
भोपाल, 16 जनवरी (हि.स.)। सनातन धर्म में हर शुभ कार्य से पहले पंचांग का विचार करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण इन पांच अंगों के समन्वय से ही यह तय होता है कि कोई धार्मिक कार्य कब और कैसे किया जाए। इसी परंपरा के अनुसार प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजन किया जाता है। माघ माह की मासिक शिवरात्रि इस बार 17 जनवरी, शनिवार को है, जोकि श्रद्धा और भक्ति के साथ हर बार की तरह मनाई जाएगी।
ज्योतिषाचार्य आचार्य भरत दुबे के अनुसार “माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 16 जनवरी की रात 10 बजकर 21 मिनट से प्रारंभ होकर 18 जनवरी की रात 12 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। व्रत और पूजा 17 जनवरी को करना इसलिए श्रेष्ठ है, क्योंकि शिव आराधना का सर्वोत्तम समय निशिता काल इसी दिन प्राप्त हो रहा है।” आचार्य भरत दुबे का कहना है कि शिवरात्रि साधना और आत्मशुद्धि का पर्व है। माघ माह में की गई शिव आराधना का विशेष महत्व है, क्योंकि यह समय तप, संयम और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।मासिक शिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन का प्रतीक है। इस दिन शिव-गौरी की संयुक्त पूजा करने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और अविवाहित श्रद्धालुओं को योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।
इसके साथ ही धर्माचार्य पंडित बृजेश चंद्र शास्त्री कहते हैं, “मासिक शिवरात्रि पर शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक कर इत्र लेपन करना चाहिए। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, फल-फूल और अबीर-गुलाल अर्पित करें। वहीं माता गौरी को 16 शृंगार की सामग्री अर्पित कर मीठे भोग से उनका शृंगार करना विशेष फलदायी होता है।” उन्होंने बताया कि इस दिन रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। शिवरात्रि की रात्रि को चार प्रहरों में पूजा करने से साधक को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसा शास्त्रों में वर्णित है कि “‘गौरी केदारेश्वराभ्यां नमः’ मंत्र का कम से कम 108 बार जप करने से मनोकामनाओं की पूर्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है।”
शुभ-अशुभ मुहूर्त और पंचांग विवरण
पंचांग के अनुसार, 17 जनवरी को मूल नक्षत्र सुबह 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, इसके पश्चात पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का आरंभ होगा। व्याघात योग रात्रि 9 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। करण की बात करें तो विष्टि करण 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगा, इसके बाद शकुनि करण होगा। इस दिन चंद्रमा धनु राशि में संचार करेंगे। सूर्योदय सुबह 7 बजकर 15 मिनट और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 48 मिनट पर होगा। वहीं निशिता काल, जिसे शिव पूजा का सर्वोत्तम समय माना जाता है, रात्रि 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इस दौरान रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जप और ध्यान करना विशेष पुण्यदायी है।
दूसरी ओर राहुकाल सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इस समय किसी भी नए या शुभ कार्य से बचने की सलाह दी जाती है। धर्माचार्यों के अनुसार, माघ माह की मासिक शिवरात्रि पर श्रद्धा, नियम और संयम के साथ की गई शिव-गौरी पूजा से पापों का नाश होता है, रोग-दोष दूर होते हैं और जीवन में सुख, शांति व आध्यात्मिक बल की प्राप्ति होती है।
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