष 1979 के बाद पहली बार किसी एक साल के दौरान सोना और चांदी के कीमत में आई ये सबसे बड़ी तेजी है।

इस साल चांदी की मांग में भी लगातार तेजी बनी रही, जिसकी वजह ये चमकीली धातु 28 औंस प्रति डॉलर के स्तर से उछल कर साल के अंत में 76 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गई। जानकारों का मानना है कि इंडस्ट्रियल डिमांड में बढ़ोतरी होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई कम हो जाने की वजह से इस साल चांदी की कीमत में लगातार तेजी बनी रही। वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव की वजह से सेफ इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट के रूप में भी इस साल चांदी में निवेश लगातार बढ़ता गया। खासकर सिल्वर ईटीएफ में लगातार इनफ्लो होता हुआ नजर आया। जिसकी वजह से चांदी रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने में सफल रही।

सोना और चांदी के अलावा प्लैटिनम की बात करें तो इस धातु की कीमत में भी इस साल लगातार तेजी का माहौल बना रहा। सिर्फ दिसंबर महीने में ही प्लैटिनम की कीमत में 40 प्रतिशत से अधिक की तेजी आ गई। इस तेजी की वजह से पहली बार प्लैटिनम 2,400 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार करके कारोबार करता हुआ नजर आ रहा है।

संस्कृति, विकास एवं नवाचार के मॉडल के रूप में उभरी अयोध्या: त्रिपाठी

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-प्रदेश के महापौर सम्मेलन में एक-दूसरे से साझा किए गए नवाचार

अयोध्या, 28 दिसंबर (हि.स.)। प्रदेश के महापौर सम्मेलन में नवाचारों पर मंथन किया गया। महापौरों ने अपने यहां किए गए नवाचार से परिचित कराया तो अन्य महापौर ने उसे अपनाने का संकल्प जताया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुए सम्मेलन में अयोध्या के महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि अयोध्या संस्कृति, विकास और नवाचार के मॉडल के रूप में विश्व फलक पर उभरी है।

उन्होंने कहा कि कभी अयोध्या के प्रवेश द्वार पर कोयला मंडी की कालिख डराती थी। कोयला मंडी के विस्थापन के लिए किए गए खुद के संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अब प्रवेश द्वार अयोध्या की भव्यता का एहसास कराता है। उन्होंने पेयजल एवं स्वच्छता के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचार की चर्चा करते हुए बताया कि स्मारक में रानी हो की मूर्ति लगने से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दो हजार वर्षों का संबंध जीवंत हुआ है। राम की पैड़ी पर नित्य दीपावली का दृश्य रहता है। तीन पारियों में नगर की सफाई मानव श्रम के साथ ऑटोमेटिक स्वीपिंग मशीन से कराई जा रही है। हर घर तक सरयू जल पहुंचाने की योजना जल्द ही साकार होगी। अयोध्या की सीमा में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को राम गाथा से जुड़ी पेंटिंग और ध्वनि विस्तारक यंत्र से गूंजने वाली रामधुन आध्यात्मिक चेतना का एहसास कराती है। नगर की सरकार आपके द्वार अभियान से समस्या निदान के साथ ही जनता की पसंद से विकास की गाथा लिखी जा रही है। दक्षिण भारत को अयोध्या के विभिन्न प्रकल्पों से जोड़कर भावनात्मक रूप से एक किया जा रहा है।

महापौर संघ के अध्यक्ष उमेश गौतम ने बताया कि बाबा विश्वनाथ के बाद प्रदेश का दूसरा कॉरिडोर बरेली में नाथ कॉरिडोर बन रहा है। महाभारत काल के मंदिर बरेली की पहचान हैं। वहां वाटर बॉडी का इस तरीके से रखरखाव किया जा रहा है कि वह पर्यावरण संरक्षण का केंद्र बन रहा है। उन्होंने पार्षदों को व्यवस्थित ढंग से कार्य करने की सलाह दी। पार्षद से सांसद और प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंचने का उदाहरण भी दिया।

