
नई दिल्ली, 02 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से महाभारत के एक श्लोक से प्रेरणा लेते हुए दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कामना की है कि हर प्रयास में सफलता मिले। नए साल में संकल्प की सिद्धि हो।प्रधानमंत्री मोदी ने जयंती पर समाज सुधारक मन्नथु पद्मनाभन का पुण्य स्मरण किया
उन्होंने ने आज सुबह एक्स पर लिखा, ” मेरी कामना है कि आने वाले समय में आपको अपने हर प्रयास में सफलता मिले। दृढ़संकल्प और इच्छाशक्ति से नए साल में आपके संकल्प की सिद्धि हो।” प्रधानमंत्री मोदी ने इस पोस्ट के साथ ”उत्थातव्यं जागृतव्यं योक्तव्यं भूतिकर्मसु। भविष्यतीत्येव मनः कृत्वा सततमव्यथैः।।” श्लोक को भी उद्धृत किया है।
यह श्लोक महाभारत के उद्योगपर्व (135/29) का है। इसका अर्थ है, “उठना चाहिए, जागते रहना चाहिए, और ऐश्वर्य (कल्याणकारी) कार्यों में लग जाना चाहिए। ‘मेरा कार्य अवश्य सिद्ध होगा’ ऐसा मन में दृढ़ निश्चय करके, लगातार विषाद (चिंता) रहित होकर कर्म करते रहना चाहिए।”
प्रधानमंत्री मोदी ने जयंती पर समाज सुधारक मन्नथु पद्मनाभन का पुण्य स्मरण किया
नई दिल्ली, 02 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज केरल के महान समाज सुधारक मन्नथु पद्मनाभन की 48वीं जयंती पर उनका पुण्य स्मरण किया। उन्होंने कहा कि उनके आदर्श न्यायपूर्ण, दयालु और सद्भावपूर्ण समाज का संदेश देते हैं। उनके आदर्श हम सबका मार्गदर्शन करते रहेंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक्स पर लिखा, ” मन्नथु पद्मनाभन की जयंती पर हम आज उन्हें गहरी श्रद्धा के साथ याद कर रहे हैं। उनका सारा जीवन समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा। वह दूरदर्शी थे। उनका मानना था कि सच्ची प्रगति गरिमा, समानता और सामाजिक सुधार में निहित है। स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में उनके प्रयास प्रेरणादायक हैं। उनके आदर्श हमें ऐसे समाज का संदेश देते हैं जो न्यायपूर्ण, दयालु और सद्भावपूर्ण हो।”
उल्लेखनीय है, दो जनवरी, 1878 को जन्मे मन्नथु पद्मनाभन महान समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और नायर सर्विस सोसाइटी के संस्थापक हैं। उन्हें नायर समुदाय के उत्थान और केरल में सामाजिक समानता लाने के लिए किए गए उनके कार्यों के लिए जाना जाता है। उन्हें भारत केसरी की उपाधि से सम्मानित किया गया। सरदार के.एम. पणिक्कर ने उन्हें ‘केरल का मदन मोहन मालवीय’ कहते थे। 1966 में उन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया।
उन्होंने वैकोम सत्याग्रह (1924) और गुरुवयूर सत्याग्रह (1931) में सक्रिय भूमिका निभाई ताकि निचली जातियों को मंदिरों में प्रवेश मिल सके। यही नहीं केरल में सैकड़ों स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों की स्थापना की। 1949 में वे त्रावणकोर विधानसभा के सदस्य भी रहे।
