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मप्र: इंदौर में दूषित पानी से 30वीं मौत 

अब भी 3 मरीज आईसीयू और एक वेंटिलेटर पर

इंदौर, 28 जनवरी (हि.स.)। देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा रखने वाले मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार सुबह 62 वर्षीय महिला लक्ष्मी रजक की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही दूषित पानी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है।

परिजनों के अनुसार, लक्ष्मी रजक को दो दिन पहले उल्टी-दस्त और घबराहट की शिकायत के बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में उनकी किडनी में गंभीर संक्रमण पाया गया। चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद बुधवार सुबह ईलाज के दाैरान उनकी मृत्यु हो गई। उल्लेखनीय है कि उनके पति स्वर्गीय डॉ. के.डी. रजक, जो स्वयं चिकित्सक थे, का निधन भी 17 माह पहले हो चुका है। सीएचएल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अवधेश गुप्ता ने बताया कि जांच में लक्ष्मी रजक की किडनी में गंभीर संक्रमण पाया गया था। संक्रमण तेजी से फैल चुका था और अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्होंने दम तोड़ दिया। इससे एक दिन पहले भागीरथपुरा निवासी 75 वर्षीय खूबचंद पुत्र गन्नुदास की भी उल्टी-दस्त से पीड़ित होने के बाद मौत हुई थी। बुधवार को उनके परिजनों और स्थानीय लोगों ने अंत्येष्टि से पहले सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया, जिससे कुछ समय के लिए क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी। समझाइश के बाद परिजन अंत्येष्टि के लिए राजी हुए और शव लेकर श्मशान घाट के लिए रवना हुए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से सीवरेज मिश्रित पानी की आपूर्ति हो रही है, जिसकी शिकायतें पहले भी की गईं, लेकिन समय पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

अब भी 3 मरीज आईसीयू में, एक वेंटिलेटर पर

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, फिलहाल 6 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 3 मरीज आईसीयू में हैं और एक की हालत गंभीर होने पर उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। दिसंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई इस बीमारी में अब तक 4,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें करीब 450 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

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