कानपुर की प्रमिला पांडेय ने राममंदिर आंदोलन से अपने जुड़ाव का वर्णन करते हुए विवाह के लिए गरीबों को मंगलमभवन मात्र 11 हजार रुपये में उपलब्ध कराने का उदाहरण दिया। उन्होंने पार्षदों को आने वाली चुनौतियों से निपटाने का तरीका बताया।

झांसी के महापौर बिहारी लाल आर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश न केवल अपराध मुक्त हुआ है, बल्कि विकसित उत्तर प्रदेश रामराज्य के रूप में पूरी देश में पहचाना जा रहा है। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई को याद करते हुए भगवान राम की अयोध्या और चित्रकूट के पुराने रिश्ते को रेखांकित किया।

लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने बताया कि 6.50 लाख मैट्रिक टन कूड़ा हटवा कर प्रेरणास्थल का निर्माण कराया है, जहां श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी की 65 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित हुई है। उन्होंने बताया कि 1200 इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से पेट्रोल वहां बंद कर खर्च पर नियंत्रण पाया है। गमला बनाने की मशीन, मियावाकी पार्क, नारियल के गोले से जूट निकालकर रस्सी बनाने की मशीन लगाने के नवाचारों से परिचित कराया।

सहारनपुर के महापौर डॉ. अजय सिंह ने कहा कि आज का पार्षद कल का विधायक है, इसलिए अपने कार्यकाल में ऐसे कार्य करें, जो नजीर बने। उन्होंने भाषा संकुल का निर्माण, गोबर से पेंट एवं पेस्टिसाइड बनाने के नवाचारों पर प्रकाश डाला। मुरादाबाद के विनोद अग्रवाल ने स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में किए गए कार्य एवं विरासत संरक्षण, हनुमान वाटिका, संस्कृति पथ, रामपथ, टैक्स वृद्धि आदि प्रकल्पों की जानकारी दी। गोरखपुर के डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने अर्बन फ्लड मैनेजमेंट एवं जल के प्राकृतिक शुद्धिकरण के प्रकल्प की जानकारी दी। निशा नायर ने नगर निगम के सफाई संबंधी प्रेजेंटेशन दिया। सम्मेलन के पूर्व प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम का प्रसारण किया गया। नगर विकास मंत्री डॉ.एके शर्मा जूम के माध्यम से सम्मेलन से जुड़े। अपने संबोधन में अयोध्या की उपेक्षा के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराया और नगर निगम की उपलब्धियां पर विस्तार से प्रकाश डाला।

नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन अपर नगर आयुक्त डॉ. नागेंद्र नाथ ने किया। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष प्रिया अग्रवाल विशेष रूप से मौजूद रहीं।अतिथियों का स्वागत भगवान राम की प्रतिमा, रामचरितमानस, हृदय में राम पुस्तक, शाल भेंट कर उपसभापति राजेश गौड़, पार्षद अनुज दास, बृजेंद्र सिंह, विशाल पाल, अनिल सिंह, चंदन सिंह, अभय श्रीवास्तव, संतोष सिंह, दीप कुमार, अमित गुप्त, विश्वजीत, अजय पांडे, विनय जायसवाल, हरिशचंद्र गुप्त, अंकित तिवारी, सूर्यकुमार तिवारी सूर्या, रमाशंकर, सौरभ सिंह, धर्मेंद्र मिश्र, सुफियान, जगतनारायन यादव, सुल्तान अंसारी, सलमान हैदर ने किया। इस मौके पर स्मारिका का विमोचन किया गया।

