मूवी रिव्यू : धर्मेंद्र और जयदीप के इमोशन से सजी अगस्त्य नंदा की देशभक्ति फिल्म इक्कीस

मनोरंजन

0
44

फिल्म: इक्कीस

स्टारकास्ट: अगस्त्य नंदा, सिमर भाटिया, राहुल देव, जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर और धर्मेंद्र

निर्माता: दिनेश विजन (मैडॉक फिल्म्स)

निर्माता: श्रीराम राघवन

रनटाइम: 2 घंटे 27 मिनट

रेटिंग्स: 4.5

फिल्म की कहानी

‘इक्कीस’ भारतीय सैन्य इतिहास के उस स्वर्णिम अध्याय को बड़े पर्दे पर जीवंत करती है, जो अदम्य साहस, कर्तव्य और सर्वोच्च बलिदान की मिसाल है। यह फिल्म पूना हॉर्स रेजिमेंट के युवा टैंक कमांडर सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की वीरगाथा को सलाम है, जिन्होंने 1971 के भारत–पाक युद्ध में महज़ 21 वर्ष की आयु में ऐसा पराक्रम दिखाया, जो इतिहास में अमर हो गया।

फिल्म शकरगढ़ सेक्टर के भीषण युद्ध को केंद्र में रखते हुए दिखाती है कि कैसे सीमित अनुभव और अधूरी तैयारी के बावजूद अरुण खेतरपाल ने असाधारण सूझबूझ और नेतृत्व से दुश्मन को घुटनों पर ला दिया। जब उनका टैंक आग की लपटों में घिर चुका था, शरीर लहूलुहान था और पीछे हटने का आदेश मिला, तब भी उन्होंने इंकार कर दिया। आख़िरी सांस तक लड़ते हुए उन्होंने पाकिस्तान के 10 टैंकों को तबाह कर दिया। यह कहानी केवल युद्धनीति की नहीं, बल्कि एक युवा सैनिक के अटूट अनुशासन, साहस और देशप्रेम की भावुक यात्रा है।

कलाकारों का प्रदर्शन

अगस्त्य नंदा इस फिल्म के साथ एक सशक्त अभिनेता के रूप में उभरते हैं। उन्होंने एक अनुशासित सैनिक और रणभूमि में आक्रामक योद्धा, दोनों के द्वंद्व को बेहद ईमानदारी से पर्दे पर उतारा है। खासकर क्लाइमेक्स में उनकी आंखों में दिखता जज़्बा और आवाज़ की दृढ़ता दर्शकों को भीतर तक झकझोर देती है। दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र अरुण के पिता के रूप में फिल्म की आत्मा बनकर उभरते हैं। उनका संयमित अभिनय, संवादों की गरिमा और भावनात्मक ठहराव फिल्म को गहराई देता है। जयदीप अहलावत पाकिस्तानी अफसर के किरदार में एक बार फिर अपनी अभिनय क्षमता का प्रमाण देते हैं उनका शांत लेकिन प्रभावशाली अभिनय खास छाप छोड़ता है। सिमर भाटिया अपनी भूमिका में सहज और प्रभावी हैं, वहीं सिकंदर खेर अपने दृश्यों में आवश्यक मनोरंजन का तड़का लगाते हैं।

संगीत और तकनीकी पक्ष

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर युद्ध के हर पल को और भी तीव्र बना देता है। धमाकों, गोलियों और टैंकों की गर्जना थिएटर में बैठकर महसूस की जा सकती है। विशाल मिश्रा का संगीत और अरिजीत सिंह की आवाज़ भावनाओं को नई ऊंचाई देती है, जहां युद्ध की विभीषिका है, वहीं इंसानी जज़्बातों की कोमलता भी। सिनेमैटोग्राफी और एडिटिंग 1971 के युद्धकालीन माहौल को इतनी सजीवता से रचती हैं कि दर्शक खुद को उसी दौर में खड़ा पाता है।

फाइनल टेक

निर्माता दिनेश विजन और निर्देशक श्रीराम राघवन की यह फिल्म सिर्फ़ एक वॉर ड्रामा नहीं, बल्कि भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान का भावनात्मक दस्तावेज़ है। “मेरी टैंक एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी” जैसे संवाद फिल्म खत्म होने के बाद भी ज़हन में गूंजते रहते हैं। ‘इक्कीस’ देशभक्ति, परिवार, प्रेम और कर्तव्य, इन सभी भावनाओं को संतुलित और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। यदि आप सिनेमा में प्रेरणा, गर्व और भावनाओं की सच्ची झलक देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको आंसुओं और सीने में गर्व लिए थिएटर से बाहर भेजेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here