प्रयागराज, 22 जनवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वकीलों की हड़ताल का सख्त संज्ञान लेते हुए महाराजगंज के चकबंदी उप-संचालक को निर्देश दिया है कि यदि संबंधित पक्षों के अधिवक्ता हड़ताल या न्यायिक कार्य से विरत रहने के कारण उपस्थित नहीं हो रहे हैं, तब भी मामलों का निस्तारण किया जाए।
वकीलों की हड़ताल पर सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने संबंधित मामले में वकीलों के पेश होने पर रोक लगा दी और टिप्पणी की कि महराजगंज में बार के सदस्य पिछले कई महीनों से अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे हैं इसलिए उक्त पुनरीक्षण में पेश होने वाले वकीलों को अदालत में उपस्थित होने से प्रतिबंधित किया जाता है। साथ ही चकबंदी उप-संचालक को निर्देश दिया कि इन निर्देशों के अनुसार पुनरीक्षण का निर्णय 15 मार्च तक या उससे पहले करें।
यह आदेश न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने चिनकई की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। उसने याचिका में महराजगंज के चकबंदी उप-संचालक के समक्ष लंबित अपने मामले के शीघ्र निस्तारण की मांग की थी।
याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि चकबंदी उप-संचालक के निर्देशों के अनुसार मामले में कई तारीखें तय की गई थीं लेकिन सभी तारीखों पर वकीलों के कार्य से विरत रहने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने कहा कि तथ्यों की इस पृष्ठभूमि में मामला तय न करने के लिए संबंधित अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
याची के अधिवक्ता ने कहा कि मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पक्षों के अधिकार शामिल हैं। साथ ही सुझाव दिया कि यदि वकील अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे हैं या संबंधित बार एसोसिएशन का ऐसा कोई प्रस्ताव है, तो यह न्यायालय पक्षों को स्वयं उपस्थित होकर चकबंदी उप-संचालक के समक्ष अपनी बात रखने की अनुमति दे सकता है।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने एक्स कैप्टन हरीश उप्पल बनाम भारत संघ के मामले में वकीलों की हड़ताल को अवैध घोषित करने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का संज्ञान लेते हुए चकबंदी उप-संचालक महराजगंज को निर्देश दिया कि संबंधित पुनरीक्षण के पक्षकारों को अगली निर्धारित तिथि पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने और मेरिट के आधार पर अपना पक्ष रखने की अनुमति दें।