आस्था बनाम साँसें: कबूतर, कानून और हमारी सामूहिक गैर-जिम्मेदारी

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—  डॉ. सत्यवान सौरभ

भारत में आस्था अक्सर तर्क से बड़ी हो जाती है। यही कारण है कि यहाँ मंदिर के बाहर घंटियों की आवाज़ से ज़्यादा तेज़ कभी-कभी साँसों की घुटन होती है, लेकिन हम सुनना नहीं चाहते। मुंबई की एक अदालत का हालिया फैसला—जिसमें सार्वजनिक स्थान पर कबूतरों को दाना डालने पर ₹5000 का जुर्माना लगाया गया—इसी टकराव की एक स्पष्ट और साहसी मिसाल है। यह फैसला कबूतरों के खिलाफ नहीं, बल्कि उस मानसिकता के खिलाफ है जो भावुकता के नाम पर विज्ञान, कानून और सार्वजनिक स्वास्थ्य को कुचल देती है।

हमारे समाज में कबूतरों को दाना डालना “पुण्य” माना जाता है। सुबह-सुबह बालकनी, छत या पार्क में मुट्ठी भर दाना डालकर आत्मसंतोष पा लिया जाता है—मानो किसी बड़ी मानवता की सेवा हो गई हो। लेकिन सवाल यह है कि क्या बिना परिणाम समझे किया गया कर्म सच में दया कहलाता है? चिकित्सा विज्ञान लगातार चेतावनी देता रहा है कि कबूतरों की सूखी बीट हवा में घुलकर क्रिप्टोकोकोसिस, हिस्टोप्लास्मोसिस, हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस और साल्मोनेला जैसी जानलेवा बीमारियाँ फैला सकती है। ये बीमारियाँ कोई काल्पनिक डर नहीं हैं, बल्कि अस्पतालों में भर्ती असली मरीज़ों की सच्ची कहानियाँ हैं। दमा, फेफड़ों के रोगी, बुज़ुर्ग और बच्चे—सबसे पहले इन्हीं की साँसें दांव पर लगती हैं।

मुंबई की अदालत ने इस मामले को केवल नगर निगम के आदेश के उल्लंघन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सीधे-सीधे जनस्वास्थ्य के लिए खतरा माना। IPC की धाराओं के तहत सज़ा यह संकेत देती है कि अब राज्य सिर्फ बीमारियों का इलाज नहीं करना चाहता, बल्कि बीमारी पैदा करने वाली सामाजिक आदतों को भी रोकना चाहता है। यह देश में पहली बार हुआ है कि कबूतरों को दाना डालने जैसे सामाजिक रूप से स्वीकृत कृत्य को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। यह फैसला बताता है कि कानून अब भावनाओं से नहीं, उनके प्रभावों से संवाद करेगा।

इस पूरे विवाद में सबसे असहज सवाल धर्म और परंपरा से जुड़ा है। कुछ लोग इसे आस्था पर हमला बता रहे हैं, लेकिन क्या धर्म कभी बीमारी फैलाने की अनुमति देता है? क्या किसी भी धार्मिक ग्रंथ में यह लिखा है कि पुण्य कमाने के लिए दूसरों की जान जोखिम में डाल दी जाए? खुद सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियाँ साफ़ कह चुकी हैं कि कबूतरों को दाना खिलाना कोई धार्मिक अनिवार्यता नहीं है, फिर भी विरोध जारी है। दरअसल यह विरोध आस्था का नहीं, ज़िद का है—अपनी आदतें न बदलने की ज़िद।

शहर अब गाँव नहीं रहे। घनी आबादी, ऊँची इमारतें, सीमित हवा और साझा स्थानों के बीच एक छोटी सी लापरवाही बड़े संकट में बदल जाती है। बालकनी में डाला गया दाना सिर्फ कबूतरों को नहीं बुलाता, बल्कि उनके साथ बीमारी, गंदगी और संक्रमण की पूरी श्रृंखला भी खड़ी कर देता है। विडंबना यह है कि वही लोग जो मास्क, वैक्सीन और वैज्ञानिक चेतावनियों पर सवाल उठाते हैं, वे पुण्य के नाम पर शहरों को जैविक कचरे का अड्डा बना देते हैं।

