बाल मुकुन्द ओझा
पिछले कुछ सालों से अनेक रिपोर्टों में यह स्वीकार किया गया कि भूजल में जहरीली धातुओं की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई है, इसके बावजूद शुद्ध पानी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया जो बेहद चिंताजनक है। यह भी स्वीकार किया है कि रसायनों या धातुओं का मानव शरीर और स्वास्थ्य पर बहुत गंभीर विषाक्त प्रभाव पड़ता है और स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा होता है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की ग्राउंड क्वालिटी रिपोर्ट 2025 के मुताबिक देशभर में पंजाब में भूजल में यूरेनियम की मात्रा सर्वाधिक पाई गई है। इस प्रदेश में 62.50 सैम्पल सुरक्षित सीमा से अधिक मिले है, जो मानव जीवन के लिए खतरनाक है। पंजाब के बाद हरियाणा, दिल्ली, कर्नाटक और दिल्ली में भी यूरेनियम प्रदूषण तय मानक से अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार उत्तरपश्चिम भारत में पंजाब, हरियाणा दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश यूरेनियम के हॉटस्पॉट के रूप में सामने आये है। वहीं फ्लोराइड प्रदूषण के मामलों में राजस्थान देशभर में अव्वल है।
रिपोर्ट में बताया गया है यूरेनियम प्रदूषण के फलस्वरूप लोग पेयजल सेवन से बीमारियों के शिकार होते है जो बेहद चिंताजनक है। इससे पूर्व गत वर्ष भारत सरकार ने संसद में स्वीकार किया था कि आज हम जो पानी पी रहे हैं वह जहर बन गया है। सरकार ने राज्यसभा में जो आंकड़े दिए थे वो न सिर्फ चौकाने वाले हैं बल्कि डराने वाले भी हैं। जहां भूजल में जहरीली धातुओं की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई है। पानी में हानिकारक वस्तुओं के मिश्रण से ही जल प्रदूषित होता है। प्रदूषित जल का सबसे भयंकर प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सम्पूर्ण विश्व में प्रतिवर्ष एक करोड़ पचास लाख व्यक्ति प्रदूषित जल के कारण मृत्यु के शिकार हो जाते हैं तथा पांच लाख बच्चे मर जाते हैं। भारत में प्रति लाख लगभग 360 व्यक्तिओं की मृत्यु हो जाती है और अस्पतालों में भर्ती होने वाले रागियों में से 50 फसदी रोगी ऐसे होते है जिनके रोग का करण प्रदूषित जल होता है। अविकसित देशों की स्थिति और भी बुरी है। यहां 80 प्रतिशत रोगों की जड़ प्रदूषित जल है।
हमारे देश के भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाईट्रेट, लोहा, कैडमियम, क्रोमियम, तांबा, निकल, सीसा, जस्ता व पारा जैसी भारी धातु का मिश्रण तेजी के साथ घुलता जा रहा है। जिससे जलजनित बीमारियां हमारे जीवन के लिए खतरा बन गई हैं। केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की माने तो विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों और जल गुणवत्ता की निगरानी के दौरान केंद्रीय भूमि जल बोर्ड द्वारा तैयार भूमि जल गुणवत्ता के आंकड़े देश के विभिन्न राज्यों के भागों के अलग-अलग हिस्सों में भूमि जल संदूषण की पुष्टि कर रहे हैं। हालत यह हो गई है की लोग धीमे जहर वाले पानी को पीने के लिए विवश हैं। मंत्रालय का दावा है कि केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर इस चुनौती से निपटने के लिए संदूषित भूजल की समस्या और विशुद्ध जल के सेवन से प्रभावित नागरिकों के उपचार के लिए जागरूकता और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।
जल शक्ति मंत्रालय के एक दस्तावेज के अनुसार देश की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी को इसका पानी भूजल से मिलता है। दुनिया में उपलब्ध कुल जल में मात्र 0.6 फीसदी जल ही पीने योग्य है। यह पानी समुद्रों नदियों, तालाबों, झीलों और अन्य जल निकायों में मौजूद है। मानव सभ्यता के विकास के साथ हमारे जलस्रोत जबरदस्त प्रदूषण के शिकार हो रहे हैं। इनमें जल प्रदूषण मुख्य कारक है। जल प्रदूषण के कारण विभिन्न जलस्रोतों में जीवन के लिए जहर रूपी खतरनाक रसायनों के मिश्रण का घोल बन रहा है। हमारे देश में शुद्ध जल की प्राप्ति दूभर होती जा रही है। प्रदूषित के बाद संदूषित जल ने हमारे स्वास्थ्य और पाचन तंत्र को बिगाड़ कर रख दिया है। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली द्वारा दिये आँकड़ों के अनुसार भारत में लगभग 4 करोड़ ग्रामीण पीने के लिये धातु-संदूषित जल का उपयोग करते हैं। जल में पाए जाने वाले प्रमुख भारी धातु फ्लोराइड, आर्सेनिक और नाइट्रेट हैं। आर्सेनिक संदूषण में बंगाल और राजस्थान शीर्ष पर हैं। जल जीवन का आवश्यक तत्व है। वनस्पति से लेकर जीव जन्तु अपने पोषक तत्वों की प्राप्ति जल के माध्यम से करते हैं। जीवन पानी पर निर्भर करता है। मनुष्य एवं प्राणियों के लिए पीने के पानी के स्त्रोत नदियाँ, सरिताएँ, झीलें, नलकूप आदि हैं। मानव पानी का उपयोग स्नान, धुलाई, उद्योग, सिंचाई, नेविगेशन, निर्माण कार्य आदि के लिए करता है यह हम सब जानते है। जल का दूषित होना मनुष्य के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है ।
बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार
डी 32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर