भारत के केंद्रीय बजट में नेपाल के लिए 800 करोड़ रुपये की सहायता का प्रावधान

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काठमांडू, 01 फ़रवरी (हि.स.)। भारत ने नेपाल के साथ अपनी दीर्घकालिक विकास साझेदारी की पुनः पुष्टि करते हुए वित्त वर्ष 2026–27 के लिए 800 करोड़ रुपये की सहायता का प्रावधान किया है।

यह जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) की ओर से जारी बजट दस्तावेज में दी गई है। वित्त वर्ष 2024–25 में नेपाल को दी गई भारतीय सहायता पर वास्तविक व्यय 701.62 करोड़ रुपये रहा था। इसके बाद 2025–26 के लिए 700 करोड़ रुपये का बजट अनुमान रखा गया, जिसे बाद में बढ़ाकर 830 करोड़ रुपये कर दिया गया। 2026–27 के लिए 800 करोड़ रुपये का आवंटन नेपाल के महत्व में कमी के बजाय भारत की क्षेत्रीय रणनीति के तहत एक संतुलित समायोजन को दर्शाता है।

नेपाल, एमईए की ‘एड टू कंट्रीज़’ योजना के तहत भूटान, श्रीलंका और मालदीव के साथ भारत से सहायता पाने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। नेपाल को दी जाने वाली अधिकांश भारतीय सहायता अनुदान आधारित होती है, जिससे काठमांडू को बाहरी ऋण भार बढ़ाए बिना विकास परियोजनाओं के कार्यान्वयन में मदद मिलती है। वर्षों से इस सहायता के माध्यम से सड़कों, पुलों, विद्युत प्रसारण लाइनों, स्कूलों, अस्पतालों, पेयजल परियोजनाओं और सांस्कृतिक धरोहर स्थलों के पुनर्स्थापन जैसे बुनियादी ढांचे के विकास को समर्थन मिला है।

भारतीय सहायता का एक बड़ा हिस्सा परंपरागत रूप से उच्च-प्रभाव वाले सामुदायिक विकास परियोजनाओं और सीमा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे पर केंद्रित रहा है, जिसका स्थानीय आजीविका और सीमा-पार संपर्क पर सीधा प्रभाव पड़ता है। द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार आगामी वित्त वर्ष में भी ऊर्जा संपर्क, व्यापार सुविधा और जन-से-जन संपर्क से जुड़े क्षेत्रों को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है।

भारत की ओर से यह सहायता ऐसे समय में सामने आई है जब नेपाल आर्थिक दबावों, महामारी के बाद की पुनर्बहाली की चुनौतियों और बड़े पैमाने पर अवसंरचना निवेश की आवश्यकता का सामना कर रहा है। इस परिप्रेक्ष्य में भारत का स्थिर समर्थन नेपाल की बाहरी विकास साझेदारियों में स्थिरता और पूर्वानुमेयता का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जा रहा है। क्षेत्रीय दृष्टिकोण से यह निरंतर सहायता भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के अनुरूप है और दक्षिण एशिया में नेपाल के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करती है।

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