इस बहस में यह स्पष्ट कर देना ज़रूरी है कि कबूतर दोषी नहीं हैं। वे तो अपने स्वभाव के अनुसार जी रहे हैं। दोषी हम हैं—हमारी अवैज्ञानिक भावुकता, हमारी सुविधा की आस्था और हमारी सामूहिक गैर-जिम्मेदारी। अगर सच में दया करनी है तो नियंत्रित, सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीकों से कीजिए—पशु कल्याण संगठनों के माध्यम से, खुले सार्वजनिक स्थलों पर नहीं।

मुंबई अदालत का यह फैसला हमें साफ़ संदेश देता है कि आस्था निजी हो सकती है, लेकिन उसका असर सार्वजनिक जीवन को बीमार नहीं कर सकता। दया का मतलब नुकसान पहुँचाना नहीं होता और कानून अब इस फर्क को समझने लगा है। यह फैसला सिर्फ एक शहर या एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है कि अगर हमने समय रहते अपनी आदतें नहीं बदलीं, तो आने वाले समय में “आस्था” भी अदालत के कटघरे में खड़ी होगी।

आज ज़रूरत इस बात की है कि हम पुण्य को नए सिरे से परिभाषित करें। वह कर्म पुण्य नहीं हो सकता जो किसी बच्चे की साँस छीन ले। वह आस्था पवित्र नहीं हो सकती जो अस्पतालों की कतारें बढ़ा दे। मुंबई अदालत का यह फैसला कबूतरों के खिलाफ नहीं, बल्कि बेहिसाब भावुकता के खिलाफ है। यह याद दिलाने के लिए कि इंसान होने की पहली शर्त है—दूसरे इंसान की ज़िंदगी का ख़याल। अगर आस्था सच में सच्ची है, तो उसे विज्ञान से डर नहीं लगा।

– डॉo सत्यवान सौरभ,

कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,

हरिद्वार और बरेली रेलवे स्टेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के लिए चिह्नित

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मुरादाबाद, 28 दिसम्बर (हि.स.)। मुरादाबाद रेल मंडल में मंडल रेल प्रबंधक संग्रह मौर्य ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उत्तर रेलवे के 10 रेलवे स्टेशन को भी इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के लिए चिह्नित किया है। इन स्टेशनाें में दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, चंडीगढ़ , लुधियाना, अमृतसर, जम्मू, हरिद्वार, बरेली शामिल हैं। इसमें हरिद्वार और बरेली मुरादाबाद रेल मंडल के अंतर्गत आते हैं।

डीआरएम ने आगे बताया कि केंद्रीय रेल मंत्री ने कहा है कि यात्रा की मांग में लगातार हो रही तीव्र वृद्धि को देखते हुए, अगले 5 वर्षों में प्रमुख शहरों की नई रेल गाड़ियों के संचालन की क्षमता को वर्तमान स्तर से दोगुना करना आवश्यक है। आगामी वर्षों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वर्तमान बुनियादी ढांचे को मजबूत करना होगा। वर्ष 2030 तक संचालन क्षमता को दोगुना करने के लिए विभिन्न कार्य शामिल होंगे जिसमें मौजूदा टर्मिनलों को अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, स्टेबलिंग लाइन, पिट लाइन और पर्याप्त शंटिंग सुविधाओं से सुसज्जित किया जएगा। शहरी क्षेत्र में और उसके आसपास नए टर्मिनलों की पहचान और निर्माण होगा। मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स सहित रखरखाव सुविधाएं दी जाएगी।

सर्राफा बाजार में जोरदार तेजी, सोना और चांदी की बढ़ी चमक

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– एक सप्ताह में 7,040 रुपये तक महंगा हुआ सोना, चांदी ने लगाई 37 हजार रुपये की छलांग

नई दिल्ली, 28 दिसंबर (हि.स.)। घरेलू सर्राफा बाजार में सोना और चांदी के भाव में आज जोरदार तेजी का रुख बना हुआ नजर आ रहा है। सोना आज 1,090 रुपये प्रति 10 ग्राम से 1,190 रुपये प्रति 10 ग्राम तक महंगा हो गया है। वहीं, चांदी ने आज करीब 11 हजार रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक की छलांग लगाई। सोने की कीमत में आई इस तेजी के कारण देश के ज्यादातर सर्राफा बाजारों में 24 कैरेट सोना आज 1,41,220 रुपये से लेकर 1,41,370 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह 22 कैरेट सोना आज 1,29,450 रुपये से लेकर 1,29,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच बिक रहा है। चांदी की कीमत में जोरदार उछाल आने के कारण ये चमकीली धातु दिल्ली सर्राफा बाजार में ढाई लाख रुपये का स्तर पार करके 2,51,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बिक रही है।

