रिटायर कर्मचारी की सौ फीसदी पेंशन रोकना गलत,आदेश रद्द

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जयपुर, 21 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने रिटायर कर्मचारी की सौ फीसदी पेंशन रोकने को गलत माना है। इसके साथ ही अदालत ने विभाग के पेंशन रोकने के आदेश को रद्द करते हुए उसे समस्त परिलाभ अदा करने को कहा है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश विलायती राम की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि विभागीय जांच में याचिकाकर्ता दोषी नहीं पाया गया और आपराधिक मामले में भी उसे दोषमुक्त किया गया। ऐसे में पुलिस को दिए बयान के आधार पर पेंशन नहीं रोकी जा सकती।

याचिका में अधिवक्ता टीएन सिंह ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता साल 1994 में विधि रचनाकार के पद पर नियुक्त हुआ था। वहीं सेवा के दौरान उस पर आरोप लगाया गया कि उसने एसटी जाति का फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी हासिल की है। इस आधार पर उसे साल 2008 में निलंबित कर दिया गया। याचिका में कहा गया कि साल 2012 में उसके खिलाफ फर्जी दस्तावेजों को लेकर आपराधिक मामला दर्ज हुआ। वहीं विभागीय जांच में उसे क्लीन चिट मिल गई। इसके अलावा आपराधिक मामले में भी उसे निचली अदालत ने बरी कर दिया और सरकार ने आदेश की अपील भी नहीं की। इसके बावजूद अनुशासनिक प्राधिकारी ने आपराधिक मामले में तहसीलदार की ओर से पुलिस को दिए बयान के आधार पर 19 अगस्त, 2020 को आदेश जारी कर उसकी सौ फीसदी पेंशन रोक दी। ऐसे में पेंशन रोकने के आदेश को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने पेंशन रोकने के आदेश को रद्द करते हुए बकाया भुगतान करने को कहा है।

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