मोदी और शाह को अपने भरोसे का अध्यक्ष चाहिए

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बाल मुकुन्द ओझा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन का सस्पेंस लगातार बढ़ता ही जा रहा है। बिहार विधानसभा चुनाव संपन्न हो गए है, इसी के साथ पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है। यह भी कहा जा रहा है खरमास के समाप्त होते ही अध्यक्ष के निर्वाचन की विधिवत प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सियासी क्षेत्रों में चर्चा है कि, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और संघ के मध्य सब कुछ सही नहीं चल रहा है, जिसके कारण दोनों के बीच आपसी तालमेल बिगड़ गया है। यही कारण है कि भाजपा अपना अध्यक्ष अब तक नहीं चुन पाई है। पिछले एक साल से हर सप्ताह – पखवाड़े शीघ्र चुनाव की खबरे मीडिया में उछलती है। इसके साथ ही पांच सात नामों की सूची पर चर्चा होने लगती है। कुछ दिनों बाद यह चर्चा ठंडी पड़ जाती है। इसके साथ कुछ दिनों के इंतज़ार के बाद फिर चुनाव की ख़बरों से सियासत गरमाने लगती है। इस प्रकार की ख़बरें पचासों बार छप चुकी है मगर आज तक भाजपा अपना अध्यक्ष नहीं खोज पाई है। अब यह मामला कहां जाकर अटका और लटका है यह मोदी और शाह ही भलीभांति बता सकते है। यह भी कहा जा रहा था कि बिहार चुनाव के बाद अध्यक्ष का फैसला हो जायेगा। अब बिहार चुनाव भी हो गया, मगर अब तक स्थिति साफ़ नहीं हुई है।  

पार्टी विथ डिफरेंस का दावा करने वाली भाजपा इस समय एक अजीब से उधेड़बुन का शिकार हो रही है। भाजपा अध्यक्ष का निर्वाचन अब बीरबल की खिचड़ी बन गया है। कोई न कोई बहाना बताकर इसे लगातार आगे से आगे खिसकाया जा रहा है। दस करोड़ सदस्यों वाली पार्टी के पास वर्तमान में 16 राज्यों में खुद के बुते अथवा सहयोगियों के साथ सरकार हैं। इसके बावजूद एक अदद अध्यक्ष की तलाश पूरी नहीं हो रही है। राज्यों में भी तदर्थ अध्यक्ष पार्टी चला रहे है। पार्टी का संगठनात्मक ढांचा डांवाडोल की स्थिति में है। वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल जनवरी 2023 में खत्म हो चुका है। इसके बाद लगातार नये अध्यक्ष की खोज की जा रही है मगर यह खोज पौने तीन साल बाद भी ख़त्म नहीं हुई है। एक व्यक्ति, एक पद का सिद्धांत भाजपा में लागू होता है। मगर दो पदों पर काम कर रहे वर्तमान अध्यक्ष को इससे छूट दे रखी है। लोग तरह तरह की टीका टिप्पणियां कर रहे है। कुछ लोग इसे भाजपा संघ के मध्य मन मुटाव से भी जोड़कर देख रहे है। बताया जा रहा है संघ ने शीर्ष नेतृत्व को अपने रूख से अवगत करा दिया है, अब फैसला पार्टी को करना है कि वह संघ के बताये रास्ते पर चलेगी अथवा अपना स्वतंत्र मार्ग अख्तियार करेगी। संघ के विश्वसनीय सूत्र बता रहे है वह आगामी लोकसभा चुनावों की रणनीति पर काम कर रही है जिसमें अध्यक्ष के साथ प्रधान मंत्री पद का फैसला अहम् बन गया है। इसी बीच एक बार फिर भाजपा के सूत्र कह रहे है पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव दिसंबर या जनवरी 26 में हो सकता है। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इस चुनाव को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।

भाजपा और संघ के जानकारों का कहना है मोदी के मन की थाह लगाना मुश्किल है। भाजपा में कई फैसले ऐसे लिए गए हैं जो बेहद चौंकाने वाले थे। मनोहर लाल खट्टर से लेकर भजन लाल तक के नाम इसमें शुमार किये जा सकते है, जिनकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। मोदी को ऐसा अध्यक्ष चाहिए जो उनका विश्वस्त तो हो ही साथ में उसे अगला चुनाव जिताने की भरपूर क्षमता और सम्भावना हो। अगले लोकसभा चुनाव नये अध्यक्ष के कार्यकाल में संपन्न होंगे इसीलिए फूंक फूंक कर कदम उठाये जा रहे है।

इसी बीच पार्टी विथ डिफरेंस और दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा में नये अध्यक्ष को लेकर तरह तरह की चर्चाएं व्याप्त हो रही हैं। दक्षिण भारत और उत्तर भारत की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। अनेक बड़े और दमदार नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, जो पार्टी के इस महत्वपूर्ण पद के लिए दावेदार हैं। इसी बीच मीडिया में प्रमुखता से एक दर्ज़न नामों की चर्चा सुनी जा रही है। इनमें केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान, देवेंद्र फडणवीस, केशव प्रसाद मौर्य, मनोहर लाल खट्टर, समृति ईरानी और संजय जोशी के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे है। रोज कुछ नाम इस सूची में  कुछ नाम जुड़ रहे है। किसी महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष का दारोमदार सौंपने की चर्चाएं भी है। संघ के पसंद- नापसंद  की चर्चाएं भी छाई हुई है। 

भाजपा के लिए नया अध्यक्ष बेहद महत्वपूर्ण होगा। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी ने जो रणनीतियां बनाई हैं, उनके साथ नए अध्यक्ष को तालमेल बैठाना होगा। उसे पार्टी के संगठन को नई दिशा देने के साथ-साथ युवाओं को जोड़ने और आगामी चुनावों की तैयारियों में सक्रिय भूमिका के साथ एनडीए के साथी  संगठनों से बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा । इसलिए पार्टी को एक ऐसे चेहरे की तलाश है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से जुड़ा हो और संगठनात्मक दृष्टि से मजबूत हो। साथ ही मोदी और शाह के भरोसे का हो।

बाल मुकुन्द ओझा

वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

डी 32, मॉडल टाउन, मालवीय नगर, जयपुर

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