साप्ताहिक आधार पर देखा जाए तो सोमवार से शनिवार तक के कारोबार के दौरान लगातार उतार-चढ़ाव होने के कारण देश के ज्यादातर सर्राफा बाजारों में 24 कैरेट सोने के भाव में 7,040 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की तेजी दर्ज की गई। इसी तरह 22 कैरेट सोना भी पिछले एक सप्ताह के दौरान 6,450 रुपये प्रति 10 ग्राम तक महंगा हुआ। सोने की तरह ही चांदी के भाव में भी इस सप्ताह भी जबरदस्त तेजी आई। इस सप्ताह के कारोबार में ये चमकीली धातु पिछले सप्ताह की तुलना में 37,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक महंगी हो गई है।

दिल्ली में आज 24 कैरेट सोना 1,41,370 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 1,29,600 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,41,220 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,29,450 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। इसी तरह अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की रिटेल कीमत 1,41,270 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,29,500 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है।

इन प्रमुख शहरों के अलावा चेन्नई में 24 कैरेट सोना आज 1,41,220 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर और 22 कैरेट सोना 1,29,450 रुपये प्रति 10 ग्राम की कीमत पर बिक रहा है। इसी तरह कोलकाता में 24 कैरेट सोना 1,41,220 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,29,450 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। भोपाल में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,41,270 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,29,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

लखनऊ के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना आज 1,41,370 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर और 22 कैरेट सोना 1,29,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। पटना में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,41,270 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है, जबकि 22 कैरेट सोना 1,29,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है। जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,41,370 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना 1,29,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

देश के अन्य राज्यों की तरह कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा के सर्राफा बाजार में भी आज सोने के भाव में तेजी दर्ज की गई है। इन तीनों राज्यों की राजधानियों बेंगलुरु, हैदराबाद और भुवनेश्वर में 24 कैरेट सोना 1,41,220 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह इन तीनों शहरों के सर्राफा बाजारों में 22 कैरेट सोना 1,29,450 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बिक रहा है।

मिलेट्स-ऑर्गेनिक फूड स्टार्टअप : सीएम योगी की प्रेरणा से गल्फ कंट्रीज के मार्केट में धाक जमाएंगी यूपी की बेटियां

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-उत्तर प्रदेश सरकार के एआईएफ फंड से मिली मजबूती, नेफेड के लिए करती हैं प्रोडक्ट तैयार

-दिल्ली, एनसीआर के बाजार में यूपी की लड़कियों ने जमाया ऑर्गेनिक फूड का कारोबार

लखनऊ, 28 दिसंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन और प्रेरणा से उत्तर प्रदेश की बेटियां न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बनाने को तैयार हैं। मिलेट्स आधारित ऑर्गेनिक फूड स्टार्टअप के जरिए यूपी की दो बेटियों ने ऐसा काम कर दिखाया है, जो प्रदेश की नई उद्यमशील शक्ति का प्रतीक बन रहा है। दिल्ली-एनसीआर में मजबूत पकड़ बनाने के बाद अब इनका लक्ष्य गल्फ कंट्रीज का बाजार है, जहां ऑर्गेनिक और मिलेट्स उत्पादों की धाक जमाने की पूरी तैयारी है। इसके लिए विशेष तौर पर किसानों को प्रशिक्षण देकर प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती करवाई जा रही है।

डीयू से लौटीं बेटियां, अपने गांव की महिलाओं को दिया रोजगार

दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद पारंपरिक करियर की राह छोड़कर गांव लौटने वाली शिखा सिंह चौहान और सोम्या सिंह ने सामाजिक उद्यमिता का रास्ता चुना। किसानों और ग्रामीण महिलाओं को साथ लेकर उन्होंने ऑर्गेनिक और मिलेट्स आधारित खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में कदम रखा। आज उनकी यूनिट में 15 से अधिक महिलाएं उत्पादन, प्रोसेसिंग और पैकेजिंग का जिम्मा संभाल रही हैं। शिखा सिंह चौहान दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट और नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी गांधीनगर, गुजरात से फूड टेक्नोलॉजी में पोस्ट-ग्रेजुएट हैं। वहीं, सोम्या सिंह दिल्ली विश्वविद्यालय से फूड टेक्नोलॉजी में बी.टेक हैं।

महिला-नेतृत्व वाला एग्रीबिजनेस मॉडल हो रहा मजबूत

सोम्या सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) के सहयोग से प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट का विस्तार हुआ। इससे न सिर्फ उत्पादन क्षमता बढ़ी, बल्कि महिला-नेतृत्व वाले एग्रीबिजनेस मॉडल को भी मजबूती मिली। यही कारण है कि दिल्ली-एनसीआर में ऑर्गेनिक फूड के बाजार में इनका ब्रांड तेजी से उभरा है।

खेत से थाली तक पारदर्शी मॉडल

सोहा ऑर्गेनिक्स की को-फाउंडर शिखा सिंह चौहान नागली वाजिदपुर, सेक्टर 130, गौतम बुद्ध नगर की रहने वाली हैं जबकि उनकी पार्टनर सोम्या सिंह बागपत जिले की निवासी हैं। रासायनिक खाद्य पदार्थों और उनसे होने वाली समस्याओं से लोगों को बचाने के लिए उन्होंने मिलेट्स-ऑर्गेनिक फूड स्टार्टअप की शुरुआत की। यह स्टार्टअप फार्म-टू-फोर्क मॉडल पर काम करता है। छोटे किसानों से सीधे कच्चा माल खरीदा जाता है और उन्हें उचित मूल्य दिया जाता है। बिचौलियों के हटने से सप्लाई चेन पारदर्शी बनी है, वहीं उपभोक्ताओं को शुद्ध, रसायन-मुक्त और पोषण से भरपूर उत्पाद मिल रहे हैं।

दिल्ली-एनसीआर से नेफेड तक सप्लाई

ऑर्गेनिक दालें, मसाले, घी, मिलेट पास्ता, मिलेट नूडल्स, मल्टीग्रेन और सत्तू चीला समेत तमाम तरह के उत्पाद यहां से सीधे मार्केट में जाते हैं। इसके बदले किसानों को उनका उचित मूल्य भी दिया जाता है। इसमें बड़े पैमाने पर बागपत से खांडसारी शुगर का उत्पाद लोगों के बीच पहुंचाया जाता है।

वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ नेफेड (एनएएफईडी) को भी उत्पादों की आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा सरकारी पोषण कार्यक्रमों के लिए विशेष उत्पाद विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है, जिससे कमजोर वर्गों तक सुरक्षित और पौष्टिक भोजन पहुंच सके।

गल्फ कंट्रीज पर नजर, ‘मेड इन यूपी’ की तैयारी

शिखा सिंह चौहान ने बताया कि ऑर्गेनिक और मिलेट्स उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए अब अगला लक्ष्य गल्फ देशों का बाजार है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पैकेजिंग और क्वालिटी कंट्रोल पर खास फोकस किया जा रहा है, ताकि विदेशों में भी उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया जा सके।

स्वास्थ्य, सततता और महिला सशक्तिकरण से निकली यूपी की बेटियों की सफलता की कहानी बताती है कि सही नीति, सरकारी सहयोग और दृढ़ संकल्प हो, तो हमारी बेटियां वैश्विक मंच पर भी परचम लहरा सकती हैं। मिलेट्स ऑर्गेनिक फूड स्टार्टअप के जरिए उभरती यह पहल न सिर्फ एक कारोबार है, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नई पहचान भी है।